यूपीएससी करंट अफेयर्स 24 अक्टूबर, 2026: भारत बना यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता | अथर्व एग्जाम वाइज डेली जीके अपडेट
ऐतिहासिक रक्षा निर्यात बदलाव का अवलोकन
वैश्विक हथियारों के व्यापार की संरचना एक निर्णायक और बुनियादी बदलाव की साक्षी बन रही है, क्योंकि भारत वैश्विक सुरक्षा साझेदारों के लिए मुख्य गोला-बारूद निर्माता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। 'ट्रेड डेटा मॉनिटर' द्वारा दर्ज किए गए व्यापक व्यापार आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने यूरोपीय देशों को ₹8,271 करोड़ (लगभग 872 मिलियन डॉलर) मूल्य के गोला-बारूद—मुख्य रूप से भारी तोपखाने के गोले और मोर्टार गोले—की आपूर्ति की है।
सैन्य आपूर्ति के इस अभूतपूर्व प्रवाह ने पूरे यूरोपीय महाद्वीप में क्षेत्रीय खरीद रैंकिंग को पूरी तरह बदल दिया है। केवल चार वर्षों के भीतर, भारत 28वें स्थान से छलांग लगाकर 13 मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के लिए दूसरा सबसे बड़ा गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिसमें वह केवल दक्षिण कोरिया से पीछे है। यह पुनर्संरचना पश्चिम एशिया में बढ़ते रक्षा सौदों के भी अनुरूप है: मार्च 2026 तक, भारत इजरायल के लिए विमान, हेलीकॉप्टर और मानव रहित हवाई वाहन (UAV/ड्रोन) घटकों का तीसरा सबसे बड़ा विदेशी आपूर्तिकर्ता बन गया, जो 2023 में नौवें स्थान पर था।
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अथर्व एग्जाम वाइज के इस दैनिक करेंट अफेयर्स और जीके अपडेट का यह विश्लेषण भारत के रक्षा औद्योगिक आधार के उस रणनीतिक परिवर्तन को दर्शाता है, जो ऐतिहासिक रूप से आयात पर निर्भर रहने की स्थिति से निकलकर उच्च-स्तरीय उत्पादन, निर्यात प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में सक्रिय भागीदारी की ओर अग्रसर हुआ है।
मुख्य तथ्य और तुलनात्मक निर्यात आंकड़े
भारतीय सैन्य निर्यात का यह विस्तार विदेशों में गोला-बारूद की बढ़ती कमी और घरेलू नीतिगत सुधारों—जिन्होंने औद्योगिक क्षमता को गति दी—दोनों को दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
यूरोपीय निर्यात में उछाल: रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद मध्य और पूर्वी यूरोपीय बाजारों में भारतीय गोला-बारूद का निर्यात 1,600% से अधिक बढ़ा, जो युद्ध से पहले के चार वर्षों में दर्ज $49.2 मिलियन के आधार स्तर से कहीं अधिक है।
महाद्वीपीय आपूर्तिकर्ता रैंकिंग: भारत चार वर्षों में 26 पायदान ऊपर चढ़कर पूर्वी और मध्य यूरोप में गोला-बारूद आपूर्ति के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया, जिससे भारतीय विनिर्माण उत्पादन सीधे दक्षिण कोरिया के पीछे स्थापित हो गया है।
पश्चिम एशियाई निर्यात में वृद्धि: मार्च 2026 तक के दो वर्षों में, भारत ने इजरायल को लगभग ₹630 करोड़ के तोपखाने के गोले, मोर्टार राउंड और औद्योगिक विस्फोटकों का निर्यात किया, जो इससे पहले के छह वर्षों के कुल निर्यात के बराबर है।
एयरोस्पेस सब-टियर एकीकरण: इजरायल के लिए विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन के पुर्जों के विदेशी आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की रैंकिंग 2023 के 9वें स्थान से सुधरकर मार्च 2026 तक 3रे स्थान पर पहुंच गई।
परीक्षा-उपयोगी आंकड़े
राष्ट्रीय निर्यात का रिकॉर्ड स्तर: वित्त वर्ष 2024-25 में कुल भारतीय रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ ($2.76 बिलियन) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2013-14 के ₹686 करोड़ की तुलना में 34 गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
घरेलू उत्पादन का मूल्य: 16,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के सहयोग से वित्त वर्ष 2024-25 में कुल स्वदेशी रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड मूल्यांकन पर पहुंच गया।
लक्ष्य प्रक्षेपवक्र (टारगेट ट्रेजेक्ट्री): रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2029 तक ₹50,000 करोड़ के वार्षिक रक्षा निर्यात और ₹3 लाख करोड़ के कुल रक्षा उत्पादन का वैधानिक नीतिगत लक्ष्य निर्धारित किया है।
संस्थागत पुनर्गठन: आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के 2021 के निगमीकरण के दौरान गठित म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), भारी तोपखाने और मोर्टार अनुबंधों को आगे बढ़ाने वाली मुख्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई बनकर उभरी है।
| संकेतक | पूर्वी और मध्य यूरोप (13 देश) | इजरायल (पश्चिम एशियाई क्षेत्र) |
|---|---|---|
| व्यापार की मात्रा / मूल्य | फरवरी 2022 के बाद ₹8,271 करोड़ ($872 मिलियन) | ₹630 करोड़ (मार्च 2026 तक 2 वर्ष की अवधि में) |
| तुलनात्मक प्रक्षेपवक्र | युद्ध-पूर्व आधार स्तर से 1,600% से अधिक की वृद्धि | 2 वर्षों की बिक्री पिछले 6 वर्षों के कुल योग के बराबर |
| आपूर्तिकर्ता स्थिति | 28वें से दूसरे स्थान पर पहुंचा (दक्षिण कोरिया के बाद) | 9वें स्थान (2023) से तीसरे स्थान (मार्च 2026) पर पहुंचा |
| भेजी गई मुख्य सामग्री | 155 मिमी तोपखाने के गोले, 120 मिमी मोर्टार राउंड, आरडीएक्स (RDX) | विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन के पुर्जे; विस्फोटक गोले |
| शामिल प्रमुख संस्थाएं | म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड, सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया | रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSUs), निजी एयरोस्पेस संयुक्त उद्यम (JVs) |
यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखला की गतिशीलता और रणनीतिक मध्यस्थता
भारतीय युद्ध सामग्री की तेजी से खरीद उस गहरे औद्योगिक संकट को उजागर करती है जिसका सामना यूरोपीय देश कर रहे हैं, क्योंकि वे अपने स्वयं के खाली हो चुके राष्ट्रीय भंडारों की भरपाई करते हुए यूक्रेन को परिचालन आपूर्ति जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं। इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आर्म्स ट्रांसफर्स प्रोग्राम के वरिष्ठ शोधकर्ता साइमन वेजेमैन ने रेखांकित किया कि यूरोपीय संप्रभु खरीदार भारत की ओर इसलिए मुड़े हैं क्योंकि भारत के पास एक परिपक्व और बड़े पैमाने का विनिर्माण ढांचा मौजूद है जो तेजी से भारी गोला-बारूद का उत्पादन कर सकता है। भारत पश्चिमी मानक क्षमता (जैसे नाटो-मानक 155 मिमी गोले) और पुराने वारसॉ पैक्ट मानक क्षमता दोनों का उत्पादन करने में सक्षम समर्पित विनिर्माण सुविधाएं बनाए रखता है, जो इसकी उत्पादन लाइनों को महाद्वीपीय कमी को पूरा करने में अत्यधिक बहुमुखी बनाती हैं।
निर्माताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट निर्यात चैनलों के संबंध में, किंग्स कॉलेज लंदन में राजनीति वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. वाल्टर लैडविग इस बात पर जोर देते हैं कि भारतीय कॉर्पोरेट संस्थाएं यूक्रेनी सरकार को सीधे द्विपक्षीय हथियारों का हस्तांतरण नहीं करती हैं। इसके बजाय, ये लेन-देन संप्रभु यूरोपीय सरकारों और स्थापित खरीद एजेंसियों के साथ संपन्न किए जाते हैं, जो कानूनी, वाणिज्यिक और राजनयिक मध्यस्थता प्रदान करते हैं।
व्यापार विश्लेषण संगठनों द्वारा संकलित सीमा शुल्क (कस्टम्स) दस्तावेज दर्शाते हैं कि भारतीय रक्षा उत्पाद व्यापक यूरोपीय रक्षा प्रणाली में कैसे एकीकृत होते हैं:
तोपखाने की खेप: 2024 की शुरुआत में दर्ज सीमा शुल्क घोषणाओं से पता चला कि भारतीय निर्मित 155 मिमी तोपखाने के गोले, प्रणोदक (प्रोपेलेंट) और फ़्यूज़ युक्त कम से कम 78 खेपें, जिनका मूल्य लगभग $62.8 मिलियन था, मध्यस्थ मार्गों के माध्यम से यूक्रेन में पहुंचीं। इन लेन-देन में अमेरिका स्थित रक्षा ठेकेदार 'रेगुलस ग्लोबल' प्राथमिक आपूर्तिकर्ता और यूक्रेनी राज्य उद्यम 'स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट' प्राप्तकर्ता कंसाइनी के रूप में दर्ज था।
मोर्टार युद्ध सामग्री: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड ने 2024 और 2025 के बीच रोमानिया की सरकारी रक्षा खरीद एजेंसी 'सीएन रोमतहनीका' को 120 मिमी मोर्टार के लगभग 72,000 गोले आपूर्ति किए, जिसका मिलान बाद में क्षेत्रीय रसद केंद्रों में किए गए पुनः हस्तांतरण से हुआ।
विस्फोटक अग्रदूत (प्रीकर्सर्स): नागपुर स्थित सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया ने 2023 और 2025 के बीच पोलिश हथियार निर्माता 'नाइट्रो-केम' को 2,29,000 किलोग्राम से अधिक सैन्य-ग्रेड आरडीएक्स भेजा। नाइट्रो-केम ने बाद में यूक्रेनी असेंबली लाइनों को विस्फोटक घटकों की आपूर्ति की, जो अग्रिम पंक्ति के मुख्य युद्धक टैंकों के लिए एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) का उत्पादन कर रही थीं।
ये लॉजिस्टिक्स तंत्र यूरोपीय रक्षा औद्योगिक आधार को बनाए रखने में भारत की अप्रत्यक्ष भूमिका को रेखांकित करते हैं, जबकि नई दिल्ली अपने संप्रभु वाणिज्यिक लेन-देन को औपचारिक विनियामक दायित्वों से बचाने के लिए सख्त एंड-यूज़र सर्टिफिकेट (अंतिम उपयोगकर्ता प्रमाण पत्र) अनिवार्य करना जारी रखती है।
इजरायल के साथ गहरे होते एयरोस्पेस और गोला-बारूद संबंध
इजरायल को हथियारों और घटकों की खेप में भारत की समानांतर वृद्धि इसके रक्षा निर्यात पोर्टफोलियो के एक पूरक और उच्च तकनीक वाले पहलू को रेखांकित करती है। जहां यूरोप को होने वाला निर्यात काफी हद तक उपभोग्य, भारी क्षमता वाले विस्फोटक गोला-बारूद पर केंद्रित है, वहीं इजरायल के साथ व्यापारिक संबंध जमीनी गोला-बारूद के साथ-साथ उन्नत सटीक सब-असेंबली को भी समाहित करते हैं।
मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच, भारतीय उद्यमों ने इजरायल को लगभग ₹630 करोड़ के तोपखाने के गोले, मोर्टार गोला-बारूद और सटीक विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति की। यह दो साल का आंकड़ा 2018 से 2024 तक के छह वर्षों में इजरायल को निर्यात किए गए ऐसे सभी गोला-बारूद के संचयी मूल्य के बराबर है, जो विस्तारित मध्य पूर्व अभियानों के बीच इजरायल के पुनःपूर्ति कार्यक्रम में भारी वृद्धि को प्रदर्शित करता है।
इसके साथ ही, इजरायल के लिए विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन घटकों का तीसरा सबसे बड़ा विदेशी प्रदाता बनने का भारत का सफर गहरे औद्योगिक एकीकरण को दर्शाता है। पिछले एक दशक में, भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों ने एल्बिट सिस्टम्स और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) सहित इजरायली रक्षा समूहों के साथ विनिर्माण संयुक्त उद्यम स्थापित किए हैं। हैदराबाद और अन्य घरेलू एयरोस्पेस समूहों की सुविधाएं 'हर्मिस 900' मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (MALE) यूएवी जैसे प्लेटफॉर्म के लिए पूर्ण एयरोस्ट्रक्चर, कार्बन-कंपोजिट असेंबली और संरचनात्मक घटकों का निर्माण करती हैं। इस संस्थागत एकीकरण ने ऐतिहासिक क्रेता-विक्रेता संबंध को पूरी तरह उलट दिया है: भारत अब एक अनिवार्य विनिर्माण केंद्र के रूप में कार्य करता है जो इजरायली विमानन लाइनों में सीधे उच्च-तनाव वाले संरचनात्मक पुर्जों की आपूर्ति करता है।
संरचनात्मक उत्प्रेरक: स्वदेशीकरण और निगमीकरण सुधार
पारंपरिक रक्षा आयातक से एक प्रभावशाली हथियार निर्यातक के रूप में भारत का तेजी से हुआ यह बदलाव पिछले पांच वर्षों में लागू किए गए निर्णायक संरचनात्मक और संस्थागत सुधारों का सीधा परिणाम है।
प्राथमिक प्रशासनिक उत्प्रेरक अक्टूबर 2021 में 220 साल पुराने आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) का विघटन था, जिसने एक संकीर्ण विभागीय एजेंसी को सात समर्पित, कॉर्पोरेट रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) में बदल दिया। म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), जिसे 12 प्रमुख गोला-बारूद और आयुध कारखाने विरासत में मिले, ने अपने परिचालन फोकस को अंतरराष्ट्रीय निर्यात की दिशा में पुनर्गठित किया। अपनी विनिर्माण प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण करके, प्रतिस्पर्धी वैश्विक निविदाओं में भाग लेकर और टर्नअराउंड समय में सुधार करके, MIL ने वित्त वर्ष 2024-25 में सभी डीपीएसयू में दर्ज 42.85% निर्यात वृद्धि में बड़ा योगदान दिया।
निगमीकरण के साथ-साथ, 'मेक इन इंडिया' रक्षा ढांचे के तहत रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित नीतिगत हस्तक्षेपों ने वैश्विक बाजार में प्रवेश के लिए आवश्यक पैमाना तैयार किया:
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां (PILs): पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की क्रमिक अधिसूचना ने हजारों सब-सिस्टम, सेंसर और युद्ध सामग्री के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे स्थानीय निर्माताओं के लिए घरेलू खरीद सुनिश्चित हुई और उन्हें निर्यात की प्रति-इकाई लागत को कम करने के लिए आवश्यक पैमाना मिला।
डिजिटल लाइसेंसिंग और प्राधिकरण सुधार: रक्षा उत्पादन विभाग ने एक एंड-टू-एंड डिजिटल निर्यात प्राधिकरण प्रणाली शुरू की, जिससे वित्त वर्ष 2024-25 में कुल स्वीकृतियां बढ़कर 1,762 हो गईं, जो साल-दर-साल 16.92% की वृद्धि है। घटकों और सब-असेंबली के लिए निर्यात परमिट की प्रक्रियागत वैधता को मूल अनुबंध की पूरी अवधि तक बढ़ा दिया गया, जिससे बार-बार आने वाली नौकरशाही बाधाएं समाप्त हो गईं।
निजी क्षेत्र का सशक्तिकरण और रक्षा गलियारे: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारों में रणनीतिक निवेश ने ₹8,600 करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष पूंजी परिव्यय आकर्षित किया, जिसने सोलर इंडस्ट्रीज और भारत फोर्ज जैसी निजी कंपनियों के बीच संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा दिया। निजी उद्यम अब भारत के कुल रक्षा निर्यात का ₹15,233 करोड़—लगभग 65% हिस्सा—उत्पादित करते हैं।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़े पुष्टि करते हैं कि इन सुधारों ने कुल घरेलू उत्पादन को ₹1.54 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया, जबकि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले घरेलू स्तर पर निर्मित उपकरणों का अनुपात 65% तक पहुंच गया, जो विदेशी आयातों पर पिछली 65% से 70% की निर्भरता का पूर्ण उलटफेर है।
भू-राजनीतिक निहितार्थ: खंडित विश्व में रणनीतिक स्वायत्तता
यूरोपीय देशों के लिए एक प्रमुख गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता और इजरायल के लिए एक प्राथमिक एयरोस्पेस घटक प्रदाता के रूप में भारत की यह दोहरी स्थिति बहु-संरेखण (मल्टी-एलाइनमेंट) और रणनीतिक स्वायत्तता के सचेत क्रियान्वयन को रेखांकित करती है।
रूसी साझेदारी का प्रबंधन
रूस भारत के लिए एक अनिवार्य रणनीतिक साझेदार बना हुआ है, जो भारतीय सेना और वायु सेना के 60% से अधिक परिचालन उपकरणों के साथ-साथ कच्चे तेल, उर्वरक और परमाणु प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण आपूर्ति प्रदान करता है। मास्को ने समय-समय पर यूरोपीय मध्यस्थों के माध्यम से यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में भारतीय तोपखाने के गोलों के पहुंचने पर गंभीर राजनयिक चिंताएं व्यक्त की हैं। इसके जवाब में, नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी परंपराओं का कड़ाई से पालन किया है: वाणिज्यिक निर्यात अनुबंध मान्यता प्राप्त द्विपक्षीय समझौतों के तहत संप्रभु साझेदार सरकारों के साथ निष्पादित किए जाते हैं, और भारत सक्रिय युद्धरत पक्षों को सीधे हथियार नहीं देता है। इस कूटनीतिक सीमा ने कोर भारत-रूस रणनीतिक संबंधों को सुरक्षित रखा है, साथ ही भारतीय रक्षा उद्यमों को लाभदायक वाणिज्यिक बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का अवसर भी दिया है।
पश्चिमी सुरक्षा प्रणालियों के साथ औद्योगिक एकीकरण
इसके साथ ही, नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को गोला-बारूद की आपूर्ति पश्चिमी सुरक्षा आपूर्ति ढांचे में भारत को एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में स्थापित करती है। पश्चिमी औद्योगिक कमियों को दूर करने के लिए आगे आकर भारत पारस्परिक रणनीतिक निर्भरता पैदा करता है। यह विनिर्माण विश्वसनीयता यूरोपीय संघ के साथ व्यापक भू-राजनीतिक और आर्थिक वार्ताओं में नई दिल्ली की स्थिति को मजबूत करती है, जिससे यह साबित होता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाए रखने में भारत एक अपरिहार्य औद्योगिक साझेदार है।
मध्य पूर्व में संतुलन
इसी प्रकार, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्यों और व्यापक ग्लोबल साउथ के साथ ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को गहरा करते हुए इजरायल के साथ निरंतर रक्षा औद्योगिक सहयोग बनाए रखना भारत के व्यावहारिक और गैर-संबद्ध (डी-हाइफनेटेड) विदेश नीति सिद्धांत को रेखांकित करता है। क्षेत्रीय सैन्य गठबंधनों में बंधे बिना, रक्षा विनिर्माण को राष्ट्रीय आर्थिक विकास और कूटनीतिक प्रभाव के एक इंजन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और अन्य प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय संबंधों, औद्योगिक नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के अंतर्संबंध का एक प्रमुख उदाहरण है।
पाठ्यक्रम से मुख्य जुड़ाव
यूपीएससी सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II (अंतरराष्ट्रीय संबंध):
द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह: भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी तथा भारत-इजरायल रक्षा सहयोग का गतिशील विकास।
विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव: वैश्विक आपूर्ति नेटवर्क और भारतीय विदेश नीति पर रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के संघर्षों का प्रभाव।
रणनीतिक स्वायत्तता और गुटनिरपेक्षता: कैसे नई दिल्ली पश्चिमी लोकतंत्रों के साथ गहन औद्योगिक एकीकरण के साथ मास्को के साथ पारंपरिक सुरक्षा संबंधों को संतुलित करती है।
यूपीएससी सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III (अर्थव्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा):
प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीक का विकास: आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र के परिवर्तन और 2021 में ओएफबी के म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड जैसी उच्च-उत्पादक इकाइयों में हुए निगमीकरण का मूल्यांकन।
औद्योगिक नीति और निर्यात संवर्धन: रक्षा निर्यात में ₹23,622 करोड़ तक पहुंचने और 2029 तक ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य रखने के पीछे के आर्थिक चालक।
आपूर्ति श्रृंखला निगरानी: एंड-यूज़र सर्टिफिकेट, दोहरे उपयोग वाले निर्यात और बहुपक्षीय हथियार अप्रसार व्यवस्थाओं के संबंध में कानूनी और रणनीतिक चुनौतियां।
अभ्यर्थियों के लिए अभ्यास मूल्यांकन
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत के रक्षा उद्योग और निर्यात नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) को 2021 में आयुध निर्माणी बोर्ड के पुनर्गठन के बाद एक स्वायत्त, निजी स्वामित्व वाली विनिर्माण फर्म के रूप में शामिल किया गया था।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का राष्ट्रीय रक्षा निर्यात ₹20,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया, जिसमें इन खेपों का अधिकांश हिस्सा निजी क्षेत्र का था।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार आंकड़ों के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद से भारत मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के लिए सबसे बड़ा गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता बन गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है क्योंकि म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के अधीन पूर्ण रूप से सरकार के स्वामित्व वाला रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (DPSU) है, न कि कोई निजी फर्म।
कथन 2 सही है क्योंकि वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसमें निजी क्षेत्र ने ₹15,233 करोड़ और डीपीएसयू ने ₹8,389 करोड़ का योगदान दिया।
कथन 3 गलत है क्योंकि भारत इस क्षेत्र के लिए दूसरा सबसे बड़ा गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता है, जो दक्षिण कोरिया के बाद आता है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. "पारंपरिक हथियार आयातक देश से यूरोप और पश्चिम एशिया के लिए सैन्य आयुध के प्रमुख निर्यातक के रूप में भारत का विकास महत्वपूर्ण घरेलू औद्योगिक प्रगति को प्रदर्शित करता है, लेकिन साथ ही यह इसकी रणनीतिक स्वायत्तता की सीमाओं का भी परीक्षण करता है।" भारतीय विदेश नीति के लिए इस बदलाव के भू-राजनीतिक और कूटनीतिक निहितार्थों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द / 15 अंक)
उत्तर के लिए रूपरेखा:
प्रस्तावना: भारत के ऐतिहासिक रक्षा निर्यात आंकड़ों (वित्त वर्ष 2024-25 में ₹23,622 करोड़) और यूरोप के दूसरे सबसे बड़े गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता (₹8,271 करोड़) तथा इजरायल के तीसरे सबसे बड़े ड्रोन/विमान पुर्जों के स्रोत के रूप में इसके उभार को रेखांकित करें।
औद्योगिक और नीतिगत उत्प्रेरक: घरेलू संरचनात्मक सुधारों को संक्षेप में प्रस्तुत करें: ओएफबी का म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड जैसे डीपीएसयू में निगमीकरण, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां, और सुव्यवस्थित डिजिटल निर्यात लाइसेंसिंग।
भू-राजनीतिक संतुलन:
रूस के साथ: तीसरे पक्षों के माध्यम से यूक्रेन भेजे जा रहे भारतीय गोलों को लेकर मास्को की चिंताओं को संभालते हुए महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रक्षा तैयारियों और ऊर्जा प्रवाह को बनाए रखना।
पश्चिम/यूरोप के साथ: औपचारिक सैन्य गठबंधनों में शामिल हुए बिना आर्थिक लाभ हासिल करना, विश्वसनीयता प्रदर्शित करना और पश्चिमी आपूर्ति श्रृंखलाओं में खुद को स्थापित करना।
पश्चिम एशिया में: अरब जगत के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियों को बनाए रखते हुए इजरायल के साथ गहन तकनीकी संयुक्त उद्यमों का प्रबंधन करना।
निष्कर्ष और आगे की राह: राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप स्थायी निर्यात राजस्व सुनिश्चित करने के लिए, बुनियादी आयुध से आगे बढ़कर जटिल उच्च-प्रौद्योगिकी प्रणालियों की ओर बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय एंड-यूज़र सर्टिफिकेट मानदंडों के कड़े विनियामक अनुपालन की आवश्यकता पर बल देते हुए उत्तर समाप्त करें।