UPSC Current Affairs June 2026: जानिए क्या है वायबिलिटी गैप फंडिंग और क्यों वित्त मंत्रालय ने ग्रेट निकोबार पोर्ट के लिए VGF को खारिज किया | Daily GK Update

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भारत का बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) विकास हमेशा से आर्थिक लाभ, पर्यावरणीय संतुलन और भू-राजनीतिक आवश्यकताओं के चौराहे पर खड़ा रहा है । इसका सबसे बड़ा और हालिया उदाहरण ग्रेट निकोबार द्वीप के गैलाथिया खाड़ी (Galathea Bay) में प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (ICTP) है । यद्यपि सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है, लेकिन वित्त मंत्रालय ने इसके लिए मांगे गए Rs. 12,230 crore के वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) को प्रदान करने से साफ इनकार कर दिया है । यह निर्णय सार्वजनिक वित्तपोषण की सीमाओं और रणनीतिक परियोजनाओं के वर्गीकरण पर गंभीर बहस छेड़ता है ।   

UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गंभीर उम्मीदवारों के लिए इस घटनाक्रम का विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण है । यह विषय सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा वित्तपोषण, संघीय बजट, पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA), और हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है । राष्ट्रीय महत्व की ऐसी खबरों के नियमित विश्लेषण के लिए अभ्यर्थी(https://www.atharvaexamwise.com) के विशेष अनुभाग को देख सकते हैं ।   

वायबिलिटी गैप फंडिंग क्या है? अवधारणा, विकास और पात्रता नियम

बुनियादी ढांचा परियोजनाएं आमतौर पर पूंजी-गहन (capital-intensive) होती हैं, जिनकी निर्माण अवधि (gestation period) लंबी होती है और जिनमें प्रारंभिक वित्तीय लाभ बहुत कम होता है । सामाजिक और आर्थिक रूप से आवश्यक होने के बावजूद, ये परियोजनाएं केवल व्यावसायिक आधार पर निजी निवेशकों को आकर्षित नहीं कर पाती हैं । अर्थशास्त्र की भाषा में, ये परियोजनाएं सकारात्मक बाह्यताओं (positive externalities) का निर्माण करती हैं, जहां निजी सीमांत लागत और सामाजिक सीमांत लाभ के बीच एक बड़ा अंतर (मार्केट फेलियर) आ जाता है । इस अंतर को भरने के लिए सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली एकमुश्त या आस्थगित (deferred) वित्तीय सहायता को वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) कहा जाता है ।   

भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA), वित्त मंत्रालय द्वारा वर्ष 2006 में "बुनियादी ढांचे में पीपीपी को वित्तीय सहायता देने की योजना" (VGF योजना) शुरू की गई थी । नवंबर 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को पुनर्गठित (revamp) किया, जिसके तहत सामाजिक बुनियादी ढांचे (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, अपशिष्ट जल प्रबंधन) में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष उप-योजनाएं शुरू की गईं । इस योजना के संबंध में आधिकारिक दिशा-निर्देशों को देखने के लिए अभ्यर्थी(http://dea.gov.in) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों का संदर्भ ले सकते हैं ।   

आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों के लिए VGF सहायता की सीमाएं

पुनर्गठित VGF योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार वित्तपोषण की अधिकतम सीमाएं और पात्रता शर्तें तय की गई हैं :   

क्षेत्र का प्रकार (Sector Category)पात्र उप-क्षेत्र (Eligible Sub-Sectors)न्यूनतम परिचालन लागत वसूली (Operational Cost Recovery)अधिकतम केंद्रीय वीजीएफ सहायता (Capital Grant)अतिरिक्त सरकारी/मंत्रालय सहायता (Sponsoring Support)कुल अधिकतम वित्तीय सहायता (Total VGF Limit)
आर्थिक क्षेत्र (Economic Sectors)सड़क, रेलवे, बंदरगाह, विमानन, बिजलीउपयोगकर्ता शुल्क/टैरिफ आधारित20% तक20% तककुल परियोजना लागत (TPC) का 40%
सामाजिक क्षेत्र (उप-योजना 1)अपशिष्ट जल उपचार, जलापूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वास्थ्य और शिक्षान्यूनतम 100%30% तक30% तककुल परियोजना लागत (TPC) का 60%
सामाजिक क्षेत्र (उप-योजना 2 - पायलट)स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में प्रदर्शन/पायलट परियोजनाएंन्यूनतम 50%40% तक (+ 25% परिचालन सहायता प्रथम 5 वर्षों हेतु)40% तक (+ 25% परिचालन सहायता प्रथम 5 वर्षों हेतु)कुल परियोजना लागत (TPC) का 80% और परिचालन लागत का 50% तक

  

VGF योजना का एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि इसका वास्तविक संवितरण (disbursement) तभी शुरू होता है जब निजी विकासकर्ता (concessionaire) अपनी हिस्सेदारी की पूरी इक्विटी खर्च कर चुका हो और ऋणदाता वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण का अनुपात जारी किया जा रहा हो ।   

ग्रेट निकोबार पोर्ट परियोजना: ₹12,230 करोड़ की VGF मांग खारिज होने के कारण

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) और उसकी कार्यान्वयन एजेंसी, कामराजार पोर्ट लिमिटेड (KPL) ने ग्रेट निकोबार में गैलाथिया खाड़ी में बन रहे इस अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (ICTP) के विकास के लिए Rs. 12,230 crore की VGF सहायता मांगी थी, जो कि परियोजना के पहले और दूसरे चरण की अनुमानित लागत का 25% थी ।   

सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) और आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने इस बड़ी राशि को सामान्य VGF योजना से देने से निम्नलिखित कारणों से इनकार कर दिया :   

योजना के कुल बजटीय परिव्यय से अधिक की मांग: पुनर्गठित VGF योजना का वर्ष 2024−25 तक कुल राष्ट्रीय बजटीय आवंटन केवल Rs. 8,100 crore निर्धारित था । अकेले इस बंदरगाह परियोजना की VGF मांग (Rs. 12,230 crore) पूरी योजना के कुल राष्ट्रीय बजट से कहीं अधिक थी ।   

मानक ढांचे में असाधारण रियायतों (Material Deviations) की मांग: पोत परिवहन मंत्रालय ने वीजीएफ योजना के दायरे से बाहर जाकर कई बड़ी रियायतें मांगी थीं । इनमें आर्थिक क्षेत्र के लिए निर्धारित 20% की सीमा से अधिक वित्तपोषण, स्वतंत्र रूप से बाजार-निर्धारित टैरिफ लागू करने की छूट, निजी इक्विटी पूरी तरह से निवेश होने से पहले ही वार्षिक आधार पर वीजीएफ जारी करने की मांग और परियोजना रद्द होने की स्थिति में 90% वीजीएफ अनुदान वापस न करने की छूट शामिल थी ।   

संस्थागत राजस्व और व्यावसायिक व्यवहार्यता: DEA का मानना है कि सामान्य VGF योजना केवल मध्यम और लघु आकार की पीपीपी परियोजनाओं के लिए है । चूंकि बंदरगाह के परिचालन के 17वें वर्ष से विकासकर्ता को बड़ा लाभांश और राजस्व हिस्सा मिलने की उम्मीद है, इसलिए PPPAC ने MoPSW को सामान्य वित्तीय सहायता के बजाय अपने स्वयं के आंतरिक बजट से इस गैप को पाटने की सिफारिश की ।   

परियोजना की लागत, चरणबद्ध विकास और संयुक्त उद्यम संरचना

यद्यपि वित्त मंत्रालय ने सामान्य VGF योजना से फंड देने से मना कर दिया, लेकिन परियोजना की रणनीतिक महत्ता को देखते हुए PPPAC ने इसके विकास को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की है । यह परियोजना कुल 50 years की रियायत अवधि (concession period) के लिए डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर आधारित होगी ।   

इस परियोजना के लागत और चरणबद्ध विवरण को निम्नलिखित तालिका से समझा जा सकता है:

परियोजना का चरणअनुमानित लागत (Estimated Cost)क्षमता लक्ष्य (Capacity Target)निर्माण अवधि (Construction Period)अन्य मुख्य विशेषताएं
प्रथम चरण (Phase-I)Rs. 27,793 crore5.6 Million TEUsउप-चरण IA: 60 महीने; उप-चरण IB: 108 महीनेशुरुआती कंटेनर बर्थ लंबाई 2,300 मीटर और 7 कंटेनर बर्थ का निर्माण ।
द्वितीय चरण (Phase-II)Rs. 21,069 crore6.2 Million TEUsकुल निर्माण काल के साथ एकीकृतकंटेनर बर्थ लंबाई 1,750 मीटर, 5 नए बर्थ और 3 MTPA की पीओएल (POL) बर्थ सुविधा ।
कुल परियोजना लागतRs. 48,862 crore14.2 Million TEUsकुल अनुमानित समयरेखा के अधीनयह द्वीप विकास कार्यक्रम (ANIIDCO द्वारा समर्थित) के तहत टाउनशिप, ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा और बिजली संयंत्र के साथ एकीकृत है ।

  

सुरक्षा और रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए, गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार इस बंदरगाह का विकास करने वाली संयुक्त उद्यम (JV) कंपनी में एक भारतीय स्वामित्व वाली निजी कंपनी की हिस्सेदारी 55% होगी, जबकि प्रमुख सरकारी बंदरगाहों (कामराजार पोर्ट सहित) की हिस्सेदारी 45% होगी । इससे विदेशी शक्तियों के हस्तक्षेप को पूरी तरह से रोका जा सकेगा ।   

वाणिज्यिक परियोजना से रणनीतिक संपत्ति में बदलाव: सुरक्षा बनाम पर्यावरण

इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय बात इसका वाणिज्यिक (commercial) से रणनीतिक (strategic) रूप में तेजी से हुआ बदलाव है । वर्ष 2021−23 की शुरुआती अवधारणा रिपोर्टों में इसे केवल एक वाणिज्यिक ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिससे प्रतिवर्ष लगभग $200 million की विदेशी मुद्रा की बचत का अनुमान लगाया गया था । लेकिन अगस्त 2024 में जब वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक निवेश बोर्ड (PIB) ने इसके "रणनीतिक उद्देश्यों" की कमी पर सवाल उठाया, तो उसके बाद रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2026 में इसे आधिकारिक तौर पर एक "रणनीतिक परियोजना" के रूप में अधिसूचित कर दिया ।   

यह भू-राजनीतिक बदलाव मुख्य रूप से मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) की निकटता के कारण है, जहां से चीन का लगभग 80% ऊर्जा आयात गुजरता है । इसे चीनी रक्षा विशेषज्ञ 'मलक्का दुविधा' (Malacca dilemma) कहते हैं । गैलाथिया खाड़ी में भारत की यह मजबूत नौसैनिक और वाणिज्यिक उपस्थिति हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी ।   

पारिस्थितिक और जनजातीय कल्याण से जुड़ी चिंताएं

परियोजना को "रणनीतिक" घोषित किए जाने के बाद से सरकार पर सूचनाओं को छिपाने और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं । पर्यावरणविदों का कहना है कि इसके नाम पर उच्च अधिकार प्राप्त समिति (HPC) की रिपोर्ट और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया गया ।   

पारिस्थितिक असंतुलन: इस परियोजना से अंडमान और निकोबार के कुल वन क्षेत्र का 1.82% हिस्सा प्रभावित होगा, जिसके कारण 49.86 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 7.11 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान है । गैलाथिया खाड़ी दुनिया के सबसे बड़े कछुए 'जायंट लेदरबैक टर्टल' का प्रमुख प्रजनन स्थल है । आलोचकों का आरोप है कि बेसलाइन डेटा केवल तीन महीनों (दिसंबर 2020 से फरवरी 2021) के दौरान एकत्र किया गया था, जो पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के विनियामक मानकों के विपरीत है ।   

जनजातीय संरक्षण: इस द्वीप पर शोम्पेन (Shompen) और निकोबारी जैसी विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTGs) निवास करते हैं । यद्यपि सरकार का दावा है कि शोम्पेन नीति 2015 के तहत उनके आवासों का विस्थापन नहीं किया जाएगा, लेकिन राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा सुरक्षा और विशेषाधिकार का हवाला देकर विवरण साझा न करने से पर्यावरण कार्यकर्ताओं में अविश्वास की भावना पैदा हुई है ।   

सरकारी रुख और रक्षा संबंधी घोषणाओं के संबंध में अधिक प्रामाणिक विश्लेषण के लिए अभ्यर्थी(https://www.pib.gov.in) की प्रेस विज्ञप्तियों का भी संदर्भ ले सकते हैं । समसामयिक मुद्दों की विस्तृत श्रृंखला को कवर करने के लिए Atharva Examwise current news की आधिकारिक वेबसाइट एक उत्कृष्ट मंच है।   

Why this matters for your exam preparation

UPSC civil services परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह विषय बहुआयामी महत्व रखता है :   

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III (भारतीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा): VGF की अवधारणा, PPPAC और PIB की भूमिका, तथा भारत में पीपीपी (PPP) परियोजनाओं के समक्ष आने वाले वित्तीय और विनियामक गतिरोधों पर सीधे विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं ।   

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III (पर्यावरण और जैव विविधता): बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन (सतत विकास), पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की विफलताएं, और वन संरक्षण अधिनियम की भूमिका जैसे ज्वलंत मुद्दों को समझने के लिए यह एक आदर्श केस स्टडी है ।   

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II (सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संबंध): हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा नीति, अंडमान और निकोबार कमान की रणनीतिक भूमिका, और चीन की 'मलक्का दुविधा' को भारत किस प्रकार संतुलित कर रहा है, इस पर मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स तैयार किए जा सकते हैं ।   

समसामयिक विषयों के गहन अध्ययन और मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन के निरंतर अभ्यास के लिए अभ्यर्थी(https://www.atharvaexamwise.com) के दैनिक अपडेट का नियमित उपयोग कर सकते हैं ।