UPSC Current Affairs May 11, 2026 | Mission Divyastra: अग्नि-5 MIRV मिसाइल परीक्षण का विस्तृत विश्लेषण | Daily GK Update Atharva Examwise

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8 मई 2026 को भारत ने अपनी रणनीतिक क्षमताओं में एक ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए 'मिशन दिव्यास्त्र' (Mission Divyastra) के तहत एक उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया । यह परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से आयोजित किया गया था, जो भारत के एकीकृत मिसाइल परीक्षण रेंज (ITR) का मुख्य केंद्र है । रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस मिसाइल ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक का उपयोग करते हुए हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न भौगोलिक स्थानों पर स्थित कई लक्ष्यों को एक साथ सफलतापूर्वक निशाना बनाया । यह उपलब्धि न केवल भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक की परिपक्वता को दर्शाती है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन (Balance of Power) को पुनर्परिभाषित करने की क्षमता भी रखती है ।

मिशन दिव्यास्त्र: आधुनिक भारत का सामरिक कवच

'मिशन दिव्यास्त्र' का नाम संस्कृत के 'दिव्य' (ईश्वरीय) और 'अस्त्र' (हथियार) शब्दों से मिलकर बना है, जो इस हथियार की विनाशकारी शक्ति और सटीकता को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है । भारत ने मार्च 2024 में पहली बार अग्नि-5 के साथ MIRV तकनीक का सफल परीक्षण किया था, और मई 2026 का यह नवीनतम परीक्षण इस प्रणाली की परिचालन स्थिरता और परिष्कृत मारक क्षमता की पुष्टि करता है । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों की सराहना करते हुए इसे "अतुलनीय क्षमता" करार दिया है जो बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ भारत की तैयारी को मजबूत करती है ।

मिसाइल का परीक्षण कई जमीनी और जहाज-आधारित ट्रैकिंग प्रणालियों की निगरानी में किया गया था, जिन्होंने लिफ्ट-ऑफ से लेकर सभी पेलोड्स के प्रभाव तक पूरी प्रक्षेपवक्र (Trajectory) की निगरानी की । उड़ान डेटा के विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि मिशन के सभी उद्देश्यों को सटीकता के साथ प्राप्त किया गया है । यह परीक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत को उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल करता है जिनके पास सिद्ध MIRV तकनीक है, जिनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं ।

अग्नि-5 MIRV की तकनीकी विशेषताएं

अग्नि-5 एक तीन-चरणीय, ठोस-ईंधन वाला इंजन आधारित मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है । MIRV तकनीक के एकीकरण के साथ, इसकी मारक क्षमता का दायरा और भी घातक हो गया है।

विशेषताविवरण
मिसाइल का प्रकारअंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी / IRBM
तकनीकमल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल (MIRV)
मारक क्षमता (Range)5,000 - 7,000+ किलोमीटर
इंजनतीन-चरणीय ठोस प्रणोदक (Solid Fuel)
गति (Speed)टर्मिनल चरण में Mach 24 (लगभग 29,400 किमी/घंटा)
पेलोड क्षमता4 से 5 परमाणु हथियार (अनुमानित)
लॉन्च प्लेटफॉर्मसड़क-मोबाइल कैनिस्टर सिस्टम (Road-mobile Canister System)

MIRV तकनीक का गहन विश्लेषण: विज्ञान और रणनीति

MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एक क्रांतिकारी बदलाव है। जहाँ एक सामान्य मिसाइल केवल एक परमाणु हथियार ले जा सकती है, वहीं MIRV से लैस मिसाइल कई स्वतंत्र वारहेड्स ले जाने में सक्षम होती है । ये वारहेड्स एक ही मिसाइल लॉन्च के माध्यम से सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर स्थित अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं ।

यह तकनीक कैसे कार्य करती है?

MIRV मिसाइल का संचालन चार मुख्य चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

बूस्ट चरण (Boost Phase): रॉकेट इंजन प्रज्वलित होते हैं और मिसाइल को वातावरण के बाहर धकेलते हैं। यहाँ तीन-चरणीय ठोस ईंधन का उपयोग करके मिसाइल को अत्यधिक गति प्रदान की जाती है ।

मिड-कोर्स चरण (Mid-course Phase): अंतरिक्ष के निर्वात में पहुँचने के बाद, मिसाइल का मुख्य पेलोड बस (Bus) या पोस्ट-बूस्ट वाहन सक्रिय होता है। यह बस अंतरिक्ष में पैंतरेबाज़ी करता है और प्रत्येक वारहेड को उसकी विशिष्ट प्रक्षेपवक्र की ओर छोड़ता है ।

तैनाती (Deployment): पेलोड बस अपनी दिशा बदलती है और एक-एक करके वारहेड्स को मुक्त करती है। इसके साथ ही, दुश्मन के रडार को भ्रमित करने के लिए 'डिकॉय' (Decoys) या नकली लक्ष्य भी छोड़े जा सकते हैं ।

पुनः प्रवेश और प्रभाव (Re-entry and Impact): प्रत्येक वारहेड अपने स्वयं के री-एंट्री वाहन में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है। वायुमंडलीय घर्षण से उत्पन्न अत्यधिक गर्मी को सहन करने के लिए इनमें उन्नत कार्बन-कार्बन कंपोजिट सामग्री का उपयोग किया जाता है ।

अग्नि-5 की टर्मिनल गति $Mach\ 24$ होने के कारण, यह किसी भी मौजूदा मिसाइल रक्षा प्रणाली (Missile Defence System) के लिए एक लगभग असंभव चुनौती पेश करती है । यह गति और कई वारहेड्स की उपस्थिति दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को 'सैचुरेट' (Saturate) कर देती है, जिससे मिसाइल के सफलतापूर्वक लक्ष्य भेदने की संभावना बढ़ जाती है ।

रणनीतिक महत्व

MIRV तकनीक के एकीकरण से भारत को कई सामरिक लाभ प्राप्त होते हैं:

निवारण क्षमता में वृद्धि (Enhanced Deterrence): यह दुश्मन को यह संदेश देता है कि भारत एक ही मिसाइल से उसके कई महत्वपूर्ण केंद्रों को नष्ट कर सकता है ।

द्वितीय आघात क्षमता (Second Strike Capability): भारत की 'नो फर्स्ट यूज़' (No First Use) नीति के तहत, यह क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि भारत पर परमाणु हमला होता है, तो भारत की जीवित बची मिसाइलें दुश्मन पर भारी जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित कर सकती हैं ।

मिसाइल डिफेंस को भेदना: चीन और अन्य देशों द्वारा विकसित की जा रही उन्नत एंटी-मिसाइल प्रणालियों (जैसे HQ-19) के खिलाफ MIRV एक प्रभावी उत्तर है ।

अग्नि श्रृंखला का विकासक्रम: अग्नि-1 से मिशन दिव्यास्त्र तक

अग्नि मिसाइल कार्यक्रम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की रीढ़ रहा है। इसकी शुरुआत 1983 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के तहत हुई थी ।

मिसाइलश्रेणीमारक क्षमता (Range)मुख्य विशेषताएं
अग्नि-ISRBM700 - 1,200 किमीएकल-चरण, ठोस ईंधन, पाकिस्तान के संदर्भ में महत्वपूर्ण
अग्नि-IIMRBM2,000 - 3,500 किमीद्वि-चरण, रेल और सड़क मोबाइल
अग्नि-IIIIRBM3,000 - 5,000 किमीउच्च सटीकता (CEP), द्वि-चरण ठोस
अग्नि-IVIRBM3,500 - 4,000 किमीउन्नत नेविगेशन और उच्च सटीकता
अग्नि-VICBM5,000 - 7,000+ किमीकैनिस्टर लॉन्च, MIRV तकनीक, वैश्विक पहुँच
अग्नि-प्राइमMRBM1,000 - 2,000 किमीनई पीढ़ी की हल्की और कैनिस्टर मिसाइल
अग्नि-VIICBM8,000 - 12,000 किमीविकास के अधीन, अधिक वारहेड्स ले जाने में सक्षम

अग्नि-5 की कैनिस्टर आधारित लॉन्च प्रणाली इसे अत्यधिक लचीलापन प्रदान करती है । इसे रेल या सड़क के माध्यम से कहीं भी ले जाया जा सकता है और मिनटों के भीतर लॉन्च किया जा सकता है, जो उपग्रहों के माध्यम से की जाने वाली दुश्मन की निगरानी से बचने में मदद करता है ।

भू-राजनीतिक निहितार्थ: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नया शक्ति संतुलन

मई 2026 का यह परीक्षण केवल तकनीकी सफलता नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली कूटनीतिक संदेश भी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता और पाकिस्तान के साथ उसके रणनीतिक संबंधों के बीच भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है 。

चीन पर प्रभाव

अग्नि-5 की मारक क्षमता चीन के सुदूर उत्तरी क्षेत्रों सहित पूरे एशियाई महाद्वीप को कवर करती है 。 MIRV तकनीक के आने से चीन की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली की प्रभावशीलता कम हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह परीक्षण विशेष रूप से चीन के बढ़ते परमाणु शस्त्रागार और उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीतियों का जवाब है 。 अब भारत बीजिंग, शंघाई और अन्य महत्वपूर्ण चीनी औद्योगिक केंद्रों को एक साथ निशाना बना सकता है, जो एक "विश्वसनीय न्यूनतम निवारण" (Credible Minimum Deterrence) स्थापित करने के लिए आवश्यक है 。

पाकिस्तान और क्षेत्रीय स्थिरता

हालाँकि पाकिस्तान ने 2017 में 'अबाबील' मिसाइल के साथ MIRV तकनीक का परीक्षण करने का दावा किया था, लेकिन भारत की अग्नि-5 तकनीक की सटीकता और सीमा उसे एक अलग श्रेणी में रखती है 。 भारत की तकनीकी बढ़त पाकिस्तान को अपने मिसाइल कार्यक्रम में और अधिक निवेश करने के लिए मजबूर कर सकती है, जो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है 。 हालांकि, यह क्षेत्रीय हथियारों की होड़ (Arms Race) की चिंताओं को भी जन्म देता है 。

वैश्विक क्लब में भारत की स्थिति

भारत अब उन विशिष्ट राष्ट्रों के समूह में मजबूती से खड़ा है जिनके पास लंबी दूरी की परमाणु हमला करने की परिष्कृत क्षमता है 。 दिलचस्प बात यह है कि उत्तर कोरिया के पास भी ICBM तकनीक है, लेकिन MIRV की परिपक्वता और सटीकता के मामले में भारत का कार्यक्रम अधिक विश्वसनीय माना जाता है 。

आत्मनिर्भर भारत और नारी शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण

मिशन दिव्यास्त्र की सफलता स्वदेशीकरण (Indigenization) की जीत है। अग्नि-5 में उपयोग किए गए अधिकांश घटक, जिनमें एवियोनिक्स, उच्च-सटीकता सेंसर पैकेज और नियंत्रण प्रणालियाँ शामिल हैं, स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं 。

महिला वैज्ञानिकों का नेतृत्व

इस मिशन का एक सबसे प्रेरणादायक पहलू इसमें महिला वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिका है। DRDO की वरिष्ठ वैज्ञानिक शीना रानी (Sheena Rani) ने अग्नि-5 परियोजना का नेतृत्व किया है ।

महत्वपूर्ण व्यक्तित्वभूमिका
शीना रानीकार्यक्रम निदेशक (Programme Director), अग्नि-5 MIRV
शंकरी चंद्रशेखरनपरियोजना निदेशक (Project Director)

शीना रानी, जिन्हें 'दिव्या पुत्री' के नाम से भी संबोधित किया गया है, 1999 से अग्नि मिसाइल प्रणालियों पर काम कर रही हैं । उन्होंने तिरुवनंतपुरम के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से अपनी शिक्षा प्राप्त की और 1998 के पोखरण-द्वितीय परीक्षणों के बाद DRDO में शामिल हुईं । उनकी टीम में कई अन्य महिला वैज्ञानिक भी शामिल थीं, जो रक्षा क्षेत्र में भारत की बदलती कार्य संस्कृति का प्रतीक हैं 。

तकनीकी नवाचार

अग्नि-5 में प्रयुक्त रिंग लेजर जायरोस्कोप आधारित जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली (RLG-INS) और माइक्रो नेविगेशन सिस्टम (MINGS) दोहरे स्तर की सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे मिसाइल बाहरी हस्तक्षेप के बावजूद अपने लक्ष्य पर सटीक बनी रहती है । इसके अलावा, मिसाइल के वजन को कम करने के लिए स्टील के स्थान पर हल्के कंपोजिट सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी मारक क्षमता और पेलोड ले जाने की क्षमता में 20% तक की वृद्धि हुई है 。

भारत का परमाणु सिद्धांत: शांति और शक्ति का मेल

मिशन दिव्यास्त्र के संदर्भ में भारत के परमाणु सिद्धांत (Nuclear Doctrine) को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का दृष्टिकोण "शक्ति के माध्यम से शांति" पर आधारित है 。

नो फर्स्ट यूज़ (NFU): भारत परमाणु हथियारों का उपयोग पहले नहीं करेगा 。

विश्वसनीय न्यूनतम निवारण: भारत केवल उतना ही शस्त्रागार बनाए रखेगा जो किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए पर्याप्त हो 。

परमाणु ट्रायड (Nuclear Triad): भारत ने भूमि (अग्नि मिसाइलें), वायु (लड़ाकू विमान) और समुद्र (अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियाँ) तीनों क्षेत्रों से परमाणु हमले की क्षमता हासिल कर ली है ।

नागरिक नियंत्रण: परमाणु हथियारों के उपयोग का निर्णय केवल नागरिक राजनीतिक नेतृत्व (प्रधान मंत्री की अध्यक्षता वाली परमाणु कमान प्राधिकरण) द्वारा ही लिया जा सकता है ।

मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास लगभग 180 परमाणु वारहेड्स हैं, जबकि चीन के पास 600 और पाकिस्तान के पास 170 हैं 。 MIRV तकनीक भारत को अपने सीमित वारहेड्स का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित करने की अनुमति देती है, जिससे मात्रात्मक हीनता के बावजूद गुणात्मक निवारण बना रहता है 。

भविष्य की राह: अग्नि-VI और हाइपरसोनिक युग

मिशन दिव्यास्त्र की सफलता के बाद, भारत की अगली चुनौती अग्नि-VI और हाइपरसोनिक हथियारों का विकास है 。

अग्नि-VI: यह एक पूर्ण अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) होगी जिसकी रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर के बीच हो सकती है 。 यह एक साथ 10 से 12 वारहेड्स ले जाने में सक्षम हो सकती है 。

हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV): 8 मई 2026 के परीक्षण में कुछ रिपोर्टों के अनुसार हाइपरसोनिक ग्लाइड तकनीक के तत्वों का भी परीक्षण किया गया था । भविष्य में, भारत ऐसी मिसाइलें विकसित करेगा जो ध्वनि की गति से 5-10 गुना तेज उड़ सकती हैं और उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकती हैं, जिससे वे अजेय बन जाएंगी ।

K-सीरीज मिसाइलें: MIRV तकनीक को जल्द ही समुद्र से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBM) जैसे K-4 और K-5 में भी एकीकृत किया जाएगा, जिससे भारत की पनडुब्बी आधारित मारक क्षमता और भी अभेद्य हो जाएगी 。

Why this matters for your exam preparation

प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर UPSC के दृष्टिकोण से, मिशन दिव्यास्त्र एक 'हॉट टॉपिक' है। इसके विभिन्न पहलू आपके पाठ्यक्रम के अलग-अलग हिस्सों को छूते हैं:

1. UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)

तथ्यात्मक प्रश्न: अग्नि मिसाइलों की रेंज, उनके चरण (Stages), और MIRV तकनीक का कार्य सिद्धांत।

राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय महत्व: उन देशों की सूची जिनके पास MIRV तकनीक है।

रक्षा संगठन: DRDO और IGMDP की भूमिका।

व्यक्तिगत समाचार: मिशन का नेतृत्व करने वाली महिला वैज्ञानिकों के नाम।

2. UPSC मुख्य परीक्षा (Mains)

सामान्य अध्ययन III (विज्ञान और तकनीक): "स्वदेशीकरण और नई तकनीकों का विकास"। यहाँ आप अग्नि-5 को उदाहरण के रूप में उपयोग कर सकते हैं ।

सामान्य अध्ययन III (आंतरिक सुरक्षा): "सीमा सुरक्षा और रणनीतिक निवारण"। भारत की परमाणु नीति और सुरक्षा चुनौतियों पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करें ।

सामान्य अध्ययन II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध): "पड़ोसी देशों के साथ संबंध" और "भारत का बढ़ता वैश्विक कद"। यह परीक्षण भारत-चीन और भारत-पाक संबंधों को कैसे प्रभावित करता है 。

3. साक्षात्कार (Interview)

नैतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण: 'नो फर्स्ट यूज़' नीति के लाभ और चुनौतियां।

लैंगिक समानता: रक्षा अनुसंधान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर विचार।

Atharva Examwise Expert Tip: अग्नि-5 के बारे में लिखते समय हमेशा "विश्वसनीय न्यूनतम निवारण" (Credible Minimum Deterrence) और "शक्ति संतुलन" जैसे शब्दों का प्रयोग करें। यह आपके उत्तर को अधिक परिपक्व और परीक्षा-केंद्रित बनाता है। नियमित Daily GK Update के लिए हमारी वेबसाइट Atharva Examwise पर बने रहें।