Daily UPSC Current Affairs: भारत का पहला ई-मेथनॉल प्लांट, कांडला, गुजरात (26 February 2026)

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प्रस्तावना: आज की प्रमुख Current Affairs खबर

भारत के समुद्री परिवहन क्षेत्र को कार्बन-मुक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में गुजरात के कांडला में देश का पहला ई-मेथनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट दीनदयाल पोर्ट ऑथोरिटी और असम फम्यूंस्टिकल लिमिटेड की साझेदारी में विकसित होगा, जिसकी क्षमता 150 टन प्रतिदिन ई-मेथनॉल उत्पादन की होगी।

यह खबर पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy), हरित शिपिंग और औद्योगिक नीति जैसे कई महत्वपूर्ण UPSC विषयों से सीधे जुड़ती है।

ई-मेथनॉल प्लांट: बुनियादी तथ्य (Prelims के लिए महत्वपूर्ण)

नीचे दिए गए बिंदु सीधे factual questions के रूप में प्रीलिम्स और अन्य Objective परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं।

स्थान: कांडला, गुजरात (दीनदयाल पोर्ट ऑथोरिटी के अधिकार क्षेत्र में).

परियोजना का प्रकार: देश का पहला ई-मेथनॉल (e-methanol) प्लांट.

संयुक्त पहल: दीनदयाल पोर्ट ऑथोरिटी + असम फम्यूंस्टिकल लिमिटेड.

उत्पादन क्षमता: 150 टन प्रति दिन (150 TPD) अनुमानित उत्पादन.

प्रमुख उद्देश्य: समुद्री शिपिंग सेक्टर के लिए वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना और डिकार्बोनाइजेशन को तेज करना.

रणनीतिक महत्व: कांडला की लोकेशन के कारण यहां से अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सीधे ई-मेथनॉल की सप्लाई संभव होगी.

ई-मेथनॉल क्या है? (संकल्पना आधारित समझ)

ई-मेथनॉल एक "कार्बन-न्यूट्रल" या कम-कार्बन तरल ईंधन है, जिसे रिन्यूएबल ऊर्जा और कैप्चर की गई कार्बन डाइऑक्साइड से तैयार किया जाता है।

पारंपरिक मेथनॉल आमतौर पर फॉसिल फ्यूल (प्राकृतिक गैस आदि) से बनाया जाता है, जबकि ई-मेथनॉल में इस्तेमाल होने वाली कार्बन वातावरण या औद्योगिक उत्सर्जन से प्राप्त होती है।

यह शिपिंग, केमिकल इंडस्ट्री और पावर सेक्टर जैसे कई क्षेत्रों में फॉसिल फ्यूल का विकल्प बन सकता है।

ई-मेथनॉल की मुख्य विशेषताएं

तरल रूप में मौजूद, इसलिए हाइड्रोजन या LNG की तरह महंगे क्रायोजेनिक स्टोरेज की जरूरत नहीं.

मौजूदा पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और जहाजों के टैंकों में सिर्फ मामूली बदलाव के साथ उपयोग योग्य.

कार्बन-न्यूट्रल फ्यूल की श्रेणी में, क्योंकि इसमें उपयोग की गई CO₂ पहले से वातावरण या उद्योग से उत्सर्जित होती है।

सर्कुलर इकोनॉमी और कार्बन कैप्चर तकनीक

इस प्लांट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ और ‘कार्बन कैप्चर’ आधारित तकनीक है।

प्रक्रिया कैसे काम करती है?

औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाली CO₂ को सीधे कैप्चर किया जाएगा (Carbon Capture).

दूसरी ओर, रिन्यूएबल ऊर्जा (सौर/पवन) से चलने वाले इलेक्ट्रोलाइजर द्वारा पानी से ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ तैयार की जाएगी।

कैप्चर की गई CO₂ और ग्रीन हाइड्रोजन को रासायनिक प्रक्रिया के जरिए संयोजित कर ई-मेथनॉल तैयार किया जाएगा।

इस तरह वातावरण में पहले से मौजूद प्रदूषणकारी कार्बन को उच्च-ऊर्जा वाले स्वच्छ तरल ईंधन में बदल दिया जाता है, जिससे यह प्रक्रिया सर्कुलर इकोनॉमी और नेट-जीरो लक्ष्यों दोनों के अनुरूप मानी जाती है।

शिपिंग सेक्टर के लिए आर्थिक और तकनीकी लाभ

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग ग्लोबल CO₂ उत्सर्जन में उल्लेखनीय योगदान देता है। ऐसे में वैकल्पिक ईंधन के रूप में ई-मेथनॉल कई आर्थिक और तकनीकी लाभ प्रदान करता है।

1. स्टोरेज और हैंडलिंग में आसानी

ई-मेथनॉल को सामान्य तापमान और वायुमंडलीय दबाव पर तरल रूप में रखा जा सकता है।

हाइड्रोजन या LNG के मुकाबले इसे स्टोर करने के लिए बहुत महंगे क्रायोजेनिक टैंकों की जरूरत नहीं पड़ती।

2. मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग

कई बंदरगाहों और जहाजों पर तरल ईंधन के लिए जो टैंक और पाइपलाइन प्रणाली पहले से मौजूद है, उसी में मामूली बदलाव करके ई-मेथनॉल को उपयोग में लाया जा सकता है।

इससे नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी पूंजीगत व्यय (Capex) की जरूरत कम हो जाती है।

3. जहाजों के रेट्रोफिटिंग की कम लागत

पारंपरिक फ्यूल ऑयल से ई-मेथनॉल पर शिफ्ट होने के लिए जहाजों में सीमित तकनीकी संशोधन करने होते हैं।

हाइड्रोजन या LNG आधारित प्रणालियों की तुलना में रेट्रोफिटिंग की लागत और समय दोनों कम हो सकते हैं।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

कांडला में ई-मेथनॉल प्लांट सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत की ‘हरित शिपिंग हब’ बनने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

भारत को क्या लाभ होंगे?

भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होगा जो शिपिंग के लिए वैकल्पिक, स्वच्छ ईंधन का उत्पादन कर रहे हैं।

कांडला की रणनीतिक स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सीधे ई-मेथनॉल की सप्लाई की जा सकेगी, जिससे भारत क्षेत्रीय हरित फ्यूल सप्लाई सेंटर बन सकता है।

यह परियोजना भारत के नेट-जीरो (Net-Zero) और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद करेगी।

संबंधित नीतियां और पहल (Mains के लिए linking points)

राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission).

ब्लू इकोनॉमी और पोर्ट-लेड डेवलपमेंट से जुड़ी नीतियां (जैसे सागरमाला आदि).

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IMO (International Maritime Organization) द्वारा शिपिंग सेक्टर में उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य.

इन्हें GS Paper 3 (Environment, Economy, Infrastructure) और GS Paper 2 (International bodies and agreements) के उत्तरों में एकीकृत किया जा सकता है।

Prelims के लिए संभावित प्रश्न

संभावित Objective प्रकार के प्रश्न

भारत का पहला ई-मेथनॉल प्लांट कहाँ स्थापित किया जा रहा है?

a) मुंबई पोर्ट

b) कोच्चि पोर्ट

c) कांडला (दीनदयाल पोर्ट)

d) विशाखापत्तनम पोर्ट

ई-मेथनॉल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  •  

यह फॉसिल फ्यूल आधारित मेथनॉल है।

  •  

इसे औद्योगिक चिमनियों से कैप्चर की गई CO₂ और ग्रीन हाइड्रोजन से बनाया जा सकता है।

  •  

इसे स्टोर करने के लिए क्रायोजेनिक टैंकों की आवश्यकता होती है।

a) केवल 1 और 2

b) केवल 2

c) केवल 2 और 3

d) 1, 2 और 3

इस ई-मेथनॉल प्लांट के संदर्भ में सही युग्म कौन-सा है?

a) दीनदयाल पोर्ट ऑथोरिटी – असम फम्यूंस्टिकल लिमिटेड – ई-मेथनॉल

b) पारादीप पोर्ट – ओएनजीसी – ग्रीन अमोनिया

c) कोच्चि पोर्ट – गैल – LNG टर्मिनल

d) कांडला पोर्ट – IOC – बायो-डीजल प्लांट

इन प्रकार के प्रश्न सीधे factual understanding और concept clarity दोनों की जांच करते हैं।

Mains Answer Writing के लिए Key Points

UPSC Mains के GS Paper 3 में इस खबर को निम्नलिखित dimensions से जोड़ा जा सकता है।

डिकार्बोनाइजेशन और जलवायु परिवर्तन: शिपिंग सेक्टर में वैकल्पिक ईंधन अपनाने से भारत के जलवायु लक्ष्यों को समर्थन.

सर्कुलर इकोनॉमी: औद्योगिक उत्सर्जन से CO₂ को कैप्चर करके ईंधन में बदलना ‘waste to wealth’ और resource efficiency का उदाहरण है।

ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता में कमी: वैकल्पिक घरेलू ईंधन उत्पादन से फॉसिल फ्यूल आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।

ब्लू इकोनॉमी और पोर्ट-लेड डेवलपमेंट: कांडला जैसे पोर्ट को हरित शिपिंग हब के रूप में विकसित करना भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

उम्मीदवार अपने उत्तरों में इस केस स्टडी को उदाहरण के रूप में जोड़कर उत्तरों को समकालीन और data-driven बना सकते हैं।

Why this matters for your exam preparation

यह खबर UPSC Prelims के लिए factual question, Matching type और Assertion-Reason जैसे प्रश्नों का आधार बन सकती है।

Mains में GS Paper 3 (Environment, Economy, Infrastructure, Energy) तथा GS Paper 2 (International bodies, Maritime security) के उत्तरों में इसे समकालीन उदाहरण के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

Essay Paper में climate change, sustainable development, energy transition, blue economy आदि विषयों पर लिखते समय ई-मेथनॉल, सर्कुलर इकोनॉमी और हरित शिपिंग जैसे keywords और case studies उत्तर को समृद्ध बना सकते हैं।

अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं (State PCS, SSC, Banking, Railways आदि) में भी यह एक महत्वपूर्ण Current Affairs topic है, खासकर विज्ञान-प्रौद्योगिकी और पर्यावरण से जुड़े सेक्शन के लिए।

इसलिए विद्यार्थियों को चाहिए कि वे न केवल इस परियोजना के स्थान, साझेदार संस्थाओं और उत्पादन क्षमता जैसे तथ्यों को याद रखें, बल्कि इसके पीछे की तकनीक (Carbon Capture, Green Hydrogen, Circular Economy) और नीति-संदर्भ (Net-Zero targets, Blue Economy, Maritime emissions) को भी अच्छी तरह समझें।