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यूपीएससी समसामयिकी: डॉ. करीम मारेडिया को 2026 का बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड | दैनिक सामान्य ज्ञान अपडेट यूपीएससी समसामयिकी: डॉ. करीम मारेडिया को 2026 का बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड | दैनिक सामान्य ज्ञान अपडेट

03 Sep 2026 03 Sep 2026

यूपीएससी समसामयिकी: डॉ. करीम मारेडिया को 2026 का बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड | दैनिक सामान्य ज्ञान अपडेट
GK (General Knowledge) Hindi 03 Sep 2026

यूपीएससी समसामयिकी: डॉ. करीम मारेडिया को 2026 का बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड | दैनिक सामान्य ज्ञान अपडेट

2026 बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड की घोषणा

काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CAST) ने मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (MSU) के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड नेचुरल रिसोर्सेज में प्रोफेसर एवं सीनियर एसोसिएट डीन डॉ. करीमभाई एम. मारेडिया को वर्ष 2026 के 'बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड' (Borlaug CAST Communication Award) के प्राप्तकर्ता के रूप में नामित किया है। यह औपचारिक पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर 2026 को वाशिंगटन, डी.सी. स्थित लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस में आयोजित किया जाएगा। इस तिथि का चयन 1970 में डॉ. नॉर्मन ई. बोरलॉग को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया है, जो प्रयोगशाला-आधारित कृषि विज्ञान और जन-कल्याणकारी मानवीय सेवा के बीच के मूलभूत संबंध को रेखांकित करता है।

काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड उन वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और संचारकों को सम्मानित करता है, जिन्होंने नागरिक नेताओं, नीति निर्माताओं और कृषक समुदायों के लिए जटिल कृषि विज्ञान और तकनीकी नवाचारों को सरल, गैर-तकनीकी भाषा में समझाने में उत्कृष्ट क्षमता का प्रदर्शन किया है। डॉ. मारेडिया का चयन वैश्विक खाद्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने में अंतरराष्ट्रीय विज्ञान कूटनीति, सहभागी कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की भूमिका को उजागर करता है।

डॉ. करीम मारेडिया का करियर और वैश्विक प्रभाव

गुजरात (भारत) के एक ग्रामीण डेयरी कृषक परिवार में जन्मे डॉ. मारेडिया का अकादमिक करियर तीन महाद्वीपों में फैला हुआ है, जो मौलिक पादप रोग विज्ञान और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) को अंतरराष्ट्रीय विकास से जोड़ता है। उनका करियर जमीनी स्तर के कृषि ज्ञान को अंतरराष्ट्रीय कृषि प्रशासन के साथ एकीकृत करता है।

डॉ. मारेडिया ने अपनी स्नातक शिक्षा भारत में पूरी की, जहाँ उन्होंने डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ (दापोली, महाराष्ट्र) से कृषि में विज्ञान स्नातक (B.Sc. Agri) की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने अलबामा एएंडएम विश्वविद्यालय से एकीकृत कीट प्रबंधन में परास्नातक (M.S.) और अर्कांसस विश्वविद्यालय से पादप प्रजनन एवं एकीकृत कीट प्रबंधन में डॉक्टरेट (Ph.D.) पूरी की। 1989 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में अपनी नियुक्ति से पहले, डॉ. मारेडिया ने मेक्सिको स्थित इंटरनेशनल मेज एंड व्हीट इम्प्रूवमेंट सेंटर (CIMMYT) में तीन वर्षों तक एक शोध वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया—यह वही अनुसंधान संस्थान है जिसका नेतृत्व ऐतिहासिक रूप से डॉ. नॉर्मन बोरलॉग ने उच्च उपज वाली अर्ध-बौनी गेहूं की किस्मों के विकास के दौरान किया था।

मील का पत्थर / आयामशैक्षणिक और व्यावसायिक विवरण
मूल निवास एवं आधारभूत शिक्षागुजरात, भारत में जन्म; डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली से बी.एससी. (कृषि)
उच्च शिक्षा (उन्नत डिग्रियां)एम.एस. (एकीकृत कीट प्रबंधन), अलबामा एएंडएम; पीएच.डी. (पादप प्रजनन/आईपीएम), अर्कांसस विश्वविद्यालय
एमएसयू से पूर्व वैज्ञानिक पदCIMMYT, मेक्सिको में शोध वैज्ञानिक (अंतरराष्ट्रीय गेहूं और मक्का सुधार पर केंद्रित)
वर्तमान शैक्षणिक भूमिकाएंप्रोफेसर, एसोसिएट डीन, और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वर्ल्ड एग्रीकल्चर सेंटर के निदेशक
प्रमुख प्रसार पहलवर्ल्ड नॉलेज एंड टेक्नोलॉजी एक्सेस प्रोग्राम (WorldTAP) के संस्थापक/निदेशक
शोध और अकादमिक रिकॉर्ड130 से अधिक वैज्ञानिक शोध-पत्र, नीतिगत विवरण और पुस्तक अध्याय; 8 पाठ्यपुस्तकों के सह-संपादक
अंतरराष्ट्रीय फेलोशिपनेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (NAAS), भारत के फेलो (2023); अफ्रीकी विज्ञान अकादमी (AAS) के फेलो (2025)
कूटनीतिक एवं सलाहकार भूमिकाएंNAAS के विदेश सचिव (2025–वर्तमान); उभरती प्रौद्योगिकियों पर अफ्रीकी संघ के उच्च-स्तरीय पैनल के सदस्य (2017–वर्तमान)

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में डॉ. मारेडिया ने 'वर्ल्ड नॉलेज एंड टेक्नोलॉजी एक्सेस प्रोग्राम' (WorldTAP) की संकल्पना की और उसका निर्देशन किया। WorldTAP विकासशील देशों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और नीतिगत सामंजस्य के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। इस पहल के माध्यम से, डॉ. मारेडिया ने 80 से अधिक देशों के 15,000 से अधिक अकादमिक, विनियामक और जमीनी हितधारकों को प्रशिक्षित किया है, एमएसयू में 250 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोधार्थियों की मेजबानी की है, और 63 देशों में फील्ड मिशन व नीतिगत परामर्श का नेतृत्व किया है।

उनके शोध कार्यों में 130 से अधिक सहकर्मी-समीक्षित (peer-reviewed) शोध पत्र, नीतिगत मोनोग्राफ और पुस्तक अध्याय शामिल हैं, साथ ही एकीकृत कीट प्रबंधन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जैव सुरक्षा प्रशासन और कृषि विस्तार पर आठ सह-संपादित पुस्तकें शामिल हैं। इन क्षमता-निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहलों को यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID), संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA), संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), विश्व बैंक, रॉकफेलर फाउंडेशन और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसी बहुपक्षीय विकास एजेंसियों से संस्थागत सहयोग प्राप्त हुआ है।

डॉ. मारेडिया की सलाहकार जिम्मेदारियों में विज्ञान कूटनीति और महाद्वीपीय नीति निर्माण भी शामिल है। वर्ष 2017 से, वह उभरती प्रौद्योगिकियों पर अफ्रीकी संघ के उच्च-स्तरीय पैनल में कार्यरत हैं, जहाँ वे कृषि जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स और कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विनियामक निरीक्षण का मार्गदर्शन करते हैं। वर्ष 2023 में, उन्हें भारत की राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) का फेलो चुना गया, और बाद में 2025 में उन्होंने इसके विदेश सचिव का पदभार संभाला। उन्हें 2025 में अफ्रीकी विज्ञान अकादमी (AAS) का फेलो चुना गया और वे वर्ल्ड एग्रीकल्चर फोरम की ग्लोबल काउंसिल के सदस्य भी हैं।

CAST और बोरलॉग पुरस्कार की संस्थागत पृष्ठभूमि

काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CAST) की स्थापना 1972 में एम्स, आयोवा में वैज्ञानिक सोसायटियों, वाणिज्यिक संस्थाओं और शैक्षणिक अनुसंधान संस्थानों के एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी संघ के रूप में की गई थी। इस संगठन की स्थापना आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में सस्य विज्ञान (agronomy) के प्रोफेसर डॉ. चार्ल्स ए. ब्लैक के नेतृत्व में और डॉ. नॉर्मन बोरलॉग सहित अंतरराष्ट्रीय कृषि शोधकर्ताओं के सहयोग से हुई थी। मुख्य रूप से एक शैक्षिक थिंक-टैंक और सूचना-केंद्र के रूप में कार्य करते हुए, CAST बहुविषयक, सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक साहित्य को लक्षित टास्क फोर्स रिपोर्टों, नीतिगत संक्षिप्तियों और टिप्पणियों में संकलित करता है, जिसका उद्देश्य विधायी कार्रवाई, विनियामक ढांचे और सार्वजनिक चर्चा को वैज्ञानिक आधार प्रदान करना है।

संचार के क्षेत्र में यह सम्मान मूल रूप से 1986 में 'चार्ल्स ए. ब्लैक अवार्ड' के नाम से शुरू किया गया था। वर्ष 2010 में, CAST ने डॉ. नॉर्मन बोरलॉग के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इस सम्मान का नाम बदलकर 'बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड' कर दिया, जो उनके इस आजीवन दृष्टिकोण को रेखांकित करता है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों को नागरिक नेताओं और जनता तक सक्रिय रूप से पहुँचाया जाना चाहिए। पुरस्कार विजेताओं को अमेरिकी कलाकार जेरी पालेन द्वारा डिजाइन की गई "अ वर्ल्ड सपोर्टेड बाय प्लांट्स एंड एनिमल्स" (A World Supported by Plants and Animals) शीर्षक वाली एक कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है।

मापदंडसंस्थागत और पुरस्कार संबंधी विवरण
प्रदान करने वाली संस्थाकाउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CAST), स्थापना 1972, एम्स, आयोवा
ऐतिहासिक नामकरणचार्ल्स ए. ब्लैक अवार्ड (1986 से 2009 तक प्रदान किया गया)
वर्तमान नामबोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड (2010 में स्थापित)
पुरस्कार का प्रतीकजेरी पालेन द्वारा निर्मित "अ वर्ल्ड सपोर्टेड बाय प्लांट्स एंड एनिमल्स" कांस्य प्रतिमा
प्राथमिक उद्देश्यसामान्य जनसमूह तक विज्ञान-आधारित कृषि सूचनाओं के निरंतर संचार को मान्यता देना
पूर्व प्राप्तकर्ताडॉ. डेविड ओर्टेगा (2025), डॉ. एलिसन बेंटले (2023), डॉ. मार्टिन विएडमैन (2022)

विज्ञान संचार और कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण

वैश्विक कृषि विकास की रूपरेखा इस बात पर जोर देती है कि व्यावहारिक ज्ञान हस्तांतरण तंत्र के बिना केवल प्रयोगशाला के नवाचार खाद्य असुरक्षा को दूर नहीं कर सकते। बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड के पीछे का संस्थागत दर्शन उस प्रणालीगत अंतर को पाटने का प्रयास करता है जो अक्सर शैक्षणिक प्रयोगशालाओं, विनियामक निकायों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के बीच उभरता है।

समकालीन सस्य विज्ञान तेजी से उन्नत तकनीकों पर निर्भर हो रहा है, जिसमें पुनः संयोजक डीएनए (recombinant DNA) पद्धतियाँ, CRISPR-Cas9 जीनोम संपादन, जैविक कीट नियंत्रक और डेटा-आधारित सटीक कृषि (precision agriculture) शामिल हैं। हालाँकि, जन-संदेह, अस्पष्ट जैव सुरक्षा ढाँचे और संचार की कमी उच्च उपज वाली और जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों के प्रसार को धीमा कर सकती है। जब वैज्ञानिक डेटा मुख्य रूप से केवल विशेष शोध पत्रिकाओं तक सीमित रहता है, तो गैर-तकनीकी हितधारकों, नागरिक समाज संगठनों और सांसदों के लिए साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना कठिन हो जाता है। डॉ. मारेडिया का कार्य यह सिद्ध करता है कि वैज्ञानिकों को संचारक के रूप में भी कार्य करना चाहिए—पारदर्शी जैव सुरक्षा दिशानिर्देश तैयार करने, आनुवंशिक सुधारों को सरल भाषा में समझाने और नीति निर्माताओं को तकनीकी सहायता प्रदान करने में मदद करनी चाहिए।

यह दृष्टिकोण डॉ. नॉर्मन बोरलॉग द्वारा स्थापित ज़मीनी दर्शन को आगे बढ़ाता है। बोरलॉग का मानना था कि वैज्ञानिक खोजें तब तक निष्प्रभावी रहती हैं जब तक कि उन्हें किसानों के खेतों में लागू न किया जाए। 1960 के दशक के दौरान मेक्सिको, भारत और पाकिस्तान में उनका कार्य इसलिए सफल रहा क्योंकि उन्होंने कैबिनेट मंत्रियों, स्थानीय विस्तार कार्यकर्ताओं और ग्रामीण किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया, जिससे प्रशासकों को बीज आयात करने, इनपुट सब्सिडी को आधुनिक बनाने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार करने के लिए प्रेरित किया जा सका। WorldTAP जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. मारेडिया ने इस संचार दृष्टिकोण को 60 से अधिक देशों में विस्तारित किया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ उसे लागू करने के लिए आवश्यक मानव क्षमता का भी विकास हो।

प्रमुख तथ्य और परीक्षा-उपयोगी आंकड़े

प्रदत्त पुरस्कार: डॉ. करीमभाई एम. मारेडिया को 2026 के बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड (BCCA) का प्राप्तकर्ता नामित किया गया है।

प्रदाता संस्था: यह पुरस्कार काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CAST) द्वारा प्रशासित है, जो 1972 में एम्स, आयोवा में स्थापित एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी वैज्ञानिक संघ है।

समारोह स्थल और समय: 10 दिसंबर 2026 को लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस (वाशिंगटन, डी.सी.) में प्रदान किया जाएगा, जो डॉ. नॉर्मन बोरलॉग को 1970 में मिले नोबेल शांति पुरस्कार की तिथि का प्रतीक है।

जीवन परिचय: गुजरात (भारत) के एक ग्रामीण गाँव में एक डेयरी कृषक परिवार में जन्मे डॉ. मारेडिया ने डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ (दापोली, महाराष्ट्र) से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

संस्थागत पद: मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (MSU) में प्रोफेसर, एसोसिएट डीन और वर्ल्ड एग्रीकल्चर सेंटर के निदेशक के रूप में कार्यरत (1989 से जुड़े)।

विस्तार कार्य: वर्ल्ड नॉलेज एंड टेक्नोलॉजी एक्सेस प्रोग्राम (WorldTAP) के निदेशक, जिसके माध्यम से 80 से अधिक देशों के 15,000 से अधिक हितधारकों को प्रशिक्षण दिया और 250 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विद्वानों की मेजबानी की।

अकादमिक योगदान: 130 से अधिक सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक प्रकाशनों, पुस्तक अध्यायों और नीतिगत विवरणों के लेखक/संपादक, और एकीकृत कीट प्रबंधन व प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर 8 पुस्तकों के सह-संपादक।

अकादमी फेलोशिप: 2023 में नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (NAAS), भारत के फेलो चुने गए (वर्तमान में इसके विदेश सचिव); 2025 में अफ्रीकी विज्ञान अकादमी (AAS) के फेलो चुने गए।

कूटनीतिक भूमिकाएँ: उभरती प्रौद्योगिकियों पर अफ्रीकी संघ के उच्च-स्तरीय पैनल (2017 से) और वर्ल्ड एग्रीकल्चर फोरम की ग्लोबल काउंसिल में कार्यरत।

पूर्व अनुभव: एमएसयू से पहले, मेक्सिको स्थित CIMMYT में तीन वर्षों तक शोध वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया।

परीक्षा की तैयारी के लिए इसका महत्व

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा और राज्य लोक सेवा आयोगों (जैसे GPSC, UPPSC, BPSC, और MPSC) की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह घटनाक्रम सामान्य अध्ययन और कृषि वैकल्पिक (Agriculture Optional) विषयों से सीधे जुड़ता है।

सामान्य अध्ययन पाठ्यक्रम के साथ जुड़ाव

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III (कृषि और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण):

कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: पाठ्यक्रम किसानों तक वैज्ञानिक अनुसंधान पहुंचाने वाले संस्थागत तंत्र पर जोर देता है। यह पुरस्कार रेखांकित करता है कि कैसे सार्वजनिक विश्वविद्यालय और अंतरराष्ट्रीय निकाय 'प्रयोगशाला से खेत' (lab-to-land) के अंतर को पाटने के लिए विस्तार प्रणालियों का निर्माण करते हैं।

जैव प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): उभरती प्रौद्योगिकियों और जैव सुरक्षा पर डॉ. मारेडिया की सलाहकार भूमिका ट्रांसजेनिक फसलों की मंजूरी, जीनोम-संपादित जीवों (SDN-1 और SDN-2 छूट) और जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) के तहत विनियामक ढांचे से संबंधित भारतीय नीतिगत बहसों से मेल खाती है।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II (अंतरराष्ट्रीय संस्थान और विज्ञान कूटनीति):

अंतरराष्ट्रीय संस्थागत सहयोग: सीमा पार तकनीकी सहायता कार्यक्रम (जैसे USAID, CIMMYT, NAAS और अफ्रीकी संघ) यह दर्शाते हैं कि कैसे विज्ञान कूटनीति तकनीकी क्षमता का समर्थन करती है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रोटोकॉल का सामंजस्य करती है और ग्लोबल साउथ में खाद्य सुरक्षा में सुधार करती है।

प्रारंभिक परीक्षा (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं):

प्रतियोगी परीक्षाओं में अंतरराष्ट्रीय कृषि पुरस्कारों, बहुपक्षीय अनुसंधान निकायों (CGIAR, CIMMYT, IRRI) और हरित क्रांति के ऐतिहासिक योगदानों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं (जैसे डॉ. नॉर्मन बोरलॉग का मूल देश, उनके नोबेल पुरस्कार का क्षेत्र—शांति, 1970, और गेहूं के संवर्धन में अर्ध-बौने 'नोरिन-10' जीन का उपयोग)।

अभ्यास प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रश्न: "बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड" और अंतरराष्ट्रीय कृषि पहलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा प्रदान किया जाता है।

यह पुरस्कार उन कृषि वैज्ञानिकों को सम्मानित करता है जो गैर-तकनीकी जनसमूह तक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी का प्रभावी संचार करते हैं।

डॉ. नॉर्मन बोरलॉग को उच्च उपज वाली फसलों की किस्मों और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर उनके कार्य के लिए 1970 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2, और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 गलत है: यह पुरस्कार 1972 में एम्स, आयोवा में स्थापित एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी वैज्ञानिक संघ, 'काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी' (CAST) द्वारा प्रदान किया जाता है, न कि FAO द्वारा।

कथन 2 सही है: बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड का प्राथमिक उद्देश्य उन वैज्ञानिकों को मान्यता देना है जो आम जनता, नागरिक प्रशासकों और गैर-तकनीकी हितधारकों के लिए तकनीकी कृषि और जैव प्रौद्योगिकी अवधारणाओं का प्रभावी संचार करते हैं।

कथन 3 सही है: डॉ. नॉर्मन बोरलॉग को 1970 में विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर भुखमरी को टालने में मदद करने वाली उच्च उपज वाली गेहूं की किस्मों के विकास के माध्यम से विश्व शांति में उनके योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।

अभ्यास मुख्य परीक्षा प्रश्न

प्रश्न: "विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचार आवश्यक तो हैं, लेकिन सुदृढ़ संचार माध्यमों और संस्थागत विस्तार सेवाओं के बिना अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं। इस आलोक में, भारत में 'प्रयोगशाला से खेत' (lab-to-land) संक्रमण के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों की विवेचना कीजिए और इन्हें दूर करने में अंतरराष्ट्रीय विज्ञान कूटनीति की भूमिका का परीक्षण कीजिए।" (उत्तर 250 शब्दों में दीजिए, 15 अंक)

मॉडल उत्तर रूपरेखा (Model Answer Framework):

प्रस्तावना: सस्य विज्ञान में 'लैब-टू-लैंड' (प्रयोगशाला से खेत) संक्रमण को परिभाषित करें। उल्लेख करें कि आनुवंशिकी या फसल सुरक्षा में वैज्ञानिक सफलताएं छोटे किसानों तक पहुंचने के लिए कार्यात्मक संचार और विस्तार तंत्र पर निर्भर करती हैं, जैसा कि बोरलॉग कास्ट कम्युनिकेशन अवार्ड जैसी पहलों में परिलक्षित होता है।

लैब-टू-लैंड तंत्र में चुनौतियाँ: राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली की संरचनात्मक सीमाओं का परीक्षण करें, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) में कर्मचारियों की कमी, राज्य स्तरीय विस्तार तंत्र का विखंडन, छोटे किसानों के बीच डिजिटल परामर्श उपकरणों की धीमी पहुंच, और कृषि जैव प्रौद्योगिकी व जीएम फसलों के संबंध में विनियामक स्वीकृतियों में होने वाले विलंब का उल्लेख करें।

विज्ञान संचार की भूमिका: चर्चा करें कि कैसे तकनीकी डेटा को सुलभ और सरल प्रारूपों में प्रस्तुत करने से भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगती है, जैव प्रौद्योगिकी के प्रति जनता का विश्वास बढ़ता है, और नीति निर्माता सुदृढ़ जैव सुरक्षा व बौद्धिक संपदा नियम तैयार करने में सक्षम होते हैं।

विज्ञान कूटनीति का योगदान: संस्थानों (जैसे NAAS, CIMMYT, और विदेशी लैंड-ग्रांट विश्वविद्यालयों) के बीच सहयोगात्मक पहलों पर प्रकाश डालें जो दक्षिण-दक्षिण (South-South) ज्ञान हस्तांतरण का समर्थन करते हैं, जलवायु-सहिष्णु बीज प्रणालियों के निर्माण में मदद करते हैं, और दक्षिण एशिया व उप-सहारा अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में मानकीकृत जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल स्थापित करते हैं।

निष्कर्ष: डॉ. नॉर्मन बोरलॉग के इस मूलभूत सिद्धांत को दोहराएं कि कृषि अनुसंधान अपने उद्देश्य को तभी पूरा करता है जब उसे किसानों के खेतों में लागू किया जाए, जिससे उत्पादकता में स्थायी वृद्धि हो, ग्रामीण आय सुरक्षित हो और राष्ट्रीय खाद्य संप्रभुता की रक्षा की जा सके।

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