UPSC Current Affairs April 25 2026: भारत में 'हीट डोम' का प्रकोप - भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण | Atharva Examwise Daily GK Update

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भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अप्रैल 2026 का महीना एक गंभीर जलवायु चेतावनी लेकर आया है। जहां सामान्यतः इस समय ग्रीष्म ऋतु का आगाज़ होता है, वहीं इस वर्ष की गर्मी ने वैज्ञानिक समुदाय और नीति निर्माताओं को आश्चर्यचकित कर दिया है। स्काईमेट और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, देश का लगभग आधा हिस्सा एक ऐसी वायुमंडलीय स्थिति के घेरे में है जिसे 'हीट डोम' (Heat Dome) कहा जाता है । यह कोई सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि वायुमंडल की ऊपरी परतों में कैद गर्म हवा का एक ऐसा दुष्चक्र है जिसने उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत को एक भट्टी में तब्दील कर दिया है। विशेष रूप से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्य इस समय इसके केंद्र में हैं, जहां तापमान ४० डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को काफी पीछे छोड़ चुका है ।   

हीट डोम की वैज्ञानिक व्याख्या: एक वायुमंडलीय ढक्कन

हीट डोम को सरल शब्दों में समझने के लिए एक ऐसे बर्तन की कल्पना की जा सकती है जिसे ढक्कन से ढक दिया गया हो। जब वायुमंडल के एक बड़े क्षेत्र में उच्च दबाव (High Pressure) का क्षेत्र बन जाता है, तो यह एक ढक्कन की तरह काम करता है जो सतह से उठने वाली गर्म हवा को ऊपर जाने से रोकता है और उसे वापस जमीन की तरफ धकेलता है ।   

वायुमंडलीय विज्ञान के अनुसार, यह स्थिति 'एन्टीसाइक्लोन' (Anticyclone) या विपरीत चक्रवात के कारण उत्पन्न होती है। एक एन्टीसाइक्लोन में हवाएं घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) घूमती हुई ऊपर से नीचे की ओर बैठती हैं । जैसे-जैसे हवा नीचे आती है, वह वायुमंडलीय दबाव के कारण संकुचित (Compress) होती है। उष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों के अनुसार, जब किसी गैस का आयतन कम किया जाता है और दबाव बढ़ाया जाता है, तो उसका तापमान बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया को 'एडियाबेटिक हीटिंग' (Adiabatic Heating) कहा जाता है। यही कारण है कि हीट डोम के तहत हवा केवल गर्म ही नहीं रहती, बल्कि लगातार दबने के कारण और भी अधिक तपती जाती है ।   

हीट डोम के निर्माण की सात-चरणीय प्रक्रिया

हीट डोम का निर्माण कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक जटिल मौसम प्रणाली का परिणाम है जिसे निम्नलिखित सात चरणों में समझा जा सकता है :   

चरणविवरणवैज्ञानिक प्रभाव
सतह की गर्म हवा का ऊपर उठनासूर्य की तपिश से जमीन गर्म होती है और हवा ऊपर उठने का प्रयास करती है।
ऊपरी उच्च दबाव क्षेत्र का सक्रिय होनावायुमंडल की ऊपरी परतों में एक एन्टीसाइक्लोनिक प्रणाली हवा को नीचे धकेलती है।
हवा का घड़ी की दिशा में घूमनाहवाएं नीचे की ओर बैठते समय घड़ी की दिशा में घूमती हैं ।
गर्म हवा का जमीन की ओर संपीड़ननीचे बैठती हवा संपीड़न (Compression) के कारण अत्यधिक गर्म हो जाती है ।
नमी का ह्रासमिट्टी और पौधे अपनी नमी खो देते हैं, जिससे वातावरण और अधिक शुष्क हो जाता है ।
बादलों का विस्थापनयह उच्च दबाव बादलों और मानसून की नमी को दूर धकेल देता है ।
सौर विकिरण का सीधा प्रवेशबादलों की अनुपस्थिति में सूर्य की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं, जिससे गर्मी का दुष्चक्र पूरा होता है।

  

जेट स्ट्रीम और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

हीट डोम के निर्माण में 'जेट स्ट्रीम' (Jet Stream) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जेट स्ट्रीम वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर बहने वाली तीव्र हवाओं की एक पट्टी है जो मौसम प्रणालियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है । सामान्यतः जेट स्ट्रीम एक लहरदार पैटर्न में चलती है, लेकिन जब ये लहरें बहुत बड़ी और स्थिर हो जाती हैं, तो मौसम प्रणालियां एक ही जगह पर "फंस" जाती हैं। इसे मौसम विज्ञान में 'ओमेगा ब्लॉक' (Omega Block) कहा जाता है ।   

२०२६ में देखा जा रहा हीट डोम इसी ओमेगा ब्लॉक का परिणाम है, जहां उच्च दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर स्थिर हो गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण जेट स्ट्रीम के व्यवहार में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे हीट डोम जैसी घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ हो रही हैं । विशेष रूप से 'ला नीना' (La Niña) के वर्षों के दौरान, प्रशांत महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच तापमान का अंतर इस प्रणाली को और अधिक मजबूती प्रदान करता है ।   

हीट डोम बनाम सामान्य लू (Heatwave): मुख्य अंतर

अक्सर छात्र 'हीट डोम' और 'लू' (Heatwave) को एक ही समझ लेते हैं, परंतु UPSC के दृष्टिकोण से इनके बीच का सूक्ष्म अंतर समझना आवश्यक है।

एक सामान्य लू (Heatwave) तब होती है जब किसी क्षेत्र में गर्म हवा का प्रवाह होता है। लू के दौरान अक्सर दोपहर के बाद आंधी या गरज के साथ हल्की बारिश की संभावना बनी रहती है, जिससे गर्मी ऊपर की ओर निकल जाती है और राहत मिलती है 。 लेकिन हीट डोम के दौरान आसमान पूरी तरह साफ रहता है और उच्च दबाव बादलों को बनने ही नहीं देता 。   

विशेषतासामान्य लू (Heatwave)हीट डोम (Heat Dome)
कारणगर्म हवा का परिवहन (Advection)उच्च दबाव और हवा का नीचे बैठना (Subsidence)
स्थिरताअल्पकालिक हो सकती हैलंबे समय तक एक ही स्थान पर टिकी रहती है
आसमान की स्थितिबादल या धूल भरी आंधी संभवबिल्कुल साफ आसमान, तेज धूप
राहत की संभावनाआंधी-बारिश से राहत संभवप्राकृतिक राहत के द्वार बंद कर देता है

  

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मानदंड और चेतावनी प्रणाली

UPSC प्रीलिम्स के लिए IMD द्वारा लू घोषित करने के मानदंडों को याद रखना अनिवार्य है। IMD तापमान और सामान्य से उसके विचलन (Departure) के आधार पर चेतावनी जारी करता है ।   

लू (Heatwave) घोषित करने के आधार

क्षेत्रतापमान मानदंड
मैदानी क्षेत्र (Plains)अधिकतम तापमान ≥40∘C
तटीय क्षेत्र (Coastal)अधिकतम तापमान ≥37∘C
पहाड़ी क्षेत्र (Hills)अधिकतम तापमान ≥30∘C

  

विचलन के आधार पर वर्गीकरण:

लू (Heatwave): सामान्य तापमान से 4.5∘C से 6.4∘C की वृद्धि ।   

भीषण लू (Severe Heatwave): सामान्य तापमान से >6.4∘C की वृद्धि 。   

यदि मैदानी इलाकों में तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस को छू लेता है, तो इसे सीधे 'लू' की स्थिति माना जाता है, और ४७ डिग्री पर 'भीषण लू' घोषित की जाती है ।   

कलर-कोडेड चेतावनी प्रणाली (Color-Coded Warning System)

मौसम विभाग जनता और प्रशासन को सचेत करने के लिए चार रंगों का उपयोग करता है :   

१. हरा (Green): कोई कार्रवाई आवश्यक नहीं। मौसम सामान्य है। २. पीला (Yellow): सतर्क रहें। मौसम में बदलाव की संभावना है 。 ३. नारंगी (Orange): तैयार रहें। भीषण गर्मी की संभावना है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है । ४. लाल (Red): कार्रवाई करें। अत्यधिक भीषण गर्मी, स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति 。   

हीट इंडेक्स (Heat Index) और 'फील लाइक' तापमान

२०२६ की गर्मी की एक बड़ी विशेषता 'उमस वाली गर्मी' (Humid Heat) है। तटीय राज्यों जैसे ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में तापमान के साथ-साथ नमी (Humidity) भी बढ़ी हुई है 。 जब हवा में नमी अधिक होती है, तो शरीर से पसीना नहीं सूखता, जिससे शरीर का प्राकृतिक शीतलन तंत्र (Cooling Mechanism) विफल हो जाता है।   

इसे मापने के लिए 'हीट इंडेक्स' का उपयोग किया जाता है, जिसे "वास्तविक अहसास" (Real Feel) तापमान भी कहते हैं । उदाहरण के लिए, यदि तापमान ४० डिग्री है और आर्द्रता ७०% है, तो शरीर को ४८ डिग्री जैसी गर्मी महसूस होगी 。 UPSC GS Paper 3 के लिए यह 'वेट-बल्ब तापमान' (Wet-bulb Temperature) की अवधारणा से जुड़ा है, जो मानव सहनशीलता की सीमा निर्धारित करता है।   

कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: 'टर्मिनल हीट' का संकट

अप्रैल का महीना रबी फसलों की कटाई और जायद फसलों की बुवाई का समय होता है। हीट डोम के कारण कृषि क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहे हैं:

गेहूं की फसल: उत्तर-पश्चिम भारत में गेहूं की कटाई के समय तापमान बढ़ने से दाने सूख जाते हैं, जिससे पैदावार में १०-१५% की कमी देखी गई है । इसे 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' कहा जाता है 。   

जायद फसलें: मक्का, मूंग, उड़द और सब्जियों में फूलों के झड़ने (Flower Drop) की समस्या बढ़ गई है 。   

पशुपालन: अत्यधिक गर्मी से दुधारू पशुओं में 'हीट स्ट्रेस' बढ़ता है, जिससे दूध उत्पादन में गिरावट आती है ।   

स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय: 'थर्मल इनजस्टिस' (Thermal Injustice)

हीट डोम का प्रभाव समाज के सभी वर्गों पर समान नहीं होता। यहीं से 'थर्मल इनजस्टिस' या तापीय अन्याय की अवधारणा जन्म लेती है 。   

१. कमजोर वर्ग: निर्माण श्रमिक, रेहड़ी-पटरी वाले और खुले में काम करने वाले मजदूरों के पास गर्मी से बचने के लिए कोई विकल्प नहीं होता। उनकी उत्पादकता कम हो जाती है और आय पर सीधा प्रहार होता है । २. बुजुर्ग और बच्चे: शरीर का तापमान नियंत्रित करने की कम क्षमता के कारण ये समूह हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं । ३. शहरी हीट आइलैंड (Urban Heat Island): कंक्रीट के जंगलों और हरियाली की कमी के कारण शहरों का तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ३-५ डिग्री अधिक बना रहता है ।   

नीतिगत खामियां और आगे की राह

भारत में अभी भी लू (Heatwave) को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत एक 'अधिसूचित आपदा' (Notified Disaster) नहीं माना गया है 。 इसके कारण राज्यों को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से धन प्राप्त करने में कठिनाई होती है।   

आवश्यक सुधार:

हीट एक्शन प्लान (HAP): प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय स्तर पर हीट एक्शन प्लान बनाना और उसे कड़ाई से लागू करना ।   

शहरी नियोजन: 'कूल रूफ' (Cool Roofs) तकनीक को बढ़ावा देना, शहरी वनीकरण (Miyawaki method) और जल निकायों का पुनरुद्धार ।   

कार्य अनुसूची में बदलाव: अत्यधिक गर्मी के घंटों के दौरान बाहरी कामकाज पर प्रतिबंध और श्रमिकों के लिए 'थर्मल शेल्टर' की व्यवस्था 。   

Why this matters for your exam preparation

UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 'हीट डोम' और 'लू' के विषय निम्नलिखित कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

१. भूगोल (GS Paper 1): जेट स्ट्रीम, Rossby Waves, एन्टीसाइक्लोन और एडियाबेटिक हीटिंग जैसे तकनीकी विषयों पर सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। २. पर्यावरण (GS Paper 3): जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम की घटनाओं (Extreme Weather Events) की आवृत्ति में वृद्धि एक ज्वलंत विषय है। ३. आपदा प्रबंधन (GS Paper 3): भारत में हीट एक्शन प्लान की प्रभावशीलता और कानूनी ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर मेन्स में विश्लेषणात्मक प्रश्न आ सकते हैं। ४. सामाजिक मुद्दे (GS Paper 1/2): 'थर्मल इनजस्टिस' और स्वास्थ्य अधिकारों (अनुच्छेद 21) के संदर्भ में इस मुद्दे को जोड़कर देखा जा सकता है 。   

एस्पिरेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे IMD के नवीनतम आंकड़ों, स्काईमेट की भविष्यवाणियों और सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत कदमों का बारीकी से अध्ययन करें। एथर्वा एग्जामवाइज़ (Atharva Examwise) पर हम आपको इन विषयों का गहन विश्लेषण प्रदान करना जारी रखेंगे। अधिक जानकारी और दैनिक जीके अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट www.atharvaexamwise.com पर विजिट करें 。