UPSC Current Affairs 1 April 2026: Daily GK Update & Atharva Examwise Current News

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वैश्विक स्तर पर 1 अप्रैल को न केवल 'अप्रैल फूल्स डे' के रूप में मनाया जाता है, बल्कि यह दिन 'फॉसिल फूल्स डे' (Fossil Fools Day) के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है, जो जीवाश्म ईंधन के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है । वर्ष 2026 में इस दिवस की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को तेजी से कम करते हुए एक 'ग्रीन एनर्जी सुपरपावर' बनने की दिशा में अग्रसर है । प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर यूपीएससी (UPSC) के दृष्टिकोण से, ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और पर्यावरणीय प्रशासन एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहाँ से प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में निरंतर प्रश्न पूछे जाते हैं ।

फॉसिल फूल्स डे: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वैश्विक संदर्भ

फॉसिल फूल्स डे की उत्पत्ति और इसका विकास पर्यावरणीय सक्रियता (Environmental Activism) और कॉर्पोरेट जवाबदेही के संघर्ष की एक दिलचस्प गाथा है। इस दिवस का नाम 'अप्रैल फूल' और 'फॉसिल फ्यूल' शब्दों पर आधारित एक व्यंग्यात्मक कटाक्ष है, जिसका उद्देश्य उन नीतियों और कॉर्पोरेट दावों को उजागर करना है जो जलवायु परिवर्तन की वास्तविकता को नजरअंदाज करते हैं ।

उत्पत्ति और शुरुआती आंदोलन

फॉसिल फूल्स डे की शुरुआत वर्ष 2004 में संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में हुई थी । इसकी नींव विश्वविद्यालयों और हाई स्कूलों के छात्रों द्वारा रखी गई थी, जिन्होंने जीवाश्म ईंधन उद्योग के भ्रामक दावों के खिलाफ 125 से अधिक समन्वित विरोध प्रदर्शन किए । इन विरोधों में 'प्रैंक' या रचनात्मक शरारतों का उपयोग एक हथियार के रूप में किया गया था। उदाहरण के लिए, अमेरिका और कनाडा के बीच प्रस्तावित तेल पाइपलाइनों का विरोध करने के लिए सार्वजनिक फव्वारों में नकली तेल रिसाव (Mock Oil Spill) का प्रदर्शन किया गया और काले रंग के विशाल गुब्बारों वाली पाइपलाइनों को सड़कों पर घुमाया गया ताकि जनता को तेल रिसाव के खतरों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जा सके ।

समय के साथ, यह आंदोलन केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा। 2008 तक, यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप धारण कर चुका था, जिसमें ब्रिटेन में 35 और उत्तरी अमेरिका में 100 से अधिक सक्रिय कार्यक्रम आयोजित किए गए । 'राइजिंग टाइड' (Rising Tide) और 'एनर्जी एक्शन कोएलिशन' (Energy Action Coalition) जैसे प्रभावशाली संगठनों ने इस दिवस को जलवायु न्याय (Climate Justice) और नवीकरणीय ऊर्जा के समर्थन के लिए एक वैश्विक मंच बना दिया ।

कार्यक्रम के उद्देश्य और कार्यप्रणाली

फॉसिल फूल्स डे का प्राथमिक उद्देश्य जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल और गैस) के उपयोग को कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल विद्युत) को बढ़ावा देना है 。 इस दिन पर्यावरणीय संगठन कई तरह की गतिविधियों का संचालन करते हैं:

कॉर्पोरेट जवाबदेही: तेल कंपनियों के उन दावों पर सवाल उठाना जो खुद को 'पर्यावरण अनुकूल' बताते हैं, जबकि उनका मुख्य निवेश अभी भी हाइड्रोकार्बन में होता है ।

सार्वजनिक शिक्षा: कार्यशालाओं, फिल्मों और रैलियों के माध्यम से आम नागरिकों को उनके कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए प्रोत्साहित करना ।

वित्तीय दबाव: बैंकों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना जो नए कोयला और गैस उत्खनन प्रोजेक्ट्स को वित्तपोषित करते हैं ।

2026 में, यह दिवस विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया 'ग्लोबल स्टॉकटेक' (Global Stocktake) के बाद के दौर में है, जहाँ 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए जीवाश्म ईंधन से पूर्ण अलगाव (Phase-out) की मांग तेज हो गई है ।

भारत का ऊर्जा परिदृश्य: 2026 के ताजा आंकड़े और विश्लेषण

भारत में ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहा परिवर्तन अभूतपूर्व है। सरकारी आंकड़ों और 'एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2026' की रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से घटकर 47.42% रह गई है । यह 2020 के परिदृश्य से एक बड़ा बदलाव है, जब जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 75% थी।

स्थापित क्षमता का वर्तमान विवरण (फरवरी 2026 तक)

भारत ने अपनी स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों के 50% के लक्ष्य को 2030 की समय सीमा से पाँच वर्ष पूर्व ही जून 2025 में प्राप्त कर लिया था । फरवरी 2026 तक का नवीनतम डेटा इस प्रकार है:

ऊर्जा स्रोतश्रेणीस्थापित क्षमता (GW)हिस्सेदारी (%)
जीवाश्म ईंधनकोयला और लिग्नाइट227.8343.47%
 गैस20.133.84%
 डीजल0.590.11%
कुल जीवाश्म 248.5547.42%
गैर-जीवाश्म ईंधनसौर ऊर्जा143.6027.40%
 पवन ऊर्जा55.1310.52%
 बड़ी जलविद्युत51.169.76%
 परमाणु ऊर्जा8.781.68%
 बायोमास और अन्य16.793.24%
कुल गैर-जीवाश्म 275.4652.58%
कुल क्षमता 524.01100.00%

स्रोत: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और NSO रिपोर्ट 2026

यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में ऊर्जा उत्पादन का आधार अब नवीकरणीय स्रोतों की ओर मजबूती से झुक गया है। सौर ऊर्जा, जो 2014 में नगण्य थी, अब देश की कुल क्षमता का 27% से अधिक हिस्सा कवर करती है ।

क्षमता बनाम उत्पादन का अंतर (The Capacity-Generation Gap)

यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण विश्लेषण यह है कि यद्यपि गैर-जीवाश्म स्रोतों की स्थापित क्षमता 52.6% है, लेकिन कुल बिजली उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी वर्तमान में लगभग 25-26% ही है । इसका मुख्य कारण सौर और पवन ऊर्जा की रुक-रुक कर होने वाली प्रकृति (Intermittency) है। रात के समय सौर उत्पादन शून्य हो जाता है, जिससे बेस-लोड (Base-load) की मांग पूरी करने के लिए कोयले पर निर्भरता बनी रहती है । इस अंतर को पाटने के लिए भारत अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ।

सौर ऊर्जा क्रांति: पीएम सूर्य घर और क्षेत्रीय प्रगति

भारत के सौर ऊर्जा लक्ष्यों का केंद्र अब बड़े 'अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क' से हटकर विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा (Decentralized Solar) की ओर बढ़ रहा है। इसमें 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है ।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: मार्च 2026 तक की प्रगति

फरवरी 2024 में लॉन्च की गई इस योजना का लक्ष्य 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है । मार्च 19, 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि:

कुल स्थापना: 26,19,879 से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं ।

वित्तीय सहायता: सरकार ने अब तक ₹17,967.53 करोड़ की सब्सिडी (CFA) लाभार्थियों को वितरित की है ।

रोजगार सृजन: इस योजना के माध्यम से स्थापना, आपूर्ति श्रृंखला और रखरखाव के क्षेत्र में लगभग 17 लाख नौकरियों के अवसर पैदा होने का अनुमान है ।

राज्यों के स्तर पर गुजरात इस योजना में अग्रणी बना हुआ है, जिसके बाद महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का स्थान है । यह योजना न केवल कार्बन उत्सर्जन कम कर रही है, बल्कि प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान कर मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार कर रही है ।

भारत का सौर विनिर्माण (Solar Manufacturing)

जीवाश्म ईंधन के खिलाफ लड़ाई में भारत की रणनीति केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत सोलर मॉड्यूल और सेल के विनिर्माण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। जनवरी 2026 तक, भारत ने 162 GW की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता और 26 GW की सोलर सेल क्षमता हासिल कर ली है । इससे चीन जैसे देशों से आयात पर निर्भरता कम हुई है और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित हुई है ।

जैव ईंधन और इथेनॉल सम्मिश्रण: 1 अप्रैल 2026 का ऐतिहासिक पड़ाव

आज, 1 अप्रैल 2026 से, पूरे भारत में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की बिक्री को अनिवार्य कर दिया गया है । यह भारत की जैव ईंधन नीति के लिए एक युगांतकारी क्षण है। मूल रूप से, यह लक्ष्य 2030 के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन सरकार ने इसकी सफलता को देखते हुए इसे 2025-26 तक पहले ही हासिल कर लिया ।

इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के लाभ

इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का और क्षतिग्रस्त अनाज से किया जाता है। पेट्रोल में इसके 20% मिश्रण के निम्नलिखित दूरगामी परिणाम हुए हैं:

विदेशी मुद्रा की बचत: पेट्रोल के स्थान पर इथेनॉल के उपयोग से भारत ने 2014 से अब तक लगभग ₹1.40 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है ।

किसानों को लाभ: पिछले एक दशक में डिस्टिलरी इकाइयों द्वारा किसानों को ₹1.18 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि हुई है ।

उत्सर्जन में कमी: इथेनॉल के उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 698 लाख टन की कमी आई है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों (NDCs) के अनुरूप है ।

उच्च ऑक्टेन रेटिंग: E20 पेट्रोल के लिए सरकार ने न्यूनतम 95 RON (Research Octane Number) अनिवार्य किया है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता बढ़ती है और 'नॉकिंग' (Knocking) की समस्या कम होती है 。

इथेनॉल सम्मिश्रण की यह सफलता दर्शाती है कि कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के बीच समन्वय कैसे भारत को जीवाश्म ईंधन से मुक्त कर सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियां: हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

यद्यपि भारत नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है, लेकिन 2026 के शुरुआती महीनों में पश्चिम एशिया में छिड़े 'ईरान युद्ध' और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने ने भारत की ऊर्जा संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है ।

संकट का प्रभाव और प्रतिक्रिया

हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट (Chokepoint) है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसके प्रभाव का विश्लेषण निम्न तालिका में किया गया है:

वस्तुआयात निर्भरताहॉर्मुज मार्ग से हिस्साप्रभाव
कच्चे तेल (Crude Oil)~90%~50%आपूर्ति में देरी, वैश्विक कीमतों में उछाल
एलपीजी (LPG)~60%~90%घरेलू गैस की भारी किल्लत, 54% आपूर्ति प्रभावित
एलएनजी (LNG)~50%~55-60%उर्वरक और बिजली संयंत्रों के लिए गैस की कमी

आंकड़े: मार्च 2026 के संकटकालीन विश्लेषण पर आधारित

सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' के तहत पेट्रोलियम उत्पादों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा और रिफाइनरियों को निर्देश दिया कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के बजाय एलपीजी (LPG) की आपूर्ति बढ़ाएं । इस संकट ने भारत को यह सीख दी है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए केवल स्रोतों का विविधीकरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा को और अधिक गति देनी होगी 。

पर्यावरणीय प्रशासन और भविष्य की रणनीति: 2030-2070

फॉसिल फूल्स डे के उपलक्ष्य में यह समझना भी आवश्यक है कि भारत की दीर्घकालिक जलवायु प्रतिबद्धताएं क्या हैं। प्रधान मंत्री द्वारा ग्लासगो (COP26) में घोषित 'पंचामृत' लक्ष्यों की ओर भारत मजबूती से बढ़ रहा है ।

संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Updated NDCs 2026)

वर्ष 2026 में भारत ने अपने एनडीसी (NDC) को और अधिक महत्वाकांक्षी बनाया है:

60% गैर-जीवाश्म क्षमता: भारत ने अब 2035 तक अपनी कुल बिजली क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है (पिछला लक्ष्य 2030 तक 50% था, जो पहले ही प्राप्त हो चुका है) ।

उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity): 2035 तक जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 2005 के स्तर से 47% की कमी लाने का लक्ष्य है ।

कार्बन सिंक: वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5 से 4 बिलियन टन CO2 के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना ।

सांता मार्टा सम्मेलन (Santa Marta Conference) 2026

वैश्विक स्तर पर, अप्रैल 2026 में कोलंबिया के सांता मार्टा में 'जीवाश्म ईंधन के चरणबद्ध समापन' (Phase-out of Fossil Fuels) पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है । यह सम्मेलन 'फॉसिल फ्यूल नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी' (Fossil Fuel Non-Proliferation Treaty) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए चुनौती यह है कि वे अपनी बढ़ती ऊर्जा मांग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बिठाते हैं ।

डेटा क्लस्टर: यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए निम्नलिखित डेटा बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

तथ्यविवरणस्रोत
इथेनॉल सम्मिश्रणE20 का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025-26 किया गया, 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य। 
गैर-जीवाश्म क्षमताफरवरी 2026 तक 52.58% हासिल की गई। 
पीएम सूर्य घर1 करोड़ घरों का लक्ष्य, 26 लाख से अधिक स्थापना पूर्ण (मार्च 2026)। 
ऊर्जा उपभोगप्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 2015-16 के 15,296 MJ से बढ़कर 18,096 MJ (2024-25)। 
T&D नुकसानपारेषण और वितरण नुकसान 22% से घटकर 17% पर आए। 
सौर विनिर्माणभारत की सोलर मॉड्यूल क्षमता 170 GW के पार। 

विश्लेषण: नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण में चुनौतियां

यद्यपि भारत की प्रगति प्रभावशाली है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं जो यूपीएससी मुख्य परीक्षा के उत्तर लेखन के लिए महत्वपूर्ण हैं:

ग्रिड स्थिरता (Grid Stability): सौर और पवन ऊर्जा की अनिश्चितता के कारण ग्रिड के असंतुलित होने का खतरा रहता है। इसके लिए 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर' और बड़े पैमाने पर स्टोरेज की आवश्यकता है ।

महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की निर्भरता: सोलर पैनल और ईवी बैटरी के लिए लिथियम, कोबाल्ट और तांबे जैसे खनिजों के लिए भारत अभी भी आयात (विशेषकर चीन) पर निर्भर है ।

वित्तीय बाधाएं (Financing Gaps): नीति आयोग के अनुसार, 2070 तक नेट जीरो हासिल करने के लिए भारत को $22.7 ट्रिलियन के निवेश की आवश्यकता है, जिसमें $6.5 ट्रिलियन का वित्तीय अंतर अभी भी बना हुआ है 。

भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition): बड़े सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के लिए विशाल भूमि की आवश्यकता होती है, जिससे अक्सर स्थानीय समुदायों और पर्यावरण के साथ संघर्ष की स्थिति पैदा होती है 。

Why this matters for your exam preparation

यूपीएससी और अन्य राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए यह समाचार अत्यधिक प्रासंगिक है क्योंकि:

GS Paper III (Environment): जलवायु परिवर्तन की रणनीतियां, NDCs, और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों (जैसे सांता मार्टा) से सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं ।

GS Paper III (Economy): ऊर्जा बुनियादी ढांचा, जीवाश्म ईंधन से आयात निर्भरता कम करना, और इथेनॉल सम्मिश्रण का आर्थिक प्रभाव महत्वपूर्ण टॉपिक्स हैं ।

GS Paper II (IR): हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और वैश्विक ऊर्जा भू-राजनीति भारत के सामरिक हितों को प्रभावित करती है ।

Prelims Facts: विभिन्न सरकारी योजनाओं के लक्ष्य (पीएम सूर्य घर, पीएम-कुसुम), ऊर्जा उत्पादन के नवीनतम आंकड़े और महत्वपूर्ण तिथियां (जैसे फॉसिल फूल्स डे) प्रारंभिक परीक्षा के लिए उच्च-संभावना वाले क्षेत्र हैं ।

अथर्व एक्जामवाइज (Atharva Examwise) के पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे इन आंकड़ों को अपने पास नोट कर लें, क्योंकि ऊर्जा और पर्यावरण से संबंधित प्रश्न अब केवल 'स्थिर' (Static) नहीं रह गए हैं, बल्कि पूरी तरह से 'समसामयिक' (Current) डेटा पर आधारित होते जा रहे हैं।