यूपीएससी करंट अफेयर्स 9 जुलाई 2026: भारत का पहला मोबाइल स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री (SALT) | दैनिक जीके अपडेट

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SALT का तकनीकी डिज़ाइन और मुख्य तंत्र (Core Mechanism)

स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री (SALT) मौलिक रूप से एक कॉम्पैक्ट, विशिष्ट फोटोबायोरिएक्टर (photobioreactor) के रूप में कार्य करता है जो अत्यधिक केंद्रित पैमाने पर प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की प्राकृतिक प्रक्रिया की नकल करता है। पारंपरिक स्थलीय पत्तियों (जमीन पर उगने वाले पौधों) का उपयोग करने के बजाय, इस सिस्टम में एक बंद, पारदर्शी मॉड्यूलर इकाई के भीतर पानी में तैरते (suspended) सूक्ष्म, एक-कोशिका वाले मीठे पानी के माइक्रोएल्गी (microalgae/सूक्ष्म शैवाल) मौजूद होते हैं। CSIR-CIMFR की वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक वेत्रिवेल अंगुसेल्वी (Vetrivel Anguselvi) के नेतृत्व में, इंजीनियरिंग टीम ने इस इकाई को प्रदूषित बाहरी हवा को अंदर खींचने, इसे तरल माध्यम से बुदबुदाने (bubble) और माइक्रोएल्गी के साथ सीधे संपर्क की सुविधा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया है।

इस परस्पर क्रिया (interaction) के दौरान, माइक्रोएल्गी प्रकाश संश्लेषण करने के लिए प्रकाश — या तो प्राकृतिक धूप या इन-बिल्ट कृत्रिम प्रकाश (artificial lighting) — का उपयोग करते हैं। यह जैविक तंत्र इन जीवों को लगातार कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) को अवशोषित करने और वापस वायुमंडल में शुद्ध ऑक्सीजन ($O_2$) छोड़ने में सक्षम बनाता है।

गैस विनिमय (gas exchange) के अलावा, तरल माध्यम के माध्यम से हवा का भौतिक रूप से बुदबुदाना (bubbling) हवा में तैरते हुए कणिकीय पदार्थों (suspended particulate matter) को फंसा लेता है, जिससे आस-पास के वातावरण में धूल, PM2.5 और PM10 की सांद्रता (concentration) काफी कम हो जाती है। संरचनात्मक स्वायत्तता (structural autonomy) सुनिश्चित करने और सार्वजनिक उपयोगिता का समर्थन करने के लिए, SALT कियोस्क को एक हाइब्रिड पावर सिस्टम के साथ तैयार किया गया है जो एकीकृत सौर ऊर्जा (solar energy) और पारंपरिक बिजली दोनों पर चलता है।

 

What is SALT, India's first mobile "liquid tree" designed to ...

भारत का स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री (SALT). Source: The Hans India / What is SALT, India's first mobile "liquid tree" designed to ...

बेलग्रेड का लिक्विड 3 (LIQUID 3) मॉडल. Source: Baloncici / Getty Images

 

जैविक क्षमताएं और एल्गल स्ट्रेन (शैवाल प्रजातियों) का चयन

SALT सिस्टम की जैविक दक्षता मुख्य रूप से चुनी गई माइक्रोएल्गल स्ट्रेन्स (सूक्ष्म शैवाल की प्रजातियों) के विशिष्ट शारीरिक लक्षणों (physiological traits) पर निर्भर करती है। माइक्रोएल्गी अविच्छिन्न रूप से कुशल प्राकृतिक कार्बन सिंक (carbon sinks) हैं; वे पृथ्वी की वायुमंडलीय ऑक्सीजन का लगभग आधा हिस्सा पैदा करने और वैश्विक स्तर पर सालाना लगभग 50 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड को स्थिर (fix) करने के लिए जिम्मेदार हैं।

सामान्य वैज्ञानिक साहित्य के अनुसार, माइक्रोएल्गी प्रकाश संश्लेषण और कार्बन-सोखने (carbon-sequestration) की ऐसी दक्षता प्रदर्शित करते हैं जो जमीन पर उगने वाले पौधों की तुलना में 10 गुना से 50 गुना ($10\times$ to $50\times$) अधिक होती है। कुछ विशिष्ट स्ट्रेन, जैसे कि क्लोरेला वुलगैरिस (Chlorella vulgaris), ने क्लोज्ड-लूप बायोबायोरिएक्टर में अनुकूलतम मापदंडों के तहत उगाए जाने पर पारंपरिक पेड़ों की तुलना में 400 गुना ($400\times$) अधिक कार्बन-कैप्चर क्षमता का प्रदर्शन किया है।

SALT के घरेलू विकास के लिए, CSIR-CIMFR के शोधकर्ताओं ने शहरी और औद्योगिक प्रदूषण के भौतिक और रासायनिक तनावों को सहन करने के लिए विशिष्ट मीठे पानी के एल्गल स्ट्रेन्स को अलग (isolate), जांच (screen) और अनुकूलित (optimize) किया है।

अलग की गई एल्गल स्ट्रेन्स और उनकी प्रदर्शन विशेषताएं

एल्गल जीनस (शैवाल वंश)प्राथमिक शारीरिक और परिचालन विशेषताएंपर्यावरणीय सहनशीलता और मजबूतीमूल्य-वर्धित उप-उत्पाद (By-Product) की संभावना
Chlorella (क्लोरेला)उच्च विकास दर, तीव्र कोशिकीय विभाजन, और असाधारण प्रकाश संश्लेषक रूपांतरण दक्षता।उत्कृष्ट तापीय स्थिरता (thermal stability); पोषक तत्वों के स्तर में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक सहिष्णु।प्रोटीन और अमीनो एसिड से भरपूर; जैविक जैव-उर्वरक (organic biofertilizers) और पशु आहार के लिए आदर्श।
Oscillatoria (ऑसिलेटोरिया)तंतुमय संरचना (Filamentous) जो बायोबायोरिएक्टर के भीतर विशेष रेशेदार सांचों पर तेजी से विकास का समर्थन करती है।$Na^+$, $Mg^{++}$, $Ni^{++}$, और $Co^{++}$ सहित धात्विक आयनों के प्रति उच्च प्रतिरोध।खाद (compost) और बायोगैस रूपांतरण के लिए कटी हुई गीली बायोमास की उत्कृष्ट उपज।
Spirogyra (स्पाइरोगाइरा)मजबूत तंतुमय हरा शैवाल, जो मीठे पानी के माध्यम में तेजी से बायोमास संचय (accumulation) की विशेषता रखता है।गैसीय ट्रेस हाइड्रोकार्बन और फ्लू गैस (flue gas) दूषित पदार्थों के प्रति मध्यम से उच्च सहनशीलता।उच्च कार्बोहाइड्रेट सामग्री जो डाउनस्ट्रीम बायोएथेनॉल किण्वन (fermentation) के लिए उपयुक्त है।
Oedogonium (ईडोगोनियम)उच्च सतह क्षेत्र-से-आयतन अनुपात वाला तंतुमय हरा शैवाल जो कुशल पोषक तत्व अवशोषण की सुविधा देता है।विभिन्न प्रकार के पानी की गुणवत्ता में पनपता है; मौसमी तापमान में गिरावट के प्रति अत्यधिक लचीला।अपशिष्ट जल (wastewater) एकीकरण और उर्वरक उत्पादन के लिए एक जैव-उपचारक (bio-remediator) के रूप में प्रभावी।
Hydrodictyon (हाइड्रोडिक्ट्योन)"वॉटर नेट" (जल जाल) शैवाल के रूप में जाना जाता है; संवर्धन कक्ष के भीतर व्यापक बहुकोशकीय नेटवर्क बनाता है।उच्च-$CO_2$ वातावरण (फ्लू गैसों से 13% से 15% सांद्रता) में अत्यधिक स्थिर।जैविक मृदा कंडीशनर (organic soil conditioners) और कृषि जैव-उत्तेजक फॉर्मूलेशन के लिए उपयुक्त।

कोशिकाओं के विभाजित होने के साथ ही इस सिस्टम का जैविक चक्र माइक्रोएल्गल बायोमास उत्पन्न करता है। इस बायोमास को समय-समय पर, आमतौर पर हर छह से आठ सप्ताह में निकाला (harvest) जाना चाहिए, जो सिस्टम को बंद (clogging) होने से रोकता है और साथ ही एक जैविक उप-उत्पाद प्रदान करता है जिसे जैविक उर्वरक या मृदा कंडीशनर के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो एक चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था (circular bioeconomy) को बढ़ावा देता है।

वायु शोधन समाधानों का तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis)

SALT तकनीक की विकासात्मक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए, इसकी तुलना मौजूदा वैश्विक उदाहरणों और प्राकृतिक पारिस्थितिक आधार रेखाओं (ecological baselines) से की जानी चाहिए। नगरपालिका वायु शोधन के लिए एक-कोशिका वाले शैवाल का उपयोग करने की अवधारणा की शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्बिया के बेलग्रेड विश्वविद्यालय में 'इंस्टीट्यूट फॉर मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च' द्वारा डिज़ाइन किए गए "LIQUID 3" प्रोजेक्ट द्वारा की गई थी, जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा एक उत्कृष्ट क्लाइमेट-स्मार्ट इनोवेशन के रूप में मान्यता दी गई थी।

शोधन अवसंरचनाओं का तकनीकी और परिचालन तुलनात्मक विवरण

मीट्रिक / पैरामीटरCSIR-CIMFR SALT (भारत)बेलग्रेड LIQUID 3 (सर्बिया)पारंपरिक शहरी पेड़
गतिशीलता और फुटप्रिंटअत्यधिक गतिशील (mobile); प्रदूषण हॉटस्पॉट्स तक ले जाने योग्य कॉम्पैक्ट मॉड्यूलर डिज़ाइन।स्थिर नगरपालिका संरचना जिसके लिए स्थायी रूप से सड़क पर स्थापना की आवश्यकता होती है।निश्चित जड़ प्रणाली; महत्वपूर्ण भूमिगत मिट्टी के आयतन की आवश्यकता होती है।
वॉल्यूमेट्रिक क्षमतातंग सड़क के कोनों और औद्योगिक परिसरों के लिए अनुकूलित कॉम्पैक्ट स्थानीयकृत डिज़ाइन।केंद्रीय नगरपालिका प्लाजा के लिए डिज़ाइन की गई 600-लीटर पानी की टैंक क्षमता।गैर-जलीय (Non-aquatic); प्रजातियों की परिपक्वता के आधार पर परिवर्तनशील भौतिक फुटप्रिंट।
अनुमानित पारिस्थितिक समतुल्यताएक इकाई पारंपरिक 10 से 50 पेड़ों के वायु-सफाई प्रभाव के बराबर होने का अनुमान है।दो 10 साल पुराने पेड़ों या लगभग 200 वर्ग मीटर सक्रिय लॉन की जगह लेता है।बेसलाइन मानक ($1\times$)।
बिजली स्वायत्ततामानक AC ग्रिड बैक-अप के साथ एकीकृत सौर फोटोवोल्टिक (Solar photovoltaic)।सीधे नगरपालिका ग्रिड कपलिंग के साथ सौर पैनल-संचालित रात्रि प्रकाश व्यवस्था।पूरी तरह से निष्क्रिय सौर (Fully passive solar); किसी अतिरिक्त ऊर्जा इनपुट की आवश्यकता नहीं।
संवेदी फीडबैक (Sensory Feedback)PM2.5, PM10, $CO_2$, तापमान और सापेक्ष आर्द्रता (relative humidity) पर वास्तविक समय का डेटा प्रदर्शित करता है।उन्नत वायुमंडलीय नैदानिक टेलीमेट्री (diagnostic telemetry) के बिना बुनियादी लाइटिंग डिस्प्ले।निष्क्रिय जैविक एकीकरण; कोई डिजिटल पर्यावरणीय निदान नहीं।
सार्वजनिक उपयोगिता सुविधाएँ4 से 8 लोगों के लिए छायादार बैठने की जगह, एकीकृत लैपटॉप/फोन चार्जिंग पॉइंट।एकीकृत नगरपालिका बेंच, रात भर सड़क पर रोशनी और USB डिवाइस चार्जर।प्राकृतिक छतरी (canopy) छाया, स्थानीय शीतलन (cooling) और जैव विविधता आवास प्रदान करता है।
कीटों के प्रति संवेदनशीलताशून्य कीट संवेदनशीलता; बंद जैविक फोटोबायोरिएक्टर (photobioreactor) सेटअप।बंद टैंक प्रणाली; विशिष्ट शहरी पारिस्थितिक खतरों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी।शहरी रोगजनकों (pathogens), कीटों, मिट्टी के संकुचन (compaction) और गंभीर धुंध के प्रति अत्यधिक संवेदनशील।

राष्ट्रीय नीति ढांचा और NCAP (National Policy Framework & NCAP)

प्रतियोगी परीक्षाओं के समसामयिक समाचारों (current news) का एक मुख्य विषय राष्ट्रीय पर्यावरण नीतियों, विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के साथ जैव प्रौद्योगिकी का संरेखण (alignment) है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा 2019 में शुरू किए गए NCAP का मूल लक्ष्य 2017 को बेसलाइन वर्ष मानते हुए 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5) की सांद्रता में 20% से 30% की कमी लाना था। इसके बाद इन लक्ष्यों को संशोधित किया गया, जिसके तहत वर्ष 2026 तक 130 'नॉन-अटेनमेंट' (गैर-प्राप्ति वाले) और दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में PM10 के स्तर में 40% तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम अनुपालन की स्थिति (2025–2026 संकेतक)

पार्टिकुलेट मैटर मानक (PM10): व्यापक निगरानी डेटा वाले 229 शहरों में से 190 शहर PM10 के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा करने में विफल रहे, जो धूल और बड़े कणों को नियंत्रित करने में लगातार बनी रहने वाली चुनौतियों को रेखांकित करता है।

पार्टिकुलेट मैटर मानक (PM2.5): 231 निगरानी वाले शहरों में से 103 शहरों ने मानक सीमाओं को पार कर लिया, जिसमें उत्तरी औद्योगिक क्षेत्रों और भारत-गंगा के मैदानी इलाकों (Indo-Gangetic Plain) में गंभीर सांद्रता के शिखर (peaks) दर्ज किए गए।

वित्तीय और व्यय विसंगतियाँ (Financing and Spending Skews): हालांकि कार्यक्रम की शुरुआत से ही गैर-प्राप्ति वाले नगर निकायों को लगभग 13,415 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, लेकिन इन फंडों का केवल 74% (9,929 करोड़ रुपये) ही उपयोग किया जा सका है। इसके अलावा, नगरपालिकाओं का खर्च अत्यधिक असंतुलित बना हुआ है, जिसमें 68% हिस्सा पूरी तरह से सड़क की धूल के प्रबंधन (road dust management) के लिए आवंटित किया गया है, जबकि औद्योगिक उत्सर्जन में कमी (industrial emission abatement), सार्वजनिक आउटरीच, और प्रत्यक्ष प्रदूषण-नियंत्रण तकनीकों को 1% से भी कम प्राप्त हुआ है।

नॉन-अटेनमेंट हॉटस्पॉट (Non-Attainment Hotspots): दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर PM10 के लिए अत्यधिक प्रदूषित बने हुए हैं, जबकि बार्नीहाट (असम), दिल्ली और गाजियाबाद PM2.5 के घनत्व में देश में सबसे आगे हैं।

यह नीतिगत माहौल यह स्पष्ट करता है कि नगरपालिका प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल सामान्य वनीकरण/हरियाली के प्रयास ही एकमात्र रणनीति क्यों नहीं हो सकते। पारंपरिक शहरी पेड़ों की छतरियों (canopies) को परिपक्व होने में स्थान, मिट्टी और दशकों का समय लगता है। इसके विपरीत, SALT जैसे मोबाइल एल्गल फोटोबायोरिएक्टर की तीव्र कार्बन-कैप्चर क्षमताएं अत्यधिक स्थानीयकृत और तुरंत तैनात करने योग्य उपाय प्रदान करती हैं।

SALT का पहले से ही अत्यधिक चुनौतीपूर्ण वातावरणों में पायलट-परीक्षण किया जा चुका है: धनबाद में CSIR-CIMFR अनुसंधान परिसर और सिंगरौली, मध्य प्रदेश में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) के सक्रिय कोयला खनन कार्यों में। यह औद्योगिक कार्यान्वयन (industrial implementation) दर्शाता है कि जैव प्रौद्योगिकी सक्रिय रूप से भारी उत्सर्जन को उनके स्रोत पर ही कम कर सकती है, जो NCAP के तहत क्षेत्रीय प्रशासनिक योजनाओं को पूरा करती है।

मुख्य तथ्य और परीक्षा-उपयोगी डेटा (Key Facts & Exam-Relevant Data)

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों (Aspirants) को त्वरित संदर्भ और रिवीजन के लिए निम्नलिखित उच्च-उपज वाले तथ्यों (high-yield facts) को प्राथमिकता देनी चाहिए:

आधिकारिक नाम और संक्षिप्त रूप: स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री (SALT)।

विकासकर्ता संस्थान: वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद – केंद्रीय खनन और ईंधन अनुसंधान संस्थान (CSIR-CIMFR), जो केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत संचालित CSIR की एक प्रमुख घटक प्रयोगशाला है।

CSIR-CIMFR का ऐतिहासिक उद्गम: इसका गठन 2007 में केंद्रीय ईंधन अनुसंधान संस्थान (CFRI, स्थापना 1946) और केंद्रीय खनन अनुसंधान संस्थान (CMRI, स्थापना 1956) के रणनीतिक विलय के माध्यम से किया गया था।

मुख्यालय का स्थान: धनबाद, झारखंड, जिसे "भारत की कोयला राजधानी" के रूप में जाना जाता है।

प्रमुख पायलट परियोजनाएं: धनबाद में CSIR-CIMFR परिसर और सिंगरौली, मध्य प्रदेश में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) कोयला खदान सुविधा में साइट पर स्थापित किया गया।

मुख्य जैव-माध्यम (Bio-Medium): एक बंद फोटोबायोरिएक्टर के भीतर पानी में तैरते (suspended) माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल)।

गैस कैप्चर प्रक्रिया: सौर ऊर्जा और AC ग्रिड बिजली का उपयोग करने वाले डुअल-एनर्जी सेटअप द्वारा संचालित प्राकृतिक प्रकाश संश्लेषण, जो रात में कृत्रिम प्रकाश के तहत निरंतर संचालन की अनुमति देता है।

सार्वजनिक सुविधा की विशेषताएं: लैपटॉप और सेलुलर डिवाइस चार्जिंग पोर्ट के साथ चार से आठ नागरिकों के लिए बैठने योग्य मॉड्यूलर कियोस्क।

पर्यावरणीय निदान (Environmental Diagnostics): इन-बिल्ट टेलीमेट्री सेंसर जो PM2.5, PM10, कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), तापमान और सापेक्ष आर्द्रता के लिए वास्तविक समय के मानों (values) की निगरानी और प्रदर्शन करते हैं।

यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा और अन्य राज्य-स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री (SALT) के विकास और नीतिगत संदर्भ को समझना अत्यधिक मूल्यवान है। यह सीधे पाठ्यक्रम (syllabus) के कई खंडों से मेल खाता है:

सामान्य अध्ययन (GS) पेपर III: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology)

SALT सिस्टम जैव प्रौद्योगिकी (biotechnology) और पर्यावरण इंजीनियरिंग का एक व्यावहारिक उदाहरण है। UPSC के प्रश्न अक्सर जैविक प्रक्रियाओं के वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करते हैं — जैसे कि जैव-उपचार (bioremediation), नगरपालिका कार्बन कैप्चर और जैव-ऊर्जा उत्पादन के लिए माइक्रोएल्गी का उपयोग करना। उम्मीदवारों को इस केस स्टडी का उपयोग यह चर्चा करने के लिए करना चाहिए कि आधुनिक औद्योगिक समस्याओं को हल करने के लिए एक-कोशिका वाले जीवों को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (public infrastructure) में कैसे एकीकृत किया जा सकता है।

सामान्य अध्ययन (GS) पेपर III: पर्यावरण और जैव विविधता (Environment and Biodiversity)

यह विषय सीधे पर्यावरणीय क्षरण (environmental degradation) और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित है। निबंधों या शहरी वायु प्रदूषण से संबंधित GS3 के उत्तरों में, उम्मीदवार SALT को एक अभिनव, स्थानीयकृत समाधान के रूप में उजागर कर सकते हैं जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जैसी राष्ट्रीय पहलों को पूरा करता है। यह एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में कार्य करता है कि कैसे जैव प्रौद्योगिकी उन जगह की कमी वाले "कंक्रीट के जंगलों" (concrete jungles) में अंतर को पाटने में मदद कर सकती है जहां प्राकृतिक पेड़ लगाना शारीरिक रूप से असंभव है।

सामान्य अध्ययन (GS) पेपर II: शासन और संस्थागत ढांचा (Governance and Institutional Infrastructure)

UPSC अक्सर प्रमुख सार्वजनिक अनुसंधान निकायों की भूमिका, अधिदेश (mandate) और इतिहास का मूल्यांकन करता है। यह विकास CSIR-CIMFR के विकासवादी जनादेश/अधिदेश को उजागर करता है, जिससे पता चलता है कि कैसे मूल रूप से कोयला अन्वेषण (coal exploration) और खनन सुरक्षा पर केंद्रित एक संस्थान ने स्थायी हरित ऊर्जा, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन (industrial decarbonization) और urban air quality management को संबोधित करने के लिए खुद को ढाला है।