NCERT, UPSC और MPPSC के लिए लाइव + रिकॉर्डेड कोर्सेस उपलब्ध हैं। निःशुल्क डेमो क्लास के लिए रजिस्टर करें। Live + Recorded courses for NCERT, UPSC & MPPSC now available. Register for a free demo class. अभी रजिस्टर करें → Register Now →
INTERNATION RELATIONS HINDI INTERNATION RELATIONS HINDI

बगलिहार बांध: भारत-पाक जल विवाद में नई कड़ी और परीक्षा दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण तथ्य बगलिहार बांध: भारत-पाक जल विवाद में नई कड़ी और परीक्षा दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण तथ्य

08 May 2025 08 May 2025

बगलिहार बांध: भारत-पाक जल विवाद में नई कड़ी और परीक्षा दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण तथ्य
INTERNATION RELATIONS HINDI 08 May 2025

बगलिहार बांध: भारत-पाक जल विवाद में नई कड़ी और परीक्षा दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण तथ्य

परिचय: बगलिहार बांध और हालिया घटनाक्रम

मार्च 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल को सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, भारत ने चिनाब नदी पर स्थित बगलिहार और सलाल बांधों के गेट बंद कर दिए, जिससे पाकिस्तान में जल प्रवाह में 90% तक की कमी आई। 

बगलिहार बांध: निर्माण और क्षमता

स्थान: रामबन जिला, जम्मू-कश्मीर, भारत।

निर्माण आरंभ: 1999; पहला चरण पूरा हुआ 2008 में, दूसरा चरण 2015 में।

प्रकार: ग्रेविटी डैम; रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना।

ऊंचाई: 143 मीटर; लंबाई: 317 मीटर।

जल संग्रहण क्षमता: 475 मिलियन क्यूबिक मीटर।

बिजली उत्पादन क्षमता: 900 मेगावाट (दो चरणों में 450-450 मेगावाट)।

पाकिस्तान की आपत्तियां और विश्व बैंक की मध्यस्थता

पाकिस्तान ने बगलिहार परियोजना पर आपत्ति जताई, यह दावा करते हुए कि यह सिंधु जल संधि का उल्लंघन है। 2005 में, पाकिस्तान ने विश्व बैंक से मध्यस्थता की मांग की। 2007 में, तटस्थ विशेषज्ञ प्रोफेसर रेमंड लाफिट्टे ने भारत को बांध की ऊंचाई 1.5 मीटर कम करने और जल संग्रहण क्षमता को 13.5% घटाने की सिफारिश की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया। 

हालिया घटनाक्रम: जल प्रवाह में कटौती

गेट बंद: भारत ने बगलिहार और सलाल बांधों के गेट बंद कर दिए, जिससे पाकिस्तान में चिनाब नदी का जल प्रवाह रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया।

जल प्रवाह में कमी: पाकिस्तान में चिनाब नदी का जल प्रवाह 29,000 क्यूसेक से घटकर 11,000 क्यूसेक रह गया।

प्रभाव: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सिंचाई और कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बिंदु

सिंधु जल संधि: 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई संधि, जिसमें भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) और पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) का अधिकार दिया गया।

रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना: बिना बड़े जलाशय के, नदी के प्रवाह का उपयोग करके बिजली उत्पादन।

बिजली उत्पादन: बगलिहार परियोजना से जम्मू-कश्मीर की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।

भू-राजनीतिक महत्त्व: जल संसाधनों का नियंत्रण भारत-पाक संबंधों में रणनीतिक उपकरण के रूप में उभर रहा है।

बगलिहार बांध और सिंधु जल संधि से संबंधित घटनाक्रम UPSC, SSC, और बैंकिंग परीक्षाओं में अंतरराष्ट्रीय संबंध, पर्यावरण, और भू-राजनीति से जुड़े प्रश्नों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। इस विषय पर गहन अध्ययन से परीक्षार्थियों को समसामयिक घटनाओं की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी।

अधिक जानकारी और दैनिक करंट अफेयर्स अपडेट के लिए Atharva Examwise पर विजिट करें।

WhatsApp WhatsApp निःशुल्क डेमो Free Demo कोर्स खरीदें Buy Course
WhatsApp पर बात करें
Chat on WhatsApp