UPSC Current Affairs June 6, 2026: भारत बनेगा AI का ग्लोबल हब; एयरट्रंक का ₹3 लाख करोड़ का निवेश | Daily GK Update

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भारतीय डिजिटल अवसंरचना में ऐतिहासिक निवेश: एक परिचय

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा विकास की यात्रा को एक अभूतपूर्व गति मिली है । एशिया-पैसिफिक और मध्य पूर्व क्षेत्र की अग्रणी हाइपरस्केल डेटा सेंटर विशेषज्ञ कंपनी एयरट्रंक (AirTrunk) ने भारतीय बाजार में लगभग ₹3 लाख करोड़ (30 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के निवेश की घोषणा की है । इस विशाल निवेश प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य भारत में 5 गीगावाट (GW) की अभूतपूर्व डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है, जो देश के डिजिटल अवसंरचना इतिहास में सबसे बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्तावों में से एक है ।   

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एयरट्रंक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रॉबिन खुदा के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस निवेश की जानकारी साझा की । इस परियोजना से न केवल क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों, रोजगार सृजन और घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा । इस ऐतिहासिक विकासक्रम के विभिन्न रणनीतिक और नीतिगत पहलुओं का गहन विश्लेषण सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गंभीर अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है । ऐसे ही महत्वपूर्ण वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाक्रमों के नियमित विश्लेषण के लिए अभ्यर्थी Atharva Examwise current news के राष्ट्रीय विकास अनुभाग का संदर्भ ले सकते हैं।   

एयरट्रंक निवेश और भारतीय डेटा सेंटर बाजार के महत्वपूर्ण आंकड़े

इस विशाल निवेश के रणनीतिक आयामों को समझने के लिए भारत के वर्तमान डेटा सेंटर परिदृश्य और नियोजित क्षमता विस्तार से जुड़े सांख्यिकीय आंकड़ों का अध्ययन आवश्यक है। नीचे दी गई तालिकाएं इस क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य के अनुमानों को स्पष्ट करती हैं:

एयरट्रंक निवेश परियोजना और बाजार अनुमान

संकेतक / पैरामीटरविवरण और सांख्यिकीय आंकड़ेसंदर्भ स्रोत
कुल घोषित निवेशलगभग ₹3 लाख करोड़ (30 बिलियन USD) 
प्रस्तावित डेटा सेंटर क्षमता5 गीगावाट (GW) (वर्ष 2030 तक) 
भारत की वर्तमान परिचालन क्षमतालगभग 1.4 से 1.6 गीगावाट (GW) (वर्ष 2026 तक) 
राष्ट्रीय क्षमता अनुमान (2030)5 GW से लेकर 8-10 GW तक बढ़ने की संभावना 
प्रमुख निवेश स्थलमुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और आंध्र प्रदेश (विशाखापत्तनम) 
संभावित रोजगार सृजनविकास, निर्माण और परिचालन चरणों में हजारों तकनीकी नौकरियां 

  

भारत में डेटा सेंटर क्षमता का भौगोलिक वितरण (प्रतिशत हिस्सेदारी)

प्रमुख शहर / हबपरिचालन क्षमता में वर्तमान हिस्सेदारी (%)संदर्भ स्रोत
मुंबई49% (पश्चिमी तट पर स्थित होने और सबमरीन केबल्स के जुड़ाव के कारण अग्रणी) 
चेन्नई18% 
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)11% 
पुणे8% 
बेंगलुरु7% 
हैदराबाद5% 
अन्य शहर (कोलकाता, कोच्चि, विशाखापत्तनम आदि)1% प्रत्येक 

  

इस क्षेत्र में हो रहे तीव्र विकास को समझने के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों पर ध्यान देना आवश्यक है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से निम्नलिखित बिंदु अत्यंत प्रासंगिक हैं:

संस्थापक और वित्तीय समर्थन: एयरट्रंक की स्थापना वर्ष 2015 में रॉबिन खुदा द्वारा की गई थी । वर्तमान में यह कंपनी वैश्विक निवेश दिग्गज ब्लैकस्टोन (Blackstone) और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) द्वारा समर्थित है ।   

बाजार में प्रवेश का इतिहास: एयरट्रंक ने अप्रैल 2026 में ल्यूमिना क्लाउडइन्फ्रा (Lumina CloudInfra) का अधिग्रहण करके भारतीय बाजार में कदम रखा था, जिससे उसे मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद में 600 मेगावाट (MW) की शुरुआती विकास पाइपलाइन प्राप्त हुई ।   

महाराष्ट्र का मेगा प्रोजेक्ट: कंपनी ने मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित रायगढ़ पेन ग्रोथ सेंटर में 3 GW क्षमता का एक विशाल कैंपस विकसित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹2 लाख करोड़ ($21 बिलियन) है ।   

आंध्र प्रदेश की रणनीति: आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने एयरट्रंक को विशाखापत्तनम (Vizag) में परिचालन स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया है, जहां राज्य सरकार 6 GW क्षमता का एआई और डेटा अवसंरचना हब विकसित करने का लक्ष्य रख रही है ।   

डेटा सेंटर और एआई क्षेत्र को गति देने वाली प्रमुख राष्ट्रीय नीतियां

वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गजों द्वारा भारत में किए जा रहे इस बड़े पैमाने के पूंजी निवेश के पीछे सरकार द्वारा तैयार किया गया सुदृढ़ नीतिगत और कानूनी ढांचा है । यूपीएससी मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 (GS Paper III) के लिए इन नियामक पहलुओं का विश्लेषण महत्वपूर्ण है ।   

ड्राफ्ट डेटा सेंटर पॉलिसी 2020 और 'इंफ्रास्ट्रक्चर' का दर्जा

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी ड्राफ्ट डेटा सेंटर पॉलिसी का उद्देश्य देश में डेटा सेंटर स्थापित करने की मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है । इस नीति के तहत भारत सरकार ने 5 मेगावाट (MW) से अधिक की आईटी लोड क्षमता वाले डेटा सेंटरों को "बुनियादी ढांचा (Infrastructure) का दर्जा" प्रदान किया है । इसे 'कम्युनिकेशन' श्रेणी के तहत बुनियादी ढांचे की सुसंगत मास्टर सूची में शामिल किया गया है । इस दर्जे के मिलने से डेटा सेंटर ऑपरेटरों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय ऋणदाताओं से आसान शर्तों पर दीर्घकालिक ऋण प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे निवेश लागत में कमी आती है ।   

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 और डेटा स्थानीयकरण

डीपीडीडी अधिनियम, 2023 के लागू होने से भारत में डेटा स्थानीयकरण (Data Localization) के नियमों को मजबूती मिली है । इसके तहत भारतीय नागरिकों के व्यक्तिगत और संवेदनशील डेटा को देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर ही संसाधित और संग्रहीत करना अनिवार्य किया जा रहा है । इसी तरह, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी भुगतान सेवा प्रदाताओं को सभी भुगतान संबंधी डेटा भारत में ही स्टोर करने का निर्देश दिया है । इन कानूनी और नियामक बाध्यताओं ने वैश्विक क्लाउड प्रदाताओं और वित्तीय संस्थानों के लिए भारत के भीतर ही स्थानीय डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता को अपरिहार्य बना दिया है ।   

इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन

कैबिनेट द्वारा मार्च 2024 में स्वीकृत ₹10,300 करोड़ से अधिक के वित्तीय परिव्यय वाले 'इंडियाएआई मिशन' का उद्देश्य स्वदेशी एआई क्षमताओं का विकास करना है । इस मिशन के "कंप्यूट पिलर" के तहत सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को किफायती दरों पर एआई अवसंरचना प्रदान करने के लिए 38,000 से अधिक जीपीयू (GPUs) को ऑनबोर्ड किया है । इन उच्च-क्षमता वाले जीपीयू को लगभग ₹65 प्रति घंटे की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो वैश्विक औसत लागत का लगभग एक-तिहाई है । यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की तर्ज पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से डेटा सेंटर्स के विकास को सीधे बढ़ावा दे रहा है ।   

ऊर्जा संकट और शांति अधिनियम (SHANTI Act), 2025 का नीतिगत अभिसरण

हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और जेनरेटिव एआई (Generative AI) के लिए उपयोग किए जाने वाले डेटा सेंटर अत्यधिक बिजली-गहन (energy-intensive) होते हैं । एआई वर्कलोड को पारंपरिक सर्वरों की तुलना में कई गुना अधिक बिजली की आवश्यकता होती है । अनुमान है कि 5 GW डेटा सेंटर क्षमता के सुचारू संचालन के लिए उतनी ही बिजली की आवश्यकता होगी जितनी भारत के एक मध्यम आकार के राज्य को लगती है । ऊर्जा मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, केवल डेटा सेंटरों से बिजली की मांग वर्ष 2031-32 तक बढ़कर 13.56 GW तक पहुंचने की उम्मीद है ।   

डेटा सेंटरों के लिए बिना किसी रुकावट के (24/7) निरंतर बिजली आपूर्ति आवश्यक है, जबकि पारंपरिक सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत प्रकृति में उतार-चढ़ाव वाले (intermittent) होते हैं । इस गंभीर ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए भारत सरकार ने एक युगांतकारी विधायी सुधार किया है, जिसे शांति अधिनियम, 2025 (SHANTI Act, 2025 - Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act) के रूप में जाना जाता है ।   

दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित इस अधिनियम ने भारत के छह दशक पुराने परमाणु ऊर्जा शासन के एकाधिकार को समाप्त कर दिया है । शांति अधिनियम, 2025 ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम (CLND Act), 2010 को प्रतिस्थापित करके एक एकीकृत नियामक ढांचा तैयार किया है । इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान डेटा सेंटर उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं:   

निजी क्षेत्र की भागीदारी: इस अधिनियम के माध्यम से पहली बार निजी भारतीय कंपनियों और संयुक्त उद्यमों (JVs) को विनियमित परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति दी गई है, जिसमें गैर-सरकारी संस्थाएं नागरिक परमाणु परियोजनाओं में 49% तक की हिस्सेदारी रख सकती हैं ।   

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) का विकास: यह अधिनियम 50 से 300 मेगावाट क्षमता वाले स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) और स्वदेशी "भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर" (BSMR-200) के तेजी से लाइसेंसिंग और तैनाती का समर्थन करता है ।   

कैप्टिव न्यूक्लियर पावर और ग्रिड स्थिरता: SMRs में उच्च ऊर्जा घनत्व होता है और वे पारंपरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की तुलना में बहुत कम भूमि घेरते हैं । डेटा सेंटर पार्क अब अपने परिसर के समीप या समर्पित कैप्टिव बिजली संयंत्र के रूप में SMRs स्थापित कर सकते हैं । इससे ग्रिड पर अतिरिक्त भार डाले बिना डेटा सेंटरों को शून्य-कार्बन, मौसम-निरपेक्ष और विश्वसनीय बेसलोड बिजली प्राप्त होगी ।   

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा: इस अधिनियम ने AERB को पूर्ण वैधानिक दर्जा प्रदान किया है, जिससे इसकी नियामक स्वतंत्रता और पारदर्शिता बढ़ी है, जो अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी सहयोग के लिए एक आवश्यक पूर्व-शर्त थी ।   

भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी: ECTA से CECA की ओर

एयरट्रंक जैसी बड़ी ऑस्ट्रेलियाई तकनीकी कंपनी द्वारा भारत में इतना बड़ा निवेश दोनों देशों के बीच गहराते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाता है । वर्ष 2020 में दोनों देशों के बीच संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (CSP) के स्तर पर उन्नत किया गया था । दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए क्वाड (Quad) और आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ता पहल (SCRI) के माध्यम से सुरक्षात्मक और रणनीतिक सहयोग कर रहे हैं ।   

आर्थिक मोर्चे पर, भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ECTA) वर्ष 2022 में हस्ताक्षरित किया गया था । इस समझौते के तहत, 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश करने वाले 100% भारतीय सामानों को शून्य-शुल्क (zero-duty) बाजार पहुंच प्राप्त हो चुकी है । वर्तमान में, दोनों देश ECTA को एक पूर्ण व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) में अपग्रेड करने के लिए बातचीत कर रहे हैं । CECA के माध्यम से दोनों देशों का लक्ष्य डिजिटल व्यापार, सेवाओं के आदान-प्रदान, निवेश संरक्षण और महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम और कोबाल्ट) की आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है । एयरट्रंक का निवेश इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब केवल पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित न रहकर उच्च-तकनीकी सहयोग और डिजिटल संप्रभुता के क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है ।   

अभ्यर्थी भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार वार्ताओं और अन्य द्विपक्षीय समझौतों के नियमित अपडेट के लिए Atharva Examwise current news के अंतर्राष्ट्रीय संबंध अनुभाग को देख सकते हैं।

भारतीय डेटा सेंटर क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां

यद्यपि भारत निवेश और नीतियों के अनुकूल माहौल के कारण डेटा सेंटर हब बनने की ओर अग्रसर है, फिर भी इस क्षेत्र को कुछ गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है :   

ग्रिड ट्रांसमिशन क्षमता और बिजली वितरण: पारंपरिक औद्योगिक भार के विपरीत, हाइपरस्केल डेटा सेंटर निरंतर और बिना किसी व्यवधान के सीधे उच्च-वोल्टेज ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी की मांग करते हैं । देश के उच्च-मांग वाले क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों की सीमित क्षमता और राज्य विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की वित्तीय स्थिति इस राह में बड़ी बाधा है ।   

जल की भारी खपत और शीतलन तकनीक: एआई सर्वरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है । जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भूजल निकासी को लेकर जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देशों के कारण उद्योगों को अब महंगी और आधुनिक शीतलन तकनीकों जैसे 'डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग' और 'इमर्शन कूलिंग' को अपनाने पर विवश होना पड़ रहा है ।   

नियामक मंजूरी और भूमि अधिग्रहण में देरी: डेटा सेंटरों की स्थापना के लिए पर्यावरण मंजूरी, अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र और राज्य स्तर पर एकल-खिड़की मंजूरी प्रणालियों की सुस्त गति अक्सर परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन को बाधित करती है ।   

Why this matters for your exam preparation

यह घटनाक्रम यूपीएससी और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPPSC, MPSC, APPSC) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुआयामी विषय है। परीक्षा के विभिन्न प्रश्नपत्रों में इसकी प्रासंगिकता को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

जीएस पेपर III (सामान्य अध्ययन - 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा बुनियादी ढांचा

स्वदेशी तकनीकी विकास और एआई: इंडियाएआई मिशन के विभिन्न स्तंभ, विशेषकर "एआई कंप्यूट क्षमता" और स्थानीय डेटा संप्रभुता से जुड़े नीतिगत प्रश्न मुख्य परीक्षा में सीधे पूछे जा सकते हैं । अभ्यर्थियों को एआई डेटा स्टोरेज की आवश्यकता और देश के आर्थिक विकास में इसके योगदान के बीच के संबंध को स्पष्ट करने में सक्षम होना चाहिए ।   

ऊर्जा संक्रमण और परमाणु नीति (शांति अधिनियम, 2025): ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नागरिक परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) की प्रासंगिकता पर विश्लेषणात्मक प्रश्न बनने की प्रबल संभावना है । अभ्यर्थियों को शांति अधिनियम, 2025 के प्रमुख प्रावधानों और भारत के 100 GW परमाणु ऊर्जा लक्ष्य (वर्ष 2047 तक) के बीच के नीतिगत अभिसरण को समझना होगा ।   

जीएस पेपर II (सामान्य अध्ययन - 2): अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंध: ECTA से CECA की ओर बढ़ते आर्थिक सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और क्वाड (Quad) के आर्थिक आयामों पर उत्तर लिखते समय एयरट्रंक जैसी द्विपक्षीय परियोजनाओं को केस स्टडी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है ।   

प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims) के संभावित फोकस क्षेत्र

ड्राफ्ट डेटा सेंटर पॉलिसी के तहत डेटा सेंटरों को प्राप्त बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के दर्जे की शर्तें ।   

शांति अधिनियम, 2025 के तहत AERB का वैधानिक दर्जा और नागरिक परमाणु क्षेत्र में निजी निवेश की सीमा (49% तक की इक्विटी) ।   

भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA के तहत आयात-निर्यात शुल्क से जुड़े प्रावधान और प्रभावी होने की तिथियां ।   

भारत के डेटा सेंटर क्षमता के वितरण में अग्रणी राज्यों और शहरों का क्रम (जैसे मुंबई सर्वाधिक परिचालन क्षमता वाला शहर है) ।   

परीक्षा के दृष्टिकोण से ऐसे ही गहन और विश्लेषणात्मक लेखों के अभ्यास और दैनिक करेंट अफेयर्स पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करने के लिए अभ्यर्थी नियमित रूप से Atharva Examwise पर उपलब्ध अध्ययन सामग्री का लाभ उठा सकते हैं ।