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UPSC समसामयिकी (Current Affairs) 19 मई, 2026: ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन – दैनिक जीके अपडेट और अथर्व एक्ज़ामवाइज़ करंट न्यूज़ टुडे UPSC समसामयिकी (Current Affairs) 19 मई, 2026: ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन – दैनिक जीके अपडेट और अथर्व एक्ज़ामवाइज़ करंट न्यूज़ टुडे

19 May 2026 19 May 2026

UPSC समसामयिकी (Current Affairs) 19 मई, 2026: ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन – दैनिक जीके अपडेट और अथर्व एक्ज़ामवाइज़ करंट न्यूज़ टुडे
INTERNATION RELATIONS HINDI 19 May 2026

UPSC समसामयिकी (Current Affairs) 19 मई, 2026: ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन – दैनिक जीके अपडेट और अथर्व एक्ज़ामवाइज़ करंट न्यूज़ टुडे

वैश्विक भू-राजनीति के बदलते संतुलन ने भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को प्रेरित किया है, जिसे उत्तरी यूरोप की ओर एक रणनीतिक झुकाव (strategic pivot) के रूप में देखा जा रहा है। 19 मई, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो, नॉर्वे में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। यह ऐतिहासिक घटना 1983 में इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद, 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर द्वारा आयोजित इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और सभी पांच नॉर्डिक देशों: डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के शासनाध्यक्षों ने हिस्सा लिया।

मूल रूप से मध्य-2025 के लिए निर्धारित इस शिखर सम्मेलन को क्षेत्रीय सुरक्षा तनावों के कारण स्थगित कर दिया गया था। मई 2026 में इसका सफल आयोजन एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर हुआ है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया युद्ध के नतीजों, होर्मुज जलडमरूद्घ (Strait of Hormuz) के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा सुरक्षा चुनौतियों और यूक्रेन में लंबे समय से जारी युद्ध से जूझ रही है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए, यह शिखर सम्मेलन सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II (द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूह) और प्रश्नपत्र III (आर्थिक विकास और पर्यावरण) के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

भारत-नॉर्डिक साझेदारी का विकास

भारत और "नॉर्डिक पांच" के बीच संस्थागत जुड़ाव सामान्य विकासात्मक सहयोग से आगे बढ़कर एक गहरे, कार्यान्वयन-उन्मुख रणनीतिक गठबंधन में बदल गया है। इन शिखर सम्मेलनों का ऐतिहासिक प्रक्षेपवक्र समस्या-समाधान की ओर एक स्पष्ट झुकाव प्रदर्शित करता है, जो भारत के बाजार के पैमाने (market scale) को नॉर्डिक देशों की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है।

शिखर सम्मेलन संस्करणतिथि और मेजबान शहरप्रमुख भागीदारप्राथमिक रणनीतिक फोकस और रणनीतिक परिणाम
पहला भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

अप्रैल 2018



 

स्टॉकहोम, स्वीडन

भारत और नॉर्डिक पांच (स्वीडन के साथ सह-आयोजित)"साझा मूल्य, पारस्परिक समृद्धि" पर ध्यान केंद्रित किया गया; हरित प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल नवाचार पर उच्च स्तरीय संवाद की शुरुआत की गई।
दूसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

मई 2022



 

कोपेनहेगन, डेनमार्क

भारत और नॉर्डिक पांच (डेनमार्क द्वारा मेजबानी)महामारी के बाद आर्थिक सुधार का मूल्यांकन किया गया; नीली अर्थव्यवस्था (blue economy), डिजिटल शासन और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को प्राथमिकता दी गई।
तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

19 मई, 2026



 

ओस्लो, नॉर्वे

भारत और नॉर्डिक पांच (नॉर्वे द्वारा मेजबानी)EFTA-TEPA को धरातल पर उतारना; आर्कटिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (supply chain resilience) और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों (6G, AI और सेमीकंडक्टर) पर ध्यान।

यह साझेदारी अत्यधिक पूरक (complementary) है। नॉर्डिक क्षेत्र, भले ही जनसंख्या में छोटा हो, लेकिन इसका संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 1.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और इसके पास दुनिया के सबसे बड़े पूंजी भंडार हैं, जिसमें नॉर्वे का गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (GPFG) शामिल है, जिसका मूल्य लगभग 1.8 ट्रिलियन डॉलर है। इसके विपरीत, भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, "मेक इन इंडिया" के तहत विशाल विनिर्माण बुनियादी ढांचा और कुशल पेशेवरों का एक बड़ा पूल प्रदान करता है, जो "नवाचार और पैमाने" (innovation meets scale) का एक स्वाभाविक ढांचा स्थापित करता है।

भू-राजनीतिक संदर्भ और "उत्तर की ओर झुकाव" (Northward Turn)

2026 का शिखर सम्मेलन उस बात को रेखांकित करता है जिसे विदेश नीति विश्लेषक भारत का "उत्तर की ओर झुकाव" कहते हैं, जो बदलते वैश्विक संरेखण के बीच उत्तरी यूरोप के साथ संबंधों को गहरा करने का एक सुनियोजित कदम है।

                    ┌────────────────────────┐                    │  आर्कटिक बर्फ का पिघलना │────────┐                    └───────────┬────────────┘        │                                │                     │                                ▼                     ▼                    ┌────────────────────────┐  ┌───────────────┐                    │ उत्तरी समुद्री मार्ग का │  │मानसून में बदलाव│                    │ खुलना (40% छोटा मार्ग) │  │ (बैरेंट्स-कारा)│                    └───────────┬────────────┘  └───────┬───────┘                                │                       │                                ▼                       ▼                    ┌────────────────────────┐  ┌───────────────┐                    │विविध आपूर्ति श्रृंखला  │  │ जलवायु जोखिम  │                    │   (महत्वपूर्ण खनिज)    │  │ (भारतीय कृषि) │                    └────────────────────────┘  └───────────────┘

उत्तरी यूरोप की बदलती सुरक्षा वास्तुकला

नाटो (NATO) में फिनलैंड और स्वीडन के प्रवेश ने उत्तरी यूरोप के सुरक्षा माहौल को नया रूप दे दिया है, जिससे बाल्टिक और आर्कटिक क्षेत्र रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के सक्रिय क्षेत्र बन गए हैं। ध्रुवीय क्षेत्र में रूस-चीन सहयोग के गहरे होने से भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। नॉर्डिक देशों के साथ संबंधों को संस्थागत बनाकर, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) को मजबूत करता है और बिना किसी सैन्य गुट में शामिल हुए उत्तरी ध्रुवीय शासन में एक राजनयिक आवाज सुरक्षित करता है।

ध्रुवीय-मानसून वैज्ञानिक संबंध

आर्कटिक में भारत की रुचि पारिस्थितिक आवश्यकता से प्रेरित है। आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत से तीन गुना से अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधान इंगित करते हैं कि बैरेंट्स-कारा सागर (Barents-Kara Sea) में बर्फ के आवरण का नुकसान सीधे तौर पर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के उतार-चढ़ाव से जुड़ा हुआ है। चूंकि ध्रुवीय तापमान के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भारत भर में कृषि उत्पादकता पर पड़ता है, इसलिए नॉर्डिक भागीदारों के साथ सहयोगात्मक वायुमंडलीय अनुसंधान अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत 2008 से नॉर्वे के स्वालबार्ड में हिमाद्रि अनुसंधान स्टेशन के माध्यम से इस क्षेत्र में एक वैज्ञानिक उपस्थिति बनाए हुए है और 2013 से आर्कटिक परिषद (Arctic Council) में एक पर्यवेक्षक (Observer) रहा है।

वाणिज्यिक पारगमन और संसाधन सुरक्षा

ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से रूस के आर्कटिक तट के साथ उत्तरी समुद्री मार्ग (Northern Sea Route - NSR) खुल रहा है। NSR पारंपरिक स्वेज नहर मार्ग की तुलना में यूरोप और एशिया के बीच समुद्री पारगमन दूरी को लगभग 40% तक कम कर सकता है, जिससे व्यापार दक्षता बढ़ेगी। इसके अलावा, आर्कटिक में महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (rare earth elements) के विशाल भंडार मौजूद हैं। संसाधन-समृद्ध नॉर्डिक देशों—जैसे स्वीडन, जिसके पास महत्वपूर्ण दुर्लभ पृथ्वी भंडार है, और नॉर्वे, जिसके पास गहरे समुद्र में खनन (deep-sea mining) की क्षमता है—के साथ साझेदारी करके भारत अपने सेमीकंडक्टर और हरित प्रौद्योगिकी उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल को सुरक्षित कर सकता है, जिससे चीन पर उसकी निर्भरता कम होगी।

ध्रुवीय विज्ञान पर विस्तृत अध्ययन सामग्री के लिए, उम्मीदवार व्यापक अथर्व एक्ज़ामवाइज़ भारत की आर्कटिक नीति विश्लेषण का संदर्भ ले सकते हैं।

2026 रोडमैप का चार-सूत्रीय रणनीतिक एजेंडा

तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन ने राजनयिक इरादों को ठोस औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने के लिए एक स्पष्ट ढांचा स्थापित किया, जो चार प्राथमिक स्तंभों के इर्द-गिर्द संरचित है।

1. EFTA-TEPA को धरातल पर उतारना

शिखर सम्मेलन ने भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए एक आवश्यक मंच प्रदान किया, जो 1 अक्टूबर, 2025 को लागू हुआ था। EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिचेंस्टीन शामिल हैं। TEPA एक अत्यधिक अभिनव मुक्त व्यापार समझौता है क्योंकि इसमें EFTA देशों द्वारा भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश करने और 15 वर्षों में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने की कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धता शामिल है। ओस्लो में द्विपक्षीय बैठकों के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने इन निवेशों में तेजी लाने के लिए इन्वेस्ट इंडिया के तहत एक समर्पित नॉर्वे-केंद्रित व्यापार सुविधा डेस्क (Trade Facilitation Desk) की स्थापना की घोषणा की।

2. नीली और हरित अर्थव्यवस्था

स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण औद्योगिक तालमेल के एक प्रमुख क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। नॉर्डिक देश डीकार्बोनाइजेशन के लिए उन्नत प्रयोगशालाओं के रूप में कार्य करते हैं, जबकि भारत पैमाना, मांग और तीव्र बुनियादी ढांचे का विस्तार प्रदान करता है।

ऑफशोर विंड और हाइड्रोजन: डेनमार्क के साथ अपतटीय पवन ऊर्जा (offshore wind energy) में और नॉर्वे के साथ हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगात्मक परियोजनाओं को बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2030 तक 500 GW स्वच्छ ऊर्जा और 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के भारत के लक्ष्यों को रेखांकित किया और नॉर्वे के संप्रभु धन कोष (sovereign wealth fund) को भारतीय हरित बुनियादी ढांचे में अपने निवेश का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया।

समुद्री सहयोग: बंदरगाह आधुनिकीकरण, हरित शिपिंग कॉरिडोर और सतत मत्स्य पालन को भारत की सागरमाला परियोजना (Sagarmala Project) के साथ जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में, नॉर्वे के लगभग 10% वाणिज्यिक जहाजों का निर्माण भारतीय शिपयार्डों में किया जाता है; दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों के भीतर इस आंकड़े को बढ़ाकर 25% करने का लक्ष्य रखा है।

भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal energy): भारत में संधारणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए गहरे भू-तापीय प्रणालियों को विकसित करने के लिए आइसलैंड की विशेषज्ञता का लाभ उठाना।

3. डिजिटल-नवाचार त्रिकोण

यह स्तंभ सुरक्षित, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी सह-विकास का समन्वय करता है।

6G, AI और क्वांटम कंप्यूटिंग: 6G मानकों के सह-विकास और सुरक्षित क्वांटम नेटवर्क पर, विशेष रूप से फिनलैंड के साथ केंद्रित साझेदारी। यह चर्चा फिनलैंड के "जस्ट एआई" (Just AI) के दृष्टिकोण पर आधारित है, जो नैतिक, समावेशी और सार्वजनिक हित वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों को बढ़ावा देती है।

सेमीकंडक्टर: भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए स्वीडन के औद्योगिक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (एरिक्सन और साब जैसी कंपनियों सहित) के साथ सहयोग। इसे स्वीडन-भारत प्रौद्योगिकी और एआई कॉरिडोर (SITAC) और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड के ASML के बीच गुजरात के धोलेरा में भारत के सेमीकंडक्टर संयंत्र को सुसज्जित करने के लिए की गई साझेदारी जैसे समझौतों द्वारा समर्थित किया गया है।

4. गतिशीलता ढांचा (Mobility Framework)

शिखर सम्मेलन ने 2 करोड़ से अधिक मजबूत भारतीय प्रवासियों और कुशल पेशेवरों को लाभान्वित करने के लिए एक व्यापक "टैलेंट स्ट्रेटजी" (Talent Strategy) को अंतिम रूप दिया। व्यावसायिक योग्यताओं (जैसे नर्सिंग, वास्तुकला और चार्टर्ड अकाउंटेंसी) में पारस्परिक मान्यता समझौतों (MRAs) को लागू करके, यह ढांचा उच्च आय वाली नॉर्डिक अर्थव्यवस्थाओं में कुशल भारतीय जनशक्ति के प्रवास को सरल बनाता crumbs है।

भारत-EFTA TEPA का विस्तृत विश्लेषण

उत्तरी यूरोप के साथ भारत के जुड़ाव के आर्थिक आधारों का मूल्यांकन करने के लिए, भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के विशिष्ट प्रावधानों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।

मुख्य आयामTEPA की प्रमुख विशेषताएं और प्रतिबद्धताएं
निवेश का संकल्प15 वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में 100 बिलियन डॉलर की बाध्यकारी प्रतिबद्धता (पहले 10 वर्षों में 50 बिलियन डॉलर और अगले 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 बिलियन डॉलर)।
रोजगार सृजनविनिर्माण, नवाचार और अनुसंधान पर केंद्रित भारत में लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन।
EFTA शुल्क रियायतें92.2% शुल्क लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच, जिसमें भारत के 99.6% निर्यात शामिल हैं, जिसमें सभी गैर-कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
भारत की शुल्क रियायतेंघरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए 5 से 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से शुल्क कटौती के साथ 82.7% शुल्क लाइनों (EFTA निर्यात का 95.3%) पर विस्तारित टैरिफ कटौती।
घरेलू सुरक्षा उपायसंवेदनशील क्षेत्र—जिनमें डेयरी, सोया, कोयला और प्रमुख कृषि उत्पाद शामिल हैं—को शुल्क रियायतों से पूरी तरह बाहर रखा गया है; सोने पर प्रभावी शुल्क अपरिवर्तित रहेगा।
सेवाएं और गतिशीलताडिजिटल डिलीवरी (मोड 1), वाणिज्यिक उपस्थिति (मोड 3), और कर्मियों की गतिशीलता (मोड 4) की सुविधा के लिए 100 से अधिक उप-क्षेत्रों (आईटी, व्यवसाय, शिक्षा) में सुरक्षित प्रतिबद्धताएं।

व्यापार समझौतों पर तुलनात्मक दृष्टिकोण के लिए, (https://www.atharvaexamwise.com) पढ़ें।

पांच देशों की यात्रा के दौरान प्रमुख द्विपक्षीय जुड़ाव

प्रधानमंत्री मोदी की ओस्लो यात्रा 15 मई से 20 मई, 2026 तक पांच देशों के व्यापक आधिकारिक दौरे का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य प्रमुख वैश्विक भागीदारों के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को गहरा करना था।

           संयुक्त अरब अमीरात (15 मई) ──► नीदरलैंड (15-17 मई) ──► स्वीडन (17-18 मई)                                                                       │           इटली (19-20 मई) ◄── नॉर्वे (18-19 मई) ───────────────────────┘

1. संयुक्त अरब अमीरात (15 मई)

प्रधानमंत्री ने अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बातचीत की। वार्ता में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य कोरिडोर और पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

2. नीदरलैंड (15-17 मई)

प्रधानमंत्री ने राजा विलेम-अलेक्जेंडर, रानी मैक्सिमा और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन से मुलाकात की। जल प्रबंधन, हरित हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर में प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच गुजरात की धोलेरा चिप निर्माण सुविधा को लिथोग्राफी उपकरण प्रदान करने के लिए एक ऐतिहासिक अनुबंध को अंतिम रूप दिया गया।

3. स्वीडन (17-18 मई)

स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टरसन के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री ने गोथेनबर्ग का दौरा किया। दोनों नेताओं ने आधिकारिक तौर पर द्विपक्षीय संबंधों को चार स्तंभों पर आधारित रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया:

स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद

अगली पीढ़ी की आर्थिक भागीदारी

उभरती प्रौद्योगिकियां और विश्वसनीय कनेक्टिविटी (स्वीडन-भारत प्रौद्योगिकी और एआई कॉरिडोर - SITAC सहित)

मिलकर कल को आकार देना – लोग, ग्रह और लचीलापन

उन्होंने संयुक्त कार्य योजना 2026-2030 का समर्थन किया और 2027 में भारत में आयोजित होने वाले एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन, "भारत-स्वीडन: स्ट्रॉन्गर टुगेदर - टुवर्ड्स 2047" की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्रियों ने COP31 में लॉन्च किए जाने वाले लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (LeadIT 3.0) के एक नए चार वर्षीय चरण की घोषणा की और भारतीय वीनस ऑर्बिटर मिशन पर संयुक्त इसरो-स्वीडिश सहयोग का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी को विदेशी नागरिकों के लिए स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस से भी सम्मानित किया गया।

4. नॉर्वे (18-19 मई)

प्रधानमंत्री मोदी ने राजा हेराल्ड V और पीएम जोनास गहर स्टोर से मुलाकात की, और भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को सह-संबोधित किया। नवीकरणीय ऊर्जा, हरित शिपिंग और नीली अर्थव्यवस्था में सहयोग को गति देने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को हरित रणनीतिक साझेदारी (Green Strategic Partnership) में उन्नत किया गया। प्रधानमंत्री को विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मान, ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया। अंतरिक्ष सहयोग पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें यह नोट किया गया कि इसरो ने स्वालबार्ड में KSAT सुविधा में ट्रैकिंग एंटेना सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं।

5. इटली (19-20 मई)

दौरे का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने इतालवी पीएम जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से मुलाकात की। चर्चाओं में संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई, जिसमें रक्षा विनिर्माण, भूमध्य सागर-हिंद-प्रशांत पारगमन कोरिडोर में समुद्री सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भू-राजनीतिक चुनौतियां और राजनयिक घर्षण

यद्यपि शिखर सम्मेलन ने प्रगति दर्ज की, लेकिन ये राजनयिक जुड़ाव कई भू-राजनीतिक और संचार चुनौतियों के बीच संपन्न हुए।

वैश्विक व्यवधान

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक चोकपॉइंट्स के साथ समुद्री सुरक्षा को खतरों ने ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता पैदा कर दी है, जिससे भारत के लिए अपनी ऊर्जा साझेदारियों में विविधता लाने की आवश्यकता रेखांकित होती है। इसके साथ ही, चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर रहा है, जिससे रूस और पश्चिमी भागीदारों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की भारत की राजनयिक क्षमता की परीक्षा हो रही है।

ओस्लो में प्रेस कॉन्फ्रेंस विवाद

ओस्लो में एक संयुक्त मीडिया बयान के दौरान यात्रा में थोड़े समय के लिए तनाव देखा गया, जब एक नॉर्वेजियन टिप्पणीकार, हेले लिंग (Helle Lyng) ने निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए भारत में मानव अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता के संबंध में प्रधानमंत्री मोदी से सीधे सवाल पूछे। प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और कमरे से चले गए, जिससे घरेलू विपक्षी नेताओं द्वारा कुछ आलोचनात्मक टिप्पणियां की गईं।

इसके बाद ओस्लो में भारतीय दूतावास ने एक आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग की मेजबानी की जहां विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारत के लोकतांत्रिक रिकॉर्ड का कड़ा बचाव किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौलिक अधिकारों, लैंगिक समानता और सार्वभौमिक मतदान अधिकारों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता स्वतंत्रता के बाद से ही संवैधानिक रूप से गारंटीकृत है। उन्होंने कुछ विदेशी गैर-सरकारी संगठनों की आलोचनाओं को पक्षपातपूर्ण और भारत के सभ्यतागत इतिहास तथा लोकतांत्रिक संस्थानों की पूरी समझ की कमी के रूप में वर्णित किया।

भौगोलिक परिभाषाएं: नॉर्डिक क्षेत्र को समझना

सिविल सेवा परीक्षा में भूगोल और मानचित्र-आधारित प्रश्नों के लिए, उम्मीदवारों को उत्तरी यूरोप के क्षेत्रीय भूगोल के संबंध में स्पष्ट अंतर बनाए रखना चाहिए।

देश और क्षेत्रराजधानीसंप्रभु स्थितिप्रमुख समुद्री और भू-आकृतियां
नॉर्वेओस्लोसंप्रभु राज्यगहरी, संकीर्ण तटीय खाड़ियों (fjords) के साथ पहाड़ी इलाका; स्वीडन और फिनलैंड के साथ भूमि सीमाएं साझा करता है।
स्वीडनस्टॉकहोमसंप्रभु राज्यक्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ा नॉर्डिक देश; व्यापक नदी नेटवर्क, झीलों और जंगलों द्वारा विशेषता।
डेनमार्ककोपेनहेगनसंप्रभु राज्यसबसे छोटा और सबसे दक्षिणी नॉर्डिक देश; इसमें जुटलैंड प्रायद्वीप और 400 से अधिक द्वीपों का एक द्वीपसमूह शामिल है।
फिनलैंडहेलसिंकीसंप्रभु राज्यव्यापक रूप से वनाच्छादित परिदृश्य जिसमें हजारों हिमनद झीलें (glacial lakes) हैं; पूर्व में रूस के साथ सीमा लगती है।
आइसलैंडरेकजाविकसंप्रभु राज्यउत्तरी अटलांटिक में स्थित ज्वालामुखी द्वीप राष्ट्र; ग्लेशियरों, गर्म झरनों और सक्रिय गीजर के लिए जाना जाता है।
ग्रीनलैंडनूकस्वायत्त क्षेत्रदुनिया का सबसे बड़ा द्वीप; डेनमार्क साम्राज्य के तहत एक स्वायत्त क्षेत्र के रूप में मौजूद है।
फरो द्वीप समूहतोर्षवनस्वायत्त क्षेत्रउत्तरी अटलांटिक में एक द्वीप समूह; डेनमार्क के स्व-शासी क्षेत्र के रूप में संचालित होता है।
ऑलैंड द्वीप समूहमैरीहैम्नस्वायत्त क्षेत्रबोथनिया की खाड़ी के प्रवेश द्वार पर एक द्वीपसमूह; फिनलैंड के एक स्व-शासी, स्वीडिश-भाषी प्रांत के रूप में मौजूद है।

स्कैंडिनेवियाई प्रायद्वीप (Scandinavian Peninsula): भौगोलिक रूप से इसमें नॉर्वे, स्वीडन और उत्तरी फिनलैंड शामिल हैं।

स्कैंडिनेविया (सांस्कृतिक/भाषाई): सांस्कृतिक रूप से इसमें नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क शामिल हैं।

फेनोस्कैंडिया (Fennoscandia): इसमें स्कैंडिनेवियाई प्रायद्वीप, फिनलैंड, कोला प्रायद्वीप और करेलिया शामिल हैं।

नॉर्डिक देश (नॉर्डन): सभी पांच संप्रभु राष्ट्रों (नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड) और उनके तीन स्वायत्त क्षेत्रों का व्यापक समूह।

यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और व्यापक पांच देशों के यूरोपीय दौरे के परिणाम प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं, विशेष रूप से UPSC सिविल सेवा परीक्षा के कई खंडों में सीधे प्रासंगिक हैं।

UPSC GS प्रश्नपत्र II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण: यह शिखर सम्मेलन भारत की बहु-संरेखित विदेश नीति का एक स्पष्ट उदाहरण प्रदान करता है। यह दर्शाता है कि कैसे नई दिल्ली रूस के साथ अपने स्वतंत्र द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखते हुए नाटो-संरेखित राष्ट्रों (फिनलैंड और स्वीडन) के साथ गहरे रणनीतिक संबंध बना सकती है।

संवैधानिक आधार: उम्मीदवारों को अंतर्राष्ट्रीय मामलों को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक ढांचे का अध्ययन करना चाहिए, विशेष रूप से राज्य के नीति निदेशक तत्वों का अनुच्छेद 51 (अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और संधि दायित्वों को बढ़ावा देना) और अनुच्छेद 253 (अंतर्राष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने की संसदीय शक्ति)।

UNSC सुधार: नॉर्डिक देशों ने एक सुधारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दावे का लगातार समर्थन किया है।

UPSC GS प्रश्नपत्र III (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और प्रौद्योगिकी)

मुक्त व्यापार समझौते: सक्रिय कार्यान्वयन में भारत-EFTA TEPA का संक्रमण आधुनिक, संतुलित व्यापार वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत करता है। उम्मीदवारों को यह समझना चाहिए कि भारत कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की रक्षा करते हुए भारी दीर्घकालिक निवेश प्रतिबद्धताओं (100 बिलियन डॉलर) को कैसे सुरक्षित करता है।

नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy): विश्व बैंक नीली अर्थव्यवस्था को "आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और महासागर पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महासागर संसाधनों के संधारणीय उपयोग" के रूप में परिभाषित करता है। उम्मीदवारों को नॉर्डिक समुद्री प्रौद्योगिकियों को सीधे भारत की सागरमाला परियोजना और हरित बंदरगाह पहलों से जोड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।

जलवायु विज्ञान: आर्कटिक बर्फ के पिघलने (विशेष रूप से बैरेंट्स-कारा सागर में) और भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के उतार-चढ़ाव के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध भूगोल और जलवायु परिवर्तन के प्रश्नों के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।

मुख्य तथ्य एक नज़र में (UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए)

स्वाब्लार्ड वेधशाला: भारत का प्राथमिक ध्रुवीय अनुसंधान पदचिह्न नॉर्वे के स्वालबार्ड में हिमाद्रि स्टेशन के माध्यम से बनाए रखा जाता है। इसके अतिरिक्त, इसरो ने उपग्रह संचार का समर्थन करने के लिए स्वालबार्ड में KSAT सुविधा में ग्राउंड एंटेना स्थापित किए हैं।

आर्कटिक परिषद में स्थिति: भारत के पास 2013 से पर्यवेक्षक (Observer) का दर्जा है; यह स्थायी सदस्य नहीं है।

EFTA सदस्यता: इसमें चार देश शामिल हैं: स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिचेंस्टीन। यह यूरोपीय संघ (EU) से एक अलग व्यापारिक ब्लॉक है।

भारत की आर्कटिक नीति (2022): इसका शीर्षक "भारत और आर्कटिक: सतत विकास के लिए साझेदारी का निर्माण" है, यह छह स्तंभों पर निर्मित है: विज्ञान और अनुसंधान, जलवायु और पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक और मानव विकास, परिवहन और कनेक्टिविटी, शासन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तथा राष्ट्रीय क्षमता-निर्माण।

संप्रभु धन कोष: उम्मीदवारों को नॉर्वे के GPFG (उत्तरी सागर तेल राजस्व द्वारा वित्त पोषित, 1.8 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का) और पारंपरिक विदेशी मुद्रा भंडार के बीच अंतर करना चाहिए।

राज्य सम्मान: यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी को ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट (नॉर्वे) और रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस (स्वीडन) प्राप्त हुआ।

अतिरिक्त दैनिक जीके अपडेट, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ-नेतृत्व वाले विश्लेषण और व्यापक मॉक टेस्ट के लिए, उम्मीदवार अथर्व एक्ज़ामवाइज़ के आधिकारिक पोर्टल पर जा सकते हैं।

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