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20 February 2026 Current Affairs: कर्नाटक का वीरगासे शैव लोकनृत्य | UPSC Daily GK Update 20 February 2026 Current Affairs: कर्नाटक का वीरगासे शैव लोकनृत्य | UPSC Daily GK Update

20 Feb 2026 20 Feb 2026

20 February 2026 Current Affairs: कर्नाटक का वीरगासे शैव लोकनृत्य | UPSC Daily GK Update
Art & Culture Hindi 20 Feb 2026

20 February 2026 Current Affairs: कर्नाटक का वीरगासे शैव लोकनृत्य | UPSC Daily GK Update

20 February 2026 Current Affairs: कर्नाटक का वीरगासे शैव लोकनृत्य

परिचय

वीरगासे (Veeragase/Guggla) कर्नाटक का एक अत्यंत ऊर्जावान शैव लोकनृत्य है, जो वीरता, भक्ति और धर्म की रक्षा जैसे विषयों को अभिव्यक्त करता है।
यह नृत्य मुख्य रूप से वीरशैव/लिंगायत परंपरा से जुड़ा है और इसे कर्नाटक के प्रमुख लोक नृत्यों में गिना जाता है, विशेषकर दशहरा (Mysuru Dasara) और श्रावण–कार्तिक महीनों के त्योहारों में।

वीरगासे नृत्य की पौराणिक पृष्ठभूमि

वीरगासे की जड़ें दक्ष यज्ञ की कथा और भगवान शिव के उग्र रूप वीरभद्र से जुड़ी मानी जाती हैं।
कथा के अनुसार, दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें शिव को आमंत्रित नहीं किया; अपमान से व्यथित सती ने यज्ञ-अग्नि में आत्मदाह कर लिया, जिसके बाद शिव के क्रोध से उनकी जटाओं से वीरभद्र प्रकट हुए और उन्होंने यज्ञ को विध्वंस कर दक्ष का संहार किया।

इस नृत्य प्रस्तुति में कलाकार वीरभद्र की वीरता, धर्म की रक्षा और दैवी न्याय की स्थापना को नाटकीय रूप से नृत्य, संवाद और संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं।
कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में वीरगासे के दौरान दक्ष यज्ञ की कथा क्रमबद्ध रूप से सुनाई और दिखाई जाती है, जिससे यह लोक-नृत्य लोक-शिक्षा और धार्मिक स्मृति दोनों का माध्यम बन जाता है।

भौगोलिक प्रसार और अवसर

वीरगासे मुख्य रूप से कर्नाटक के शिमोगा, चिक्कमगलूरु, चित्रदुर्ग, धारवाड़ और बल्लारी जैसे जिलों में लोकप्रिय है।
यह नृत्य मेलों, देव-यात्राओं, पूर्णिमा, विवाह, गृह-प्रवेश जैसे मांगलिक अवसरों के साथ-साथ विशेष रूप से मैसूरु दशहरा शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र रहता है।

कई वीरशैव–लिंगायत परिवारों में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य महत्वपूर्ण संस्कारों के समय वीरभद्र देवता की आराधना के रूप में वीरगासे कराया जाता है, जिसे एक अनुष्ठानिक व्रत व सेवा माना जाता है।
कुछ परंपराओं में देवगंगे (पवित्र जल) घर लाने की रस्म के दौरान भी वीरगासे किया जाता है, जहाँ नृत्य के माध्यम से गंगा और वीरभद्र दोनों की कृपा का आह्वान किया जाता है।​

वेशभूषा और प्रतीकात्मकता

वीरगासे की वेशभूषा अत्यंत प्रभावशाली, रंगीन और प्रतीकात्मक मानी जाती है।
कलाकार प्रायः सफेद पगड़ी या मुकुट, केसरिया/कवि रंग के वस्त्र, कमर पर पट्टा, रुद्राक्ष की माला, नागाभरण (सर्पाकार आभूषण) और पैरों में घुँघरू धारण करते हैं, जबकि माथे, भौंहों और शरीर पर विभूति (भस्म) लगाते हैं।

नृत्य के दौरान कलाकार दाएँ हाथ में खुली तलवार और बाएँ हाथ में लकड़ी का पट्ट या वीरभद्र की प्रतिमा जैसा पट्टिका धारण करते हैं, जो युद्धशील संन्यासी या वीर-साधु की छवि निर्मित करता है।
केसरिया वस्त्र वैराग्य और आध्यात्मिकता के प्रतीक माने जाते हैं, जबकि रुद्राक्ष और विभूति शिव-भक्ति और शैव पहचान को रेखांकित करते हैं।

संगीत, वाद्य और नृत्य-शैली

वीरगासे में तीव्र, ऊर्जावान और थकाने वाली नृत्य-चालें शामिल होती हैं, जिन्हें एक प्रकार का मार्शल/वीर नृत्य भी कहा जाता है।
नृत्य के दौरान कराडे (एक प्रकार का ड्रम), चामला/चामल, ओलागा या मौरी जैसे वाद्ययंत्रों के साथ तीव्र लय और लगातार ताल बजती रहती है, जो उत्साह और रोमांच पैदा करती है।

अक्सर कलाकार समवेत रूप से गोल या कतारबद्ध संरचना में नृत्य करते हैं, बीच-बीच में नाटकीय मुद्राएँ, तलवार-चालन, छलाँगें और वीर-हुंकारें भी शामिल होती हैं।
कुछ परंपराओं में नृत्य के दौरान कलाकार अपने गाल या मुँह में सुई या नुकीली वस्तु भेदने जैसे तपस्या-प्रतीक अनुष्ठान भी करते हैं, जिन्हें अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है।

नर्तक/समुदाय और सामाजिक आयाम

परंपरागत रूप से यह नृत्य वीरशैव या लिंगायत समुदाय के जंगम/लिंगदेवरु (Lingadevaru) द्वारा किया जाता रहा है, जिन्हें गाँवों में पुरावंता या वीरकुमार जैसे नामों से भी जाना जाता है।
इन कलाकारों के लिए वीरगासे केवल कला नहीं बल्कि धार्मिक कर्तव्य, भक्ति और सामुदायिक सेवा का रूप माना जाता है, जिसके लिए विशेष व्रत, नियम और शुद्धता की शर्तें होती हैं।

समकालीन समय में कई स्थानों पर स्त्री कलाकार भी वीरगासे में भाग लेने लगी हैं, जिससे यह परंपरा व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक पुनर्जीवन का माध्यम बन रही है।
दलों में सामान्यतः सम संख्या (2, 4, 6 आदि) में कलाकार भाग लेते हैं और एक नायक/वाचक कथा व प्रत्येक भावाभिनय को श्रोताओं तक समझाता है।

परीक्षा के लिए मुख्य तथ्य (Prelims Focus)

राज्य: वीरगासे कर्नाटक का पारंपरिक लोकनृत्य है।

परंपरा: शैव–मार्शल (Shaivite, वीर नृत्य) लोककला, वीरशैव/लिंगायत समुदाय से जुड़ी।

मुख्य देवता: भगवान शिव के उग्र रूप वीरभद्र; दक्ष यज्ञ की कथा पर आधारित।

अवसर/त्योहार: मैसूरु दशहरा, श्रावण व कार्तिक महीने, ग्राम–देवता यात्राएँ, विवाह व गृह-प्रवेश जैसे अनुष्ठान।

प्रमुख वाद्य: कराडे, चामला (चामल), ओलागा/मौरी आदि पंचवाद्य; तेज और ऊर्जावान लय।

वेशभूषा: सफेद पगड़ी/मुकुट, केसरिया/कवि वस्त्र, रुद्राक्ष माला, नागाभरण, विभूति, घुँघरू, हाथ में तलवार और लकड़ी का पट्ट/वीरभद्र की पट्टिका।

समुदाय/कलाकार: जंगम या लिंगदेवरु; गाँवों में पुरावंता/वीरकुमार; पारंपरिक रूप से पुरुष, लेकिन अब कुछ स्थानों पर महिलाएँ भी।

प्रकृति: तीव्र, ऊर्जावान, ऊर्जा-खपत करने वाला वीर-नृत्य; तलवार-चालन और मार्शल स्टेप्स प्रमुख।

इनमें से “वीरगासे – किस राज्य का लोक नृत्य है?” जैसा प्रश्न पहले से कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के MCQs में पूछा गया है, जहाँ सही उत्तर कर्नाटक दिया गया है।

Mains/विस्तृत समझ: संस्कृति, धर्म और लोक-स्मृति

वीरगासे भारतीय लोक-संस्कृति में यह दर्शाता है कि किस प्रकार मिथकीय कथाएँ (जैसे दक्ष–यज्ञ) लोकनृत्य, लोक-संगीत और अनुष्ठानों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी संप्रेषित होती रहती हैं।
यह नृत्य एक ओर शिव–भक्ति और वीरता का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक–धार्मिक मूल्यों, न्याय-बोध और धर्म-रक्षा के विचार को भी लोक-स्तर पर स्थापित करता है।

कर्नाटक के संदर्भ में वीरगासे, राज्य की बहुस्तरीय सांस्कृतिक विविधता और क्षेत्रीय पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
ग्रामीण–शहरी दोनों परिवेशों में त्योहारों, शोभा–यात्राओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसकी उपस्थिति, लोककलाओं की सामाजिक स्वीकार्यता और पर्यटन–संभावनाओं को भी बढ़ाती है।

Why this matters for your exam preparation

Art & Culture (GS-I, Prelims + Mains): UPSC Prelims में अक्सर “फलाँ नृत्य – किस राज्य से संबंधित है?”, “कौन-सा नृत्य किस देवता या त्योहार से जुड़ा है?” जैसे सीधे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं; वीरगासे इस श्रेणी का महत्त्वपूर्ण नृत्य है।

Static GK + Current Affairs Integration: मैसूरु दशहरा या कर्नाटक की किसी सांस्कृतिक योजना/उत्सव पर खबर आने पर, वीरगासे जैसे नृत्यों से जुड़े प्रश्न “करंट से लिंक्ड स्टैटिक GK” के रूप में बन सकते हैं, इसलिए आज के करंट अफेयर्स के साथ इसे जोड़कर याद रखना लाभदायक है।

मेन परीक्षा के लिए उदाहरण: “भारतीय लोककलाओं की भूमिका”, “धर्म और लोक-संस्कृति का अंतर्संबंध”, “सांस्कृतिक विविधता और एकता” जैसे GS-I या निबंध के प्रश्नों में वीरगासे को एक केस–स्टडी या उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जा सकता है।

राज्य–विशिष्ट तैयारी (KPSC/SSC/State PSC): कर्नाटक, दक्षिण भारत या भारतीय कला–संस्कृति से जुड़े राज्य/केंद्रीय परीक्षाओं (SSC, Railways, बैंकिंग, State PSCs आदि) में लोकनृत्य–आधारित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं; वीरगासे के राज्य, देवता, समुदाय और त्योहार–संबंध को स्पष्ट रूप से याद रखना स्कोर बढ़ाने में मदद करेगा।

इसलिए आज की Atharva Examwise current affairs अपडेट के रूप में वीरगासे को केवल एक सांस्कृतिक तथ्य नहीं, बल्कि “हाई–यील्ड Art & Culture टॉपिक” मानकर संक्षिप्त नोट, फ्लैश–कार्ड और रिविज़न लिस्ट में ज़रूर शामिल करें।

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