UPSC करेंट अफेयर्स: प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को COSPAR विक्रम साराभाई मेडल 2026 से सम्मानित किया गया | अथर्व एक्जामवाइज दैनिक सामान्य ज्ञान अपडेट
वैश्विक अंतरिक्ष खगोल विज्ञान में ऐतिहासिक मील का पत्थर
भारतीय खगोल भौतिकी (Astrophysics) और वैज्ञानिक नेतृत्व में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु की निदेशक प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (COSPAR) विक्रम साराभाई मेडल से सम्मानित किया गया है। अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (COSPAR) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाने वाला यह पदक विकासशील देशों में किए गए या उनसे सीधे लाभान्वित होने वाले असाधारण वैज्ञानिक अनुसंधान को मान्यता देने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में से एक है।
यह आधिकारिक सम्मान समारोह इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 46वीं COSPAR वैज्ञानिक संगोष्ठी (Scientific Assembly) के दौरान संपन्न हुआ। प्रोफेसर सुब्रमण्यम की इस उपलब्धि ने भारतीय वैज्ञानिक परिदृश्य में कई ऐतिहासिक मानक स्थापित किए हैं:
वह COSPAR विक्रम साराभाई मेडल से सम्मानित होने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं।
1990 में इसकी शुरुआत के बाद से वह यह पदक प्राप्त करने वाली कुल चौथी भारतीय वैज्ञानिक हैं।
वह विश्व स्तर पर इस सम्मान से नवाजी जाने वाली केवल तीसरी महिला शोधकर्ता हैं।
यह सम्मान भारत के एक इंजीनियरिंग-केंद्रित अंतरिक्ष कार्यक्रम से निकलकर प्रेक्षणात्मक खगोल भौतिकी (Observational Astrophysics), बहु-तरंगदैर्ध्य उपकरण (Multi-Wavelength Instrumentation), और पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट - UV) अंतरिक्ष खगोल विज्ञान में एक अंतरराष्ट्रीय अगुआ बनने के संक्रमण को रेखांकित करता है। अथर्व एक्जामवाइज UPSC करेंट अफेयर्स पोर्टल के माध्यम से दैनिक घटनाक्रमों की समीक्षा करने वाले अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विज्ञान शासन (Science Governance) के लिए इस पुरस्कार के संस्थागत तंत्र, प्रेक्षणात्मक प्रौद्योगिकियों और रणनीतिक महत्व का मूल्यांकन करना चाहिए।
संस्थागत ढांचा: COSPAR विक्रम साराभाई मेडल
COSPAR विक्रम साराभाई मेडल की स्थापना 1990 में COSPAR और ISRO के बीच एक संयुक्त समझौते के माध्यम से डॉ. विक्रम साराभाई की स्मृति में की गई थी, जिन्हें व्यापक रूप से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। साराभाई ने इस दर्शन की वकालत की थी कि विकासशील देशों को केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं की नकल करने के बजाय उन्नत प्रौद्योगिकियों को सीधे वास्तविक सामाजिक-आर्थिक विकास और स्वदेशी क्षमता-निर्माण में लागू करना चाहिए।
COSPAR की संस्थागत संरचना
COSPAR की स्थापना 1958 में उपग्रह-आधारित अनुसंधान के शुरुआती दौर में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ साइंटिफिक यूनियन्स—जो अब अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद (ISC) है—द्वारा की गई थी। बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति (UN-COPUOS) के सीधे सहयोग से कार्य करते हुए, COSPAR बिना किसी राजनीतिक या वैचारिक सीमाओं के अंतरिक्ष यान, रॉकेट और उच्च-ऊंचाई वाले गुब्बारों के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक खुला वैश्विक मंच प्रदान करता है।
पुरस्कार के मानदंड और पात्रता शर्तें
यह पदक COSPAR वैज्ञानिक संगोष्ठी (Scientific Assembly) के दौरान द्विवार्षिक (Biennially) रूप से प्रदान किया जाता है। पुरस्कार की पात्रता यह अनिवार्य करती है कि उम्मीदवार का प्राथमिक वैज्ञानिक योगदान मुख्य रूप से उस संगोष्ठी से एक वर्ष पूर्व समाप्त होने वाली पांच वर्ष की अवधि के दौरान किया गया हो जिसमें पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। यद्यपि यह दुनिया भर के उम्मीदवारों के लिए खुला है, लेकिन इसका चार्टर स्पष्ट रूप से विकासशील देशों में किए गए उच्च-प्रभाव वाले अंतरिक्ष अनुसंधान योगदान को प्राथमिकता देता है।
| वर्ष | प्राप्तकर्ता | विशेषज्ञता का क्षेत्र | प्रमुख संस्थागत संबद्धता |
|---|---|---|---|
| 1996 | प्रो. यू. आर. राव | उपग्रह प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुप्रयोग, कॉस्मिक किरणें | इसरो / अंतरिक्ष विभाग |
| 2014 | प्रो. गुरबख्श सिंह लखीना | अंतरिक्ष प्लाज्मा भौतिकी, भू-चुंबकत्व, अंतरिक्ष मौसम | भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान (IIG) |
| 2024 | प्रो. अनिल भारद्वाज | ग्रह विज्ञान, चंद्र-मंगल वायुमंडल | भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) |
| 2026 | प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम | तारकीय भौतिकी, यूवी स्पेस इंस्ट्रूमेंटेशन, एस्ट्रोसैट (AstroSat) | भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) |
यह क्रम भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के कालानुक्रमिक विकास को दर्शाता है: उपग्रह बस विकास और प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग से शुरुआत (प्रो. यू. आर. राव), पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष प्लाज्मा और ग्रहीय वायुमंडलीय विज्ञान की ओर विस्तार (प्रो. जी. एस. लखीना और प्रो. अनिल भारद्वाज), और गहरे अंतरिक्ष के खगोलीय उपकरण निर्माण एवं तारकीय विकासवादी मॉडलिंग में प्रगति (प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम)।
डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम का शैक्षणिक प्रोफाइल और वैज्ञानिक योगदान
प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम एक खगोल भौतिकीविद् (Astrophysicist) हैं जो तारकीय प्रणालियों (Stellar Systems), गांगेय विकास (Galactic Evolution), और अंतरिक्ष-आधारित खगोलीय उपकरणों में विशेषज्ञता रखती हैं। वर्ष 2019 में, उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के तहत संचालित एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) की पहली महिला निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS), बेंगलुरु के अतिरिक्त निदेशक के रूप में भी कार्य किया है।
उनका प्राथमिक अनुसंधान तारा समूहों (Star Clusters) के निर्माण और विकासात्मक गतिकी, क्लासिकल और मैग्नेटिक Be तारों (Be Stars), आकाशगंगा (Milky Way) के संरचनात्मक यांत्रिकी, और मैगलेनिक बादलों (Magellanic Clouds) में तारकीय आबादी पर केंद्रित है। तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में, प्रोफेसर सुब्रमण्यम ने प्रमुख वैश्विक पत्रिकाओं में लगभग 175 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे हैं और 15 पीएचडी शोधार्थियों के डॉक्टरेट शोध प्रबंधों का मार्गदर्शन किया है।
अंतरिक्ष अभियानों में उनके व्यापक वैज्ञानिक नेतृत्व और योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी की श्रेणी में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार – विज्ञान श्री (2024) से सम्मानित किया गया था। इस प्रशस्ति पत्र में विशेष रूप से उनके प्रेक्षणात्मक खगोल भौतिकी अनुसंधान और भारत की अंतरिक्ष वेधशालाओं के लिए अंतरिक्ष-आधारित उपकरणों के विकास में उनके नेतृत्व को मान्यता दी गई थी। राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मानों के व्यापक विश्लेषण के लिए, अथर्व एक्जामवाइज साइंस एंड टेक्नोलॉजी डोजियर देखें।
अंतरिक्ष खगोल विज्ञान: एस्ट्रोसैट पर UVIT और अगली पीढ़ी के दूरबीन
प्रोफेसर सुब्रमण्यम के पुरस्कार प्रशस्ति पत्र का एक केंद्रीय घटक अंतरिक्ष-आधारित पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट - UV) खगोल विज्ञान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
पृथ्वी का वायुमंडल समतापमंडलीय ओजोन परत और वायुमंडलीय आणविक अवशोषण के कारण पराबैंगनी स्पेक्ट्रम के लगभग पूरे हिस्से—विशेष रूप से $300\text{ nm}$ से नीचे—को अवशोषित कर लेता है। यद्यपि यह स्थलीय जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह वायुमंडलीय ढाल ज़मीनी वेधशालाओं को उन अत्यधिक गर्म, ऊर्जावान खगोलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करने से रोकती है जो मुख्य रूप से पराबैंगनी तरंगदैर्ध्य में उत्सर्जन करती हैं। नतीजतन, पराबैंगनी खगोल विज्ञान के लिए पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर स्थित अंतरिक्ष-आधारित वेधशालाओं की आवश्यकता होती है।
1. एस्ट्रोसैट (AstroSat) और पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT)
28 सितंबर 2015 को PSLV-C30 के माध्यम से प्रक्षेपित, एस्ट्रोसैट भारत की पहली समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला है। लगभग $650\text{ km}$ की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में कार्यरत, एस्ट्रोसैट में पांच पेलोड लगे हैं जो ऑप्टिकल, नियर-यूवी (Near-UV), फार-यूवी (Far-UV), और ब्रॉडबैंड एक्स-रे स्पेक्ट्रा में एक साथ ब्रह्मांड का अवलोकन करते हैं।
पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) एस्ट्रोसैट पर मुख्य ऑप्टिकल-यूवी पेलोड के रूप में कार्य करता है। होसकोटे स्थित अपने CREST कैंपस में IIA द्वारा डिज़ाइन, असेंबल और कैलिब्रेट किए गए UVIT को इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), इसरो के विभिन्न केंद्रों (URSC, LEOS, IISU, SAC), और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के सहयोग से विकसित किया गया था।
ट्विन-टेलीस्कोप ऑप्टिकल सिस्टम: UVIT दो समानांतर (co-aligned) 375 मिमी टेलीस्कोप का उपयोग करता है। एक टेलीस्कोप सुदूर-पराबैंगनी (FUV: $130\text{--}180\text{ nm}$) बैंड का अवलोकन करता है, जबकि दूसरा डाइक्रोइक बीम स्प्लिटर का उपयोग करके निकट-पराबैंगनी (NUV: $200\text{--}300\text{ nm}$) और दृश्य (VIS: $320\text{--}550\text{ nm}$) चैनलों को एक साथ रिकॉर्ड करता है।
उच्च स्थानिक विभेदन (Spatial Resolution): UVIT $28\text{ arcminute}$ के विस्तृत दृष्टि क्षेत्र (Field of View) में $1.5\text{ arcseconds}$ से बेहतर स्थानिक विभेदन प्रदान करता है, जो नासा के पूर्ववर्ती उपग्रह GALEX की तुलना में अधिक स्पष्ट स्थानिक विवरण प्रदान करता है।
कैलिब्रेशन नेतृत्व: UVIT की कैलिब्रेशन वैज्ञानिक के रूप में, प्रोफेसर सुब्रमण्यम ने प्री-लॉन्च प्रयोगशाला लक्षण वर्णन, विशेष क्लीनरूम में संदूषण नियंत्रण, और इन-ऑर्बिट कैलिब्रेशन चरणों का नेतृत्व किया ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि टेलीस्कोप से डाउनलिंक किया गया वैज्ञानिक डेटा सटीक खगोलीय मानकों को पूरा करता है।
प्रमुख खोजें: एक दशक से अधिक समय से संचालित, UVIT ने 1,451 खगोलीय लक्ष्यों पर अवलोकन दर्ज किए हैं, जिससे लगभग 300 सहकर्मी-समीक्षित (peer-reviewed) लेख और 19 डॉक्टरेट शोध प्रबंध तैयार हुए हैं। प्रमुख खोजों में रेडशिफ्ट $z = 1.42$ पर आकाशगंगाओं से लाइमैन सातत्य विकिरण (Lyman continuum radiation) का पता लगाना, Be तारों के अत्यधिक गर्म बाइनरी साथियों की पहचान करना, और गोलाकार तारा समूहों (Globular Clusters) में ब्लू स्ट्रैगलर (Blue Straggler) निर्माण मार्गों का मानचित्रण शामिल है।
2. इनसिस्ट मिशन (INSIST): भारत की अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष वेधशाला
UVIT की सफलता के आधार पर, प्रोफेसर सुब्रमण्यम इंडियन स्पेक्ट्रोस्कोपिक एंड इमेजिंग स्पेस टेलीस्कोप (INSIST) की मुख्य अन्वेषक (Principal Investigator - PI) के रूप में कार्य कर रही हैं।
चूँकि वैश्विक वेधशालाएं तेजी से अवरक्त (Infrared) खगोल विज्ञान की ओर झुक रही हैं—जैसा कि जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप द्वारा देखा गया है—वैश्विक खगोलीय समुदाय को 2020 के उत्तरार्ध और 2030 के दशक में उच्च-विभेदन अंतरिक्ष-आधारित यूवी इमेजिंग सुविधाओं की अनुमानित कमी का सामना करना पड़ रहा है। INSIST को इस प्रेक्षणात्मक अंतर को पाटने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
ऑप्टिकल आर्किटेक्चर: यूवी और ऑप्टिकल तरंगदैर्ध्य में एक साथ संचालित होने वाला 1.0-मीटर श्रेणी का अपर्चर स्पेस टेलीस्कोप।
स्थानिक प्रदर्शन: $\sim 0.2\text{ arcseconds}$ का स्थानिक विभेदन प्राप्त करने के लिए इंजीनियर किया गया, जो हबल स्पेस टेलीस्कोप की इमेजिंग गुणवत्ता के करीब पहुंचता है।
स्पेक्ट्रोस्कोपिक क्षमता: $30 \times 30\text{ arcminute}$ के दृष्टि क्षेत्र ($R \sim 1000\text{--}2000$) में कई खगोलीय लक्ष्यों से स्पेक्ट्रा एकत्र करने के लिए डिजिटल माइक्रोमिरर डिवाइसेस (DMD) का उपयोग करके एक मल्टी-ऑब्जेक्ट स्पेक्ट्रोग्राफ (MOS) को शामिल करता है।
मिशन एकीकरण: तारा-निर्माण क्षेत्रों, कम द्रव्यमान वाली बौनी आकाशगंगाओं और दूरस्थ सक्रिय गांगेय नाभिक (Active Galactic Nuclei - AGN) के व्यापक-क्षेत्र यूवी सर्वेक्षण प्रदान करने के लिए इसरो के मानक प्रक्षेपण यानों के माध्यम से प्रक्षेपित होने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
3. थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) कंसोर्टियम में भागीदारी
भारत मौना की (Mauna Kea), हवाई में निर्माण के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) कंसोर्टियम में एक प्रमुख भागीदार है। IUCAA और आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के साथ IIA द्वारा समन्वित, भारतीय वैज्ञानिक और उद्योग भागीदार सेगमेंट सपोर्ट असेंबली, सटीक एक्चुएटर तंत्र, एज सेंसर और कोर टेलीस्कोप नियंत्रण सॉफ्टवेयर का योगदान दे रहे हैं। प्रोफेसर सुब्रमण्यम ने इस परियोजना में भारत की वैज्ञानिक भागीदारी के लिए एक मुख्य योगदानकर्ता के रूप में कार्य किया है।
| खगोलीय मिशन | प्राथमिक स्पेक्ट्रल बैंड | परिचालन वातावरण | मुख्य वैज्ञानिक कार्य | संस्थागत नेतृत्व |
|---|---|---|---|---|
| एस्ट्रोसैट (UVIT) | UV ($130\text{--}300\text{ nm}$), ऑप्टिकल, एक्स-रे | अंतरिक्ष (पृथ्वी की निचली कक्षा, $650\text{ km}$) | एक साथ बहु-तरंगदैर्ध्य ब्रह्मांडीय सर्वेक्षण | इसरो / IIA (पेलोड नेतृत्व) |
| इनसिस्ट (INSIST) | उच्च-विभेदन UV एवं ऑप्टिकल | अंतरिक्ष (प्रस्तावित LEO) | गहरा UV वाइड-फील्ड इमेजिंग और मल्टी-ऑब्जेक्ट स्पेक्ट्रोस्कोपी | IIA के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय कंसोर्टियम / इसरो |
| थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) | ऑप्टिकल से मध्य-अवरक्त ($0.31\text{--}28\text{ }\mu\text{m}$) | ज़मीनी-आधारित (मौना की, हवाई) | प्रारंभिक तारा निर्माण, गहरा गांगेय विकास, एक्सोप्लैनेट्स | अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम (भारत, अमेरिका, जापान, कनाडा, चीन) |
| आदित्य-L1 (Aditya-L1) | दृश्य, UV, एक्स-रे, कण सेंसर | अंतरिक्ष (सूर्य-पृथ्वी L1 पर हेलो कक्षा) | सौर कोरोना गतिकी, CME ट्रैकिंग, अंतरिक्ष मौसम | इसरो / IIA (VELC पेलोड नेतृत्व) |
राष्ट्रीय अंतरिक्ष हार्डवेयर और वेधशालाओं पर अधिक विवरण की समीक्षा के लिए, अथर्व एक्जामवाइज डीप स्पेस एनालिसिस देखें।
भारतीय विज्ञान के लिए रणनीतिक और प्रणालीगत निहितार्थ
प्रोफेसर सुब्रमण्यम को 2026 के COSPAR विक्रम साराभाई मेडल से सम्मानित किया जाना भारत के वैज्ञानिक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए व्यापक रणनीतिक निहितार्थ रखता है:
उपयोगितावादी मंचों से मौलिक विज्ञान की ओर बदलाव: जहाँ शुरुआती दशक INSAT और IRS उपग्रहों के माध्यम से घरेलू दूरसंचार, कृषि मानचित्रण और मौसम संबंधी निगरानी स्थापित करने के लिए समर्पित थे, वहीं एस्ट्रोसैट, आदित्य-L1 और चंद्रयान जैसे मिशन प्राथमिक वैज्ञानिक खोज और गहरे अंतरिक्ष भौतिकी में भारत की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।
अंतर-संस्थागत सहयोग का मॉडल: UVIT पेलोड की सफलता अंतर-संस्थागत सहयोग के लिए एक दोहराने योग्य परिचालन मॉडल प्रदान करती है। इस परियोजना ने स्वायत्त शैक्षणिक निकायों (IIA, IUCAA, TIFR) और इसरो केंद्रों को उच्च-निर्वात परीक्षण अवसंरचना, विशेष ऑप्टिकल कोटिंग्स और अंतरिक्ष-ग्रेड उपकरणों को स्थानीय स्तर पर विकसित करने के लिए एकीकृत किया।
STEM नेतृत्व में महिलाओं के लिए मार्ग: IIA की पहली महिला निदेशक और साराभाई मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला के रूप में, प्रोफेसर सुब्रमण्यम का सफर अकादमिक नेतृत्व और प्रमुख राष्ट्रीय मिशन निदेशकों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए एक ठोस मॉडल प्रदान करता है।
विज्ञान कूटनीति (Science Diplomacy) का विस्तार: COSPAR, अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद और UN-COPUOS में भारत की सक्रिय उपस्थिति देश की विज्ञान कूटनीति का विस्तार करती है। प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष विज्ञान उपकरणों को विकसित करके और इसरो के PRADAN पोर्टल जैसे ओपन-एक्सेस अभिलेखागार को बनाए रखकर, भारत खुद को अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान टीमों और विकासशील देशों दोनों के लिए एक सुलभ, उच्च-मूल्य वाले सहयोगी के रूप में स्थापित करता है।
यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा (CSE) और राज्य लोक सेवा आयोगों की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए, यह विषय पाठ्यक्रम के कई खंडों से सीधे जुड़ता है:
पाठ्यक्रम मानचित्रण और परीक्षा आयाम
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I):
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं: COSPAR विक्रम साराभाई मेडल का विवरण, मेजबान सभाएं, और पिछले भारतीय प्राप्तकर्ता (यू. आर. राव, गुरबख्श सिंह लखीना, अनिल भारद्वाज, अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम)।
सामान्य विज्ञान: विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के सिद्धांत, वायुमंडलीय अवशोषण के कारण पराबैंगनी अवलोकनों के लिए अंतरिक्ष-आधारित प्लेटफार्मों की आवश्यकता, और एस्ट्रोसैट तथा प्रस्तावित INSIST मिशन के परिचालन विनिर्देश।
UPSC मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी):
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां: विश्व स्तरीय प्रेक्षणात्मक सुविधाओं की स्थापना में भारतीय खगोल भौतिकविदों और इसरो/IIA वैज्ञानिकों का योगदान।
प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण: भारत के भीतर अंतरिक्ष उपकरण, क्लीनरूम प्रयोगशालाएं, डिटेक्टर सिस्टम और उच्च-सटीक दर्पणों का डिजाइन और निर्माण।
अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता: अनुप्रयोग उपग्रहों से बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशालाओं जैसे एस्ट्रोसैट और भविष्य की डीप-स्पेस परियोजनाओं में तकनीकी संक्रमण।
UPSC मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I (सामाजिक मुद्दे):
महिलाओं और महिला संगठनों की भूमिका: STEM में महिलाओं की प्रगति में आने वाली संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना और वरिष्ठ वैज्ञानिक नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं को उजागर करना।
UPSC मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II (अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं शासन):
अंतरराष्ट्रीय संस्थान: COSPAR के शासन जनादेश, अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद (ISC) के साथ इसके संस्थागत संबंध, और UN-COPUOS के तहत बहुपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न (UPSC पैटर्न)
प्र. पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) और अंतरिक्ष खगोल विज्ञान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
UVIT एस्ट्रोसैट पर स्थित एक मल्टी-चैनल पेलोड है जो सुदूर-पराबैंगनी (Far-UV), निकट-पराबैंगनी (Near-UV) और दृश्य (Visible) स्पेक्ट्रा में एक साथ अवलोकन करने में सक्षम है।
पराबैंगनी खगोल विज्ञान को ज़मीनी दूरबीनों से समान कोणीय विभेदन के साथ किया जा सकता है क्योंकि पृथ्वी का वायुमंडल पराबैंगनी विकिरण के लिए पूरी तरह से पारदर्शी है।
COSPAR विक्रम साराभाई मेडल केवल विकसित देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को सम्मानित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) और नासा द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2, और 3
सही उत्तर: (A) केवल 1
स्पष्टीकरण: कथन 1 सही है (UVIT FUV, NUV और VIS चैनलों में कार्य करता है)। कथन 2 गलत है क्योंकि पृथ्वी का वायुमंडल अधिकांश UV तरंगदैर्ध्य को अवशोषित कर लेता है, जिसके लिए अंतरिक्ष वेधशालाओं की आवश्यकता होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह पदक COSPAR और ISRO द्वारा संयुक्त रूप से उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने विकासशील देशों में अंतरिक्ष अनुसंधान में प्रमुख योगदान दिया है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (GS प्रश्नपत्र III)
प्र. "भारत के अंतरिक्ष प्रयास अनुप्रयोग-संचालित इंजीनियरिंग मिशनों से उच्च-प्रभाव वाले मौलिक विज्ञान और अंतरिक्ष खगोल विज्ञान की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं।" एस्ट्रोसैट और इनसिस्ट (INSIST) जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं के संदर्भ में इस संक्रमण का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। जांच कीजिए कि इसरो और स्वायत्त शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोगात्मक साझेदारी किस प्रकार स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं में योगदान करती है।