UPSC समसामयिक घटनाक्रम: इसरो ने GSLV-F17 के माध्यम से EOS-05 का सफल प्रक्षेपण किया | अथर्व एग्ज़ामवाइज़ समसामयिक समाचार एवं दैनिक सामान्य ज्ञान अपडेट
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) के द्वितीय लॉन्च पैड से GSLV-F17 मिशन का सफल संचालन कर एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर स्थापित किया। भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV Mk II) ने 2,367 किलोग्राम वजनी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, जिसे EOS-05 (जीसैट-1ए / GISAT-1A के नाम से भी ज्ञात) नाम दिया गया है, को उप-भू-समकालिक अंतरण कक्षा (Sub-GTO) में सटीकता से स्थापित किया। यह अभियान भारत के अंतरिक्ष टोही और पर्यावरणीय निगरानी तंत्र को निम्न-ऊंचाई वाले आवधिक (episodic) दौरों से निरंतर, वास्तविक समय (real-time) की भू-स्थैतिक निगरानी में रूपांतरित करता है।
इस सफल कक्षीय अंतःक्षेपण ने 2026 के प्रारंभ में विसंगतिपूर्ण मिशनों के उपरांत राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के लिए आठ महीने के प्रक्षेपण अंतराल को समाप्त किया, साथ ही अगस्त 2021 में GSLV-F10 उड़ान के दौरान EOS-03 (GISAT-1) अंतरिक्ष यान के नुकसान से उत्पन्न परिचालन शून्यता को भी दूर किया। व्यापक अंतरिक्ष नीति विश्लेषण और पाठ्यक्रम-संरेखित ब्रीफिंग अथर्व एग्ज़ामवाइज़ करंट अफेयर्स पोर्टल पर निरंतर संकलित की जाती हैं।
मुख्य तथ्य: एक नज़र में
मिशन पदनाम: GSLV-F17 / EOS-05 (GISAT-1A) मिशन
प्रक्षेपण तिथि एवं समय: 4 सितंबर 2026 को 02:55 बजे IST (उत्थापन / Liftoff); कक्षीय अंतःक्षेपण की पुष्टि 03:14 बजे IST पर
स्पेसपोर्ट सुविधा: द्वितीय लॉन्च पैड (SLP), सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
प्रक्षेपण यान संरचना: 51.7 मीटर लंबा, तीन चरणों वाला GSLV Mk II, ओगिव कम्पोजिट पेलोड फेयरिंग के साथ
अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान: 2,367 किलोग्राम (GSLV Mk II विन्यास द्वारा किसी अंतरण कक्षा में स्थापित अब तक का सबसे भारी पेलोड)
परिचालन व्यवस्था: भूमध्य रेखा से लगभग $36{,}000\text{ km}$ ऊपर स्थित भू-समकालिक कक्षा (GEO)
अभिकल्पित जीवनकाल: 9 वर्ष की निरंतर कक्षीय सेवा
कालिक इमेजिंग विभेदन: प्रत्येक 30 मिनट में संपूर्ण उपमहाद्वीप का फुल-डिस्क कवरेज; प्रत्येक 5 मिनट में लक्षित क्षेत्रीय निगरानी
GSLV-F17 प्रक्षेपण यान की तकनीकी संरचना
GSLV Mk II एक मध्यम-भारी प्रक्षेपण प्रणाली है जिसे संचार और उच्च-ऊंचाई वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों को अंतरण कक्षाओं में स्थापित करने के लिए अभिकल्पित किया गया है। F17 उड़ान के लिए, रॉकेट ने 420.5 टन के सकल द्रव्यमान के साथ उड़ान भरी, जिसमें तीन चरणों वाले क्रमिक प्रणोदन विन्यास का उपयोग किया गया। प्रक्षेपण के लगभग 18 मिनट बाद उपग्रह का सफल कक्षीय अंतःक्षेपण संपन्न हुआ।
प्रणोदन प्रणाली में ठोस, द्रव और क्रायोजेनिक चरणों का समन्वय किया गया है। इसका मुख्य ठोस चरण समुद्र-स्तर पर प्राथमिक थ्रस्ट प्रदान करता है, जिसे चार उच्च-थ्रस्ट वाले लिक्विड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर सहायता प्रदान करते हैं। दूसरा चरण ऊपरी वायुमंडल में त्वरण बनाए रखने के लिए हाइपरगोलिक तरल प्रणोदकों का उपयोग करता है। अंतिम चरण स्वदेशी रूप से विकसित क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (CUS15) पर निर्भर करता है, जो लक्षित अपभू (apogee) और कक्षीय झुकाव प्राप्त करने हेतु आवश्यक उच्च विशिष्ट आवेग (specific impulse) प्रदान करने के लिए तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का उपयोग करता है।
| चरण पदनाम | प्रणोदन मॉड्यूल | प्रणोदक रसायन शास्त्र | प्रणोदक भार | परिचालन कार्य |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम चरण (GS1) | S139 सॉलिड कोर + 4 L40H स्ट्रैप-ऑन | ठोस: हाइड्रॉक्सिल-टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडीन (HTPB) / द्रव: $\text{UH}_{25} + \text{N}_2\text{O}_4$ | 138 टन (कोर) + 170 टन (स्ट्रैप-ऑन समूह) | प्राथमिक उत्थापन थ्रस्ट और प्रारंभिक वायुमंडलीय पारगमन प्रदान करना। |
| द्वितीय चरण (GS2) | GL40HT लिक्विड स्टेज | द्रव: अनसिमेट्रिकल डाइमिथाइलहाइड्राज़ीन संरचना ($\text{UH}_{25}$) + डाइनाइट्रोजन टेट्राऑक्साइड ($\text{N}_2\text{O}_4$) | 42 टन | बाह्य-वायुमंडलीय त्वरण और वायुगतिकीय आरोहण को बनाए रखना। |
| तृतीय चरण (GS3) | CUS15 क्रायोजेनिक स्टेज | क्रायोजेनिक: तरल हाइड्रोजन ($\text{LH}_2$) ईंधन + तरल ऑक्सीजन ($\text{LOX}$) ऑक्सीकारक | 15 टन | उप-भू-समकालिक अंतरण कक्षा (Sub-GTO) में सटीक कक्षीय अंतःक्षेपण निष्पादित करना। |
प्रक्षेपण प्लेटफॉर्म का यह विकासात्मक प्रदर्शन इसरो के प्रणोदन इंजीनियरिंग में उल्लेखनीय संरचनात्मक प्रगति को दर्शाता है। प्रारंभिक GSLV विन्यासों की पेलोड क्षमता 1,536 किलोग्राम तक सीमित थी। संरचनात्मक द्रव्यमान में कमी, प्रणोदक लोडिंग के अनुकूलन और परिष्कृत क्रायोजेनिक दहन गतिशीलता ने इस क्षमता को 2,367 किलोग्राम तक विस्तारित किया है, जो इस प्रक्षेपण यान की परिचालन परिपक्वता को सिद्ध करता है। प्रणोदन ऊष्मागतिकी (propulsion thermodynamics) का अध्ययन करने वाले अभ्यर्थी अथर्व एग्ज़ामवाइज़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी नोट्स के माध्यम से मूलभूत अध्ययन मॉड्यूल देख सकते हैं।
सेंसर पेलोड और ऑप्टिकल उपकरण
EOS-05 उपग्रह इसरो की उड़ान-परीक्षित I-2K सैटेलाइट बस पर निर्मित है, जिसे विभिन्न स्पेक्ट्रमी तरंगदैर्घ्य बैंडों में उच्च-मांग वाले ऑप्टिकल पेलोड को संचालित करने के लिए संरचित किया गया है। अंतरिक्ष यान में 700 मिमी का रिची-क्रेतिएं (Ritchey–Chrétien) ऑप्टिकल टेलीस्कोप असेंबली शामिल है, जिसे उच्च-विभेदन कार्टोसैट संरचनाओं से अनुकूलित किया गया है। यह टेलीस्कोप आपतित विकिरण को दृश्य (visible), निकट-अवरक्त (near-infrared) और लघु-तरंग अवरक्त (short-wave infrared) चैनलों में संचालित होने वाले फोकल प्लेन एरे पर केंद्रित करता है।
| ऑप्टिकल सेंसर प्रणाली | स्पेक्ट्रमी परास (μm) | चैनल क्षमता | धरातलीय स्थानिक विभेदन | प्राथमिक क्षेत्रीय अनुप्रयोग |
|---|---|---|---|---|
| मल्टीस्पेक्ट्रल (VNIR) | $0.45 \text{ -- } 0.875$ | 6 चैनल | $42\text{ m}$ | तीव्र क्षेत्रीय भूमि-उपयोग इमेजिंग, बादलों के फटने की पहचान, चक्रवाती मार्गों की ट्रैकिंग। |
| हाइपरस्पेक्ट्रल (VNIR) | $0.375 \text{ -- } 1.0$ | 158 चैनल | $318\text{ m}$ | वनस्पति सूचकांक, वितान नाइट्रोजन अवशोषण, सतही क्लोरोफिल मूल्यांकन। |
| हाइपरस्पेक्ट्रल (SWIR) | $0.9 \text{ -- } 2.5$ | 256 चैनल | $191\text{ m}$ | मृदा नमी वितरण, खनिज अन्वेषण, वायुमंडलीय एरोसोल प्रोफाइलिंग। |
इस पेलोड की मुख्य क्षमता त्वरित-ताल (rapid-cadence) इमेजिंग है। जहां निम्न-ऊंचाई वाली इमेजिंग प्रणालियां केवल निर्धारित कक्षीय दौरों के दौरान ही चित्र ले पाती हैं, वहीं EOS-05 में लगे सेंसर प्रत्येक 5 मिनट में निर्दिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों के मल्टीस्पेक्ट्रल दृश्य प्रस्तुत करते हैं और प्रत्येक 30 मिनट में संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप का चित्रण करते हैं। आधिकारिक मिशन मापदंड और लाइव उपकरण टेलीमेट्री इसरो GSLV-F17 मिशन पोर्टल पर प्रलेखित हैं।
भू-समकालिक बनाम निम्न पृथ्वी कक्षा पृथ्वी अवलोकन
भारत का पारंपरिक सुदूर संवेदन (remote sensing) बेड़ा मुख्य रूप से $500\text{ km}$ से $900\text{ km}$ की ऊंचाई पर स्थित निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) के अंतर्गत सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षाओं में संचालित होता रहा है। EOS-05 की तैनाती एक पूरक परिचालन प्रतिमान प्रस्तुत करती है जो कालिक विभेदन (temporal resolution) की मूलभूत सीमाओं का समाधान करती है।
निम्न पृथ्वी कक्षा में उपग्रह लगभग $7.5\text{ km/s}$ की गति से यात्रा करते हैं और प्रत्येक 90 से 100 मिनट में एक परिक्रमा पूरी करते हैं। यह उच्च वेग उत्कृष्ट स्थानिक विभेदन (spatial resolution)—अक्सर उप-मीटर स्तर की छवियां—प्रदान करता है, लेकिन धरातलीय ट्रैक की निरंतरता को सीमित कर देता है। एक एकल LEO उपग्रह को समान भौगोलिक निर्देशांकों का पुनः चित्रण करने के लिए कई दिनों से लेकर हफ्तों का समय लग सकता है, जिससे तेज़ी से बदलते संकटों के दौरान निगरानी अंतराल उत्पन्न होता है।
इसके विपरीत, लगभग $35{,}786\text{ km}$ की ऊंचाई पर भू-समकालिक कक्षा में स्थापित इमेजिंग उपग्रह की कक्षीय अवधि पृथ्वी की घूर्णन अवधि के समकालिक होती है ($\omega_{\text{orbit}} = \omega_{\text{Earth}}$)। भारतीय भूभाग पर निरंतर स्थिति बनाए रखकर, EOS-05 स्थानिक विवरण के स्थान पर कालिक निरंतरता को प्राथमिकता देता है। यह प्लेटफॉर्म संवेदनशील क्षेत्रों पर निर्बाध डेटा प्रवाह प्रदान करता है, जिससे उन त्वरित मौसम और स्थलीय परिवर्तनों की निगरानी संभव होती है जिन्हें LEO उपग्रह केवल रुक-रुक कर ही देख पाते हैं।
| प्रणालीगत विशेषता | निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) बेड़ा (उदा. Cartosat, RISAT) | भू-समकालिक कक्षा (GEO) प्रणाली (EOS-05) |
|---|---|---|
| कक्षीय ऊंचाई ($h$) | $500 \text{ से } 900\text{ km}$ | $\approx 35{,}786\text{ km}$ |
| ग्राउंड ट्रैक वेग | उच्च ($\approx 7.5\text{ km/s}$ सापेक्ष वेग) | ग्रहीय घूर्णन के साथ समकालिक ($0\text{ km/s}$ सापेक्ष वेग)। |
| पुनरावलोकन अंतराल (Revisit Cadence) | स्वाथ चौड़ाई और संचालन के आधार पर 2 से 24 दिन। | 5 से 30 मिनट का निरंतर रीयल-टाइम अंतराल। |
| धरातलीय विभेदन | उच्च से उप-मीटर स्तर ($0.25\text{ m} \text{ से } 5\text{ m}$)। | मध्यम विभेदन ($42\text{ m}$ मल्टीस्पेक्ट्रल ग्राउंड रेजोल्यूशन)। |
| मिशन का मुख्य फोकस | विस्तृत स्थलाकृतिक मानचित्रण, नगर नियोजन, क्षति आकलन। | वास्तविक समय में आपदा ट्रैकिंग, सीमा निगरानी, गतिशील पर्यावरणीय अलर्ट। |
बहुक्षेत्रीय रणनीतिक और नागरिक अनुप्रयोग
EOS-05 की परिचालन तैनाती भारत के नागरिक आपदा प्रबंधन, कृषि निगरानी और राष्ट्रीय सीमा सुरक्षा अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से उन्नत बनाती है।
वास्तविक समय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जल-मौसम विज्ञान
पारंपरिक मौसम उपग्रह जैसे INSAT-3D और INSAT-3DR आवधिक थर्मल इन्फ्रारेड और जल-वाष्प प्रोफाइल प्रदान करते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से मौसम संबंधी मॉडलिंग के लिए तैयार किया गया है। EOS-05 उच्च आवृत्ति वाली मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग को 5 मिनट के लक्षित स्कैन के साथ जोड़कर इन क्षमताओं को बढ़ाता है।
यह तीव्र अंतराल आपदा प्रबंधन अधिकारियों को चक्रवाती तूफानों के तट से टकराने के दौरान उनकी आंतरिक संरचना पर नज़र रखने, बादलों के फटने का कारण बनने वाले स्थानीय संवहनी संकेतों की पहचान करने, प्रमुख नदी घाटियों में बढ़ते बाढ़ के जलस्तर की निगरानी करने और दूरदराज के वन क्षेत्रों में वनाग्नि के प्रसार को ट्रैक करने में सक्षम बनाता है। आपातकालीन प्रशासनिक प्रतिक्रिया के रणनीतिक मॉडल अथर्व एग्ज़ामवाइज़ आपदा प्रबंधन श्रृंखला के माध्यम से उपलब्ध हैं।
सटीक कृषि और प्राकृतिक संसाधन प्रशासन
अपने 414 संयुक्त हाइपरस्पेक्ट्रल चैनलों के माध्यम से, EOS-05 कृषि क्षेत्रों पर निरंतर स्पेक्ट्रमी डेटा प्रदान करता है। संकीर्ण बैंड परावर्तन मानों का विश्लेषण कृषि वैज्ञानिकों को फसल स्वास्थ्य का आकलन करने, फसल में नमी के प्रारंभिक तनाव का पता लगाने, मृदा लवणता के परिवर्तनों को मैप करने और क्षेत्रीय स्तर पर उत्पादन का अनुमान लगाने में सहायता करता है। ये स्पेक्ट्रमी संकेतक वानिकी सर्वेक्षण, हिमालय में हिमखंडों के पिघलने के मूल्यांकन और अंतर्देशीय जल निकायों के संरक्षण में भी मदद करते हैं।
रणनीतिक टोही और समुद्री क्षेत्र जागरूकता
EOS-05 के प्रक्षेपण का भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया, जो इस अंतरिक्ष यान के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। 36,000 किमी की ऊंचाई से संचालित यह उपग्रह भारत की स्थलीय सीमाओं और निकटवर्ती समुद्री मार्गों पर निरंतर निगरानी बनाए रखता है।
यह उच्च-ऊंचाई वाला दृष्टिकोण उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करता है, जिससे निम्न पृथ्वी कक्षा उपग्रहों में होने वाले निगरानी अंतराल समाप्त हो जाते हैं। समुद्री क्षेत्र में, EOS-05 हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की निगरानी करता है, जिससे राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) में सुधार होता है और नौसेना अधिकारियों को संदेहास्पद सतही गतिविधियों पर नज़र रखने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष रोडमैप और आगामी प्रक्षेपण सूची
GSLV-F17 मिशन ने वर्ष के प्रारंभ में आई प्रणोदन संबंधी समस्याओं और प्रक्षेपण निरस्तीकरण के बाद इसरो के परिचालन कार्यक्रम को पुनः स्थिरता प्रदान की है। EOS-05 के संचालन के साथ, एजेंसी ने अपने नागरिक, वैज्ञानिक और रणनीतिक उद्देश्यों को गति देने हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान छह अतिरिक्त कक्षीय प्रक्षेपणों की योजना बनाई है।
इस प्रक्षेपण शृंखला के आगामी प्रमुख चरण:
क्षेत्रीय उपग्रह प्रणाली 'नाविक' (NavIC) को सुदृढ़ करने के लिए द्वितीय पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह NVS-03 की तैनाती।
गगनयान (G1) मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की पहली मानवरहित कक्षीय उड़ान, जिसे 2026 के अंत तक लक्षित किया गया है। इसने लॉन्च एबॉर्ट सिस्टम, लाइफ सपोर्ट और वायुमंडलीय पुनःप्रवेश प्रणालियों से संबंधित 8,000 से अधिक स्थैतिक और गतिशील योग्यता परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।
राष्ट्रीय सक्रिय उपग्रह सूची को मौजूदा 21 परिचालन उपग्रहों से आगे बढ़ाने के लिए पूरक वाणिज्यिक और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों की स्थापना।
बहु-वर्षीय वैज्ञानिक विकास पर नज़र रखने वाले अभ्यर्थी अथर्व एग्ज़ामवाइज़ UPSC प्रीलिम्स मॉड्यूल के माध्यम से संरचित पुनरीक्षण मैट्रिक्स की समीक्षा कर सकते हैं।
परीक्षा-प्रासंगिक त्वरित संदर्भ डेटा
प्रक्षेपण यान वर्गीकरण: GSLV Mk II, 19वीं परिचालन उड़ान (F17)।
उत्थापन द्रव्यमान एवं आयाम: द्रव्यमान: 420.5 टन; ऊंचाई: 51.7 मीटर; फेयरिंग: 4.0 मीटर व्यास वाली ओगिव कम्पोजिट।
कक्षीय अंतःक्षेपण मेट्रिक्स: उप-भू-समकालिक अंतरण कक्षा (Sub-GTO) में स्थापित; उपभू (Perigee): $170\text{ km}$, अपभू (Apogee): लगभग $28{,}934\text{ से } 31{,}026\text{ km}$, और कक्षीय झुकाव: $19.28^\circ$।
प्रणोदन प्रणालियां: प्रथम चरण ठोस कोर (S139) चार तरल स्ट्रैप-ऑन (L40H) के साथ; द्वितीय चरण तरल (GL40HT); तृतीय चरण $\text{LH}_2$ और $\text{LOX}$ द्वारा संचालित स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (CUS15)।
पेलोड द्रव्यमान: 2,367 किलोग्राम (GSLV Mk II उड़ानों के लिए नया पेलोड रिकॉर्ड)।
सेंसर क्षमताएं: 6-बैंड मल्टीस्पेक्ट्रल VNIR ($42\text{ m}$ विभेदन), 158-बैंड हाइपरस्पेक्ट्रल VNIR ($318\text{ m}$ विभेदन), और 256-बैंड हाइपरस्पेक्ट्रल SWIR ($191\text{ m}$ विभेदन)।
पूर्ववर्ती मिशन: EOS-03 (GISAT-1) की क्षमता की भरपाई, जो अगस्त 2021 में GSLV-F10 मिशन की विफलता के कारण कक्षा में नहीं पहुंच सका था।
यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
EOS-05 मिशन को समझना संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा के दोनों चरणों में पाठ्यक्रम के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने के दृष्टिकोण से अनिवार्य है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रासंगिकता: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-I
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और प्रणोदन यांत्रिकी: प्रारंभिक परीक्षा में प्रक्षेपण यान विन्यासों का नियमित मूल्यांकन किया जाता है; जैसे PSLV (चार चरणों वाला वैकल्पिक ठोस/द्रव विन्यास), GSLV Mk II (स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करने वाली तीन चरणों वाली प्रणाली), और LVM3 (ट्विन सॉलिड बूस्टर, कोर लिक्विड स्टेज और C25 क्रायोजेनिक अपर स्टेज) के बीच परिचालन अंतर।
कक्षीय गतिशीलता: अभ्यर्थियों को विभिन्न कक्षीय व्यवस्थाओं के बीच स्पष्ट अंतर समझना चाहिए; विशेष रूप से निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO), ध्रुवीय सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (SSPO), भू-स्थिर कक्षा (GSO), और भू-समकालिक अंतरण कक्षा (GTO) की परिचालन सीमाओं का अध्ययन।
विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम का अनुप्रयोग: दूरसंवेदी स्पेक्ट्रल बैंडों से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं; जैसे दृश्य, निकट-अवरक्त और लघु-तरंग अवरक्त आवृत्तियों का उपयोग वनस्पति सूचकांक, मृदा नमी और वायुमंडलीय संरचना की निगरानी में कैसे किया जाता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए प्रासंगिकता: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-III
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण): यह मिशन GSLV प्लेटफॉर्म के प्रारंभिक $1{,}536\text{ kg}$ पेलोड से $2{,}367\text{ kg}$ तक के क्रमिक विकास को प्रदर्शित करता है। यह क्रायोजेनिक अपर स्टेज (CUS15) पर भारत की तकनीकी महारत को रेखांकित करता है, जिसके लिए पूर्व में देश विदेशी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर निर्भर था।
आपदा प्रबंधन (सेंडाई फ्रेमवर्क प्राथमिकता 1): रीयल-टाइम 5-मिनट इमेजिंग आपदा जोखिम न्यूनीकरण रूपरेखा का समर्थन करती है। यह डेटा उष्णकटिबंधीय चक्रवातों, हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (GLOFs) और आकस्मिक बाढ़ (flash floods) के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियों में सीधे शामिल होता है, जिससे आपदा नीति प्रतिक्रियात्मक राहत से बदलकर सक्रिय शमन (proactive mitigation) की ओर अग्रसर होती है।
आंतरिक सुरक्षा एवं सीमा प्रबंधन: भू-समकालिक प्लेटफॉर्म से निरंतर निगरानी व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) को सशक्त बनाती है और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र जागरूकता को उन्नत करती है, जिससे संवेदनशील उत्तरी सीमाओं और समुद्री चोक पॉइंट्स की निगरानी में सहायता मिलती है।
अभ्यर्थियों के लिए अभ्यास मूल्यांकन
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्र. EOS-05 (GISAT-1A) मिशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
यह उप-मीटर विभेदन वाली छवियां प्राप्त करने के लिए निम्न पृथ्वी सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में संचालित होता है।
इसमें दृश्य और लघु-तरंग अवरक्त दोनों तरंगदैर्घ्य बैंडों को कवर करने वाले हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सेंसर लगे हैं।
इस अंतरिक्ष यान को चार चरणों वाले ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) द्वारा कक्षा में स्थापित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b)
विश्लेषणात्मक व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि EOS-05 भारतीय उपमहाद्वीप पर निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए लगभग $36{,}000\text{ km}$ की ऊंचाई पर भू-समकालिक कक्षा (GEO) से संचालित होता है। कथन 2 सही है क्योंकि यह अंतरिक्ष यान 158-चैनल VNIR और 256-चैनल SWIR हाइपरस्पेक्ट्रल पेलोड ले जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि इस उपग्रह को तीन चरणों वाले GSLV Mk II (उड़ान F17) द्वारा प्रक्षेपित किया गया था, न कि चार चरणों वाले PSLV द्वारा।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्र. "भू-समकालिक कक्षाओं में पृथ्वी अवलोकन प्रणालियों की स्थापना आपदा प्रबंधन और सीमा निगरानी के परिचालन दृष्टिकोण को मौलिक रूप से बदल देती है।" इसरो द्वारा हाल ही में EOS-05 उपग्रह की तैनाती के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।