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UPSC समसामयिकी: भारत ने UNCCD COP17 में घास के मैदानों के लिए पहली मार्गदर्शिका जारी की | दैनिक GK अपडेट UPSC समसामयिकी: भारत ने UNCCD COP17 में घास के मैदानों के लिए पहली मार्गदर्शिका जारी की | दैनिक GK अपडेट

20 Aug 2026 20 Aug 2026

UPSC समसामयिकी: भारत ने UNCCD COP17 में घास के मैदानों के लिए पहली मार्गदर्शिका जारी की | दैनिक GK अपडेट
Environment and Biodiversity Hindi 20 Aug 2026

UPSC समसामयिकी: भारत ने UNCCD COP17 में घास के मैदानों के लिए पहली मार्गदर्शिका जारी की | दैनिक GK अपडेट

राष्ट्रीय पर्यावरण शासन और वैश्विक संरक्षण नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में, भारत ने अपने पहले 'घास के मैदानों और भारत के अन्य खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों (ONEs) के लिए मार्गदर्शिका' का अनावरण किया। यह दस्तावेज़ आधिकारिक तौर पर उलानबटार, मंगोलिया में आयोजित मरुस्थलीकरण की रोकथाम के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCCD) के पक्षकारों के 17वें सत्र (COP17) के एक आधिकारिक साइड इवेंट के दौरान लॉन्च किया गया।

यह अग्रणी प्रकाशन पारंपरिक वृक्ष-केंद्रित वानिकी नीतियों से हटकर एक व्यापक, विज्ञान-आधारित संरक्षण ढांचे की ओर एक आदर्श बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है जो गैर-वन बायोम के पारिस्थितिक, आर्थिक और जलवायु महत्व को मान्यता देता है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के मार्गदर्शन में विकसित इस गाइड का नेतृत्व अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट (ATREE) द्वारा इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन सस्टेनेबल लैंड मैनेजमेंट (CoE-SLM), और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के सहयोग से किया गया।

यह पहल उन ऐतिहासिक नीतिगत चूकों को संबोधित करती है जिन्होंने जैव विविधता से समृद्ध खुले आवासों को अनुत्पादक भूमि के रूप में वर्गीकृत किया था। 24 विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र प्रकारों में मानक आधार रेखाएं स्थापित करके, यह प्रकाशन नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, विकास एजेंसियों और स्थानीय समुदायों को पारिस्थितिक बहाली, सतत भूमि प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका समर्थन के लिए एक संरचित खाका प्रदान करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी अथर्व एग्जामवाइज एनवायरनमेंट नोट्स के माध्यम से आगे की संरचित अध्ययन सामग्री देख सकते हैं।

खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर राष्ट्रीय मार्गदर्शिका की मुख्य विशेषताएं

24 पारिस्थितिकी तंत्र प्रकारों का वर्गीकरण: यह गाइड स्थानिक मानचित्रण, पारिस्थितिक आधार रेखाएं और प्रजाति सूची प्रदान करते हुए 24 गैर-वन बायोम का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण करती है।

बहुविषयक दायरा: यह अग्नि पारिस्थितिकी (fire ecology), मृदा कार्बन पृथक्करण (soil carbon sequestration), पशुचारण (pastoralism), और पारंपरिक संसाधन अधिकारों पर विशेष विषयगत अनुभागों को एकीकृत करता है।

संस्थागत संरेखण: ATREE, MoEFCC, IUCN, CoE-SLM और ICFRE को शामिल करते हुए बहु-संस्थागत समन्वय के माध्यम से तैयार किया गया।

'बंजर भूमि' (Wasteland) के गलत वर्गीकरण में सुधार: लॉन्च के समय एक वीडियो संदेश में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रेखांकित किया कि वृक्षों के वितान (canopy) के अभाव के कारण घास के मैदानों, झाड़ीदार भूमि और खड्डों को ऐतिहासिक रूप से कम करके आंका गया है। अजमेर, राजस्थान में अपने युवा दिनों को याद करते हुए, उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे विशाल चरागाहों को नियमित रूप से "बंजर भूमि" के रूप में गलत लेबल किया जाता था।

पारंपरिक ज्ञान का समावेश: मंत्री ने ओरान (पवित्र सामुदायिक उपवन/शामलात भूमि) और गोचर (ग्राम चरागाह भूमि) जैसी प्राचीन समुदाय-आधारित संरक्षण संस्थाओं पर जोर दिया, यह प्रदर्शित करते हुए कि स्थानीय देहाती ज्ञान आधुनिक पारिस्थितिक विज्ञान के अनुरूप है।

वैश्विक प्रतिबद्धताओं का समर्थन: यह गाइड भूमि क्षरण तटस्थता (LDN), जलवायु लचीलापन और चारागाह शासन के संबंध में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के प्रतिनिधित्व को मजबूत करती है।

भारत के खुले पारिस्थितिक तंत्रों का स्थानिक वितरण और विविधता

खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (ONEs) भारत के कुल भौगोलिक भूभाग के लगभग एक चौथाई हिस्से को कवर करते हैं। ये आवास उच्च ऊंचाई वाले अल्पाइन क्षेत्रों से लेकर तटीय शुष्क परिदृश्यों तक फैले हुए हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र श्रेणीभौगोलिक स्थिति और क्षेत्रपारिस्थितिक विशेषताएं और लक्षणसंबंधित देशी वनस्पति और जीव
अल्पाइन घास के मैदान (बुग्याल और मर्ग)उच्च हिमालय (लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड)वृक्ष रेखा से ऊपर शाकीय वनस्पति; मौसमी चराई प्रणाली।हिम तेंदुआ, हिमालयी तहर, कस्तूरी मृग
तराई और जलोढ़ घास के मैदानहिमालय की तलहटी, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के बाढ़ के मैदानउच्च बायोमास वाले जलोढ़ घास के मैदान (चौर) जो मौसमी बाढ़ के अधीन हैं।एक सींग वाला गैंडा, दलदली हिरण (बारहसिंगा), बंगाल फ्लोरिकन
तैरते हुए आर्द्र घास के मैदान (फुमदी)लोकतक झील, मणिपुरखुले पानी पर तैरती हुई विषम वनस्पति और जैविक पदार्थों का द्रव्यमान।संगाई हिरण (Rucervus eldii eldii)
शुष्क और अर्ध-शुष्क परिदृश्यथार मरुस्थल, कच्छ के बन्नी घास के मैदान (गुजरात, राजस्थान)लवणीय मैदान, मरुद्भिद झाड़ियाँ, पशुचारण को सहारा देने वाले मौसमी मिट्टी के मैदान।ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, भारतीय जंगली गधा, मरुस्थली लोमड़ी
दक्कन सवाना और झाड़ीदार भूमिप्रायद्वीपीय पठार, अरावली पर्वतमाला (महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना)पथरीले लेटराइट पठारों के बीच खुले वृक्ष-घास मोज़ेक।काला हिरण (कृष्णमृग), भारतीय भेड़िया, चिंकारा
शोला घास के मैदानपश्चिमी घाट की उच्च ऊंचाई (नीलगिरि, अनामलाई, पलानी पहाड़ियाँ)बौने सदाबहार वन पैच (शोला) के साथ फैले हुए घुमावदार घास के मैदान।नीलगिरि तहर, नीलगिरि पिपिट
खड्ड और बीहड़ (Ravines and Badlands)यमुना-चंबल नदी बेसिन (मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश)सूखा-सहिष्णु झाड़ीदार संरचनाओं के साथ खड़ी कटी हुई खड्ड प्रणालियां।भारतीय भेड़िया, धारीदार लकड़बग्घा, सुनहरा सियार
विशिष्ट संरचनाएंसेंट्रल निकोबार, तमिलनाडु (थेरी काडू), पश्चिमी घाट के लेटराइट पठारलाल टीले परिसर (थेरी), मौसमी चट्टानी जलकुंड, तटीय घास के किनारे।स्थानिक छिपकलियां (geckos), विशिष्ट मरुद्भिद पौधे

आगामी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए, प्रारंभिक परीक्षा के मानचित्रण प्रश्नों के लिए इन भौगोलिक संबंधों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है। अथर्व एग्जामवाइज भूगोल अनुभाग के माध्यम से आगे की स्थानिक अध्ययन सामग्री प्राप्त करें।

घास के मैदानों का पारिस्थितिक महत्व और वैश्विक नामकरण

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं और जैव विविधता समर्थन

घास के मैदान गतिशील स्थलीय बायोम का प्रतिनिधित्व करते हैं जो पोएसी (Poaceae) परिवार के पौधों के प्रभुत्व में हैं, जिसमें दुनिया भर में 10,000 से 12,000 व्यक्तिगत प्रजातियां शामिल हैं। ये पारिस्थितिकी तंत्र आमतौर पर 600 mm और 1500 mm के बीच वार्षिक वर्षा प्राप्त करने वाले जलवायु क्षेत्रों में फलते-फूलते हैं।

घास के मैदानों द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्राथमिक पारिस्थितिक कार्यों में शामिल हैं:

मृदा कार्बन भंडारण: बंद वितान (closed-canopy) वाले वनों के विपरीत, जो मुख्य रूप से ज़मीन के ऊपर की काष्ठीय संरचनाओं में कार्बन का भंडारण करते हैं, घास के मैदान अपने कार्बन का 80% तक गहरी जड़ प्रणालियों और भूमिगत मिट्टी की परतों में स्थिर करते हैं। यह भूमिगत कार्बन पूल सतह पर लगने वाली जंगल की आग के प्रति अत्यधिक लचीला होता है।

जल विज्ञान प्रबंधन: गहरी जड़ संरचनाएं जल अंतःस्रवण (infiltration) दरों में सुधार करती हैं, कटाव के खिलाफ ऊपरी मिट्टी को स्थिर करती हैं, जलभृतों (aquifers) को पुनर्भरण करती हैं और अचानक आने वाली बाढ़ (flash floods) को कम करती हैं।

गंभीर रूप से लुप्तप्राय जीवों के लिए आवास: खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र खुले मैदानों के अनुकूल स्थानिक प्रजातियों को आश्रय देते हैं, जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps), लेसर फ्लोरिकन (Sypheotides indicus), बंगाल फ्लोरिकन (Houbaropsis bengalensis), भारतीय भेड़िया (Canis lupus pallipes), और काला हिरण (Antilope cervicapra)।

पशुचारक अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन: लाखों अर्ध-खानाबदोश और पारंपरिक चरवाहे पशुधन चारे, चारा सुरक्षा और ग्रामीण आय सृजन के लिए सीधे घास के मैदानों पर निर्भर हैं।

घास के मैदान बायोम के लिए वैश्विक शब्दावली

विश्व वन्यजीव कोष (WWF) द्वारा विस्तृत विवरण के अनुसार, घास के मैदानों को विश्व स्तर पर विभिन्न क्षेत्रीय नामों से जाना जाता है:

सवाना (Savannah): बिखरे हुए पेड़ों वाले उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय घास के मैदान, जो अफ्रीका की विशेषता हैं।

सेराडो (Cerrado): दक्षिण अमेरिका में जैव विविधता से समृद्ध उष्णकटिबंधीय सवाना बायोम।

प्रेयरी (Prairie): उत्तरी अमेरिका में लंबी घासों के प्रभुत्व वाले विस्तृत समशीतोष्ण घास के मैदान।

स्टेपी (Steppe): मध्य एशिया में फैले विशाल, अर्ध-शुष्क महाद्वीपीय घास के मैदानों की पट्टियाँ।

मीडो (Meadow): यूनाइटेड किंगडम और यूरोप में प्रचलित नम, कम ऊंचाई वाले घास के आवास।

मुख्य अंश से परे: बॉन चैलेंज पर भारत की दूसरी प्रगति रिपोर्ट

बॉन चैलेंज का अवलोकन

बॉन चैलेंज एक वैश्विक बहाली पहल है जिसे 2011 में जर्मनी सरकार और इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) द्वारा शुरू किया गया था, जिसमें IUCN इसके सचिवालय के रूप में कार्य करता है। यह आंदोलन पारिस्थितिकी तंत्र बहाली पर संयुक्त राष्ट्र दशक, सतत विकास लक्ष्य (SDGs), जैविक विविधता पर कन्वेंशन (CBD) के तहत आइची जैव विविधता लक्ष्य, और पेरिस समझौते सहित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौतों का समर्थन करता है।

2020 वैश्विक लक्ष्य: 150 मिलियन हेक्टेयर निम्नीकृत और वन-विहीन परिदृश्यों को बहाल करना।

2030 वैश्विक लक्ष्य: दुनिया भर में 350 मिलियन हेक्टेयर को बहाल करना।

भारत के संकल्प और उपलब्धियां

भारत ने मूल रूप से 2020 तक 13 मिलियन हेक्टेयर निम्नीकृत भूमि को बहाल करने का संकल्प लिया था, जिसमें 2030 तक अतिरिक्त 8 मिलियन हेक्टेयर का लक्ष्य था। 2019 में नई दिल्ली में आयोजित UNCCD के पक्षकारों के 14वें सत्र (COP14) में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लक्ष्य को बढ़ाकर 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर कर दिया।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा IUCN द्वारा 17 जून 2026 को संयुक्त रूप से जारी भारत की दूसरी बॉन चैलेंज प्रगति रिपोर्ट के अनुसार:

प्रदर्शन पैरामीटरमात्रात्मक सांख्यिकी / मीट्रिक
बहाल किया गया कुल क्षेत्रफल (2011–2020)21.7 मिलियन हेक्टेयर
संशोधित 2030 बहाली संकल्प26.0 मिलियन हेक्टेयर
क्षरण/मरुस्थलीकरण से प्रभावित कुल क्षेत्रफल97.85 मिलियन हेक्टेयर (कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 29.77%)
क्षरण में वृद्धि (2011–13 से 2018–19)1.45 मिलियन हेक्टेयर (कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 0.44%)
बहाली के माध्यम से सकल कार्बन पृथक्करण461.14 मिलियन टन $\text{CO}_2$ समतुल्य
शुद्ध कार्बन पृथक्करण (मृत्यु दर के लिए समायोजित)343.66 मिलियन टन $\text{CO}_2$ समतुल्य

राज्यवार प्रदर्शन और प्रमुख योजनाएं

2011 और 2020 के बीच भूमि बहाली रोपे गए वनों, प्राकृतिक पुनर्जनन, वन संवर्धन (silviculture), कृषि वानिकी (agroforestry), और मैंग्रोव बहाली के माध्यम से पूरी की गई।

शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य: तेलंगाना ने 4.18 मिलियन हेक्टेयर का उच्चतम बहाली आंकड़ा हासिल किया, जो 3.6 मिलियन हेक्टेयर से अधिक में बड़े पैमाने पर कृषि वानिकी विस्तार द्वारा संचालित था।

अन्य प्रमुख राज्य: मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और आंध्र प्रदेश ने राष्ट्रीय बहाली परिणामों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ये परिणाम प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों और समर्पित राज्य स्तरीय हरित पहलों के समन्वय से प्राप्त हुए:

प्रतिपूरक वनीकरण कोष (CAF / CAMPA)

राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (GIM)

राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (NAP)

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS)

पर्यावरण नीति कार्यान्वयन का विस्तृत विश्लेषण अथर्व एग्जामवाइज करेंट अफेयर्स पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नीतिगत निहितार्थ और रणनीतिक दृष्टिकोण

दूसरी बॉन चैलेंज रिपोर्ट के साथ UNCCD COP17 में इस गाइड का अनावरण भारत की भूमि-उपयोग रणनीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। गैर-वन बायोम को मुख्यधारा की संरक्षण नीति में शामिल करके, राज्य वन विभाग प्राकृतिक रूप से खुले आवासों में अनुपयुक्त वृक्षारोपण पहलों से दूर जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, घास के मैदानों में भूमिगत कार्बन पृथक्करण का आकलन भारत को पेरिस समझौते के लिए भूमि उपयोग, भूमि-उपयोग परिवर्तन और वानिकी (LULUCF) ढांचे के तहत अपनी कार्बन सूची की सटीकता में सुधार करने की अनुमति देता है। ओरान और गोचर जैसी पारंपरिक संस्थाओं के साथ कानूनी भूमि संरक्षण को संरेखित करना शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पशुधन आजीविका की रक्षा करते हुए भूमि क्षरण को रोकने के लिए एक समुदाय-केंद्रित ढांचा प्रदान करता है।

आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

भारत की घास के मैदानों की मार्गदर्शिका, खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र, और बॉन चैलेंज प्रगति रिपोर्ट की व्यापक समझ प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से UPSC सिविल सेवा परीक्षा के कई चरणों के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

पर्यावरण और पारिस्थितिकी: बायोम स्थानों पर सीधे तथ्यात्मक प्रश्न (उदा., लोकतक झील में फुमदी, उत्तराखंड में बुग्याल, या तमिलनाडु में थेरी काडू)।

अंतरराष्ट्रीय संधियां और अभिसमय: UNCCD COP17 मेजबान विवरण (उलानबटार, मंगोलिया), बॉन चैलेंज का सचिवालय (IUCN), और भूमि क्षरण तटस्थता (LDN) लक्ष्यों पर ध्यान।

सरकारी पहल और योजनाएं: CAMPA, हरित भारत मिशन, NAP, और MGNREGS अभिसरण (convergence) से संबंधित विशिष्ट विवरण।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए प्रासंगिकता (GS पेपर III और निबंध)

संरक्षण और पर्यावरण क्षरण: मात्रात्मक डेटा बिंदु (उदा., 21.7 मिलियन हेक्टेयर बहाल, 97.85 मिलियन हेक्टेयर क्षरण से प्रभावित, 343.66 मिलियन टन शुद्ध कार्बन संग्रहीत) पर्यावरण प्रबंधन और जलवायु शमन पर प्रश्नों के लिए अनुभवजन्य साक्ष्य प्रदान करते हैं।

कृषि और ग्रामीण आजीविका: पशुचारक अर्थव्यवस्थाओं, पारंपरिक भूमि कार्यकाल प्रणालियों (ओरान, गोचर), और कृषि वानिकी रणनीतियों पर चर्चा।

विश्लेषणात्मक निबंध लेखन: ऐतिहासिक नीतिगत चूकों (आवासों को "बंजर भूमि" के रूप में गलत लेबल करना) से विज्ञान-आधारित, समावेशी परिदृश्य संरक्षण की ओर संक्रमण को प्रदर्शित करने वाली मजबूत केस स्टडी सामग्री।

प्रमुख परीक्षा अवधारणाओं का सारांश

शब्द / अवधारणासंक्षिप्त परिभाषापरीक्षा अनुप्रयोग
खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (ONEs)गैर-वन बायोम जो प्राकृतिक रूप से खुले वितान (open canopies) और कम वृक्ष घनत्व की विशेषता रखते हैं।प्रारंभिक परीक्षा परिभाषा / मुख्य परीक्षा GS-III
ओरान और गोचरपवित्र सामुदायिक उपवन और पारंपरिक ग्राम चरागाह भूमि।प्रारंभिक परीक्षा संस्कृति/पारिस्थितिकी और मुख्य परीक्षा GS-III
बॉन चैलेंज2020 तक 150 मिलियन हेक्टेयर और 2030 तक 350 मिलियन हेक्टेयर भूमि बहाल करने का वैश्विक संकल्प।प्रारंभिक परीक्षा अंतरराष्ट्रीय अभिसमय
भूमि क्षरण तटस्थता (LDN)एक लक्षित स्थिति जहां स्वस्थ भूमि की मात्रा स्थिर रहती है या बढ़ती है।मुख्य परीक्षा GS-III जलवायु लक्ष्य

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