UPSC Current Affairs 6 March 2026: 9 राज्यों में राज्यपाल–उपराज्यपाल फेरबदल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपाल व उपराज्यपाल पदों में बड़ा फेरबदल किया है, जो सीधे-सीधे संघ–राज्य संबंधों और आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
Daily GK Update: मुख्य बिंदु (One-Liner Recap)
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपने पद से इस्तीफा दिया।
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया गया।
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नंद किशोर यादव को नगालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया, वे अरिफ मोहम्मद खान की जगह लेंगे।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया।
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया।
दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया।
पूर्व राजदूत तरणजीत सिंह संधू को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया।
पृष्ठभूमि: CV आनंद बोस का इस्तीफा और राजनीतिक संदर्भ
सी.वी. आनंद बोस ने लगभग साढ़े तीन वर्ष तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य करने के बाद अचानक इस्तीफा दे दिया, जबकि राज्य अप्रैल–मई 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहा है। वे नवंबर 2022 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल नियुक्त हुए थे और तृणमूल कांग्रेस सरकार के साथ कई मुद्दों पर उनके संबंध लगातार विवादों में रहे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके इस्तीफे पर “चिंता” व्यक्त करते हुए यह संकेत दिया कि संभव है कि केंद्र सरकार की ओर से उन पर राजनीतिक दबाव रहा हो, हालांकि आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई कारण दर्ज नहीं है। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब बंगाल सहित कई विपक्ष-शासित राज्य चुनावी मोड में हैं, जिससे इस घटनाक्रम के राजनीतिक निहितार्थ और भी बढ़ जाते हैं।
9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नई नियुक्तियाँ: एक नज़र में
राष्ट्रपति द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख नियुक्तियाँ/स्थानांतरण किए गए हैं।
राज्यपाल/उपराज्यपाल बदलाव की सारणी (Exam-Friendly Form)
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | पूर्व पदाधिकारी | नए पदाधिकारी / नई व्यवस्था | प्रकार |
|---|---|---|---|
| पश्चिम बंगाल | डॉ. C.V. आनंद बोस (इस्तीफा) | आर.एन. रवि (पूर्व Governor, तमिलनाडु) | राज्यपाल |
| तमिलनाडु | आर.एन. रवि | राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर (Governor, केरल) – अतिरिक्त प्रभार | राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) |
| केरल | राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर | यथावत (उनके पास अब केरल + TN दोनों का प्रभार) | राज्यपाल |
| बिहार | अरिफ मोहम्मद खान | लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन | राज्यपाल |
| नगालैंड | — | नंद किशोर यादव (पूर्व अध्यक्ष, बिहार विधानसभा) | राज्यपाल |
| तेलंगाना | जिष्णु देव वर्मा | शिव प्रताप शुक्ल (पूर्व Governor, हिमाचल प्रदेश) | राज्यपाल |
| महाराष्ट्र | — | जिष्णु देव वर्मा (पूर्व Governor, तेलंगाना) | राज्यपाल |
| हिमाचल प्रदेश | शिव प्रताप शुक्ल | कविंदर गुप्ता (पूर्व LG, लद्दाख) | राज्यपाल |
| लद्दाख (UT) | कविंदर गुप्ता | विनय कुमार सक्सेना (पूर्व LG, दिल्ली) | उपराज्यपाल |
| दिल्ली (NCT) | विनय कुमार सक्सेना | तरणजीत सिंह संधू (पूर्व भारतीय राजदूत, USA) | उपराज्यपाल |
(ध्यान दें: उपरोक्त सारणी में वही फेरबदल शामिल हैं जिन्हें Rashtrapati Bhavan की विज्ञप्ति और प्रमुख समाचार एजेंसियों ने कंफर्म किया है।)
संवैधानिक संदर्भ: राज्यपाल की नियुक्ति व भूमिका (UPSC के लिए महत्वपूर्ण)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार, “प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा”, और एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों के लिए भी राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है – यही वजह है कि कई बार एक राज्यपाल को दूसरे राज्य का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है। अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा “अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित वारंट द्वारा” की जाती है, अर्थात यह एक नामांकित (appointed) पद है, न कि निर्वाचित।
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है; राज्य की समस्त कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है, जिसे वह स्वयं या अपने अधीन अधिकारियों के माध्यम से प्रयोग करता है (अनुच्छेद 154)। राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है, मंत्रिपरिषद की शपथ दिलाता है, विधानसभा सत्र बुलाने/स्थगित करने और विधेयकों पर हस्ताक्षर या राष्ट्रपति के लिए आरक्षण जैसी शक्तियों का प्रयोग करता है, जो संघ–राज्य संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
विस्तृत नोट्स के लिए पढ़ें:
Indian Polity – Governor: Appointment, Powers & Removal (Atharva Examwise नोट्स)
उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) का संवैधानिक ढांचा
उपराज्यपाल (LG) आमतौर पर केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासक के रूप में राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 239 के तहत नियुक्त किए जाते हैं। दिल्ली के संदर्भ में 69वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 239AA, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए विशेष प्रावधान करता है और यहाँ LG की भूमिका को विशिष्ट बनाता है।
LG, राज्यपाल की तरह ही एक नाममात्र (titular) प्रमुख होते हैं, लेकिन दिल्ली जैसे केंद्रशासित प्रदेशों में भूमि, पुलिस और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर उनकी स्वतंत्र भूमिका और अधिक प्रभावी मानी जाती है, जिस पर कई बार राजनीतिक टकराव भी देखने को मिलता है।
Concept Booster:
Lieutenant Governor vs Governor – Comparison for UPSC
समय-सीमा और राजनीतिक महत्व: चुनावी राज्यों पर फोकस
यह फेरबदल उस समय किया गया है जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे प्रमुख राज्य आने वाले महीनों में विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहे हैं। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में राज्यपाल–सरकार टकराव और चुनावी ध्रुवीकरण की पृष्ठभूमि इसे और संवेदनशील बनाते हैं।
तमिलनाडु में भी आर.एन. रवि का कार्यकाल अक्सर डीएमके सरकार के साथ टकराव और लंबित विधेयकों जैसे मुद्दों के कारण चर्चा में रहा है, इसलिए उनका पश्चिम बंगाल स्थानांतरण और केरल के राज्यपाल को तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार देना एक व्यापक राजनीतिक–प्रशासनिक सिग्नल के रूप में देखा जा रहा है।
संघ–राज्य संबंध और “राजभवन राजनीति”
राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा होती है, इसलिए राजभवन कई बार “केंद्रीय राजनीति” और “राज्यीय राजनीति” के बीच संघर्ष की जगह बन जाते हैं। कई मामलों में विपक्ष-शासित राज्यों में राज्यपाल पर सरकार के कामों में बाधा, विधेयकों को लंबित रखने या राजनीतिक टिप्पणियाँ करने के आरोप लगाए जाते हैं, जबकि केंद्र की दलील संवैधानिक प्रहरी (constitutional watchdog) की भूमिका पर आधारित रहती है।
हाल के वर्षों में तमिलनाडु, केरल, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राज्यपाल/उपराज्यपाल और निर्वाचित सरकार के बीच टकराव पर सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के फैसले भी आए हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण केस–स्टडी प्रदान करते हैं।
Prelims के लिए संभावित तथ्य (फास्ट रिविजन पॉइंट्स)
अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल का प्रावधान; एक ही व्यक्ति एक से अधिक राज्यों का भी राज्यपाल हो सकता है।
अनुच्छेद 155: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, उनके हस्ताक्षर और मुहर सहित वारंट से की जाती है।
अनुच्छेद 156: राज्यपाल “President’s pleasure” के आधार पर पद धारण करता है, सामान्यतः कार्यकाल पाँच वर्ष माना जाता है।
अनुच्छेद 239 व 239AA: केंद्रशासित प्रदेशों व दिल्ली में प्रशासक/उपराज्यपाल की व्यवस्था, और दिल्ली के लिए विशेष प्रावधान।
वर्तमान में ताज़ा फेरबदल के तहत: RN रवि – पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल, राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर – तमिलनाडु के राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार), ले. जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन – बिहार के नए राज्यपाल, नंद किशोर यादव – नगालैंड के राज्यपाल, तरणजीत सिंह संधू – दिल्ली के उपराज्यपाल।
Daily Practice के लिए देखें:
UPSC Current Affairs Daily MCQs – Atharva Examwise
Mains Answer Writing Angle
राज्यपाल–उपराज्यपाल से जुड़े हालिया फेरबदल को आप निम्नलिखित थीम्स के साथ Mains में उपयोग कर सकते हैं:
संवैधानिक पद व राजनीतिक निष्पक्षता – क्या नियुक्ति की वर्तमान प्रणाली (purely presidential appointment) राज्यों में “संवैधानिक तटस्थता” सुनिश्चित करती है या राजनीतिकरण को बढ़ाती है?
संघीय ढांचा और सहकारी संघवाद – जब चुनावी राज्यों में अचानक राज्यपाल बदले जाते हैं, तो क्या यह “cooperative federalism” की भावना से मेल खाता है, या इसे “competitive/ confrontational federalism” के रूप में देखा जा सकता है?
न्यायपालिका की भूमिका – दिल्लीTitle: UPSC Current Affairs 6 March 2026 – 9 राज्यों में राज्यपाल/एलजी बदलाव, आरएन रवि बने बंगाल के नए गवर्नर | Daily GK Update
Meta Description: UPSC current affairs 6 March 2026: राष्ट्रपति द्वारा 9 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल/एलजी फेरबदल, आरएन रवि पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल।
6 March 2026 UPSC Current Affairs: 9 राज्यों में राज्यपाल/एलजी फेरबदल, पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल आरएन रवि
केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल व लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। यह बदलाव विशेष रूप से उन राज्यों में अहम है जहाँ अप्रैल–मई 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल।
प्रमुख तथ्य एक नज़र में (Prelims Friendly Snapshot)
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने इस्तीफा दिया; राष्ट्रपति ने इस्तीफा स्वीकार किया।
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया।
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया।
बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नंद किशोर यादव को नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
शिव प्रताप शुक्ला (वर्तमान हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल) को तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया।
जिष्णु देव वर्मा (पूर्व में तेलंगाना के राज्यपाल) को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
कविंदर गुप्ता, जो अब तक लद्दाख के LG थे, उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया।
विनय कुमार सक्सेना (दिल्ली के LG) को लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया गया।
पूर्व राजनयिक तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया।
पृष्ठभूमि: बोस का इस्तीफा और बंगाल में नया समीकरण
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने लगभग साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल के बाद अचानक इस्तीफा दे दिया। वे नवंबर 2022 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल नियुक्त हुए थे और उनका कार्यकाल लगातार राज्य सरकार के साथ टकराव और राजनीतिक विवादों के लिए चर्चा में रहा।
इस्तीफे के तुरंत बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया, जो पहले से ही एक विपक्ष-शासित राज्य (तमिलनाडु) की सरकार से बार-बार टकराव के लिए सुर्खियों में रहे हैं। यह नियुक्ति चुनावी राज्य में केंद्र–राज्य संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियुक्तियाँ: विस्तृत सूची
नीचे दी गई सूची UPSC/SSC/Bank जैसे एग्ज़ाम के लिए रटने योग्य डेटा के रूप में महत्वपूर्ण है:
पश्चिम बंगाल
पूर्व: डॉ. सी.वी. आनंद बोस (इस्तीफा)
नए राज्यपाल: आर.एन. रवि (पहले तमिलनाडु के राज्यपाल)।
तमिलनाडु
आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल भेजे जाने के बाद
केरल के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर को तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
बिहार
नए राज्यपाल: लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन।
नगालैंड
नए राज्यपाल: नंद किशोर यादव (बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष)।
तेलंगाना
नए राज्यपाल: शिव प्रताप शुक्ला (अब तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल)।
महाराष्ट्र
नए राज्यपाल: जिष्णु देव वर्मा (पूर्व तेलंगाना के राज्यपाल)।
हिमाचल प्रदेश
नए राज्यपाल: कविंदर गुप्ता, जो इससे पहले लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे।
लद्दाख (UT)
नए LG: विनय कुमार सक्सेना, जो पहले दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे।
दिल्ली (NCT)
नए LG: तरणजीत सिंह संधू, भारत के पूर्व राजदूत (अमेरिका) और वरिष्ठ राजनयिक।
इन सभी नियुक्तियों को राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से जारी किया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि नियुक्तियाँ संबंधित अधिकारी के पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी।
संवैधानिक प्रावधान: राज्यपाल और उपराज्यपाल की नियुक्ति
अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होगा; एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है।
अनुच्छेद 154: राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है और वह इसे प्रत्यक्ष या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से प्रयोग करता है।
अनुच्छेद 155: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने “हस्ताक्षर और मुहर वाले वारंट” के माध्यम से की जाती है।
अनुच्छेद 156: राज्यपाल राष्ट्रपति की इच्छा पर पद धारण करता है और सामान्यतः पाँच वर्ष का कार्यकाल होता है, परंतु उसे पहले भी हटाया या स्थानांतरित किया जा सकता है।
उपराज्यपाल (LG) की नियुक्ति भी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वे संघ शासित प्रदेशों के प्रशासन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं, विशेषकर दिल्ली जैसे क्षेत्रों में जहाँ विशेष संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 239, 239AA) लागू हैं।
विस्तार से पढ़ें:
Indian Polity – Governor: Constitutional Provisions (Atharva Examwise)
State Executive (Articles 153–167) – UPSC Notes (Atharva Examwise)
राजनीतिक संदर्भ: चुनावी राज्यों में राजभवन की भूमिका
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में अगले कुछ सप्ताहों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए वहाँ के राजभवन में किसी भी तरह की नियुक्ति या बदलाव को राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल–मुख्यमंत्री संबंध पहले से ही विवादों का विषय रहे हैं और बोस के कार्यकाल के दौरान भी कई बार टकराव की स्थिति बनी रही।
इसी प्रकार, तमिलनाडु में आर.एन. रवि और राज्य की DMK सरकार के बीच लगातार विवादों और लंबित विधेयकों जैसे मुद्दों ने केंद्र–राज्य संबंधों पर बहस को तेज किया था; ऐसे में उन्हें एक अन्य विपक्ष-शासित राज्य पश्चिम बंगाल भेजना राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
केंद्र–राज्य संबंध और संघीय ढाँचे पर प्रभाव
राज्यपाल केंद्र द्वारा नियुक्त संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जो एक ओर राज्य की कार्यपालिका के प्रमुख हैं और दूसरी ओर केंद्र और राज्य के बीच सेतु का काम करते हैं। बार-बार के स्थानांतरण, इस्तीफे और विवादास्पद नियुक्तियाँ संघीय ढाँचे (federalism) और “सहकारी संघवाद” (cooperative federalism) की धारणा पर प्रश्नचिह्न खड़े कर सकती हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट भी कई निर्णयों में रेखांकित कर चुका है।
दिल्ली और अन्य केंद्रशासित प्रदेशों में LG की भूमिका पहले से ही राजनीतिक और न्यायिक व्याख्या का विषय रही है, जहाँ अनुच्छेद 239AA के अंतर्गत LG और निर्वाचित सरकार के अधिकार क्षेत्र को लेकर बार-बार विवाद सामने आए हैं। इस ताज़ा फेरबदल के बाद इन प्रदेशों में केंद्र के प्रतिनिधि की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
और पढ़ें:
Governor vs Lieutenant Governor – Differences for UPSC (Atharva Examwise)
Centre–State Relations: Constitutional & Political Issues (Atharva Examwise)
Mains के लिए संभावित विश्लेषण बिंदु
UPSC Mains में इस मुद्दे को निम्नलिखित एंगल से पूछा जा सकता है:
संवैधानिक प्रश्न:
“राज्यपाल की नियुक्ति और स्थानांतरण की वर्तमान प्रक्रिया क्या वास्तव में राजनीतिक निष्पक्षता को सुनिश्चित करती है?”
“क्या राज्यपाल ‘संवैधानिक प्रमुख’ होने के बजाय ‘केंद्रीय प्रतिनिधि’ के रूप में अधिक सक्रिय हो गए हैं?”
संघवाद (Federalism) पर प्रभाव:
विपक्ष-शासित राज्यों में राज्यपाल–सरकार टकराव, सहकारी संघवाद की अवधारणा से कितना मेल खाता है?
क्या बार-बार के राजनीतिक विवादों के बीच राज्यपाल की भूमिका पुनर्परिभाषित की जानी चाहिए?
संभावित सुधार (कई आयोगों की सिफारिशों के संदर्भ में):
राज्यपाल की नियुक्ति में राज्य सरकार से “परामर्श” अनिवार्य किया जाए।
कार्यकाल की सुरक्षा और मनमाने स्थानांतरण पर नियंत्रण।
राज्यपाल की ‘discretionary powers’ को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित करना।
आप इन बिंदुओं को GS-II (Indian Polity and Governance) की उत्तर लेखन में उदाहरण सहित जोड़ सकते हैं।
Why this matters for your exam preparation
Prelims के लिए:
यह टॉपिक “Current Affairs + Indian Polity” दोनों से जुड़ा है, इसलिए इसे दोहरी तैयारी के रूप में देखें।
आपसे सीधे-सीधे पूछा जा सकता है कि “किस राज्य/UT के वर्तमान राज्यपाल/एलजी कौन हैं?”, “किस अनुच्छेद के अंतर्गत राज्यपाल की नियुक्ति होती है?” या “एक ही व्यक्ति को दो राज्यों का राज्यपाल बनाने की अनुमति किस अनुच्छेद में है?”
Static Polity (M. Laxmikant आदि) पढ़ते समय अनुच्छेद 153–156 के साथ यह ताज़ा उदाहरण जोड़कर रिविज़न करें।
Mains (GS-II) और Essay के लिए:
“Role of Governor in Centre–State Relations”, “Cooperative vs Competitive Federalism”, “Politicisation of Constitutional Posts” जैसे टॉपिक्स पर उत्तर लिखते समय आप इस reshuffle और बोस–ममता विवाद या तमिलनाडु में आर.एन. रवि के साथ लंबित विधेयक विवादों को केस स्टडी की तरह उपयोग कर सकते हैं।
दिल्ली और अन्य UTs में LG की भूमिका पर चल रहे राजनीतिक–कानूनी विवादों को अनुच्छेद 239 और 239AA के संदर्भ में उदाहरण के रूप में जोड़ें।
इंटरव्यू (Personality Test) के लिए:
यदि आपका होम स्टेट इनमें से कोई है (WB, TN, Kerala, Bihar, Nagaland, Telangana, Maharashtra, HP, Delhi, Ladakh), तो आपसे पूछा जा सकता है कि “आपके राज्य के वर्तमान राज्यपाल कौन हैं और हाल में उनसे जुड़ी क्या चर्चा रही?”
आपको यह भी स्पष्ट रूप से बताने में सक्षम होना चाहिए कि “राज्यपाल का संवैधानिक रोल क्या है और हाल के बदलावों को आप संघीय ढाँचे के संदर्भ में कैसे देखते हैं?”
इसलिए, इस एक ही न्यूज़ से फैक्ट्स + कॉन्सेप्ट + आंसर-राइटिंग के उदाहरण – तीनों स्तर की तैयारी की जा सकती है। इसे अपनी डेली UPSC current affairs / daily GK update नोटबुक में अवश्य मार्क करें और ऊपर दिए गए Articles एवं Atharva Examwise की Polity Notes के साथ लिंक कर के पढ़ें।