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UPSC करेंट अफेयर्स 31 अक्टूबर 2026: विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत में गरीबी में विश्व की सबसे तीव्र गिरावट दर्ज | अथर्व एग्ज़ामवाइज़ करेंट न्यूज़, दैनिक जीके अपडेट और प्रतियोगी परीक्षा समाचार आज UPSC करेंट अफेयर्स 31 अक्टूबर 2026: विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत में गरीबी में विश्व की सबसे तीव्र गिरावट दर्ज | अथर्व एग्ज़ामवाइज़ करेंट न्यूज़, दैनिक जीके अपडेट और प्रतियोगी परीक्षा समाचार आज

31 Oct 2026 31 Oct 2026

UPSC करेंट अफेयर्स 31 अक्टूबर 2026: विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत में गरीबी में विश्व की सबसे तीव्र गिरावट दर्ज | अथर्व एग्ज़ामवाइज़ करेंट न्यूज़, दैनिक जीके अपडेट और प्रतियोगी परीक्षा समाचार आज
INDIAN ECONOMY HINDI 31 Oct 2026

UPSC करेंट अफेयर्स 31 अक्टूबर 2026: विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत में गरीबी में विश्व की सबसे तीव्र गिरावट दर्ज | अथर्व एग्ज़ामवाइज़ करेंट न्यूज़, दैनिक जीके अपडेट और प्रतियोगी परीक्षा समाचार आज

कार्यकारी सारांश: विश्व बैंक अक्टूबर 2026 पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ (Poverty and Equity Brief)

भारत ने वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन की सबसे तीव्र दरों में से एक दर्ज की है, जिसने 2011 और 2023 के बीच अनुमानित 496 मिलियन (49.6 करोड़) नागरिकों को मध्यम गरीबी से बाहर निकाला है। अक्टूबर 2026 में जारी विश्व बैंक के पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार, भारत की अत्यधिक मौद्रिक गरीबी में जीवन यापन करने वाली जनसंख्या का अनुपात दस गुना से भी अधिक कम होकर 2011–12 के 27.1% से घटकर 2023–24 में 2.6% रह गया है। UPSC करेंट अफेयर्स और प्रतियोगी परीक्षा समाचारों को ट्रैक करने वाले सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए, यह ऐतिहासिक मूल्यांकन राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) से प्राप्त अद्यतन अनुभवजन्य मानक प्रदान करता है।

विश्व बैंक का यह मूल्यांकन दर्शाता है कि भारत में गरीबी उन्मूलन गहरा और बहुआयामी दोनों रहा है। बुनियादी अस्तित्व के पैमानों से परे, 2021 की क्रय शक्ति समता (PPP) पर मापी गई 4.20 डॉलर प्रति दिन की निम्न-मध्यम-आय देश (LMIC) गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली जनसंख्या का अनुपात 2011 के 57.7% से घटकर 2023 में 16.1% रह गया। इसके साथ ही, स्वास्थ्य, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं से जुड़े गैर-मौद्रिक वंचन (non-monetary deprivation) में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। हालाँकि, इस व्यापक समष्टि-स्तरीय (macro-level) प्रक्षेपवक्र के साथ कुछ संरचनात्मक श्रम बाज़ार चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं, जिनमें स्थिर वास्तविक मजदूरी, कम उत्पादकता वाले रोज़गार का संकेंद्रण, गंगा के मैदानी इलाकों में वंचन का क्षेत्रीय संकेंद्रण और युवा बेरोज़गारी में वृद्धि शामिल हैं। अथर्व एग्ज़ामवाइज़ करेंट अफेयर्स पोर्टल का उपयोग करने वाले अभ्यर्थियों को आगामी सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्रों के लिए इन कल्याणकारी उपलब्धियों और अंतर्निहित विकासात्मक बाधाओं दोनों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के लिए प्रमुख तथ्य और परीक्षा-उपयोगी आंकड़े

UPSC प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा GS प्रश्नपत्र-II, GS प्रश्नपत्र-III और राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी विश्व बैंक की रिपोर्ट के निम्नलिखित उच्च-प्राथमिकता वाले सांख्यिकीय निष्कर्षों को संकलित कर सकते हैं:

अत्यधिक गरीबी उन्मूलन ($3.00/दिन PPP): अंतरराष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी रेखा 3.00 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (2021 PPP पर, 2021 की कीमतों में लगभग ₹58 के बराबर) के नीचे रहने वाली भारत की जनसंख्या का अनुपात 2011–12 के 27.1% से घटकर 2022–23 में 5.3% और फिर 2023–24 में आधा होकर 2.6% रह गया।

अत्यधिक वंचन से बाहर निकाली गई जनसंख्या: वर्ष 2011 से 2023 के बीच लगभग 307 मिलियन (30.7 करोड़) लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले, जो लगभग 2 प्रतिशत अंक की वार्षिक गिरावट (या गिरावट की 18% वार्षिक दर) को दर्शाता है। वर्तमान में, अनुमानित 7.5 करोड़ लोग 3.00 डॉलर प्रति दिन के मानक से नीचे हैं।

निम्न-मध्यम-आय गरीबी ($4.20/दिन PPP): 4.20 डॉलर प्रति दिन की LMIC गरीबी रेखा (2021 PPP पर, 2021 की कीमतों में लगभग ₹82 या वर्तमान नाममात्र संदर्भ में लगभग ₹400 के बराबर) के आधार पर मापी गई भारत की मध्यम गरीबी दर 2011 के 57.7% से घटकर 2023 में 16.1% हो गई, जो 3.5 प्रतिशत अंक की वार्षिक गिरावट दर्शाती है।

गरीबी उन्मूलन का रिकॉर्ड स्तर (मात्रा): 4.20 डॉलर/दिन की सीमा पर आई गिरावट ने 12 वर्षों में 496 मिलियन (49.6 करोड़) लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया—यह संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका की कुल जनसंख्या से लगभग 150 मिलियन अधिक है। सर्वेक्षण के जनसंख्या भार के आधार पर, वर्तमान में 23.3 करोड़ से 34 करोड़ के बीच लोग इस सीमा से नीचे हैं।

उच्च-मध्यम-आय गरीबी ($8.30/दिन PPP): उच्च-मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए लागू 8.30 डॉलर प्रति दिन के मानक के अनुसार, लगभग 115 करोड़ भारतीय अभी भी इस सीमा से नीचे हैं, जो 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रति व्यक्ति आय परिवर्तन को रेखांकित करता है।

भावी गरीबी अनुमान (2026–2028): विश्व बैंक के माइक्रोसिमुलेशन संकेत देते हैं कि मध्यम गरीबी ($4.20/दिन) में गिरावट जारी रहेगी, यद्यपि इसकी गति अधिक क्रमिक होगी; यह 2026 में 14.2% से घटकर 2028 तक 12.1% होने का अनुमान है।

गरीबी की गहनता में कमी (गरीबी अंतराल सूचकांक / FGT-1): फोस्टर-ग्रीर-थॉर्बेके ($FGT_1$) गरीबी अंतराल—जो गरीबी रेखा के सापेक्ष जनसंख्या के औसत उपभोग अंतर (shortfall) को मापता है—2011 से 2023 के बीच मध्यम गरीबी के लिए 16.1% से घटकर 2.6% और अत्यधिक गरीबी के लिए 2.6% से घटकर 0.7% रह गया।

बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) में लाभ: ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) के अनुसार, भारत में गैर-मौद्रिक बहुआयामी गरीबी 2005–06 के 53.8% से गिरकर 2015–16 में 28.0% और 2019–21 में 16.4% हो गई। विश्व बैंक के अपने बहुआयामी गरीबी पैमाने के अंतर्गत, 2022–23 में वंचन 15.5% पर था।

रोज़गार विस्तार (2017–2023): भारत में 2017 से 2023 के बीच 134 मिलियन (13.4 करोड़) रोज़गारयुक्त व्यक्ति जुड़े—जो इस अवधि के दौरान कामकाजी उम्र की आबादी की वृद्धि से लगभग दोगुना है—जिसका मुख्य कारण ग्रामीण महिलाओं का सवैतनिक आर्थिक गतिविधियों में प्रवेश था।

उपभोग असमानता बनाम मजदूरी असमानता: उपभोग पर आधारित भारत का गिनी सूचकांक 2011–12 के 28.8 से सुधरकर 2022–23 में 25.5 और 2023–24 में 23.0 हो गया। इसके विपरीत, श्रम बाज़ार के आँकड़े बताते हैं कि 2023 में शीर्ष 10% श्रमिकों की औसत कमाई सबसे निचले 10% श्रमिकों की तुलना में 13 गुना अधिक थी।

विश्व बैंक पद्धति को समझना: पीपीपी मानक और गरीबी की गहनता

भारतीय अर्थव्यवस्था मॉड्यूल की तैयारी के लिए अथर्व एग्ज़ामवाइज़ अध्ययन सामग्री का उपयोग करने वाले अभ्यर्थियों के लिए गरीबी आकलन पद्धति की गहन समझ आवश्यक है। विश्व बैंक विभिन्न देशों के बीच मूल्य-स्तर की विसंगतियों को दूर करने के लिए बाज़ार विनिमय दरों के बजाय अंतरराष्ट्रीय तुलना कार्यक्रम (ICP) द्वारा संकलित क्रय शक्ति समता (PPP) विनिमय दरों का उपयोग करके मौद्रिक गरीबी का मूल्यांकन करता है। यद्यपि नाममात्र रुपया-डॉलर बाज़ार विनिमय दर लगभग ₹95 प्रति अमेरिकी डॉलर के करीब है—जिसके आधार पर 3.00 डॉलर का मूल्य ₹285 होगा—लेकिन 2025 में भारत के लिए ICP PPP रूपांतरण कारक 20.09 था, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में भारत में गैर-व्यापारिक वस्तुओं और सेवाओं की काफी कम घरेलू लागत को दर्शाता है।

विश्व बैंक वर्गीकरणदैनिक सीमा (2021 PPP)भारतीय रुपयों में आधारभूत मूल्य2011–12 हेडकाउंट अनुपात2023–24 हेडकाउंट अनुपातरेखा के नीचे अनुमानित जनसंख्या (2023–24)
अंतरराष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी रेखा$3.00 प्रति दिन~₹58 (2021 की कीमतों पर)27.1%2.6%~7.5 करोड़ (75 मिलियन)
निम्न-मध्यम-आय (LMIC) रेखा$4.20 प्रति दिन~₹82 (2021 कीमतें) / ~₹400 (वर्तमान)57.7%16.1%~23.3 करोड़ से 34 करोड़
उच्च-मध्यम-आय (UMIC) रेखा$8.30 प्रति दिन2021 PPP बास्केट के अनुसार समायोजितलागू नहींअधिकांश जनसंख्या~115 करोड़ (1.15 बिलियन)

मानक हेडकाउंट अनुपात ($FGT_0$) से परे, विश्व बैंक गरीबी अंतराल सूचकांक ($FGT_1$) पर बल देता है, जिसे गणितीय रूप से इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:

$$FGT_1 = \frac{1}{N} \sum_{i=1}^{q} \left( \frac{z - y_i}{z} \right)$$

जहाँ $N$ कुल जनसंख्या को दर्शाता है, $q$ गरीब व्यक्तियों की संख्या है, $z$ गरीबी रेखा है, और $y_i$ $i$-वें गरीब व्यक्ति का उपभोग व्यय है। भारत के मध्यम गरीबी अंतराल का 16.1% से घटकर 2.6% होना गहरे राजकोषीय निहितार्थ रखता है। यह साबित करता है कि न केवल गरीब लोगों की पूर्ण संख्या में कमी आई है, बल्कि जो लोग $4.20/दिन की सीमा से नीचे बचे हैं, वे अब गरीबी रेखा के काफी निकट स्थित हैं। परिणामस्वरूप, सटीक प्रशासनिक लक्ष्यीकरण के तहत शेष मध्यम गरीबी को समाप्त करने के लिए आवश्यक न्यूनतम राजकोषीय संसाधन हस्तांतरण 2011 के अपने स्तर के एक छोटे से अंश तक सीमित हो गया है।

सांख्यिकीय बारीकी: कल्याणकारी लाभ बनाम सर्वेक्षण उपकरण (Survey Instrumentation)

विश्व बैंक के आँकड़ों का विश्लेषणात्मक अध्ययन यह दर्शाता है कि अत्यधिक गरीबी 2022–23 में 5.3% से तेजी से घटकर 2023–24 में 2.6% (केवल एक वर्ष में आधी) रह गई। चूँकि 2022–23 और 2023–24 दो क्रमिक NSSO HCES सर्वेक्षण दौरों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी सामाजिक-जनसांख्यिकीय नमूना संरचना—परिवार का आकार, जनसांख्यिकीय संरचना, जाति, धर्म, शिक्षा और रोज़गार प्रकार सहित—स्थिर रही, इसलिए विश्व बैंक के निदान द्वारा साधारण यांत्रिक नमूना त्रुटियों को खारिज कर दिया गया है। इसके बजाय, विश्व बैंक इस तीव्र एक-वर्षीय गिरावट का श्रेय सबसे निचले 10% (bottom-decile) के वास्तविक कल्याणकारी विकास और डेटा संग्रह के दूसरे लगातार वर्ष के दौरान परिष्कृत सर्वेक्षण कार्यान्वयन के संयोजन को देता है, जिसने फील्ड प्रगणकों (field enumerators) को खाद्य, गैर-खाद्य वस्तुओं, सेवाओं और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं पर घरेलू व्यय को अधिक सटीकता से दर्ज करने में सक्षम बनाया।

भारत के गरीबी उन्मूलन के तीन मुख्य चालक

विश्व बैंक भारत के अत्यधिक वंचन से तीव्र निकास का श्रेय तीन परस्पर पूरक संरचनात्मक तंत्रों को देता है: गरीबों के पक्ष में उपभोग का विस्तार (pro-poor consumption expansion), ग्रामीण महिला कार्यबल का प्रवेश, और लक्षित सामाजिक सुरक्षा हस्तांतरण।

गरीबों के अनुकूल घरेलू उपभोग वृद्धि (Pro-Poor Household Consumption Growth):

2011 से 2023 के बीच, भारत ने प्रति व्यक्ति घरेलू व्यय में निरंतर और व्यापक आधार वाली वृद्धि का अनुभव किया, जिसने वितरण के सबसे निचले स्तरों को अधिक लाभान्वित किया। आर्थिक पिरामिड के आधार पर मौजूद परिवारों की बढ़ती क्रय शक्ति ने उन्हें अपने उपभोग बास्केट को मुख्य खाद्यान्नों से परे उच्च-मूल्य वाले पोषण संबंधी मदों, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, परिवहन सेवाओं और टिकाऊ घरेलू परिसंपत्तियों की ओर विविधतापूर्ण बनाने की अनुमति दी।

ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी (Rural Female Labor Force Participation):

2017 से 2023 के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था ने लगभग 134 मिलियन (13.4 करोड़) नए रोज़गार के अवसर सृजित किए—जो इसी अवधि में कार्यशील आयु वाली जनसंख्या की वृद्धि दर से लगभग दोगुना था। इस विस्तार के भीतर सबसे निर्णायक जनसांख्यिकीय बदलाव ग्रामीण महिलाओं का सवैतनिक आर्थिक भूमिकाओं में बड़े पैमाने पर प्रवेश था। ग्रामीण परिवारों में द्वितीयक और तृतीयक कमाने वालों को जोड़कर, महिला कार्यबल की भागीदारी ने सीधे तौर पर कुल घरेलू आय में वृद्धि की और पारिवारिक आर्थिक निर्भरता अनुपातों को कम किया।

सामाजिक सुरक्षा और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का विस्तार:

सार्वभौमिक खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के साथ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के संस्थागतीकरण ने कमज़ोर नागरिकों के लिए एक सुदृढ़ उपभोग आधार (consumption floor) तैयार किया। सरकार द्वारा वित्तपोषित मुफ्त खाद्यान्न वितरण और प्रत्यक्ष बैंक अंतरणों ने कम आय वाले परिवारों को समष्टि आर्थिक झटकों और खाद्य मुद्रास्फीति से सुरक्षित रखा, जिससे बुनियादी कैलोरी आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से सब्सिडी मिली और गैर-खाद्य व्यय के लिए प्रयोज्य घरेलू आय (disposable income) मुक्त हो सकी।

गैर-मौद्रिक वंचन: बुनियादी सुविधाओं की पूर्ण संतृप्ति (Saturation)

गरीबी केवल मौद्रिक आय की कमी नहीं है; इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के स्तर पर क्षमता का अभाव (capability deprivation) शामिल है, जिसे बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के माध्यम से मापा जाता है। OPHI बहुआयामी गरीबी सूचकांक—जो 2005–06 में 53.8% से गिरकर 2015–16 में 28.0% और 2019–21 में 16.4% हो गया—और 2022–23 में 15.5% पर विश्व बैंक का अपना बहुआयामी गरीबी पैमाना, दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि गैर-मौद्रिक कल्याणकारी सुधार मौद्रिक लाभों के समानांतर रहे हैं।

यह संरचनात्मक परिवर्तन ग्रामीण और शहरी परिवारों में बुनियादी नागरिक बुनियादी ढाँचे को लक्षित करने वाली सार्वजनिक सेवा वितरण की लगभग पूर्ण संतृप्ति को दर्शाता है। पिछले दो दशकों में, सभी मौसमों के अनुकूल पक्के मकानों, घरेलू विद्युतीकरण, स्वच्छ रसोई गैस (LPG), सुरक्षित पेयजल और घरेलू स्वच्छता सुविधाओं तक विस्तारित पहुँच ने वंचन के गैर-मौद्रिक आयामों को व्यवस्थित रूप से समाप्त किया है, जिससे उन क्षेत्रों में भी बुनियादी जीवन स्तर में सुधार हुआ है जहाँ नकद आय मामूली बनी हुई है।

संरचनात्मक विरोधाभास और विकासात्मक चुनौतियाँ

अत्यधिक वंचन को समाप्त करने में ऐतिहासिक प्रगति के बावजूद, विश्व बैंक की रिपोर्ट क्षेत्रीय भूगोल, श्रम बाज़ार उत्पादकता और मजदूरी वितरण से जुड़ी गंभीर संरचनात्मक कमज़ोरियों पर प्रकाश डालती है, जिन पर भारत के उच्च-मध्यम-आय की स्थिति की ओर अग्रसर होने के दौरान नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

वंचन का स्थानिक और क्षेत्रीय संकेंद्रण (Spatial and Sectoral Concentration):

पूरे भारत में गरीबी में कमी भौगोलिक और जनसांख्यिकीय रूप से असमान बनी हुई है। $4.20/दिन की सीमा पर, ग्रामीण गरीबी 2023 में 19.3% थी, जो शहरी क्षेत्रों में दर्ज 8.6% के दोगुने से भी अधिक है। यद्यपि ग्रामीण क्षेत्रों ने 2011 और 2023 के बीच अधिक पूर्ण वार्षिक कमी हासिल की—जो काफी अधिक प्रारंभिक आधार के कारण शहरी केंद्रों में 2.6 प्रतिशत अंक की तुलना में सालाना 3.8 प्रतिशत अंक गिरी—शहरी गरीबी ग्रामीण क्षेत्रों के 10% की तुलना में 12% की तेज़ आनुपातिक वार्षिक गति से घटी। भौगोलिक दृष्टि से, भारत की 57% गरीब आबादी उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले एक सन्निहित (समीपवर्ती) स्थानिक क्षेत्र में संकेंद्रित है। इन क्षेत्रों में, शेष वंचन निम्न शैक्षिक उपलब्धि, कम भौतिक संपत्ति, उच्च निर्भरता अनुपात और स्थिर, गैर-कृषि रोज़गार तक सीमित पहुँच वाले कमज़ोर परिवारों के बीच अत्यधिक संकेंद्रित हो गया है। अथर्व एग्ज़ामवाइज़ स्टेट पीसीएस पोर्टल और MPPSC कोचिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य स्तरीय सिविल सेवाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को क्षेत्रीय आर्थिक विश्लेषण में इन स्थानिक असमानताओं को शामिल करना चाहिए।

रोज़गार की मात्रा बनाम गुणवत्ता का विरोधाभास (The Employment Quantity vs. Quality Paradox):

यद्यपि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2017 से 2023 के बीच 134 मिलियन अतिरिक्त श्रमिकों को समाहित किया, लेकिन यह मात्रात्मक विस्तार आनुपातिक वेतन वृद्धि उत्पन्न करने में विफल रहा। विश्व बैंक का अवलोकन है कि इस अवधि के दौरान वास्तविक कमाई व्यापक रूप से स्थिर रही क्योंकि रोज़गार सृजन मुख्य रूप से अपेक्षाकृत कम उत्पादकता वाली गतिविधियों में केंद्रित था। इसके अतिरिक्त, जहाँ समग्र श्रम बाज़ार की स्थिति काफी हद तक लचीली साबित हुई, वहीं युवा बेरोज़गारी वित्त वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही में 14.6% से बढ़कर वित्त वर्ष 2026–27 की समान तिमाही में 15.9% हो गई, जिसमें युवा ग्रामीण महिलाओं को अत्यधिक बेरोज़गारी दबाव का सामना करना पड़ा। इसलिए 2028 तक गरीबी में कमी को बनाए रखना श्रमिकों को कम-उत्पादकता वाले कृषि और अनौपचारिक कार्यों से उच्च-उत्पादकता वाले गैर-कृषि रोज़गार में स्थानांतरित करने पर निर्भर करेगा।

गिनी सूचकांक (23.0) और 13 गुना मजदूरी अंतर का सामंजस्य:

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक प्रश्न यह है कि भारत 2023 में 23.0 का कम उपभोग गिनी सूचकांक—जो 2011–12 में 28.8 और 2022–23 में 25.5 था (0 से 100 के पैमाने पर जहाँ 0 पूर्ण समानता दर्शाता है)—कैसे दर्ज कर सकता है, जबकि शीर्ष 10% श्रमिकों की औसत कमाई सबसे निचले 10% की तुलना में 13 गुना अधिक है। यह विसंगति मापन के दायरे और सर्वेक्षण कवरेज के मूलभूत अंतरों से उत्पन्न होती है। पहला, भारत का गिनी सूचकांक आय या संपत्ति के बजाय घरेलू उपभोग व्यय का मूल्यांकन करता है, और उपभोग वितरण स्वाभाविक रूप से निचले स्तर पर रियायती खाद्य अंतरणों द्वारा और शीर्ष स्तर पर परिवारों की उच्च बचत प्रवृत्ति के कारण संकुचित (compressed) हो जाता है। दूसरा, गिनी गुणांक पूरी जनसंख्या वितरण में फैलाव को दर्शाता है, जबकि 13 गुना मजदूरी अंतर विशेष रूप से शीर्ष और निचले दशमक (decile) छोरों पर औसत श्रमिक कमाई की तुलना करता है। अंत में, विश्व बैंक स्पष्ट रूप से सचेत करता है कि घरेलू उपभोग सर्वेक्षण संपन्न परिवारों के व्यय को पूरी तरह से दर्ज नहीं कर पाते हैं, जो रिपोर्ट किए गए गिनी मेट्रिक में वास्तविक असमानता को व्यवस्थित रूप से कम करके आँकता है।

यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के तीनों चरणों (प्रारंभिक, मुख्य और व्यक्तित्व परीक्षण) के साथ-साथ राज्य PCS परीक्षाओं के लिए इसका महत्व स्पष्ट है। UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए, वस्तुनिष्ठ प्रश्न अक्सर तकनीकी गरीबी पद्धतियों का परीक्षण करते हैं, जिनमें विश्व बैंक के 2021 PPP मानक (अत्यधिक गरीबी के लिए $3.00/दिन, निम्न-मध्यम-आय वाले देशों के लिए $4.20/दिन, और उच्च-मध्यम-आय वाले देशों के लिए $8.30/दिन), OPHI बहुआयामी गरीबी सूचकांक और विश्व बैंक MPI के बीच पद्धतिगत अंतर, गिनी सूचकांक, और फोस्टर-ग्रीर-थॉर्बेके ($FGT_1$) गरीबी अंतराल सूचकांक शामिल हैं।

UPSC मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-II (शासन, कल्याणकारी योजनाएं और सामाजिक न्याय) में, यह अनुभवजन्य पुष्टि कि विस्तारित सामाजिक अंतरण, खाद्य सब्सिडी और नागरिक बुनियादी ढाँचे ने अत्यधिक गरीबी को 27.1% से घटाकर 2.6% कर दिया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और अंतिम छोर तक सार्वजनिक सेवा वितरण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करते समय प्रामाणिक साक्ष्य प्रदान करती है। सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-III (भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास और रोज़गार) में, 134 मिलियन नई नौकरियों के साथ स्थिर वास्तविक मजदूरी, 13 गुना दशमक आय अंतर और 15.9% युवा बेरोज़गारी की स्थिति अभ्यर्थियों को एक संतुलित, डेटा-आधारित तर्क प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है कि भारत को सामाजिक-अंतरण-आधारित गरीबी उन्मूलन से उच्च-उत्पादकता वाले गैर-कृषि रोज़गार सृजन की ओर क्यों बढ़ना चाहिए। इसके अलावा, यह निष्कर्ष कि भारत के 57% गरीब उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक के सन्निहित क्षेत्र में रहते हैं, संतुलित क्षेत्रीय विकास और सहकारी संघवाद पर मुख्य परीक्षा के निबंधों के लिए उच्च-प्रभाव अनुभवजन्य आधार प्रस्तुत करता है। भारतीय अर्थव्यवस्था और करेंट अफेयर्स पर संरचित अवधारणा-आधारित व्याख्यान, दैनिक एमसीक्यू अभ्यास और डाउनलोड करने योग्य पुनरीक्षण माइंड मैप के लिए, अभ्यर्थी अथर्व एग्ज़ामवाइज़ के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध व्यापक पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर सकते हैं।

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