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AI से बने चाइल्ड एब्यूज़ कंटेंट पर चिंता बढ़ी है। जानें भारत के कानून, चुनौतियाँ और समाधान—UPSC, SSC और बैंकिंग परीक्षाओं के लिए जरूरी विश्लेषण।

परिचय: डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर नया खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ नवाचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल चाइल्ड एब्यूज़ जैसी गंभीर समस्याओं को भी जन्म दे रहा है। ब्रिटेन की विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग तथा AI सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी AI सेफ्टी रिपोर्ट 2025 में इस खतरनाक रुझान की ओर पहली बार वैश्विक स्तर पर ध्यान दिलाया गया है।

यह विषय UPSC, SSC, बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए न केवल सामयिक करंट अफेयर्स का हिस्सा है, बल्कि नैतिकता, साइबर कानून, और टेक्नोलॉजी से जुड़ी नीतियों के विश्लेषण के लिहाज़ से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

CSAM क्या है और AI इसे कैसे बना रहा है?

CSAM (Child Sexual Abuse Material) की परिभाषा:

इसमें ऐसे फोटो, वीडियो या ऑडियो आते हैं जो किसी बच्चे को यौन रूप से स्पष्ट रूप में दर्शाते हैं।

अब AI टूल्स द्वारा बिना किसी वास्तविक बच्चे की उपस्थिति के, ऐसे फेक इमेजेस या वीडियो बनाए जा रहे हैं जो अत्यधिक यथार्थवादी लगते हैं।

AI-जनरेटेड CSAM क्यों है खतरनाक?

नकली दिखते हुए भी, इसका मानसिक प्रभाव असली जैसा होता है।

इससे बाल यौन शोषण की मानसिकता को बढ़ावा मिलता है।

इंटरनेट पर तेजी से फैलने और पहचान में कठिनाई के कारण रोकथाम कठिन हो जाती है।

ब्रिटेन का कानून: भविष्य की ओर एक ठोस कदम

ब्रिटेन पहला देश बनने जा रहा है जो AI टूल्स के स्वयं के उपयोग और वितरण को अपराध की श्रेणी में लाने वाला है।

नए कानून की प्रमुख बातें:

AI टूल्स का निर्माण, स्वामित्व और वितरण, जो CSAM उत्पन्न कर सकते हैं, अवैध होगा।

Paedophile manuals का भी निर्माण और वितरण प्रतिबंधित होगा।

अपराधियों को ‘कृत्य’ से पहले की स्थिति में ही पकड़ा जा सकेगा।

AI से बने नकली बच्चों के चित्रों को भी अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा।

UPSC Preparation Tip:
कानूनों में ‘व्यक्ति-केंद्रित’ से ‘उपकरण-केंद्रित’ बदलाव पर ध्यान दें — यह परिवर्तन मौजूदा नीति संरचना और समाज की बदलती टेक्नोलॉजी को दर्शाता है।

भारत की स्थिति: क्या हम तैयार हैं?

खतरनाक आंकड़े:

NCRB 2022 के अनुसार, बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध में तेजी से वृद्धि हुई है।

NCRP पोर्टल पर अप्रैल 2024 तक 1.94 लाख चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामलों की रिपोर्ट हुई।

69.05 लाख साइबर टिपलाइन रिपोर्ट्स भारत की राज्य सरकारों के साथ साझा की गई हैं।

भारत में मौजूदा कानून:

कानून का नामप्रमुख प्रावधान
IT Act 2000 (Sec 67B)बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशन या ट्रांसमिशन अपराध
POCSO Act 2012सेक्शन 13-15 के तहत बाल यौन शोषण और पोर्नोग्राफी पर रोक
भारतीय न्याय संहिता (Section 294, 295)बच्चों को अश्लील सामग्री दिखाने पर प्रतिबंध

लेकिन कमी कहाँ है?

ये कानून AI द्वारा बनाए गए CSAM को नहीं पहचानते।

इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स, VPN, और क्लाउड सर्विसेस को पर्याप्त कानूनी ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है।

क्या होना चाहिए भारत का अगला कदम?

भारत को अपने कानूनों और नीतियों में तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए सुधार करना चाहिए:

अनुशंसित सुधार:

POCSO Act में ‘child pornography’ को बदलकर ‘CSAM’ शब्द का प्रयोग करना चाहिए (NHRC Advisory, 2023)।

IT Act की धारा 67B में ‘sexually explicit’ की स्पष्ट परिभाषा जोड़ी जाए।

VPN, VPS और Cloud Services को ‘intermediaries’ की श्रेणी में शामिल किया जाए।

Digital India Act 2023 में AI से उत्पन्न CSAM को विशेष रूप से कवर किया जाए।

UN के प्रस्तावित Draft Convention को अपनाने की दिशा में भारत को सक्रिय प्रयास करने चाहिए।

परीक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बिंदु

AI और कानून का संबंध – साइबर लॉ, नैतिकता और नीति निर्माण से जुड़े प्रश्नों में सहायक।

भारत बनाम अन्य देश – अंतर्राष्ट्रीय तुलना UPSC में निबंध और GS पेपर II के लिए जरूरी।

डिजिटल सुरक्षा और बच्चों के अधिकार – सामाजिक न्याय, संवैधानिक सुरक्षा के सेक्शन में शामिल।

UPSC और बैंकिंग करंट अफेयर्स के लिए अक्टूबर 2024 और फरवरी 2025 की रिपोर्ट्स याद रखें।

क्यों यह विषय परीक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है?

डिजिटल अपराधों से जुड़ी नई तकनीकियों को समझना आवश्यक है।

भारत की नीति और कानून में सुधार की आवश्यकता को समझना वैकल्पिक विषयों, निबंध और GS पेपर-II के लिए लाभदायक होगा।

यह विषय समसामयिक घटनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है, जिसे हर सीरियस प्रतियोगी विद्यार्थी को समझना चाहिए।

✍️ Key Takeaways for Exam Preparation:

CSAM का फुल फॉर्म, परिभाषा और प्रभाव याद रखें।

ब्रिटेन का प्रस्तावित कानून और भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना करें।

IT Act 2000, POCSO Act 2012 के प्रासंगिक सेक्शन याद रखें।

AI से उत्पन्न अपराधों पर भारत के भविष्य की कानूनी रणनीति पर निबंध और उत्तर तैयार करें।

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