परिचय: भारत-जर्मनी संबंधों में ऐतिहासिक मील का पत्थर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने 12 जनवरी 2026 को गांधीनगर (गुजरात) में ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की, जिसके परिणामस्वरूप 19 व्यापक द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। यह यात्रा मर्ज़ का भारत का प्रथम दौरा होने के साथ-साथ एशिया की ओर उनका प्रथम राजकीय दौरा भी है, जो जर्मनी की भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने की इच्छा को रेखांकित करता है।
दोनों देशों ने 2026 में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाते हुए रक्षा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल तकनीक एवं हरित ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए मार्ग निर्धारित किए। इन समझौतों ने दोनों देशों की ‘नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (rules-based international order)’ के प्रति साझा प्रतिबद्धता एवं भू-राजनीतिक निर्भरताओं से मुक्त सुरक्षित एवं सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण की सामूहिक आवश्यकता को प्रकट किया।
मोडी-मर्ज़ वार्ता के प्रमुख परिणाम
1. भारतीय पासपोर्ट धारकों हेतु वीज़ा-मुक्त ट्रांज़िट सुविधा
क्या बदल गया?
अब भारतीय पासपोर्ट धारक तृतीय देशों की यात्रा के दौरान जर्मन हवाई अड्डों पर वीज़ा-मुक्त ट्रांज़िट सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। इससे पूर्व भारतीय नागरिकों को फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख अथवा बर्लिन जैसे जर्मन हवाई अड्डों पर संक्षिप्त ठहराव हेतु भी शेंगेन ट्रांज़िट वीज़ा आवश्यक होता था।
महत्व क्यों?
यात्रा प्रक्रिया सुगम: पृथक ट्रांज़िट वीज़ा आवेदन की आवश्यकता समाप्त, दस्तावेज़ीकरण एवं प्रसंस्करण समय में कमी
लागत में कमी: वीज़ा शुल्क एवं संबंधित व्यय में बचत
व्यापारिक लाभ: भारत-यूके के मध्य जर्मन कैरियर्स (Lufthansa, Air India कोड-शेयर) द्वारा सुगम कनेक्टिविटी
जन-से-जन संपर्क: सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं पेशेवर संबंधों को सुदृढ़ करना
व्यावहारिक प्रभाव:
अब दिल्ली से लंदन (मार्ग: फ्रैंकफर्ट/म्यूनिख) अथवा सिंगापुर (मार्ग: बर्लिन) की यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों को ट्रांज़िट वीज़ा की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे अंतर्राष्ट्रीय यात्राएँ अधिक किफायती एवं सुगम होगी।
2. रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप
समझौता:
भारत एवं जर्मनी ने रक्षा उद्योगों के मध्य दीर्घकालिक सहयोग हेतु एक व्यापक रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करने संबंधी संयुक्त आशय-पत्र (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए।
मुख्य स्तंभ (Key Pillars):
| सहयोग क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| प्रौद्योगिकी साझेदारी | संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पहल |
| सह-विकास एवं सह-उत्पादन | रक्षा प्लेटफॉर्म एवं उपकरणों का संयुक्त निर्माण |
| निर्यात स्वीकृति सरलीकरण | जर्मनी द्वारा रक्षा निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण |
| औद्योगिक सहभागिता | बर्लिन एवं नई दिल्ली में नियमित रक्षा राउंडटेबल एवं सेमिनार |
वर्तमान रक्षा सहयोग:
पनडुब्बी प्रौद्योगिकी: उन्नत पनडुब्बी विकास (ThyssenKrupp Marine Systems के €5 बिलियन पनडुब्बी सौदे सहित)
हेलीकॉप्टर प्रणाली: बाधा-परिहार प्रणाली
काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS): उन्नत ड्रोन-रोधी प्रणाली
संयुक्त सैन्य अभ्यास: वायु एवं नौसैनिक सहयोग, पोर्ट विज़िट एवं सुरक्षा परामर्श
रणनीतिक महत्व:
यह रोडमैप भारत की निम्न शक्ति-लागत एवं मानव संसाधन क्षमता को जर्मनी की उच्च-स्तरीय तकनीक एवं पूँजी निवेश के साथ संयोजित कर ‘विन-विन सहयोग’ स्थापित करता है, साथ ही भारत की रक्षा आयात निर्भरता को भी कम करता है।
3. सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम साझेदारी
ढाँचा:
भारत एवं जर्मनी ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम साझेदारी पर संयुक्त आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिससे विनिर्माण एवं विकास हेतु साझा रोडमैप स्थापित होगा।
भारत हेतु लाभ:
आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन: वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका सुदृढ़
निवेश अवसर: जर्मन सेमीकंडक्टर कंपनियों हेतु भारत में विनिर्माण एवं R&D केंद्र
कौशल विकास: प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान क्षेत्रों में उच्च-मूल्य रोजगार
नवाचार केंद्र: भारत की PLI योजना को समर्थन
उद्योग संदर्भ:
2000+ जर्मन कंपनियाँ भारत में सक्रिय हैं; अतः यह साझेदारी जर्मनी की भारत-केंद्रित तकनीकी निवेश रणनीति के अनुरूप है।
4. महत्वपूर्ण खनिज सहयोग (Critical Minerals)
रणनीतिक महत्व:
दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग पर सहमति जताई, जो हरित ऊर्जा संक्रमण एवं उन्नत विनिर्माण हेतु अत्यावश्यक है।
अनुप्रयोग क्षेत्र:
बैटरी विनिर्माण
सौर पैनल एवं नवीकरणीय उपकरण
भू-राजनीतिक संवेदनशील आपूर्ति निर्भरता में कमी
जर्मनी की खनिज प्रसंस्करण तकनीक
5. नवीकरणीय ऊर्जा पर उत्कृष्टता केंद्र
उद्यम:
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जर्मनी नवीकरणीय ऊर्जा उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की।
वित्तीय प्रतिबद्धता:
जर्मनी ने GSDP के अंतर्गत €1.24 बिलियन की अतिरिक्त सहायता की घोषणा, जिसका उपयोग:
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं
हरित हाइड्रोजन विकास
PM ई-बस सेवा कार्यक्रम
जलवायु-सुदृढ़ शहरी अवसंरचना
हेतुओं हेतु किया जाएगा।
पूर्व प्रतिबद्धता:
GSDP के अंतर्गत जर्मनी 2030 तक €10 बिलियन की प्रतिबद्धता कर चुका है, जिसमें से ~€5 बिलियन 2022 से उपयोग/निर्धारित।
6. उच्च शिक्षा एवं कौशल गतिशीलता रोडमैप
मुख्य समझौते:
इंडो-जर्मन व्यापक उच्च शिक्षा रोडमैप
द्वैध डिग्री कार्यक्रम (IIT एवं जर्मन तकनीकी विश्वविद्यालयों के मध्य)
भारतीय स्नातकों हेतु जर्मन श्रम बाजार में समाकलन
NEP 2020 के अंतर्गत जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने हेतु आमंत्रण
अवसर:
जर्मनी में बढ़ती भारतीय छात्र संख्या दोनों देशों के शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करती है।
7. CEO फोरम एवं आर्थिक साझेदारी
संस्थागत ढाँचा:
CEO Forum को संयुक्त भारत-जर्मनी आर्थिक एवं निवेश समिति में समाहित किया गया।
दायरा:
रक्षा क्षेत्र में सह-नवाचार एवं सह-उत्पादन
व्यापार एवं निवेश प्रवाह में वृद्धि
आगामी भारत-EU शिखर सम्मेलन में FTA पर प्रगति
8. हिंद-प्रशांत सहयोग एवं सुरक्षा संवाद
नए तंत्र:
हिंद-प्रशांत परामर्श संवाद
Track 1.5 उच्च-स्तरीय विदेश नीति संवाद
दोनों देशों ने समर्थन पुनः व्यक्त किया:
Free & Open Indo-Pacific (FOIP)
UNCLOS
India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC)
सांस्कृतिक क्षण — साबरमती पर पतंग-उत्सव
कूटनीति से इतर, मोदी एवं मर्ज़ ने अहमदाबाद में अंतर्राष्ट्रीय पतंग उत्सव में सहभागिता की। मर्ज़ द्वारा पतंग उड़ाने का प्रतीकात्मक gesture दोनों देशों के जन-से-जन संबंधों एवं सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ कौन हैं?
संक्षिप्त प्रोफ़ाइल:
आयु: 69 वर्ष
पर्वतारोही: 13,000-फुट स्विस ऐल्प्स शिखर आरोहण
राजनीतिक सहभागिता: 2021 चुनाव अभियान में 12 दिन साइकिल प्रचार
वैवाहिक स्थिति: पत्नी शार्लोट (न्यायाधीश)
रुचियाँ: फोटोग्राफी, प्रौद्योगिकी, विमानन (लाइसेंस प्राप्त पायलट)
तैयारी पद्धति:
प्रत्येक प्रमुख भाषण/सभा पूर्व एक घंटे का एकांत अनुशासन, जो उनके शासन एवं कूटनीति में पद्धतिगत दृष्टि को दर्शाता है।
19 द्विपक्षीय समझौते: संपूर्ण विवरण
समझौते निम्न क्षेत्रों में:
रक्षा औद्योगिक रोडमैप
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम साझेदारी
महत्वपूर्ण खनिज सहयोग
दूरसंचार सहयोग
खेल सहयोग
उच्च शिक्षा रोडमैप
डिजिटल संवाद कार्ययोजना (2025-27)
हरित हाइड्रोजन ऑफटेक समझौता (AM Green-Uniper)
बैटरी भंडारण कार्यसमूह
स्वास्थ्य, मानव संसाधन, क्षमता विकास आदि (10-19)
रणनीतिक महत्व — एशिया की ओर जर्मनी का झुकाव
वैश्विक परिप्रेक्ष्य:
मर्ज़ का भारत-केंद्रित एशियाई प्रथम दौरा संकेत देता है:
आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण (चीन पर निर्भरता में कमी)
भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन
भारतीय बाजार एवं जनसंख्या लाभ
AI, सेमीकंडक्टर एवं हरित तकनीक में प्रतिस्पर्धा
UPSC एवं प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्व
1. अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं विदेश नीति
UPSC प्रासंगिकता (GS-II):
द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी
रक्षा सहयोग ढाँचा
वीज़ा एवं गतिशीलता नीति
FOIP एवं Indo-Pacific तंत्र
मुख्य बिंदु:
वीज़ा-मुक्त ट्रांज़िट → जन-से-जन कूटनीति
रक्षा औद्योगिक सहयोग → आत्मनिर्भर भारत
सेमीकंडक्टर साझेदारी → तकनीकी संप्रभुता
2. आर्थिक सहयोग एवं व्यापार
UPSC प्रासंगिकता (GS-III):
विदेशी निवेश
तकनीकी हस्तांतरण
विनिर्माण सहयोग
आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन
3. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
प्रासंगिक विषय:
सेमीकंडक्टर (PLI)
हरित हाइड्रोजन
C-UAS रक्षा तकनीक
4. भूगोल एवं भू-राजनीति
Indo-Pacific रणनीति
आपूर्ति श्रृंखला पुनर्संरेखण
चीन कारक
5. प्रीलिम्स हेतु संभावित प्रश्न
75 वर्ष: 2026
आगंतुक: Friedrich Merz (प्रथम एशिया दौरा)
समझौते: 19
कंपनी: ThyssenKrupp Marine Systems
6. Mains संरचना
प्रश्न:
“भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी का सेमीकंडक्टर, रक्षा औद्योगिक रोडमैप एवं आत्मनिर्भर भारत संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।”
संरचना:
परिचय
सेमीकंडक्टर
रक्षा
Indo-Pacific
निष्कर्ष
7. संबंधित परस्पर विषय
भारत-EU FTA
आत्मनिर्भर भारत
NEP 2020
GSDP
महत्वपूर्ण खनिज
त्वरित पुनरावृत्ति (10 बिंदु):
वीज़ा-मुक्त ट्रांज़िट
75 वर्ष पूर्ण
19 समझौते
रक्षा रोडमैप
सेमीकंडक्टर साझेदारी
€1.24 बिलियन GSDP
CEO Forum
उच्च शिक्षा रोडमैप
महत्वपूर्ण खनिज सहयोग
FOIP-UNCLOS-IMEC समर्थन
निष्कर्ष
जनवरी 2026 की मोदी-मर्ज़ वार्ता ने भारत-जर्मनी संबंधों को नई दिशा प्रदान की। प्रतीकात्मक पतंग-उत्सव से परे, इन समझौतों के व्यावहारिक परिणाम भारतीय यात्रियों हेतु सुगम यात्रा, भारत की रक्षा क्षमता में वृद्धि, सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता एवं जर्मनी के वृद्ध होती श्रमशक्ति हेतु भारतीय पेशेवरों का अवसर हैं।
UPSC परीक्षार्थियों हेतु यह घटना अंतर्राष्ट्रीय संबंध, आर्थिक सहयोग, तकनीकी हस्तांतरण, भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन एवं सतत विकास जैसे बहु-विषयी विषयों का उत्कृष्ट उदाहरण है।