Corruption Perceptions Index 2025: भारत की 91वीं रैंक – UPSC Current Affairs
Transparency International द्वारा जारी Corruption Perceptions Index (CPI) 2025 में भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर रहा है, और इसका स्कोर 39 दर्ज किया गया है। यह पिछली बार के 96वें स्थान और 38 के स्कोर से हल्का सुधार है, लेकिन भारत अब भी वैश्विक औसत स्कोर 42 से नीचे है। इस वैश्विक औसत को पिछले दस वर्षों का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है।
CPI क्या है और इसे कौन जारी करता है?
Corruption Perceptions Index (भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक) एक वार्षिक सूचकांक है जिसे गैर-सरकारी संगठन Transparency International द्वारा जारी किया जाता है। यह सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के धारणा-स्तर के आधार पर देशों को रैंक करता है। यह विशेषज्ञों और व्यवसायी समुदाय के सर्वेक्षणों और 13 तक डेटा स्रोतों के आधार पर तैयार किया जाता है।
CPI में देशों को 0 से 100 के पैमाने पर अंक दिए जाते हैं, जहाँ 0 का अर्थ 'अत्यधिक भ्रष्ट' और 100 का अर्थ 'अत्यंत साफ-सुथरा' सार्वजनिक क्षेत्र होता है। 2024 की रिपोर्ट में 180 देशों को रैंक किया गया था, जबकि नवीनतम रिपोर्ट में भारत सहित 182 देशों और क्षेत्रों का आकलन किया गया है।
CPI 2025 में भारत की स्थिति: 91वीं रैंक, स्कोर 39
CPI 2025 में भारत को 182 देशों में 91वीं रैंक और 39 का स्कोर प्राप्त हुआ। यह स्कोर पिछले वर्ष के 38 से एक अंक अधिक है, जिससे भारत की रैंक भी 96 से सुधरकर 91 हो गई है। इसके बावजूद, भारत अभी भी वैश्विक औसत 42 से नीचे है, जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की धारणा भारत में एक संरचनात्मक चुनौती के रूप में बनी हुई है।
भारत का CPI प्रदर्शन (2022–2025)
| वर्ष | रैंक | स्कोर |
|---|---|---|
| 2025 | 91 | 39 |
| 2024 | 96 | 38 |
| 2023 | 93 | 39 |
| 2022 | 85 | 40 |
ऊपर दी गई तालिका से स्पष्ट है कि 2022 से 2024 के बीच भारत का स्कोर 40 से घटकर 38 तक चला गया था, जबकि 2025 में यह फिर से 39 पर लौट आया है। पर समग्र रूप से पिछले एक दशक में भारत का CPI स्कोर 38–41 की संकीर्ण रेंज में ही अटका रहा है।
परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु (भारत)
CPI 2025 में भारत की रैंक: 91/182, स्कोर: 39।
पिछले वर्ष (CPI 2024) में भारत: 96/180, स्कोर 38।
2023 में भारत: 93/180, स्कोर 39; 2022 में: 85/180, स्कोर 40।
भारत का स्कोर अब भी वैश्विक औसत 42 से कम है, जो इसे “मध्यम से उच्च भ्रष्टाचार धारणा” की श्रेणी में रखता है।
अथर्व Examwise पर India–CPI से जुड़ी पृष्ठभूमि, डेटा और प्रश्न अभ्यास के लिए देखें:
India and Global Indices – UPSC Prelims Notes
Governance & Corruption – GS-2 Mains Notes
वैश्विक परिदृश्य: CPI 2025 से क्या संकेत मिलते हैं?
CPI 2025 में वैश्विक औसत स्कोर गिरकर 42 पर आ गया है, जिसे पिछले दस वर्षों का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है। इसका अर्थ है कि समग्र रूप से अधिकांश देशों में भ्रष्टाचार विरोधी प्रयास या तो ठहर गए हैं या पीछे हट रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, कुल देशों में से लगभग दो-तिहाई देशों का स्कोर 50 से नीचे है, जो दुनिया के बड़े हिस्से में सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च स्तर की भ्रष्टाचार-धारणा की ओर इशारा करता है। एशिया–प्रशांत क्षेत्र में भी सुधार बहुत धीमा रहा है और कई लोकतांत्रिक देशों में संस्थागत मानकों का क्षरण, राजनीतिक फंडिंग की अपारदर्शिता और नागरिक स्वतंत्रताओं पर दबाव देखा गया है।
80+ स्कोर वाले सबसे कम भ्रष्ट देश
हाल की CPI रिपोर्टों में लगातार कुछ देश शीर्ष पर बने हुए हैं, जिनके स्कोर 80 या उससे ऊपर हैं और जिन्हें दुनिया के सबसे कम भ्रष्ट देशों में गिना जाता है – जैसे डेनमार्क, फिनलैंड, सिंगापुर, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और स्विट्ज़रलैंड। 2024 और 2025 की रिपोर्टों में डेनमार्क कई वर्षों से प्रथम स्थान पर है, जबकि फिनलैंड और सिंगापुर प्रायः दूसरे या तीसरे स्थान पर रहते हैं।
इन देशों की विशेषताएँ (जो परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं):
मजबूत, स्वतंत्र न्यायपालिका और नियामक संस्थाएँ।
पारदर्शी राजनीतिक फंडिंग और कड़े हित–संघर्ष (conflict-of-interest) नियम।
उच्च स्तर की प्रेस स्वतंत्रता और सिविल सोसाइटी की सक्रियता।
भारत में भ्रष्टाचार के बने रहने के प्रमुख कारण
Transparency International और अन्य विश्लेषणों के अनुसार, भारत में भ्रष्टाचार की धारणा बनी रहने के कई संरचनात्मक कारण हैं:
मुख्य कारक (Mains के लिए उपयोगी बिंदु):
ब्यूरोक्रेटिक रेड टेप और जटिल प्रक्रियाएँ: अत्यधिक नियम और लंबी अनुमोदन प्रक्रियाएँ “गेटकीपिंग” और रिश्वत की गुंजाइश पैदा करती हैं।
राजनीतिक फंडिंग की अपारदर्शिता: चुनावी फंडिंग के तंत्र में पारदर्शिता की कमी से “क्रोनी कैपिटलिज़्म” (Crony Capitalism) और नीति–निर्माण पर धन का प्रभाव बढ़ता है।
कानून का असमान और कमजोर प्रवर्तन: उच्च–प्रोफाइल मामलों की जांच और मुकदमों में देरी तथा कम सज़ा–दर से दण्डहीनता (impunity) का संदेश जाता है।
पत्रकारों और व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा की कमी: CPI रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि कम स्कोर वाले कई देशों में खोजी पत्रकारों और भ्रष्टाचार उजागर करने वालों पर हमलों का जोखिम अधिक रहता है, और भारत ऐसे देशों में गिना जाता है।
संवैधानिक निकायों और नियामक संस्थाओं की स्वायत्तता पर प्रश्न: कई देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, की रिपोर्टों ने यह इंगित किया है कि जाँच एजेंसियों और अन्य संस्थाओं की स्वतंत्रता पर राजनीतिक प्रभाव की धारणा बनी हुई है।
इन बिंदुओं को आप GS-2 (Governance), GS-4 (Ethics) और निबंध में “भ्रष्टाचार, नैतिक प्रशासन और संस्थागत सुधार” जैसे टॉपिक्स के तहत सीधे उद्धृत कर सकते हैं।
सुधार के लिए सुझाए गए उपाय (परीक्षा–उन्मुख दृष्टिकोण)
अंतरराष्ट्रीय और भारतीय स्रोत निम्न प्रकार के सुधारों पर बल देते हैं, जिन्हें आप अपने उत्तरों में “Way Forward” (आगे की राह) के रूप में उपयोग कर सकते हैं:
राजनीतिक फंडिंग में पूर्ण पारदर्शिता: डोनेशन के पब्लिक डिस्क्लोज़र, मजबूत ऑडिट और चुनावी सुधारों के माध्यम से “क्लीन मनी–क्लीन पॉलिटिक्स” की दिशा में कदम।
जाँच एजेंसियों की वास्तविक स्वायत्तता: नियुक्ति, सेवा–सुरक्षा और फंडिंग में राजनीतिक हस्तक्षेप को न्यूनतम करना।
व्हिसलब्लोअर और पत्रकार सुरक्षा कानूनों का सख्त क्रियान्वयन: सूचना उजागर करने वालों की पहचान, नौकरी और शारीरिक सुरक्षा की कानूनी गारंटी।
डिजिटाइज़ेशन और प्रोसेस–रीइंजीनियरिंग: ई–गवर्नेंस, DBT, ऑनलाइन अनुमोदन प्रणाली आदि के माध्यम से “विशेषाधिकार” (Discretion) कम कर “पारदर्शिता” (Transparency) बढ़ाना।
सिविक स्पेस और RTI को मजबूत करना: नागरिकों, मीडिया और सिविल सोसाइटी की निगरानी क्षमता जितनी मजबूत होगी, भ्रष्टाचार उतना ही नियंत्रित किया जा सकेगा।
अथर्व Examwise पर इन सुधारों से संबंधित विस्तृत नोट्स के लिए देखें:
Ethics, Integrity & Aptitude – GS-4 Handwritten Notes
Election Funding & Electoral Reforms – GS-2 Topic Guide
CPI पर आधारित संभावित Prelims और Mains एंगल
Prelims–उन्मुख तथ्य बिंदु
CPI किसके द्वारा जारी किया जाता है? – Transparency International (NGO)।
स्कोर स्केल क्या है? – 0 (सबसे भ्रष्ट) से 100 (सबसे साफ)।
CPI किसको मापता है? – सार्वजनिक क्षेत्र (Public sector) में अनुमानित भ्रष्टाचार (Perceived corruption)।
CPI 2025 में भारत की रैंक और स्कोर – 91 और 39 (182 देशों में)।
वैश्विक औसत स्कोर – 42, जो पिछले दशक का सबसे कम स्तर है (CPI 2025 के अनुसार)।
Mains–उन्मुख थीम्स
"भ्रष्टाचार और लोकतंत्र का क्षरण" – CPI और लोकतांत्रिक सूचकों के बीच संबंध।
"इंस्टीट्यूशनल इंटीग्रिटी (संस्थागत सत्यनिष्ठा) और Accountability (जवाबदेही)" – शीर्ष देशों की सफलता से सबक।
"India’s CPI performance and the challenge of governance reforms" – GS-2 में सीधे सवाल की संभावना।
परीक्षा की तैयारी के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
CPI 2025 से जुड़े तथ्य और विश्लेषण सीधे तौर पर UPSC Prelims, Mains और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सिलेबस से जुड़े हैं। Prelims में यह “इंडाइसेज़/रिपोर्ट्स” और “Important International Organisations” के अंतर्गत तथ्यात्मक (factual) प्रश्न के रूप में पूछा जा सकता है – जैसे जारी करने वाली संस्था, स्कोर स्केल, भारत की रैंक/स्कोर या वैश्विक औसत।
Mains के GS-2 (Governance, Transparency & Accountability) और GS-4 (Ethics) में CPI डेटा का उपयोग आप भ्रष्टाचार, संस्थागत सुधार, राजनीतिक फंडिंग, मीडिया–स्वतंत्रता, और व्हिसलब्लोअर संरक्षण जैसे टॉपिक्स पर उत्तर समृद्ध करने के लिए कर सकते हैं, विशेषकर “critically analyse” और “discuss” प्रकार के सवालों में। निबंध पेपर में “Corruption and Development”, “Crisis of Public Morality” या “Good Governance” जैसे विषयों पर लिखते समय भारत के CPI ट्रेंड (2022–2025) और शीर्ष देशों के उदाहरण आपके आंसर को डेटा–समृद्ध और अधिक विश्वसनीय बनाते हैं।
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