NEP 2020 की चमक के पीछे छिपे तीन गंभीर संकट—केंद्रीकरण, व्यापारीकरण और सांप्रदायीकरण—जानें क्यों यह हर UPSC, SSC और बैंकिंग परीक्षार्थी के लिए ज़रूरी है।
परिचय: NEP 2020 के पीछे की सच्चाई
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को परिवर्तनकारी नीति के रूप में प्रचारित किया गया, लेकिन इसके पीछे छुपी है एक गंभीर हकीकत—भारतीय शिक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले तीन संकट:
केंद्रीकरण (Centralisation)
व्यापारीकरण (Commercialisation)
सांप्रदायीकरण (Communalisation)
Atharva Examwise के इस लेख में हम इन्हीं 3Cs की गहराई से पड़ताल करेंगे—जो UPSC, SSC और बैंकिंग परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के भविष्य को सीधा प्रभावित करते हैं।
पहला C: शिक्षा में केंद्रीकरण का खतरा
शिक्षा नीति को लागू करने में केंद्र सरकार का एकतरफा रवैया भारतीय संघीय ढांचे के खिलाफ है।
मुख्य बिंदु:
Central Advisory Board of Education की बैठक 2019 से अब तक नहीं हुई।
NEP 2020 लागू करते समय राज्यों से कोई चर्चा नहीं की गई, जबकि शिक्षा संविधान की संवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है।
PM-SHRI योजना को जबरदस्ती लागू करवाने के लिए Samagra Shiksha Abhiyan (SSA) के फंड रोक लिए गए।
UGC के 2025 के ड्राफ्ट दिशानिर्देशों के तहत राज्य सरकारों को विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर कर दिया गया।
क्यों है यह चिंताजनक?
राज्यों की स्वायत्तता समाप्त होती जा रही है।
एक ही पैटर्न की नीति से स्थानीय आवश्यकताओं की अनदेखी हो रही है।
यह मुद्दा UPSC की Polity और Governance से जुड़े सवालों में सीधे उपयोगी हो सकता है।
दूसरा C: शिक्षा का व्यापारीकरण
सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी स्कूलों का विस्तार किया जा रहा है और उच्च शिक्षा को ऋण आधारित प्रणाली में बदला जा रहा है।
आंकड़ों की नजर से:
2014 से अब तक:
89,441 सरकारी स्कूल बंद
42,944 निजी स्कूल खोले गए
Higher Education Financing Agency (HEFA) के तहत विश्वविद्यालयों को ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता है।
78% से 100% ऋण छात्रों की फीस बढ़ाकर वसूला जा रहा है।
असर छात्रों पर:
गरीब वर्ग के लिए सरकारी शिक्षा तक पहुंच मुश्किल हो गई है।
छात्रों को महंगी कोचिंग और निजी कॉलेज में जाना मजबूरी बन गया है।
SSC और बैंकिंग की तैयारी करने वाले छात्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
तीसरा C: शिक्षा का सांप्रदायीकरण
शिक्षा को राजनीतिक और वैचारिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रमुख बदलाव:
NCERT किताबों से:
गांधी जी की हत्या, मुगल इतिहास और संविधान की प्रस्तावना हटाई गई।
उच्च शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक विचारधारा से जुड़े प्रोफेसरों की नियुक्ति।
UGC नियमों में ढील, ताकि कम योग्य लेकिन विचारधारा-निष्ठ व्यक्तियों की नियुक्ति हो सके।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खतरा:
इतिहास और संविधान के तथ्यात्मक अध्ययन में विकृति आ रही है।
UPSC की Ethics और Essay जैसी परीक्षा में तथ्यों पर आधारित सोच प्रभावित होती है।
धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक सोच को क्षति पहुँच रही है।
इन नीतियों का परीक्षार्थियों पर क्या प्रभाव है?
इन तीन Cs के कारण शिक्षा प्रणाली का ढांचा और गुणवत्ता दोनों बदल रहे हैं।
छात्रों पर सीधा प्रभाव:
शिक्षा सुलभ नहीं रह गई, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए।
कोर्स सामग्री में पक्षपात, जिससे छात्रों की General Studies में तैयारी प्रभावित हो रही है।
नीति निर्धारण में राज्यों की भूमिका खत्म, जिससे स्थानीय जरूरतों की अनदेखी हो रही है।
परीक्षार्थियों के लिए क्यों ज़रूरी है इसे समझना?
अगर आप UPSC, SSC, या बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह विषय आपके लिए बहुत उपयोगी है:
नीति विश्लेषण UPSC के GS पेपर II, Essay, और Interview में काम आता है।
शिक्षा प्रणाली की समझ से आप बेहतर वर्तमान घटनाओं का विश्लेषण कर पाते हैं।
यह विषय Atharva Examwise Blog के माध्यम से आपके ज्ञान को न केवल गहरा करता है, बल्कि आपको परीक्षा की दृष्टि से अद्वितीय दृष्टिकोण भी देता है।
परीक्षा की दृष्टि से मुख्य निष्कर्ष
संविधान में Concurrent List की भूमिका – UPSC के Polity सेक्शन में काम आएगा।
NEP 2020 का आलोचनात्मक विश्लेषण – Essay और GS पेपर II के लिए ज़रूरी।
शिक्षा बजट और ट्रेंड्स पर नजर रखें – बैंकिंग परीक्षा के लिए उपयोगी।
पाठ्यपुस्तकों के बदलाव को ट्रैक करें – SSC के इतिहास और सामान्य ज्ञान खंड के लिए महत्वपूर्ण।
शिक्षा नीति में केंद्रीकरण को पहचानें – Ethics और Decision Making में उपयोगी होगा।
Atharva Examwise Blog पर ऐसे ही और गहराई से शोधित, परीक्षा-केंद्रित लेख पढ़ते रहें।
आपकी तैयारी सिर्फ सिलेबस तक सीमित नहीं होनी चाहिए—बल्कि उस सिस्टम की समझ तक जानी चाहिए जिसमें आप काम करने जा रहे हैं।