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UPSC करंट अफेयर्स डेली GK अपडेट: दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क, हिमालयी पारिस्थितिकी और जैव विविधता हॉटस्पॉट | अथर्व एग्जामवाइज करंट न्यूज UPSC करंट अफेयर्स डेली GK अपडेट: दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क, हिमालयी पारिस्थितिकी और जैव विविधता हॉटस्पॉट | अथर्व एग्जामवाइज करंट न्यूज

11 Aug 2026 11 Aug 2026

UPSC करंट अफेयर्स डेली GK अपडेट: दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क, हिमालयी पारिस्थितिकी और जैव विविधता हॉटस्पॉट | अथर्व एग्जामवाइज करंट न्यूज
GK (General Knowledge) Hindi 11 Aug 2026

UPSC करंट अफेयर्स डेली GK अपडेट: दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क, हिमालयी पारिस्थितिकी और जैव विविधता हॉटस्पॉट | अथर्व एग्जामवाइज करंट न्यूज

हिमालय में उच्च-ऊंचाई बुनियादी ढांचा और सामरिक सड़क इंजीनियरिंग

प्रोजेक्ट हिमांक (Project HIMANK) के तहत सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किए गए अभूतपूर्व उच्च-ऊंचाई वाले सिविल इंजीनियरिंग कार्यों के कारण पूर्वी लद्दाख के भू-सामरिक परिदृश्य में एक संरचनात्मक बदलाव आया है। 52 किलोमीटर लंबी चिसुमले-डेमचॉक सड़क का निर्माण और तारकोल से पक्कीकरण, जो 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित उमलिंग ला दर्रे से होकर गुजरती है (जिसके कुछ विशेष क्रेस्ट सड़क खंड 19,300 फीट तक पहुंचते हैं), राष्ट्रीय सीमा अवसंरचना विकास में एक प्रमुख मील का पत्थर है। नवंबर 2021 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक रूप से प्रमाणित, इस पक्की सड़क वाले दर्रे ने बोलीविया में उटुरुंकु ज्वालामुखी ट्रैक द्वारा बनाए गए 18,953 फीट के पिछले वैश्विक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसी परिचालन गति को आगे बढ़ाते हुए, प्रोजेक्ट हिमांक ने मिग ला दर्रे पर 19,400 फीट की ऊंचाई पर लिकारू-मिग ला-फुकचे सड़क अक्ष के निर्माण के साथ एक नया मानदंड स्थापित किया।

इन उच्च-ऊंचाई वाले दर्रों पर इंजीनियरिंग कार्य का निष्पादन अत्यधिक शारीरिक और वायुमंडलीय सीमाओं को पार करता है। निर्माण इकाइयां अत्यधिक उप-शून्य (sub-zero) पर्यावरणीय परिस्थितियों में काम करती हैं, जहां सर्दियों का तापमान -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और वायुमंडलीय ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तलीय सांद्रता की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। कम वायुमंडलीय दबाव के कारण आंतरिक दहन इंजन (Internal combustion engines) गंभीर बिजली गिरावट का सामना करते हैं, जबकि निर्माण कर्मियों को हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (HAPE) और हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा (HACE) के जोखिम को कम करने के लिए व्यवस्थित अनुकूलन प्रोटोकॉल (acclimatization protocols) की आवश्यकता होती है।

उच्च-ऊंचाई अवसंरचना / स्थानऊंचाई / एलिवेशननिर्माण एजेंसी / संरेखणसामरिक एवं भू-आकृतिक महत्व
मिग ला दर्रा सड़क19,400 फीट (5,913 मीटर)बीआरओ / प्रोजेक्ट हिमांक (लिकारू-मिग ला-फुकचे)फुकचे के पास महत्वपूर्ण सीमा चौकियों को जोड़ता है; दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क का रिकॉर्ड रखता है।
उमलिंग ला दर्रा सड़क19,024–19,300 फीट (5,799 मीटर)बीआरओ / प्रोजेक्ट हिमांक (चिसुमले-डेमचॉक)पूर्वी लद्दाख में चिसुमले और डेमचॉक को जोड़ता है; आधिकारिक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणन प्राप्तकर्ता।
उटुरुंकु ज्वालामुखी सड़क (बोलीविया)18,953 फीट (5,777 मीटर)नागरिक अवसंरचना / कच्चा ट्रैकउच्च-ऊंचाई वाली मोटरेबल पहुंच के लिए पूर्व रिकॉर्ड धारक।
सियाचिन ग्लेशियर सैन्य अड्डा17,700 फीट (5,395 मीटर)भारतीय सशस्त्र बल रक्षा अक्षउच्च-ऊंचाई वाला सैन्य क्षेत्र; उमलिंग ला और मिग ला दर्रों दोनों से ऊंचाई में कम।
एवरेस्ट साउथ बेस कैंप (नेपाल)17,598 फीट (5,364 मीटर)गैर-मोटरेबल ट्रेकिंग मार्गलद्दाख की पक्की सड़कों की ऊंचाई से नीचे स्थित अंतरराष्ट्रीय अल्पाइन बेस कैंप।
खारदुंग ला दर्रा17,582 फीट (5,359 मीटर)बीआरओ / प्रोजेक्ट हिमांकलेह को श्योक और नुब्रा घाटियों से जोड़ने वाला ऐतिहासिक मुख्य द्वार।

इन सड़कों के सामरिक निहितार्थ राष्ट्रीय रक्षा और क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों दोनों में विस्तृत हैं। भू-राजनीतिक रूप से, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ डेमचॉक और फुकचे जैसी सीमावर्ती बस्तियों के लिए प्रत्यक्ष वाहन पहुंच स्थापित करने से तेजी से बल-प्रक्षेपण क्षमताओं (rapid force-projection capabilities) और सैन्य रसद में सुधार होता है। सामाजिक-आर्थिक रूप से, वर्षभर पक्की कनेक्टिविटी मिलने से अलग-थलग पड़े चरवाहा समुदाय व्यापक क्षेत्रीय बाजारों के साथ एकीकृत होते हैं, लेह तक यात्रा का समय कम होता है, और उच्च-ऊंचाई वाले साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। सीमा अवसंरचना विकास का विस्तृत कवरेज नियमित रूप से अथर्व एग्जामवाइज करंट न्यूज पोर्टल पर अपडेट किया जाता है, जिसमें प्राथमिक आधिकारिक अधिसूचनाएं पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति निर्देशिका के माध्यम से उपलब्ध हैं।

मुख्य तथ्य: उच्च-ऊंचाई अवसंरचना डेटा

विश्व रिकॉर्ड ऊंचाई: उमलिंग ला दर्रा 19,024 फीट (5,799 मीटर) पर स्थित है, जिसमें शीर्ष तारकोल खंड 19,300 फीट तक पहुंचते हैं, जो इसे माउंट एवरेस्ट साउथ बेस कैंप (17,598 फीट) और नॉर्थ बेस कैंप (16,900 फीट) दोनों से अधिक ऊंचा बनाता है।

प्रोजेक्ट हिमांक की भूमिका: बीआरओ के प्रोजेक्ट हिमांक के तहत निर्मित, 52 किमी लंबी चिसुमले-डेमचॉक सड़क को नवंबर 2021 में आधिकारिक रूप से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्राप्त हुआ।

अगला मील का पत्थर: मिग ला दर्रा सड़क संरेखण (19,400 फीट) ने लिकारू-मिग ला-फुकचे अक्ष के साथ भारत के सीमावर्ती नेटवर्क का और विस्तार किया।

चरम परिचालन स्थितियां: निर्माण और रखरखाव कर्मियों को -40°C तक तापमान में गिरावट और परिवेशी ऑक्सीजन के स्तर में 50 प्रतिशत की कमी का सामना करना पड़ता है।

भारतीय हिमालय का भौतिक भूगोल और अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र

भारतीय हिमालय क्षेत्र (IHR) दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप के प्राथमिक भौतिक अवरोधक और जलवायु नियामक का निर्माण करता है। सेनोज़ोइक युग के दौरान यूरेशियन प्लेट के साथ भारतीय टेक्टोनिक प्लेट की टक्कर के माध्यम से भूगर्भीय रूप से निर्मित यह भूभाग अत्यधिक ऊर्ध्वाधर स्थलाकृति (vertical topography) पेश करता है। भारत में औसत समुद्र तल से 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली 138 से अधिक पर्वत चोटियां शामिल हैं। यह ऊर्ध्वाधर वितरण लद्दाख, लाहौल-स्पीति और ऊपरी सिक्किम में उष्णकटिबंधीय तलहटी घाटियों से लेकर अल्पाइन शीत मरुस्थलों तक विविध सूक्ष्म-जलवायु क्षेत्रों का निर्माण करता है।

उच्च-ऊंचाई संचालन, वैज्ञानिक अनुसंधान और खोज-एवं-बचाव क्षमताओं का समर्थन करने के लिए, भारत ने प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों का एक नेटवर्क स्थापित किया। दार्जिलिंग में हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (HMI), उत्तरकाशी में नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM), और पहलगाम में जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (JIM&WS) जैसे संस्थानों ने वैश्विक स्तर पर किसी भी समकक्ष राष्ट्रीय प्रणाली की तुलना में अधिक प्रमाणित पर्वतारोहियों और उच्च-ऊंचाई बचाव विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया है।

ऊंचाई क्षेत्रऊंचाई सीमाप्रचलित वनस्पति / परिदृश्यप्रमुख पारिस्थितिक एवं पर्यावरणीय गतिशीलता
निवल क्षेत्र (Nival Zone)5,000 मीटर से ऊपरस्थायी हिमक्षेत्र, ग्लेशियर, क्रस्टोज़ लाइकेनक्रायोटर्बेशन (मृदा विकृति), गंभीर फ्रीज-थॉ चक्र, अत्यधिक सौर विकिरण, वनस्पति-रहित भूभाग।
अल्पाइन क्षेत्र (Alpine Zone)3,500 से 5,000 मीटरअल्पाइन घास के मैदान (बुग्याल), बौनी झाड़ियां, काई (mosses)मौसमी चराई के मैदान, उच्च-ऊंचाई परमाफ्रॉस्ट, कम बायोमास उत्पादकता।
उप-अल्पाइन क्षेत्र (Sub-Alpine Zone)2,800 से 3,500 मीटरभोजपत्र (Birch), रोडोडेंड्रोन (बुरांश), सिल्वर फरइको-टोन संक्रमण क्षेत्र, तापीय भिन्नताओं और ट्री-लाइन (टिम्बरलाइन) बदलाव के प्रति संवेदनशील।
समशीतोष्ण क्षेत्र (Temperate Zone)1,500 से 2,800 मीटरदेवदार, ओक, मैपल, ब्लू पाइन के जंगलघना वितान (canopy) आवरण, हिमालयी बारहमासी नदियों के लिए प्राथमिक जलग्रहण क्षेत्र।
उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Subtropical Zone)1,500 मीटर से नीचेसाल के जंगल, मिश्रित पर्णपाती, बांस के झुरमुटउच्च प्राथमिक उत्पादकता, मानव बस्ती गलियारे, भूमि-उपयोग परिवर्तन का दबाव।

अत्यधिक ऊंचाई प्रवणता (elevation gradient) हिमालयी जलसम्भर (watersheds) में स्पष्ट पारिस्थितिक क्षेत्रीकरण बनाती है:

वायुमंडलीय और तापीय संपीडन: जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, बैरोमीटर का दबाव कम होता जाता है, जिससे तीव्र रुद्धोष्म शीतलन (adiabatic cooling) और गंभीर दैनिक तापमान में उतार-चढ़ाव होता है।

परमाफ्रॉस्ट और मृदा भू-आकृति विज्ञान: उच्च-ऊंचाई वाली मिट्टी में जैविक अपघटन की दर कम होती है, जिससे पतली पेडोलॉजिकल परतें बारिश से प्रेरित ढलान विफलता और मृदा अपरदन के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।

जलवैज्ञानिक गतिशीलता: हिमालयी ग्लेशियर सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र सहित प्रमुख नदी प्रणालियों के उद्गम स्रोत के रूप में कार्य करते हैं, जो उत्तर भारत में क्षेत्रीय कृषि चक्रों को नियंत्रित करते हैं।

हिमालयी भू-आकृति विज्ञान पर गहन विश्लेषणात्मक मॉड्यूल अथर्व एग्जामवाइज भूगोल नोट्स के माध्यम से उपलब्ध हैं।

मुख्य तथ्य: भौतिक भूगोल और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र

6,000 मीटर वाली चोटियां: भारत 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली 138 से अधिक पर्वत चोटियों का घर है, जो स्थानीय पर्वतीय (orographic) मौसम पैटर्न और हिमनद गतिविधियों को संचालित करती हैं।

वैश्विक पर्वतारोहण केंद्र: भारतीय पर्वतारोहण प्रशिक्षण केंद्र तकनीकी उच्च-ऊंचाई उत्तरजीविता, अभियान नेतृत्व और अल्पाइन बचाव प्रमाणन में विश्व स्तर पर अग्रणी हैं।

बारहमासी जलविज्ञान: बर्फबारी का पिघलना और उच्च हिमालयी श्रृंखलाओं से ग्लेशियर का बहाव प्रमुख दक्षिण एशियाई नदी नेटवर्क के आधार प्रवाह को बनाए रखता है।

जैव विविधता हॉटस्पॉट और यूनेस्को मिश्रित विश्व धरोहर स्थल

भारत के पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र जैविक विविधता के महत्वपूर्ण भंडार के रूप में कार्य करते हैं, जो अल्पाइन, उप-अल्पाइन और समशीतोष्ण वन क्षेत्रों में संरक्षित 15,000 से अधिक पौधों की प्रजातियों के लिए आवास प्रदान करते हैं। ये वनस्पति समुदाय जल-संरक्षण, कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration), और तीव्र नदी जलग्रहण क्षेत्रों में ढलान स्थिरीकरण सहित महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, कंजर्वेशन इंटरनेशनल 36 वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट निर्दिष्ट करता है जो अत्यधिक प्रजाति स्थानिकता (species endemics) और गंभीर आवास हानि की विशेषता रखते हैं। भारत इनमें से चार हॉटस्पॉट का प्रतिनिधित्व करता है: हिमालय, पश्चिमी घाट, भारत-वर्मा क्षेत्र और सुंडालैंड। इनमें से दो—पूर्वी हिमालय और पश्चिमी घाट—पूर्ण या मुख्य रूप से भारतीय क्षेत्र के भीतर स्थित हैं।

क्षेत्र / स्थल का नामसंरक्षण स्थिति / श्रेणीजैव विविधता विशेषताएंप्रमुख स्थानिक एवं संकटग्रस्त प्रजातियां
पूर्वी हिमालयवैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉटउच्च ऊर्ध्वाधर प्रवणता, अल्पाइन घास के मैदान, समशीतोष्ण शंकुधारी वन।लाल पांडा (Ailurus fulgens), हिम तेंदुआ (Panthera uncia), ऑर्किडेसी स्थानिक प्रजातियां।
पश्चिमी घाटवैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉटउष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, मोंटेन शोला-घास के मैदान का जटिल ढांचा।लायन-टैल्ड मैकाक (शेर की पूंछ वाला बंदर), नीलगिरि तहर, स्थानिक उभयचर (amphibian) समूह।
कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यानयूनेस्को मिश्रित विश्व धरोहर स्थल (2016)1,200 मीटर से 8,586 मीटर ऊंचाई तक फैला हुआ; प्राकृतिक और सांस्कृतिक मानदंडों को एकीकृत करता है।हिमालयी कस्तूरी मृग, तिब्बती भेड़िया, पवित्र बौद्ध/लेप्चा परिदृश्य विशेषताएं।

भारतीय पारिस्थितिक संरक्षण में एक केंद्रीय मील का पत्थर सिक्किम में कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान (KNP) है, जिसे यूनेस्को के विश्व धरोहर सम्मेलन के तहत भारत के एकमात्र 'मिश्रित विश्व धरोहर स्थल' के रूप में 2016 में अंकित किया गया था। मिश्रित स्थल पदनाम के लिए प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों विरासत मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है:

प्राकृतिक मानदंड (vii और x): KNP में उपोष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी तंत्र से लेकर माउंट कंचनजंगा के शिखर (8,586 मीटर, पृथ्वी पर तीसरी सबसे ऊंची चोटी) तक नाटकीय स्थलाकृति शामिल है। इसमें जेमू ग्लेशियर जैसे प्रमुख ग्लेशियर, उच्च-ऊंचाई वाले टार्न (झीलें), और लुप्तप्राय अल्पाइन जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास शामिल हैं।

सांस्कृतिक मानदंड (iii और vi): यह पार्क स्वदेशी लेप्चा लोगों के लिए 'मायेल ल्यांग' के पवित्र भूगोल और तिब्बती बौद्ध धर्म में 'बेयुल' (पवित्र गुप्त क्षेत्र) के सांस्कृतिक परिदृश्य की रक्षा करता है। पहाड़ों, गुफाओं और नदियों सहित स्थानीय परिदृश्य की विशेषताएं जीवित धार्मिक परंपराओं और पवित्र भूगोल में सक्रिय रूप से एकीकृत बनी हुई हैं।

अभ्यर्थी अथर्व एग्जामवाइज पर्यावरण अनुभाग के माध्यम से व्यापक पर्यावरणीय प्रोफाइल का पता लगा सकते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय विरासत डेटाशीट को यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र पोर्टल पर संदर्भित किया जा सकता है।

मुख्य तथ्य: जैव विविधता और विरासत डेटा

मिश्रित विश्व धरोहर स्थिति: कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक मानदंडों (vii, x) और सांस्कृतिक मानदंडों (iii, vi) को पूरा करने वाला भारत का एकमात्र यूनेस्को मिश्रित विश्व धरोहर स्थल है।

वैश्विक हॉटस्पॉट: भारत 4 वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के महत्वपूर्ण हिस्सों को आश्रय देता है, जिसमें पूर्वी हिमालय और पश्चिमी घाट मुख्य रूप से देश के भीतर स्थित हैं।

वनस्पति विविधता: भारत में पर्वतीय वन पारिस्थितिकी तंत्र 15,000 से अधिक पौधों की प्रजातियों को आश्रय देते हैं, जो औषधीय और पारिस्थितिक संसाधनों के लिए एक महत्वपूर्ण आनुवंशिक भंडार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा (CSE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए उच्च-ऊंचाई वाली सड़क अवसंरचना, भौतिक भू-आकृति विज्ञान और पर्वतीय जैव विविधता को समझना आवश्यक है। यह विषय भौतिक भूगोल, पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और राष्ट्रीय सुरक्षा को आपस में जोड़ता है।

UPSC सामान्य अध्ययन पत्र संरेखण

UPSC प्रारंभिक परीक्षा (GS पेपर I - भूगोल और पर्यावरण):

स्थान-आधारित और भौतिक मानचित्रण: उच्च-ऊंचाई वाले दर्रों (उमलिंग ला, मिग ला, खारदुंग ला), पर्वत श्रृंखलाओं और शीत मरुस्थल भू-आकृति विज्ञान पर प्रश्न।

पारिस्थितिकी और संरक्षण: यूनेस्को विश्व धरोहर मानदंडों, वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट और संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क (जैसे, KNP) से संबंधित सीधे प्रश्न।

UPSC मुख्य परीक्षा (GS पेपर I - भौतिक भूगोल):

विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएं: उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्वत-निर्माण प्रक्रियाओं, ऊर्ध्वाधर जलवायु क्षेत्रीकरण, वनस्पति परिवर्तन और हिमनद के पीछे हटने का विश्लेषण।

UPSC मुख्य परीक्षा (GS पेपर III - सुरक्षा और पर्यावरण):

सीमावर्ती क्षेत्र अवसंरचना: अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ बीआरओ द्वारा निर्मित दोहरे उपयोग वाले परिवहन नेटवर्क (नागरिक परिवहन बनाम रक्षा लामबंदी) का रणनीतिक मूल्यांकन।

पर्यावरण प्रभाव और संरक्षण: संवेदनशील जैव विविधता हॉटस्पॉट के भीतर पारिस्थितिक संरक्षण के साथ सीमा सुरक्षा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का संतुलन बनाना।

परीक्षा रणनीति और उत्तर लेखन एकीकरण

प्रारंभिक परीक्षा में तथ्यात्मक सटीकता: वैश्विक ऊंचाई रिकॉर्ड के संबंध में कथन-आधारित प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए उमलिंग ला (19,024 फीट) और मिग ला (19,400 फीट) के बीच अंतर स्पष्ट रखें।

अंतर-विषयक मुख्य परीक्षा संश्लेषण: सीमा विकास पर प्रश्नों का उत्तर देते समय, इंजीनियरिंग उपलब्धियों (प्रोजेक्ट हिमांक) को एलएसी (LAC) के साथ सीमावर्ती जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक समावेशन और रक्षा तैयारियों से जोड़ें।

संरचनात्मक पारिस्थितिक रूपरेखा: 'मिश्रित विरासत' प्रबंधन के लिए एक केस स्टडी के रूप में कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान का हवाला दें, यह प्रदर्शित करते हुए कि कैसे स्वदेशी सांस्कृतिक सुरक्षा जैविक संरक्षण के साथ संरेखित होती है।

कस्टमाइज्ड मॉक टेस्ट और उत्तर-लेखन अभ्यास के लिए, अथर्व एग्जामवाइज प्रैक्टिस सीरीज पर जाएं।

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