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UPSC समसामयिकी: भारत-अमेरिका जेवलिन मिसाइल सौदे और रक्षा आधुनिकीकरण का रणनीतिक विश्लेषण UPSC समसामयिकी: भारत-अमेरिका जेवलिन मिसाइल सौदे और रक्षा आधुनिकीकरण का रणनीतिक विश्लेषण

01 Sep 2026 01 Sep 2026

UPSC समसामयिकी: भारत-अमेरिका जेवलिन मिसाइल सौदे और रक्षा आधुनिकीकरण का रणनीतिक विश्लेषण
Defense Technology Hindi 01 Sep 2026

UPSC समसामयिकी: भारत-अमेरिका जेवलिन मिसाइल सौदे और रक्षा आधुनिकीकरण का रणनीतिक विश्लेषण

संदर्भ और मुख्य खरीद संरचना

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए युद्ध-परीक्षित FGM-148 जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) प्रणाली हासिल करने हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते को अंतिम रूप दिया है। अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री (Foreign Military Sales - FMS) ढांचे के तहत, भारतीय सेना ने लगभग ₹292 करोड़ ($45 मिलियन) के अनुमानित अनुबंध मूल्य के लिए ऑफर और स्वीकृति पत्र (Letter of Offer and Acceptance - LOA) निष्पादित किया है। इस खरीद पैकेज में हल्के कमांड लॉन्च यूनिट्स (CLUs) के साथ लगभग 60 जेवलिन मिसाइल राउंड शामिल हैं।

यह पूंजीगत खरीद आपातकालीन खरीद तंत्र के छठे चरण (Emergency Procurement - EP-6) के तहत निष्पादित की गई है। यह एक त्वरित माध्यम है जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' के परिचालन अनुभवों के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर चिन्हित महत्वपूर्ण परिचालन कमजोरियों को दूर करने के लिए अधिकृत किया गया है। वैधानिक EP प्रावधानों के तहत, सैन्य मुख्यालयों को प्रति उपकरण श्रेणी ₹300 करोड़ की सीमा तक सीधे वित्तीय अधिकार सौंपे गए हैं, जिससे खरीद प्रक्रियाएं मानक बहु-वर्षीय अधिग्रहण चरणों से बच जाती हैं। इन्फैंट्री की एंटी-आर्मर क्षमताओं को तत्काल उन्नत करने के लिए प्रारंभिक डिलीवरी वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अग्रिम मोर्चे के फॉर्मेशनों तक पहुंचने का कार्यक्रम है।

यह सौदा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की सार्वजनिक घोषणाओं के बाद हुआ है, जिन्होंने उल्लेख किया कि इस युद्ध-परीक्षित प्रणाली का शामिल होना द्विपक्षीय रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और दोनों देशों के बीच भविष्य के सह-उत्पादन की नींव रखता है। जेवलिन मिसाइलों के साथ, भारतीय सेना इसी आपातकालीन खरीद माध्यम का उपयोग अपने M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर के लिए अतिरिक्त एक्सकैलिबर (Excalibur) प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी राउंड हासिल करने के लिए भी कर रही है।

भारत-अमेरिका रक्षा गतिशीलता का विकास और 16 वर्षों की यात्रा

जेवलिन अनुबंध का संपन्न होना 16 वर्षों से चले आ रहे खरीद गतिरोध का समाधान करता है, जो भारत-अमेरिका रक्षा-औद्योगिक सहयोग की बदलती प्रकृति को रेखांकित करता है।

आधुनिक मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक क्षमता की परिचालन आवश्यकता 2010 की है, जब सेना के आंतरिक आकलनों ने 44,000 से अधिक ATGMs की कमी का संकेत दिया था। तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के कार्यकाल में शुरू हुई वार्ताओं के दौरान भारत ने मिसाइल के संवेदनशील सीकर एल्गोरिदम पर केंद्रित व्यापक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) की मांग की थी। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार विनियमों (ITAR) के तहत कड़े अमेरिकी निर्यात नियंत्रण नियमों के कारण, वाशिंगटन ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अनुरोधित स्तर को अस्वीकार कर दिया, जिससे 2012 और 2014 के बीच बातचीत रुक गई।

रणनीतिक तत्परता के इस अंतर को पाटने के लिए, भारतीय पैदल सेना ने लाइसेंस प्राप्त, दूसरी पीढ़ी की वायर-गाइडेड प्रणालियों, विशेष रूप से फ्रेंको-जर्मन मिलान-2T (MILAN-2T) और रूसी 9M113 कोंकूर (Konkurs) पर निर्भर रहना जारी रखा। 2019 में, रक्षा मंत्रालय ने तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इजरायली स्पाइक-LR ATGMs की आपातकालीन खरीद की। इसके साथ ही, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) कार्यक्रम में तेजी लाई।

वाशिंगटन के रुख में आया यह बदलाव—प्रौद्योगिकी से इनकार करने से लेकर सक्रिय सह-उत्पादन चर्चाओं तक—महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाता है:

इंडो-पैसिफिक रणनीतिक अनिवार्यताएं: अमेरिका एक सुसज्जित भारतीय सेना को क्षेत्रीय आक्रामकता के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण संतुलन और उच्च-ऊंचाई वाले भू-सीमांतों व समुद्री चोक पॉइंट्स पर निवारक (deterrence) क्षमता के लिए एक आवश्यक साझेदार के रूप में देखता है।

रूसी प्लेटफॉर्मों से विविधीकरण: वाशिंगटन प्रत्यक्ष सरकार-से-सरकार व्यवस्थाओं के माध्यम से उन्नत पश्चिमी प्रणालियों की पेशकश करके रूसी सैन्य उपकरणों पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।

"मेक इन इंडिया" के साथ संरेखण: केवल आयात-आधारित खरीद के विरुद्ध नई दिल्ली की नीति को स्वीकार करते हुए, अमेरिकी निर्माताओं (लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स) ने भारतीय सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्यमों के साथ प्रत्यक्ष संयुक्त पहल स्थापित की है।

FGM-148 जेवलिन की तकनीकी कार्यप्रणाली और युद्धक्षेत्र क्षमताएं

लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स (रेथियॉन) के जेवलिन संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित FGM-148 जेवलिन, आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों (MBTs) और भारी किलेबंद बंकरों को नष्ट करने के लिए निर्मित तीसरी पीढ़ी का, मैन-पोर्टेबल, मध्यम दूरी का एंटी-टैंक हथियार है।

        [जेवलिन टॉप-अटैक उड़ान प्रक्षेपवक्र]                       ▲                     /   \  (150 मीटर तक ऊपर चढ़ता है)                   /       \                 /           ▼ (कमजोर ऊपरी बुर्ज/टूरट पर प्रहार) [फायरिंग स्थिति] ─── ─── ─── ───► [लक्षित बख्तरबंद वाहन]

मार्गदर्शन तंत्र और 'दागो और भूल जाओ' (Fire-and-Forget) संरचना

दूसरी पीढ़ी की वायर-गाइडेड मिसाइलों के विपरीत, जिनमें गनर द्वारा विस्फोट होने तक लक्ष्य की निरंतर ऑप्टिकल ट्रैकिंग की आवश्यकता होती है, जेवलिन एक पैसिव इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर का उपयोग करता है। यह सीकर लॉन्च से पहले लक्ष्य के थर्मल हस्ताक्षर पर लॉक हो जाता है और उड़ान पथ को स्वायत्त रूप से समायोजित करता रहता है। यह 'दागो और भूल जाओ' क्षमता मिसाइल फायर करने के तुरंत बाद क्रू को अपनी स्थिति बदलने की अनुमति देती है, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई और निगरानी के प्रति उनकी संवेदनशीलता काफी कम हो जाती है।

टॉप-अटैक और डायरेक्ट-अटैक प्रोफाइल

यह प्रणाली सामरिक परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप दोहरी प्रहार क्षमता प्रदान करती है:

टॉप-अटैक मोड: मिसाइल एक ऊंचे प्रक्षेपवक्र (150 मीटर तक ऊपर चढ़कर) पर जाती है और लक्ष्य के बुर्ज (Turret) की छत पर लंबवत रूप से गिरती है। चूंकि मुख्य युद्धक टैंक अपने सबसे मोटे कंपोजिट कवच को सामने (ग्लेसिस) और किनारों पर केंद्रित करते हैं, इसलिए यह प्रहार उनके अपेक्षाकृत पतले ऊपरी कवच की कमजोरी का लाभ उठाता है।

डायरेक्ट-अटैक मोड: मिसाइल एक सीधी रेखा (लाइन-ऑफ-साइट) प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करती है, जिसे कंक्रीट के मजबूत बंकरों, निगरानी चौकियों और हल्के सैन्य वाहनों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है।

सॉफ्ट-लॉन्च इंजीनियरिंग

जेवलिन में सीमित/बंद स्थानों के लिए डिज़ाइन की गई दो-चरणीय प्रणोदन प्रणाली (Two-stage propulsion system) शामिल है। प्राथमिक उड़ान मोटर के सुरक्षित दूरी पर प्रज्वलित होने से पहले, एक प्रारंभिक लो-इम्पल्स इजेक्टर मोटर मिसाइल को लॉन्च ट्यूब से बाहर धकेलती है। यह सॉफ्ट-लॉन्च तंत्र बैकब्लास्ट ओवरप्रेशर को न्यूनतम करता है, जिससे सैनिक इमारतों के अंदर, रक्षात्मक बंकरों और बीहड़ पहाड़ी इलाकों में सुरक्षित रूप से हथियार चला सकते हैं।

तकनीकी तुलना: जेवलिन बनाम स्वदेशी MPATGM बनाम सेवा में शामिल प्रणालियां

विशिष्टता पैरामीटरFGM-148 जेवलिन (अमेरिका)DRDO MPATGM (भारत)स्पाइक-LR (इजराइल)मिलान-2T (फ्रांस / भारत)9M113 कोंकूर (रूस / भारत)
सिस्टम पीढ़ीतीसरी पीढ़ीतीसरी पीढ़ीचौथी पीढ़ीदूसरी पीढ़ीदूसरी पीढ़ी
मार्गदर्शन प्रणालीपैसिव इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) / फायर-एंड-फॉरगेटपैसिव IIR होमिंग सीकर / फायर-एंड-फॉरगेटडुअल-मोड IIR/CCD (फाइबर-ऑप्टिक डेटा लिंक)सेमी-ऑटोमैटिक कमांड टू लाइन ऑफ साइट (SACLOS) वायरSACLOS वायर गाइडेड
परिचालन रेंज65 मीटर से 4,000 मीटर (4.0 किमी)200 मीटर से 2,500 मीटर (2.5 किमी)200 मीटर से 4,000 मीटर (4.0 किमी)25 मीटर से 2,000 मीटर (2.0 किमी)75 मीटर से 4,000 मीटर (4.0 किमी)
प्रहार प्रक्षेपवक्रटॉप-अटैक एवं डायरेक्ट-अटैकटॉप-अटैक एवं डायरेक्ट-अटैकटॉप-अटैक, डायरेक्ट-अटैक एवं लो-एंगलकेवल डायरेक्ट-अटैककेवल डायरेक्ट-अटैक
वॉरहेड का प्रकारटेंडेम शेप्ड चार्ज HEATटेंडेम शेप्ड चार्ज HEATटेंडेम HEAT / बहुउद्देशीयटेंडेम HEATटेंडेम HEAT
सिस्टम का वजन~22.3 किग्रा (मिसाइल + CLU)~28.75 किग्रा (मिसाइल: 14.5 किग्रा, CLU: 14.25 किग्रा)~26.0 किग्रा (संपूर्ण प्रणाली)~16.5 किग्रा (लॉन्चर + ट्यूब)~26.5 किग्रा (ट्राइपॉड + लॉन्चर)
लॉन्च सिग्नेचरसॉफ्ट-लॉन्च (इनडोर/बंकर सक्षम)सॉफ्ट-लॉन्च सक्षमसॉफ्ट-लॉन्च सक्षमउच्च बैकब्लास्ट सिग्नेचरउच्च बैकब्लास्ट सिग्नेचर
विनिर्माण भागीदारलॉकहीड मार्टिन एवं RTXDRDO, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), BELराफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्सभारत डायनेमिक्स लिमिटेड (लाइसेंस के तहत)भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (लाइसेंस के तहत)

प्रक्रियात्मक ढांचा: आपातकालीन खरीद और औद्योगिक मार्ग

जेवलिन अधिग्रहण राष्ट्रीय रक्षा तत्परता आवश्यकताओं को पूरा करने में फास्ट-ट्रैक पूंजी खरीद चैनलों की उपयोगिता को दर्शाता है।

EP-6 खरीद माध्यम

आपातकालीन खरीद ढांचा सेना प्रमुखों को नियमित रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) के लंबे चरणों को बायपास करने में सक्षम बनाता है। EP-6 विंडो के तहत फास्ट-ट्रैक अनुमतियां सुनिश्चित करती हैं:

प्रति उपकरण श्रेणी ₹300 करोड़ की सीमा तक वित्तीय अधिकार प्रत्यायोजित।

12 से 24 महीने की त्वरित समय-सीमा के भीतर अनुबंधित उपकरणों की डिलीवरी।

'ऑपरेशन सिंदूर' के मद्देनज़र सक्रिय सामरिक क्षेत्रों को सुदृढ़ करने के लिए लक्षित युद्ध क्षमताओं का त्वरित एकीकरण।

भारतीय रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) के साथ सह-उत्पादन के मार्ग

यद्यपि यह प्रारंभिक ₹292 करोड़ का ऑर्डर तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऑफ-द-शेल्फ इकाइयों का प्रावधान करता है, व्यापक रूपरेखा में रक्षा-औद्योगिक सह-उत्पादन शामिल है। 2025 की शुरुआत में, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने घरेलू विनिर्माण संभावनाओं का आकलन करने के लिए जेवलिन संयुक्त उद्यम के साथ एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यदि इसका विस्तार होता है, तो यह साझेदारी निम्नलिखित अवसर प्रदान करती है:

उप-घटक निर्माण और संरचनात्मक असेंबली में घरेलू रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को एकीकृत करना।

जीवन-चक्र समर्थन के लिए घरेलू रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) केंद्रों की स्थापना करना।

उच्च-सटीक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और प्रणोदन इकाइयों में प्रौद्योगिकी अवशोषण को आगे बढ़ाना।

स्वदेशी MPATGM के साथ आयात का समन्वय

जेवलिन अधिग्रहण घरेलू कार्यक्रमों के विकल्प के बजाय एक परिचालन सेतु (operational bridge) के रूप में कार्य करता है। अहिल्या नगर के केके रेंज में गतिशील लक्ष्यों के विरुद्ध परीक्षित DRDO का स्वदेशी MPATGM, स्वदेशी IIR होमिंग सीकर, टेंडेम वॉरहेड और पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम को शामिल करता है। विकास-सह-उत्पादन भागीदारों (DcPP) भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ कार्य करते हुए, बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ने के साथ MPATGM को पुराने मिलान और कोंकूर सिस्टम के बड़े इन्वेंट्री को बदलने के लिए कॉन्फ़िगर किया गया है।

पर्वतीय युद्ध और भारत-प्रशांत संतुलन के लिए रणनीतिक महत्व

जेवलिन प्रणाली की तैनाती भारतीय सशस्त्र बलों के लिए महत्वपूर्ण सामरिक और रणनीतिक क्षमताएं प्रस्तुत करती है:

पर्वतीय युद्ध तत्परता: पूर्वी लद्दाख और सिक्किम जैसे उच्च-ऊंचाई वाले वातावरण में, बख्तरबंद वाहन और रक्षात्मक बंकर ऊंचे इलाकों और संकीर्ण दर्रों से काम करते हैं। टॉप-अटैक उड़ान गतिशीलता के साथ संयुक्त मैन-पोर्टेबल प्रोफ़ाइल (22.3 किग्रा) पैदल सेना इकाइयों को एक जैविक (organic) एंटी-आर्मर स्ट्राइक क्षमता प्रदान करती है।

द्विपक्षीय अभ्यासों में अंतर-संचालनीयता: मानक पश्चिमी प्रणालियों का संचालन क्वाड साझेदार सेनाओं के साथ आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यासों (जैसे युद्ध अभ्यास) के दौरान परिचालन समन्वय को बढ़ाता है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के विरुद्ध सुदृढ़ता: हाल के वैश्विक संघर्षों ने एकल-स्रोत आपूर्ति निर्भरता की कमजोरियों को रेखांकित किया है, जिससे एक विविध रक्षा पोर्टफोलियो के महत्व पर बल मिलता है।

परीक्षा की तैयारी के लिए प्रासंगिकता

यह विकास प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं के UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) और राज्य लोक सेवा आयोग के पाठ्यक्रमों के कई प्रमुख विषयों से सीधे जुड़ता है:

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध और द्विपक्षीय समझौते

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रक्षा सहयोग: प्रमुख रक्षा साझेदार (Major Defence Partner) ढांचे के तहत क्रेता-विक्रेता संबंध से संयुक्त सह-उत्पादन की दिशा में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के परिवर्तन को स्पष्ट करता है।

भारत-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक संतुलन: यह विश्लेषण करने के लिए व्यावहारिक सामग्री प्रदान करता है कि साझा क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं उच्च-प्रौद्योगिकी रक्षा व्यापार और द्विपक्षीय कूटनीति को कैसे प्रभावित करती हैं।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III: आंतरिक सुरक्षा, रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण

रक्षा स्वदेशीकरण (आत्मनिर्भर भारत): इसके अंतर्गत विश्लेषण की आवश्यकता है कि तत्काल पूंजीगत खरीद (जैसे जेवलिन) को घरेलू आरएंडडी कार्यक्रमों (जैसे डीआरडीओ का MPATGM) के साथ कैसे संतुलित किया जाता है।

रक्षा खरीद सुधार: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 के तहत मानक प्रक्रियाओं की तुलना में फास्ट-ट्रैक वित्तीय तंत्र (आपातकालीन खरीद अधिकार, EP-6) पर एक केस स्टडी प्रस्तुत करता है।

रक्षा क्षेत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: पारंपरिक SACLOS वायर-गाइडेड मिसाइलों की तुलना में तीसरी पीढ़ी के फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम, पैसिव इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर और टॉप-अटैक वॉरहेड मैकेनिक्स के तकनीकी सिद्धांतों को कवर करता है।

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा: मुख्य बिंदु

मिसाइल मार्गदर्शन वर्गीकरण: वायर-गाइडेड, लेजर बीम-राइडिंग और पैसिव इन्फ्रारेड होमिंग सिस्टम के बीच मुख्य अंतर।

खरीद रूपरेखा: विदेशी सैन्य बिक्री (FMS), प्रत्यक्ष वाणिज्यिक बिक्री (DCS), और प्रत्यायोजित आपातकालीन खरीद सीमाओं के परिचालन दायरे को समझना।

संस्थागत भूमिकाएं: स्वदेशी रक्षा डिजाइन और उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र में DRDO, BDL और BEL के कार्यों की पहचान करना।

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