ट्रंप के नए टैरिफ़ नीति का भारत और वैश्विक व्यापार पर प्रभाव जानें। UPSC, SSC और बैंकिंग छात्रों के लिए जरूरी करेंट अफेयर्स विश्लेषण।
ट्रंप के टैरिफ़ का हमला: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए जरूरी विश्लेषण
2 अप्रैल 2025 को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "लिबरेशन डे" के अवसर पर अमेरिका के व्यापार घाटे को लेकर कड़ा कदम उठाया। उन्होंने सभी देशों पर नए टैरिफ़ (आयात शुल्क) लगाने का ऐलान किया — जिसे उन्होंने "प्रतिशोधात्मक टैरिफ़" कहा।
इस लेख में हम आपको इन टैरिफ़ के पीछे का तर्क, भारत पर इसका असर, और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव सरल भाषा में समझा रहे हैं — जो कि UPSC, SSC, बैंकिंग व अन्य परीक्षाओं के लिए बेहद जरूरी है।
क्या ऐलान हुआ है?
दो प्रमुख टैरिफ़ की श्रेणियां:
सामान्य टैरिफ़ 10% — सभी देशों पर लागू, 5 अप्रैल 2025 से प्रभावी
देश-विशेष टैरिफ़, जो हर देश द्वारा अमेरिका पर लगाए गए शुल्क के आधार पर तय हुआ है — 9 अप्रैल 2025 से प्रभावी
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका "दयालु" देश है, इसलिए वह सिर्फ उतने टैरिफ़ लगा रहा है जितने का आधा दूसरे देश अमेरिका पर लगाते हैं।
वैश्विक प्रभाव: किन देशों पर सबसे ज्यादा असर?
देश | ट्रंप का टैरिफ़ (%) | 2024 में अमेरिका का व्यापार घाटा (मिलियन $ में) | प्रति व्यक्ति आय |
---|---|---|---|
कंबोडिया | 49% | –12,300 | $2,950 |
वियतनाम | 46% | –1,22,071 | $4,990 |
चीन | 34% | –2,95,402 | $13,870 |
बांग्लादेश | 37% | –6,152 | $2,770 |
भारत | 26% | –45,664 | $2,940 |
यूरोपीय संघ | 20% | –2,31,769 | $45,240 |
दक्षिण कोरिया | 25% | –66,007 | $37,670 |
मुख्य बिंदु:
गरीब देशों जैसे कंबोडिया, बांग्लादेश और भारत पर ज्यादा टैरिफ़ लगे हैं जबकि अमीर देशों जैसे यूरोप पर कम।
यूके, ब्राज़ील, और सिंगापुर जैसे देश जिनसे अमेरिका को व्यापार में लाभ होता है, उन्हें भी टैरिफ़ झेलना पड़ा।
सिर्फ तीन देश (चीन, वियतनाम, यूरोपीय संघ) हैं जो अमेरिका के व्यापार घाटे में दोहरे अंकों का योगदान देते हैं।
🇮🇳 भारत क्यों निशाने पर है?
भारत पर 26% टैरिफ़ लगाया गया है और अमेरिका के व्यापार विभाग ने भारत की नीतियों पर कड़ी टिप्पणी की है।
भारत को लेकर प्रमुख आपत्तियाँ:
कृषि पर दुनिया के सबसे ऊँचे शुल्क — औसतन 113.1%, अधिकतम 300%
अचानक शुल्क वृद्धि (2019–2022), बिना सार्वजनिक परामर्श के
रक्षात्मक नीतियाँ – टेलिकॉम, सोलर उत्पाद, हेडफोन, रिटेल सेक्टर में
एफडीआई पर सीमाएं, खासकर बैंकिंग और रिटेल क्षेत्र में
बौद्धिक संपदा संरक्षण की कमी
बीमा और सरकारी खरीद में सरकारी कंपनियों को प्राथमिकता
इंटरनेट शटडाउन, जिससे डिजिटल व्यापार बाधित होता है
विनियमों में पारदर्शिता की कमी
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े सबक
1. वैश्विक विकास दर में गिरावट
चाहे कोई देश जवाब न भी दे, इन टैरिफ़ से वैश्विक व्यापार धीमा होगा, जिससे आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा।
2. अमेरिका में महंगाई में उछाल
अमेरिका को भारत से सामान 26% महंगे मिलेंगे। अगर डॉलर की वैल्यू 26% नहीं बढ़ी, तो अमेरिकी जनता को कीमतें झेलनी होंगी।
3. स्टैगफ्लेशन का खतरा
यदि विकास रुके और महंगाई बढ़े, तो अमेरिका को स्टैगफ्लेशन झेलना पड़ सकता है — यह स्थिति 1970 के दशक में भी देखी गई थी।
4. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव
देश अमेरिका पर निर्भरता कम कर सकते हैं। अगर यूरोप एशिया से साझेदारी बढ़ाए, तो अमेरिका की पकड़ कमजोर हो सकती है।
भारत क्या करे?
भारत के सामने दो रास्ते हैं:
नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखे, भले ही टैरिफ झेले
या टैरिफ और एफडीआई नियमों में सुधार करे और अमेरिका से राहत मांगे
कमजोर रुपये और उच्च व्यापार घाटे को देखते हुए दूसरा विकल्प वर्तमान में ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।
याद रखने लायक मुख्य तथ्य
अमेरिका का व्यापार घाटा (2024): $1.2 ट्रिलियन
भारत पर टैरिफ़: 26%
भारत का व्यापार घाटा अमेरिका के साथ: –$45,664 मिलियन
भारत की प्रति व्यक्ति आय: $2,940
टैरिफ़ लागू होने की तिथि: सामान्य – 5 अप्रैल, देश-विशेष – 9 अप्रैल
वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी: अमेरिका – 13%, यूरोप – 38%, एशिया – 35%
परीक्षा के लिए क्यों जरूरी है?
यह विषय निम्नलिखित परीक्षा बिंदुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है:
UPSC GS पेपर 2 और 3 – अंतरराष्ट्रीय संबंध, अर्थव्यवस्था
SSC CGL, बैंकिंग, रेलवे – करंट अफेयर्स और वैश्विक व्यापार
निबंध और इंटरव्यू – भारत की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति
यह विषय आने वाली प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं में संभावित प्रश्न बन सकता है। आंकड़े, नीतियां और वैश्विक संदर्भ अच्छे से समझें।
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