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लेज़ीम नृत्य करेंट अफेयर्स: महाराष्ट्र का पारंपरिक लोक नृत्य UPSC की सुर्खियों में | 12 सितम्बर 2025 लेज़ीम नृत्य करेंट अफेयर्स: महाराष्ट्र का पारंपरिक लोक नृत्य UPSC की सुर्खियों में | 12 सितम्बर 2025

12 Sep 2025 12 Sep 2025

लेज़ीम नृत्य करेंट अफेयर्स: महाराष्ट्र का पारंपरिक लोक नृत्य UPSC की सुर्खियों में | 12 सितम्बर 2025
Art & Culture Hindi 12 Sep 2025

लेज़ीम नृत्य करेंट अफेयर्स: महाराष्ट्र का पारंपरिक लोक नृत्य UPSC की सुर्खियों में | 12 सितम्बर 2025

अवलोकन: लेज़ीम नृत्य समाचारों में

लेज़ीम, महाराष्ट्र का जीवंत पारंपरिक लोक नृत्य, हाल ही में चर्चा में आया है। इसका कारण है आने वाली बॉलीवुड फिल्म छावा, जो मराठा शासक छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म में लेज़ीम को दिखाए जाने से यह सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण नृत्य एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, जिससे यह UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक हो गया है।

लेज़ीम नृत्य क्या है?

लेज़ीम महाराष्ट्र का पारंपरिक लोक नृत्य है, जो नृत्य और मार्शल आर्ट्स (युद्धकला) दोनों का अनूठा मिश्रण है। इसका नाम "लेज़ीम" नामक वाद्य यंत्र से पड़ा है — यह एक लकड़ी की छड़ी होती है जिसमें धातु की झनझनाती डिस्क या झांझ लगी होती हैं जिन्हें नर्तक प्रदर्शन के दौरान हाथ में पकड़ते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

उत्पत्ति: महाराष्ट्र, भारत

स्वरूप: नृत्य और कठोर शारीरिक व्यायाम का संगम

प्रदर्शन शैली: समूहों में – दो-दो, चार-चार या गोल घेरे में

गतिविधियाँ: तेज़, तालबद्ध और जोशीले हावभाव — कदमताल, उठक-बैठक, कूदना और युद्धक मुद्राएँ

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक महत्व

मार्शल आर्ट्स संबंध

लेज़ीम का गहरा रिश्ता महाराष्ट्र की सैन्य परंपराओं और युद्धकलाओं से है:

सैन्य उत्पत्ति: छत्रपति शिवाजी महाराज के समय सैनिकों के प्रशिक्षण का हिस्सा रहा

शारीरिक क्षमता: योद्धाओं की सहनशक्ति, फुर्ती और समन्वय बढ़ाने हेतु विकसित किया गया

अखाड़ा परंपरा: पारंपरिक व्यायामशालाओं (अखाड़ों) की शारीरिक ड्रिल से जुड़ा हुआ

सांस्कृतिक विकास

ऐतिहासिक उद्देश्य: मूलतः सैनिकों की ताकत और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रयोग किया जाता था

संस्कृति संरक्षण: कुछ समुदायों ने इसे संरक्षित रखा और धीरे-धीरे इसे नृत्य के रूप में विकसित किया

आधुनिक अनुकूलन: आज महाराष्ट्र के स्कूलों और कॉलेजों की शारीरिक शिक्षा में शामिल

वाद्य यंत्र और प्रदर्शन शैली

प्रमुख वाद्य यंत्र

लेज़ीम: लकड़ी की छड़ी जिस पर लोहे की चैन और धातु की झनझनाती डिस्क लगी होती हैं

ढोल/ढोलकी: ताल देने वाला पारंपरिक वाद्य

ताशा: एक और प्रकार का नगाड़ा

प्रदर्शन की विशेषताएँ

कोई वाद्य वायु या तार वाले नहीं: केवल तालवाद्य का प्रयोग

ताल की प्रगति: धीमी गति से शुरू होकर धीरे-धीरे तेज़ होती है

सामूहिक समन्वय: समूह में एक जैसी लय और पैटर्न में नृत्य

उत्सव और सांस्कृतिक संदर्भ

प्रमुख अवसर

गणेश चतुर्थी: इस पर्व के दौरान सबसे प्रमुख प्रदर्शन

धार्मिक शोभायात्राएँ: विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर

शादी समारोह: बारात या विवाह जुलूस में

सांस्कृतिक कार्यक्रम: स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक आयोजनों में नियमित

क्षेत्रीय महत्व

मराठा पहचान: मराठा गौरव और योद्धा परंपराओं का प्रतीक

सामूहिकता: एकता, अनुशासन और सामूहिक उत्सव का भाव

सांस्कृतिक निरंतरता: महाराष्ट्र की सैन्य विरासत और वर्तमान संस्कृति को जोड़ता है

UPSC के लिए प्रासंगिकता: कला और संस्कृति आयाम

स्थैतिक ज्ञान बिंदु

राज्यवार लोकनृत्य: लेज़ीम महाराष्ट्र का महत्वपूर्ण लोकनृत्य

मार्शल नृत्य रूप: युद्धकला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का मिश्रण

उत्सव संबंध: गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों से जुड़ा

करेंट अफेयर्स एकीकरण

सांस्कृतिक विवाद: फिल्म छावा ने ऐतिहासिक सटीकता पर बहस छेड़ी

विरासत संरक्षण: पारंपरिक कला रूपों को जीवित रखने के प्रयास

आधुनिक अनुकूलन: परंपरा का समकालीन जीवन से जुड़ाव

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुख्य तथ्य

याद रखने योग्य बिंदु

राज्य: महाराष्ट्र

वाद्य यंत्र: लेज़ीम (लकड़ी की छड़ी व धातु की डिस्क)

स्वरूप: नृत्य + व्यायाम

ऐतिहासिक संबंध: शिवाजी महाराज के सैनिक प्रशिक्षण से जुड़ा

उत्सव: गणेश चतुर्थी

प्रदर्शन शैली: समूह – दो-दो, चार-चार या गोल घेरे में

वाद्य सीमा: केवल तालवाद्य, कोई तार/वायु वाद्य नहीं

तुलनात्मक संदर्भ

अन्य महाराष्ट्र लोकनृत्य: लावणी, पोवाड़ा, कोळी, तमाशा, धनगरी गजा

यह आपकी परीक्षा तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

सीधा परीक्षा अनुप्रयोग

UPSC प्रीलिम्स: राज्यवार नृत्य, उत्सव संबंध और सांस्कृतिक धरोहर पर प्रश्न

UPSC मेन्स (GS पेपर 1):

सांस्कृतिक विविधता और क्षेत्रीय परंपराएँ

उपयोगी से प्रदर्शनकारी कला रूपों का विकास

सांस्कृतिक संरक्षण में ऐतिहासिक व्यक्तियों की भूमिका

शारीरिक प्रशिक्षण और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का संगम

राज्य लोकसेवा आयोग: महाराष्ट्र और अन्य राज्यों की परीक्षाओं में सांस्कृतिक धरोहर से संबंधित प्रश्न

करेंट अफेयर्स एकीकरण

हाल ही की छावा फिल्म और उससे जुड़ी बहसें दिखाती हैं कि किस तरह पारंपरिक कला रूप समकालीन सांस्कृतिक चर्चाओं से जुड़े रहते हैं।

तैयारी रणनीति

लेज़ीम को अन्य युद्धकला-प्रेरित नृत्यों जैसे:

थांग-टा (मणिपुर)

छऊ (पूर्वी भारत)
के साथ पढ़ें, ताकि भारतीय संस्कृति के व्यापक मार्शल आर्ट्स-प्रभावित नृत्य रूपों को समझा जा सके।

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