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समसामयिकी 21 अक्टूबर, 2026: जापान ने मंगल के चंद्रमा फोबोस के लिए MMX मिशन लॉन्च किया | UPSC करेंट अफेयर्स और दैनिक GK अपडेट समसामयिकी 21 अक्टूबर, 2026: जापान ने मंगल के चंद्रमा फोबोस के लिए MMX मिशन लॉन्च किया | UPSC करेंट अफेयर्स और दैनिक GK अपडेट

21 Oct 2026 21 Oct 2026

समसामयिकी 21 अक्टूबर, 2026: जापान ने मंगल के चंद्रमा फोबोस के लिए MMX मिशन लॉन्च किया | UPSC करेंट अफेयर्स और दैनिक GK अपडेट
Science & Technology Hindi 21 Oct 2026

समसामयिकी 21 अक्टूबर, 2026: जापान ने मंगल के चंद्रमा फोबोस के लिए MMX मिशन लॉन्च किया | UPSC करेंट अफेयर्स और दैनिक GK अपडेट

कार्यकारी सारांश: आज के प्रतियोगी परीक्षा समाचार

21 अक्टूबर, 2026 की समसामयिकी में गहरे अंतरिक्ष ग्रहीय अन्वेषण (deep-space planetary exploration) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने मंगल ग्रह प्रणाली के लिए विश्व का पहला 'सैंपल-रिटर्न' (नमूना वापसी) मिशन—मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है। जापान के प्रमुख H3 प्रक्षेपण यान (उड़ान संख्या 10, H3-24L कॉन्फ़िगरेशन) के माध्यम से कागोशिमा प्रान्त स्थित तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से मंगलवार, 20 अक्टूबर, 2026 को 04:41:03 JST (भारतीय समयानुसार 20 अक्टूबर को 01:11 AM / 19:41:03 UTC, 19 अक्टूबर) पर इस रोबोटिक प्रोब ने सफल उड़ान भरी। प्रक्षेपण के लगभग 71 मिनट बाद यह अंतरिक्ष यान अपने ऊपरी चरण से अलग होकर मंगल की ओर अपने अंतरग्रहीय स्थानांतरण पथ (interplanetary transfer trajectory) पर अग्रसर हो गया।

प्रारंभिक सौर मंडल में ग्रहीय विकास और वाष्पशील यौगिकों (volatile compounds) के परिवहन से जुड़े दशकों पुराने रहस्यों को सुलझाने के उद्देश्य से निर्मित MMX अंतरिक्ष यान अगस्त 2027 में मंगल की कक्षा में पहुँचेगा। मंगल के प्रभाव क्षेत्र में अपने तीन-वर्षीय परिचालन चरण के दौरान, यह प्रोब मंगल के दोनों चंद्रमाओं—फोबोस (Phobos) और डीमोस (Deimos)—का निकट से सर्वेक्षण करेगा, फोबोस की सतह पर 'इडेफिक्स' (IDEFIX) नामक एक फ्रेंको-जर्मन मोबाइल रोवर तैनात करेगा, और फोबोस की सतह से कम से कम 10 ग्राम ($0.35\text{ औंस}$) रेगोलिथ (धूल/मिट्टी) एकत्र कर सीलबंद नमूनों को वर्ष 2031 में पृथ्वी पर वापस लाएगा। अथर्व एग्जामवाइज आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर इस दैनिक GK अपडेट का अध्ययन करने वाले सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए MMX मिशन कक्षीय यांत्रिकी (orbital mechanics), खगोल-जीवविज्ञान (astrobiology), अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कूटनीति और प्रक्षेपण यान सत्यापन का एक उत्कृष्ट संगम प्रस्तुत करता है, जो UPSC मुख्य परीक्षा (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्य तथ्य और परीक्षा-उपयोगी आंकड़े: JAXA MMX मिशन एक नजर में

अथर्व एग्जामवाइज समसामयिक समाचार और प्रतियोगी परीक्षा अपडेट्स को ट्रैक करने वाले गंभीर अभ्यर्थी प्रारंभिक और वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्यों को संकलित कर सकते हैं:

मिशन का नाम और नेतृत्वकारी एजेंसी: मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX), जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) द्वारा विकसित और संचालित।

प्रक्षेपण यान और स्थल: H3-24L रॉकेट (उड़ान संख्या 10), लॉन्च पैड LA-Y2, तानेगाशिमा स्पेस सेंटर, कागोशिमा प्रान्त, जापान।

अंतर्राष्ट्रीय साझेदार एजेंसियां: नासा (NASA - संयुक्त राज्य अमेरिका), ईएसए (ESA - यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी), सीएनईएस (CNES - नेशनल सेंटर फॉर स्पेस स्टडीज, फ्रांस), और डीएलआर (DLR - जर्मन एयरोस्पेस सेंटर) का सहयोगात्मक मिशन।

प्राथमिक लक्षित खगोलीय पिंड: फोबोस (मंगल का बड़ा और आंतरिक चंद्रमा), साथ ही डीमोस (मंगल का छोटा और बाहरी चंद्रमा) का दूरस्थ फ्लाईबाई (flyby) अवलोकन।

ऐतिहासिक प्रथम उपलब्धियां: फोबोस की अर्ध-उपग्रह कक्षा (क्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट - QSO) में प्रवेश करने और उस पर उतरने वाला विश्व का पहला अंतरिक्ष यान; मंगल के किसी चंद्रमा पर रोवर (IDEFIX) तैनात करने वाला पहला मिशन; तथा मंगल प्रणाली से पृथ्वी तक का विश्व का पहला राउंड-ट्रिप सैंपल-रिटर्न मिशन।

लक्षित नमूने की मात्रा: फोबोस की सतह और उथली उप-सतह ($2\text{ cm}$ गहराई) से कम से कम 10 ग्राम रेगोलिथ, जिसे दोहरी नमूनाकरण प्रणालियों (C-Sampler और P-Sampler) के माध्यम से दो बार लैंडिंग टचडाउन करके एकत्र किया जाएगा।

मिशन समयरेखा और पुनर्प्राप्ति (Recovery): कुल पाँच वर्ष की अवधि (प्रक्षेपण: अक्टूबर 2026; मंगल पर आगमन: अगस्त 2027; मंगल से प्रस्थान: 2030; नमूना कैप्सूल की वापसी: 2031 में वूमेरा टेस्ट रेंज, ऑस्ट्रेलिया)।

अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान और संरचना: कुल प्रक्षेपण द्रव्यमान लगभग $4,200\text{ से }4,480\text{ किग्रा}$ (जिसमें $\sim 1,900\text{ किग्रा}$ प्रणोदक और $2,100\text{ किग्रा}$ शुष्क द्रव्यमान शामिल है)। यह तीन मॉड्यूल में विभाजित है: प्रणोदन मॉड्यूल (Propulsion Module - $1,800\text{ किग्रा}$), वापसी मॉड्यूल (Return Module - $1,050\text{ किग्रा}$), और अन्वेषण मॉड्यूल (Exploration Module - $150\text{ किग्रा}$)।

मिशन पैरामीटरआधिकारिक तकनीकी विनिर्देशपरीक्षा महत्व / परिचालन भूमिका
प्रक्षेपण तिथि एवं समय20 अक्टूबर, 2026 (04:41 JST / 01:11 IST)जापान के प्रमुख H3 हेवी-लिफ्ट रॉकेट की 10वीं उड़ान
अनुमानित मिशन लागतलगभग $\$578\text{ मिलियन}$मंगल की सतह पर पूर्ण लैंडर भेजने की तुलना में लागत-प्रभावी सैंपल-रिटर्न
फोबोस पर कक्षीय व्यवस्थाक्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट (QSO)अस्थिर गुरुत्वाकर्षण पर नियंत्रण, जहाँ मंगल का ज्वारीय खिंचाव फोबोस के गुरुत्वाकर्षण पर हावी रहता है
ऑनबोर्ड सतही रोवरइडेफिक्स - IDEFIX (पृथ्वी पर $25\text{ किग्रा}$; फोबोस पर $15\text{ ग्राम}$)CNES–DLR का चार पहियों वाला स्काउट रोवर, जो $1\text{ मिमी/सेकंड}$ की गति से $\sim 100\text{ दिनों}$ तक कार्य करेगा
नमूनाकरण प्रणालियांC-SMP (कोरर) और P-SMP (न्यूमैटिक)$2\text{ सेमी}$ उप-सतही कोर (JAXA) और सतही कणों (NASA) दोनों का निष्कर्षण
वैज्ञानिक उपकरण सूट13 विशिष्ट पेलोडजलयोजित खनिजों, कार्बनिक पदार्थों, गामा किरणों/न्यूट्रॉनों और विकिरण का मानचित्रण
नमूना वापसी स्थलवूमेरा प्रतिबंधित क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया (2031)विश्लेषण के लिए कैप्सूल को सागामिहारा स्थित JAXA के ISAS केंद्र में स्थानांतरित किया जाएगा

मिशन संरचना और पाँच-वर्षीय समयरेखा: 10 ग्राम नमूने एकत्र करने में 2031 तक का समय क्यों लगेगा?

ग्रहीय इंजीनियरिंग (planetary engineering) में एक प्रमुख विश्लेषणात्मक प्रश्न यह उठता है कि फोबोस से केवल 10 ग्राम मिट्टी लाने के लिए अक्टूबर 2026 से 2031 तक के पाँच-वर्षीय राउंड-ट्रिप मिशन की आवश्यकता क्यों है। पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी को कुछ ही दिनों में तय करने वाले चंद्र अभियानों के विपरीत, पृथ्वी और मंगल के बीच अंतरग्रहीय यात्राएं सूर्यकेंद्रीय कक्षीय यांत्रिकी (heliocentric orbital mechanics) और न्यूनतम-ऊर्जा होहमैन ट्रांसफर विंडो (Hohmann transfer windows) द्वारा संचालित होती हैं। यह अनुकूल खिड़की केवल प्रत्येक 780 दिनों (लगभग 26 महीनों) में एक बार बनती है, जब पृथ्वी और मंगल एक सीध में आते हैं। परिणामस्वरूप, पृथ्वी से मंगल तक की केवल एकतरफा यात्रा में ही लगभग 10 से 11 महीने का समय लगता है, जिससे MMX अगस्त 2027 में मंगल की कक्षा में प्रवेश करेगा।

वर्ष 2027 से 2030 के दौरान मंगल प्रणाली के भीतर अंतरिक्ष यान को एक अत्यधिक जटिल खगोल-गतिकीय चुनौती (astrodynamic challenge) का सामना करना पड़ेगा, जिसे JAXA के मिशन योजनाकार "अत्यधिक मजबूत और अत्यधिक कमजोर गुरुत्वाकर्षण" का विरोधाभास कहते हैं। चूँकि फोबोस एक छोटा, अनियमित आकार का पिंड है जो मंगल की सतह से मात्र $5,989\text{ किमी}$ ऊपर परिक्रमा कर रहा है, मंगल का विशाल गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र चंद्रमा के चारों ओर के अंतरिक्ष को गंभीर रूप से विक्षुब्ध (perturb) कर देता है। इससे फोबोस का हिल स्फीयर (Hill sphere - गुरुत्वाकर्षण प्रभुत्व का क्षेत्र) इतना संकुचित हो जाता है कि फोबोस के चारों ओर एक पारंपरिक उपग्रह कक्षा भौतिक रूप से अस्थिर हो जाती है।

इसके साथ ही, फोबोस का सतही गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का केवल $1/1700$वाँ भाग है। इसका अर्थ यह है कि अंतरिक्ष यान अनियंत्रित उछाल (bounce) के जोखिम के बिना सीधे सतह पर नहीं उतर सकता; फिर भी यह गुरुत्वाकर्षण रयुगु (Ryugu) या इटोकावा (Itokawa) जैसे क्षुद्रग्रहों की तुलना में काफी अधिक है, जिसके लिए विशेष लैंडिंग लेग्स और हाइड्राजीन/रासायनिक थ्रस्टर्स की आवश्यकता होती है।

इस कक्षीय पहेली को हल करने के लिए, MMX एक विशेष क्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट (QSO) में प्रवेश करेगा। यह वास्तव में मंगल के चारों ओर की एक ऐसी कक्षा है जो फोबोस के कक्षीय पथ का निकटता से अनुसरण करती है। फोबोस के संदर्भ में देखने पर अंतरिक्ष यान ऐसा प्रतीत होता है मानो वह फोबोस की परिक्रमा कर रहा हो, जबकि वास्तव में वह सीधे मंगल की परिक्रमा कर रहा होता है।

उत्तरोत्तर निचली QSO ऊंचाइयों से MMX लगभग तीन वर्षों तक सेंटीमीटर-स्तरीय रिज़ॉल्यूशन पर फोबोस की स्थलाकृति (topography) का मानचित्रण करेगा, दर्जनों संभावित स्थलों पर खनिज वितरण का विश्लेषण करेगा, रेगोलिथ की यांत्रिकी का प्रत्यक्ष परीक्षण करने के लिए 2028-2029 में IDEFIX रोवर को सतह पर उतारेगा, और कम से कम 10 ग्राम नमूना एकत्र करने के लिए दो बार सटीक टचडाउन करेगा। नमूना संग्रह के पश्चात, अंतरिक्ष यान बाहरी चंद्रमा डीमोस के कई वैज्ञानिक फ्लाईबाई करेगा और फिर पृथ्वी वापसी के लिए 2030 के ग्रहीय संरेखण (planetary alignment) की प्रतीक्षा करेगा। अंततः एक वर्ष की वापसी यात्रा के बाद, वर्ष 2031 में वूमेरा (ऑस्ट्रेलिया) के ऊपर इसके $60\text{ सेमी}$ के सैंपल रिटर्न कैप्सूल (SRC) का वायुमंडलीय पुनः प्रवेश होगा।

फोबोस और डीमोस की भौतिक और कक्षीय रूपरेखा: रोश सीमा (Roche Limit) परिघटना

मंगल के दो छोटे, अनियमित आकार के प्राकृतिक उपग्रह हैं, जिनकी खोज 1877 में अमेरिकी खगोलशास्त्री असाफ हॉल (Asaph Hall) ने की थी। इनका नामकरण ग्रीक युद्ध के देवता एरेस (रोमन देवता मार्स के समकक्ष) के जुड़वां बेटों के नाम पर किया गया था: फोबोस ("भय") और डीमोस ("आतंक" या "त्रास")। दोनों में से किसी भी चंद्रमा में इतना द्रव्यमान नहीं है कि उसका आंतरिक गुरुत्वाकर्षण उसे जलस्थैतिक संतुलन (hydrostatic equilibrium) में खींचकर गोलाकार बना सके, जिसके कारण ये गड्ढों से भरे, आलू के आकार (potato-like) के पिंड हैं।

फोबोस और डीमोस के प्रमुख खगोलीय-भौतिकीय पैरामीटर

इन दोनों उपग्रहों के तुलनात्मक अध्ययन से स्पष्ट होता है कि JAXA ने फोबोस को प्राथमिक लैंडिंग लक्ष्य के रूप में क्यों चुना और डीमोस को केवल फ्लाईबाई अवलोकनों तक सीमित क्यों रखा।

फोबोस की तीनों अक्षों पर माप $27 \times 22 \times 18\text{ किमी}$ है (औसत व्यास $\sim 22\text{ किमी}$ और सबसे लंबा अक्ष $27\text{ किमी}$) तथा इसका द्रव्यमान $10.6 \times 10^{15}\text{ किग्रा}$ है। इसके मंगल-उन्मुख गोलार्ध पर स्टिक्नी क्रेटर (Stickney Crater) स्थित है, जो $9\text{ से }10\text{ किमी}$ व्यास का एक विशाल इम्पैक्ट बेसिन है—अर्थात चंद्रमा की कुल चौड़ाई का लगभग आधा। इसका नाम गणितज्ञ क्लो एंजेलिन स्टिक्नी हॉल के नाम पर रखा गया है। चंद्रमा की सतह पर रैखिक खांचे ($100\text{ से }200\text{ मीटर}$ चौड़े और $20\text{ मीटर}$ गहरे), 'फोबोस मोनोलिथ' (सतह पर मौजूद $85\text{ मीटर}$ चौड़ा और $90\text{ मीटर}$ ऊंचा एक विशाल शिलाखंड) और सूक्ष्म-उल्कापिंडों की लगातार बमबारी से बनी कम से कम $1\text{ मीटर}$ मोटी महीन रेगोलिथ धूल की चादर मौजूद है।

मंगल की सतह से मात्र $5,989\text{ किमी}$ (मंगल के केंद्र से $9,375\text{ किमी}$) की औसत ऊंचाई पर परिक्रमा करने वाला फोबोस, सौर मंडल में अपने प्राथमिक ग्रह के सबसे निकट स्थित प्राकृतिक उपग्रह है। इस अत्यधिक कम ऊंचाई के कारण, फोबोस मंगल का एक चक्कर मात्र $7\text{ घंटे और }39\text{ मिनट}$ ($0.32\text{ दिन}$) में पूरा कर लेता है—अर्थात यह मंगल के अपने अक्ष पर घूर्णन ($24.5\text{ घंटे}$) की तुलना में तीन गुना से भी अधिक तेजी से चक्कर लगाता है।

परिणामस्वरूप, मंगल की सतह पर खड़े किसी प्रेक्षक के लिए फोबोस की गति आभासी रूप से उल्टी (प्रत्यागामी / retrograde) दिखाई देगी—यह प्रत्येक मार्टियन दिन में दो बार पश्चिम से उगेगा और पूर्व में अस्त होगा। साथ ही, ग्रह की वक्रता के कारण मंगल के ध्रुवीय क्षेत्रों से यह क्षितिज के नीचे ही छुपा रहेगा।

चूँकि फोबोस मंगल की तुल्यकालिक कक्षीय त्रिज्या (synchronous orbital radius) के अंदर परिक्रमा करता है, इसका कक्षीय कोणीय वेग मंगल के घूर्णन वेग से अधिक है। इसके कारण फोबोस द्वारा मंगल पर उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण ज्वारीय उभार (tidal bulge) चंद्रमा से पीछे छूट जाता है, जिससे एक निरंतर पीछे की ओर गुरुत्वाकर्षण खिंचाव (ज्वारीय मंदी / tidal deceleration) उत्पन्न होता है। यह खिंचाव कक्षीय ऊर्जा को क्षीण करता है और फोबोस को प्रति शताब्दी लगभग $1.8\text{ मीटर}$ ($6\text{ फीट}$) की दर से ($\sim 3.8\text{ सेमी}$ प्रति वर्ष) मंगल की ओर अंदर खींच रहा है।

खगोल-भौतिकीय मॉडलों के अनुसार, लगभग $2\text{ से }5\text{ करोड़ वर्ष}$ ($\sim 40\text{ मिलियन वर्ष}$) में फोबोस $5,500\text{ किमी}$ की ऊंचाई पर पहुँच जाएगा—जो मंगल की रोश सीमा (Roche limit) है। रोश सीमा के भीतर पहुँचते ही मंगल के ज्वारीय बल फोबोस के आंतरिक गुरुत्वाकर्षण सामर्थ्य से अधिक शक्तिशाली हो जाएंगे, जिससे यह चंद्रमा टूटकर मलबे में बिखर जाएगा। यह मलबा अस्थायी रूप से शनि जैसा एक वलय (ring) बनाएगा और अंततः धीरे-धीरे मंगल के भूमध्य रेखा पर गिर जाएगा।

इसके विपरीत, डीमोस काफी छोटा है (औसत व्यास $\sim 12\text{ किमी}$) और तुल्यकालिक त्रिज्या से काफी बाहर $23,500\text{ किमी}$ की ऊंचाई पर $30\text{ घंटे}$ से अधिक की कक्षीय अवधि के साथ परिक्रमा करता है। चूँकि डीमोस मंगल के घूर्णन की तुलना में धीमी गति से परिक्रमा करता है, मंगल का ज्वारीय बल इसे आगे की ओर गति प्रदान करता है। इससे यह पृथ्वी के चंद्रमा की तरह धीरे-धीरे बाहर की ओर खिसक रहा है और सुदूर भविष्य में मंगल के गुरुत्वाकर्षण से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।

पैरामीटरफोबोस (आंतरिक चंद्रमा)डीमोस (बाहरी चंद्रमा)
व्युत्पत्ति (ग्रीक पौराणिक कथा)"भय" (एरेस का पुत्र)"आतंक" या "त्रास" (एरेस का पुत्र)
आयाम / औसत व्यास$27 \times 22 \times 18\text{ किमी}$ (औसत: $\sim 22\text{ किमी}$)औसत व्यास: $\sim 12\text{ किमी}$
मंगल की सतह से ऊंचाई$5,989\text{ किमी}$ ($\sim 6,000\text{ किमी}$)$\sim 23,500\text{ किमी}$
कक्षीय अवधि (मंगल की परिक्रमा)$7\text{ घंटे }39\text{ मिनट}$ ($0.32\text{ दिन}$)$> 30\text{ घंटे}$
मंगल के घूर्णन के सापेक्ष गतिमंगल के घूर्णन ($24.5\text{ घंटे}$) से तेज; पश्चिम से उदय, पूर्व में अस्तमंगल के घूर्णन से धीमा; पूर्व से उदय, पश्चिम में अस्त
दीर्घकालिक ज्वारीय प्रक्षेपवक्रअंदर की ओर सर्पिलाकार ($1.8\text{ मीटर}$/शताब्दी); $\sim 40\text{ मिलियन वर्ष}$ में $5,500\text{ किमी}$ की रोश सीमा पर विखंडनबाहर की ओर सर्पिलाकार; अंततः मंगल के गुरुत्वाकर्षण से मुक्त हो जाएगा
MMX मिशन संचालनक्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट, IDEFIX रोवर लैंडिंग, 2 टचडाउन और सैंपल-रिटर्नदूरस्थ संवेदन (remote sensing) और मल्टी-फ्लाईबाई स्पेक्ट्रोस्कोपी

प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्य: ग्रहीय उत्पत्ति, प्राचीन मंगल का जल और बायोसिग्नेचर

JAXA MMX मिशन और इसके यूरोपीय साझेदार फ्रेमवर्क (ESA MMX फैक्टशीट) का मुख्य वैज्ञानिक उद्देश्य मंगल प्रणाली के विकास के इतिहास को समझना और यह स्पष्ट करना है कि आंतरिक स्थलीय ग्रहों (बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल) तक जल और जीवन-पूर्व कार्बनिक यौगिक (prebiotic organic compounds) कैसे पहुँचे।

1. मंगल के चंद्रमाओं की उत्पत्ति के रहस्य को सुलझाना

ग्रह वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात पर विभाजित रहे हैं कि मंगल ने फोबोस और डीमोस को कैसे प्राप्त किया, क्योंकि वर्तमान डेटा विरोधाभासी संकेत देता है:

विशाल संघात परिकल्पना (Giant Impact Hypothesis): यह मॉडल प्रस्तावित करता है कि सौर मंडल के प्रारंभिक इतिहास में एक विशाल प्रोटो-प्लैनेटरी पिंड युवा मंगल से टकराया था। इससे मंगल की पपड़ी (crust) और मेंटल का मलबा अंतरिक्ष में फैल गया, जो बाद में एकत्रित होकर फोबोस और डीमोस के रूप में संघनित हुआ—ठीक उसी प्रकार जैसे पृथ्वी के चंद्रमा का निर्माण हुआ था। चंद्रमाओं की कक्षीय संरचना इस सिद्धांत का दृढ़ता से समर्थन करती है: फोबोस की कक्षा लगभग गोलाकार (उत्केंद्रता / eccentricity $0.015$) और लगभग भूमध्यरेखीय (झुकाव / inclination $1.1^\circ$) है, जो मलबे की डिस्क से संचयन का स्वाभाविक परिणाम है। यदि MMX के नमूने संघात उत्पत्ति की पुष्टि करते हैं, तो यह रेगोलिथ सीधे तौर पर प्रारंभिक मंगल की भू-रासायनिक संरचना को उजागर करेगा।

अभिग्रहीत क्षुद्रग्रह परिकल्पना (Captured Asteroid Hypothesis): इसके अनुसार, फोबोस और डीमोस मूल रूप से सौर मंडल के बाहरी हिस्से में निर्मित स्वतंत्र क्षुद्रग्रह थे, जो अंदर की ओर आए और मंगल के गुरुत्वाकर्षण द्वारा पकड़ लिए गए। पुराने ऑर्बिटर्स से प्राप्त वर्णक्रमीय (spectral) डेटा इसका समर्थन करता है, जो दर्शाता है कि फोबोस का परावर्तन (albedo) कार्बनयुक्त चोंड्राइट उल्कापिंडों (D-टाइप या C-टाइप क्षुद्रग्रह, जो जल और कार्बन से समृद्ध होते हैं) से मिलता-जुलता है। हालाँकि, वायुगतिकीय या ज्वारीय अपव्यय के बिना दो क्षुद्रग्रहों का वृत्ताकार, भूमध्यरेखीय कक्षाओं में कैद होना एक बड़ी सैद्धांतिक पहेली है। यदि MMX के समस्थानिक (isotopic) विश्लेषण इसकी पुष्टि करते हैं, तो यह स्पष्ट होगा कि जल-समृद्ध क्षुद्रग्रहों ने आंतरिक ग्रहों तक जीवन के आवश्यक घटकों का परिवहन कैसे किया।

2. प्राचीन मंगल के जल, कार्बनिक पदार्थों और बायोसिग्नेचर की जांच

MMX मिशन एक अद्वितीय प्राकृतिक तंत्र का लाभ उठाता है: मंगल से फोबोस तक संघात मलबे (impact ejecta) का स्थानांतरण।

भू-आकृतिक साक्ष्य (नदी घाटियाँ, सूखी झीलें) और इसरो के मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) द्वारा मापे गए वायुमंडलीय ड्यूटेरियम-से-हाइड्रोजन ($D/H$) अनुपात से स्पष्ट है कि लगभग 4 अरब वर्ष पहले मंगल पर प्रचुर मात्रा में तरल जल मौजूद था। पिछले चार अरब वर्षों में मंगल पर उल्कापिंडों की भारी बमबारी ने चट्टानों और मिट्टी को अंतरिक्ष में उड़ाया है। मात्र $5,989\text{ किमी}$ की दूरी पर स्थित होने के कारण, फोबोस एक 'कॉस्मिक विटनेस प्लेट' (cosmic witness plate) की तरह कार्य करता है, जिसने इस उड़े हुए मलबे को अपनी सतह पर समेट लिया है (अनुमान है कि फोबोस पर डीमोस की तुलना में 100 गुना अधिक मार्टियन मलबा जमा है)।

मंगल की सतह पर उतरने वाला कोई भी रोवर केवल एक विशिष्ट भूवैज्ञानिक स्थल का नमूना ले सकता है, जबकि फोबोस का रेगोलिथ पूरे मंगल ग्रह और उसके सभी युगों के मलबे का एक मिश्रित प्राकृतिक संग्रह है। फोबोस के नमूनों से वैज्ञानिक जलयोजित खनिजों, कार्बनिक अवशेषों और संभावित बायोसिग्नेचर (प्राचीन मार्टियन जीवन के रासायनिक या समस्थानिक निशान) का अध्ययन कर सकेंगे, जो अंतरिक्ष के निर्वात में विकिरण द्वारा निष्फल (sterilized) होकर संरक्षित रहे हैं।

3. भावी मानवयुक्त मंगल अभियानों के लिए पूर्ववर्ती आकलन

MMX 2030 और 2040 के दशक में मंगल पर मानव मिशनों के लिए एक तकनीकी पाथफाइंडर के रूप में भी कार्य करता है। अंतरिक्ष यात्रियों को सीधे मंगल की सतह पर उतारना और फिर वापस लॉन्च करना अत्यधिक जटिल और भारी ईंधन की मांग करता है। इसलिए वैज्ञानिक फोबोस को एक "प्राकृतिक अंतरिक्ष स्टेशन" या कक्षीय अग्रिम चौकी के रूप में आंक रहे हैं, जहाँ से अंतरिक्ष यात्री मंगल पर मौजूद रोवर्स को शून्य संचार विलंबता (zero latency) के साथ नियंत्रित कर सकें या इन-सिटू प्रणोदक उत्पादन के लिए उप-सतही बर्फ का उपयोग कर सकें। MMX पर लगा IREM उपकरण भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए विकिरण स्तरों का सटीक मापन करेगा।

ऑनबोर्ड तकनीक: दोहरी नमूनाकरण प्रणालियां, IDEFIX रोवर, और 13 वैज्ञानिक उपकरण

अज्ञात सतही परिस्थितियों में मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए MMX को दो स्वतंत्र सैंपलिंग सिस्टम, एक स्काउट रोवर (IDEFIX) और 13 वैज्ञानिक उपकरणों से लैस किया गया है। इसमें पाँच प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों की सहभागिता है: JAXA मिशन का नेतृत्व कर रहा है, H3-24L रॉकेट प्रदान कर रहा है, और 9 पेलोड का योगदान दे रहा है। NASA दो महत्वपूर्ण पेलोड (MEGANE और P-SMP) प्रदान कर रहा है; CNES और DLR ने संयुक्त रूप से IDEFIX रोवर और MIRS उपकरण विकसित किया है; जबकि ESA अपने 'एस्ट्रैक' (Estrack) ग्राउंड नेटवर्क और डीप-स्पेस संचार हार्डवेयर के साथ सहायता प्रदान कर रहा है।

दोहरी नमूनाकरण प्रणालियां: C-Sampler बनाम P-Sampler

कोरर सैंपलिंग मैकेनिज्म (C-SMP / C-Sampler - JAXA): यह रोबोटिक आर्म पर लगी एक बेलनाकार कोरिंग ट्यूब का उपयोग करता है, जो 2.5 घंटे के टचडाउन के दौरान सतह में $\sim 2\text{ सेमी}$ गहराई तक प्रवेश करती है। यह अंतरिक्ष अपक्षय (space weathering) से अप्रभावित आंतरिक रेगोलिथ नमूनों ($>10\text{ ग्राम}$) को सुरक्षित रूप से कैप्सूल में एकत्र करता है।

न्यूमैटिक सैंपलिंग मैकेनिज्म (P-SMP / P-Sampler - NASA / हनीबी रोबोटिक्स): यह लैंडिंग लेग पर लगा है। यह संपीड़ित नाइट्रोजन गैस के हल्के झोंके छोड़कर एक सेकंड के भीतर सतही धूल को संग्रह कक्ष में खींच लेता है। यदि सतह विषम हो और तुरंत थ्रस्टर्स चालू करने पड़ें, तो भी यह अल्ट्रा-फास्ट प्रणाली टचडाउन के क्षण में ही नमूना सुरक्षित करने की परिचालन अतिरेकता (redundancy) प्रदान करती है।

IDEFIX माइक्रोग्रैविटी रोवर (CNES और DLR)

फ्रेंच कॉमिक चरित्र एस्टेरिक्स के पालतू कुत्ते के नाम पर नामित IDEFIX एक $25\text{ किग्रा}$ वजनी, चार पहियों वाला स्वायत्त रोवर है। फोबोस के सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण ($1/1700$वाँ भाग) के कारण इसका वजन सतह पर मात्र $15\text{ ग्राम}$ (लगभग एक कॉम्पैक्ट डिस्क या तीन कागजों के बराबर) होगा।

लैंडिंग से पहले इसे $50\text{ मीटर}$ से कम ऊंचाई से गिराया जाएगा। यह सतह पर गिरकर, लुढ़ककर रुकने के बाद स्वयं को सीधा करने की क्षमता रखता है। सौर पैनलों और रिचार्जेबल बैटरी पर यह लगभग 100 दिनों तक कार्य करेगा। माइक्रोग्रैविटी में उछलकर अंतरिक्ष में खो जाने से बचने के लिए, यह मात्र $1\text{ मिलीमीटर प्रति सेकंड}$ की अत्यधिक धीमी गति से चलेगा। इसमें रेगोलिथ यांत्रिकी के अध्ययन के लिए नेविगेशन कैमरे ($100\,\mu\text{m}$ रिज़ॉल्यूशन), इन-सिटू खनिज पहचान के लिए RAX रमन स्पेक्ट्रोमीटर और थर्मल इनर्शियल मापन के लिए miniRAD रेडियोमीटर लगे हैं।

13 वैज्ञानिक उपकरणों की पूरी सूची

क्र.उपकरण का संक्षिप्त नामपूर्ण तकनीकी नाम एवं योगदानकर्ता एजेंसीमंगल क्षेत्र में प्राथमिक वैज्ञानिक कार्य
1TENGOOटेलिस्कोपिक नादिर इमेजर फॉर जियोमॉर्फोलॉजी (JAXA)नैरो-एंगल कैमरा ($\sim 40\text{ सेमी}$ रिज़ॉल्यूशन), जो विस्तृत सतही स्थलाकृति और लैंडिंग खतरों का मानचित्रण करता है।
2OROCHIऑप्टिकल रेडियोमीटर कंपोज्ड ऑफ क्रोमैटिक इमेजर्स (JAXA)वाइड-एंगल मल्टी-वेवलेंथ विजिबल कैमरा, जो जलयोजित खनिजों और कार्बनिक पदार्थों की पहचान करता है।
3LIDARलाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (JAXA)लेजर अल्टीमीटर, जो अंतरिक्ष यान की ऊंचाई, सतह की स्थलाकृति और एल्बिडो वितरण को मापता है।
4MIRSMMX इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर (CNES / LESIA, फ्रांस)नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर ($0.9\text{–}3.6\,\mu\text{m}$), जो जल-संबंधी खनिजों और कार्बनिक पदार्थों का नक्शा तैयार करता है।
5MEGANEमार्स-मून एक्सप्लोरेशन विद गामा रेज एंड न्यूट्रॉन्स (NASA / Johns Hopkins APL)ब्रह्मांडीय किरणों की उत्तेजना द्वारा तात्विक संरचना (हाइड्रोजन/बर्फ और आयरन/सिलिकॉन अनुपात) का मापन।
6CMDMसरकम-मार्टियन डस्ट मॉनिटर (JAXA)इम्पैक्ट मलबे और संभावित धूल वलयों के अध्ययन के लिए मंगल के चारों ओर धूल के कणों ($\ge 10\,\mu\text{m}$) का पता लगाना।
7MSAमास स्पेक्ट्रम एनालाइजर (JAXA)आयन मास स्पेक्ट्रोमीटर, जो मंगल के वायुमंडल और फोबोस की आंतरिक बर्फ से निकलने वाले आवेशित कणों का विश्लेषण करता है।
8IDEFIXमोबाइल सरफेस रोवर (CNES फ्रांस और DLR जर्मनी)$25\text{ किग्रा}$ का स्काउट रोवर, जिसमें RAX (रमन स्पेक्ट्रोमीटर), miniRAD और माइक्रो-इमेजर्स लगे हैं।
9C-SMPकोरर सैंपलिंग मैकेनिज्म / C-सैंपलर (JAXA)रोबोटिक आर्म कोरर, जो उप-सतह से $\sim 2\text{ सेमी}$ गहराई तक रेगोलिथ की खुदाई करता है।
10P-SMPन्यूमैटिक सैंपलिंग मैकेनिज्म / P-सैंपलर (NASA)संपीड़ित नाइट्रोजन गैस प्रणाली, जो सतही रेगोलिथ को तेजी से कंटेनर में उड़ाकर भरती है।
11SRCसैंपल रिटर्न कैप्सूल (JAXA)$60\text{ सेमी}$ का हीट-शील्डेड कैप्सूल, जो 2031 में पृथ्वी पर पुनः प्रवेश के लिए $>10\text{ ग्राम}$ नमूनों को सुरक्षित रखता है।
12IREMइंटरप्लेनेटरी रेडिएशन एनवायरनमेंट मॉनिटर (JAXA)अंतरिक्ष यात्रियों के विकिरण खतरों के आकलन के लिए उच्च-ऊर्जा ब्रह्मांडीय किरणों और सौर प्रोटॉनों का मापन।
13SHVसुपर हाई-विज़न कैमरा (JAXA और NHK)अल्ट्रा-हाई-डेफिनिशन 4K और 8K कैमरे, जो मंगल और उसके चंद्रमाओं के दृश्यों का सजीव प्रसारण दर्ज करते हैं।

भू-राजनीतिक संदर्भ और इसरो (ISRO) मिशनों के साथ रणनीतिक संबंध

MMX के प्रक्षेपण का विश्लेषण UPSC मुख्य परीक्षा (GS प्रश्नपत्र-II और GS प्रश्नपत्र-III) के दृष्टिकोण से तीन गहरे भू-राजनीतिक और तकनीकी रुझानों को उजागर करता है:

1. ऐतिहासिक "फोबोस कर्स" (Phobos Curse) से पार पाना और वैश्विक मार्स सैंपल-रिटर्न दौड़

ऐतिहासिक रूप से फोबोस अंतरिक्ष अन्वेषण के सबसे कठिन लक्ष्यों में से एक रहा है। 1980 के दशक के उत्तरार्ध में सोवियत संघ ने फोबोस 1 और फोबोस 2 लॉन्च किए, जो सतही अभियान से पहले ही संचार विफलता का शिकार हो गए। नवंबर 2011 में रूस के रोस्कोस्मोस ने $13,505\text{ किग्रा}$ का भारी-भरकम 'फोबोस-ग्रंट' (Fobos-Grunt) मिशन लॉन्च किया (जिसमें चीन का पहला मार्स ऑर्बिटर यिंगहुओ-1 भी शामिल था), जिसका लक्ष्य $200\text{ ग्राम}$ मिट्टी लाना था। किंतु इसके थ्रस्टर्स पृथ्वी की निचली कक्षा में ही विफल हो गए और यह जनवरी 2012 में प्रशांत महासागर में जलकर नष्ट हो गया।

जापान ने अपने सफल क्षुद्रग्रह अभियानों—हायाबुसा (2010 में इटोकावा से) और हायाबुसा-2 (2020 में रयुगु से)—के अनुभव का उपयोग करते हुए MMX को केवल $4,480\text{ किग्रा}$ (फोबोस-ग्रंट के एक-तिहाई से भी कम) द्रव्यमान और ट्रिपल-रिडंडेंट नेविगेशन के साथ डिजाइन किया है।

इसके अलावा, MMX ने मंगल से नमूना वापसी की वैश्विक होड़ का समीकरण बदल दिया है। जहाँ नासा के पर्सिवियरेंस (Perseverance) रोवर द्वारा मंगल पर एकत्र किए गए नमूनों को लाने वाला संयुक्त अमेरिकी-यूरोपीय मार्स सैंपल रिटर्न (MSR) मिशन अत्यधिक बजट वृद्धि के कारण 2026 की शुरुआत में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थगित कर दिया गया, वहीं अब 2031 तक मंगल प्रणाली से नमूने लाने की दौड़ मुख्य रूप से दो देशों के बीच सिमट गई है: जापान का MMX (2031 में वापसी) और चीन का तियानवेन-3 (Tianwen-3) मिशन (2028 में प्रक्षेपण, 2031 में वापसी का लक्ष्य)।

2. ISRO–JAXA चंद्रयान-5 (LUPEX) मिशन के लिए प्रत्यक्ष तकनीकी सत्यापन

भारतीय अंतरिक्ष और रक्षा विश्लेषकों के लिए H3-24L रॉकेट की 10वीं सफल उड़ान का सीधा संबंध इसरो (ISRO) से है। इसी समान हेवी-लिफ्ट रॉकेट कॉन्फ़िगरेशन—H3-24L—को संयुक्त ISRO–JAXA चंद्रयान-5 / ल्यूपेक्स (LUPEX - लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन) मिशन के प्रक्षेपण के लिए आधिकारिक रूप से चुना गया है।

मार्च 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत और जुलाई 2026 में तकनीकी समीक्षा से गुजरे ल्यूपेक्स मिशन में इसरो का उन्नत चंद्र लैंडर और JAXA का $350\text{ किग्रा}$ का रोवर शामिल होगा, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों (PSRs) में $1.5\text{ मीटर}$ तक ड्रिलिंग करेगा। $4.48\text{ टन}$ वजनी MMX का सफल प्रक्षेपण भारत के $6.2\text{ टन}$ वजनी चंद्रयान-5 मिशन की प्रक्षेपण वास्तुकला को तकनीकी रूप से जोखिम-मुक्त (de-risk) बनाता है।

3. ISRO के मंगलयान-1 (MOM) और मंगलयान-2 (मार्स लैंडर मिशन / MLM) के साथ वैज्ञानिक तालमेल

भारत का मंगल अन्वेषण रोडमैप भी सीधे MMX से जुड़ता है:

मंगलयान-1 (MOM): 2014 से 2022 तक कार्यरत रहते हुए इसरो के मार्स कलर कैमरा (MCC) ने डीमोस के सुदूर हिस्से (far side) की विश्व की पहली तस्वीरें ली थीं। साथ ही, इसके लाइमैन अल्फा फोटोमीटर (LAP) ने मंगल के ऊपरी वायुमंडल में पृथ्वी की तुलना में छह गुना अधिक ड्यूटेरियम-हाइड्रोजन ($D/H$) अनुपात दर्ज किया था, जिसने प्राचीन मार्टियन महासागरों के अस्तित्व का स्वतंत्र प्रमाण दिया था।

मंगलयान-2 / मार्स लैंडर मिशन (MLM): 21 फरवरी, 2025 को अंतरिक्ष आयोग द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकृत यह मिशन वर्ष 2030 में LVM3 रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा। इसमें क्रूज स्टेज, डिसेंट स्टेज (सॉफ्ट लैंडिंग हेतु), रोवर और एक मार्स हेलिकॉप्टर (MARBLE) शामिल होगा। इसका प्रमुख पेलोड MODEX (मार्स ऑर्बिट डस्ट एक्सपेरिमेंट) उच्च गति वाले धूल कणों का पता लगाएगा, जिससे यह पुष्टि होगी कि मंगल के चारों ओर धूल के वलय अंतरग्रहीय अंतरिक्ष से आते हैं या फोबोस और डीमोस से निकलते हैं। MMX का CMDM उपकरण (2027–2030) और मंगलयान-2 का MODEX (2030) मिलकर मंगल के धूल भरे पर्यावरण का पूरक और सटीक डेटासेट प्रदान करेंगे।

आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

JAXA MMX मिशन UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE), राज्य लोक सेवा आयोगों (जैसे MPPSC), CDS, CAPF और अन्य परीक्षाओं के लिए अत्यंत संभावित विषय है:

UPSC प्रारंभिक परीक्षा (GS प्रश्नपत्र-I — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और भौतिक भूगोल):

मिशनों और उनकी एजेंसियों का मिलान (MMX – JAXA, H3 रॉकेट, फोबोस; IDEFIX – CNES/DLR; MEGANE और P-Sampler – NASA)।

अवधारणात्मक प्रश्न: फोबोस का पश्चिम में उगना और पूर्व में अस्त होना (इसकी $7\text{ घंटे }39\text{ मिनट}$ की कक्षीय अवधि मंगल के $24.5\text{ घंटे}$ के घूर्णन से तेज होने के कारण)।

रोश सीमा ($5,500\text{ किमी}$) के भौतिक नियम और ज्वारीय मंदी।

क्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट (QSO) और सामान्य केपलरियन कक्षाओं के बीच अंतर।

चंद्रयान-5 (LUPEX) और MMX के बीच उभयनिष्ठ प्रक्षेपण यान (H3-24L) का संबंध।

UPSC मुख्य परीक्षा (GS प्रश्नपत्र-III — अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता; GS प्रश्नपत्र-II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध):

यह मिशन आधुनिक अंतरिक्ष कूटनीति में लागत-साझेदारी और तकनीकी पूरकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जापानी प्रणोदन, अमेरिकी परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी, फ्रेंको-जर्मन रोवर और यूरोपीय संचार नेटवर्क का यह समन्वय बहुपक्षीय साझेदारी के महत्व को दर्शाता है।

अभ्यर्थी इसे ISRO–JAXA LUPEX और NASA–ISRO NISAR के साथ जोड़कर हिंद-प्रशांत और यूरोपीय भागीदारों के बीच रणनीतिक अंतरिक्ष सहयोग के मॉडल के रूप में उद्धृत कर सकते हैं।

कम गुरुत्वाकर्षण वाले चंद्रमा (फोबोस) से संघात मलबे को लाना बहु-अरब डॉलर के सतही लैंडर अभियानों की तुलना में एक अत्यधिक वित्तीय व्यवहार्य ($\$578\text{ मिलियन}$) विकल्प प्रदान करता है।

प्रारंभिक परीक्षा हेतु मॉडल अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) मिशन और मंगल के चंद्रमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

MMX मिशन का नेतृत्व जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) द्वारा किया जा रहा है और इसे H3 हेवी-लिफ्ट रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया है।

इसमें 'इडेफिक्स' (IDEFIX) नामक एक मोबाइल सतही रोवर शामिल है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और नासा (NASA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।

चूँकि फोबोस मंगल के अपने अक्ष पर घूर्णन की तुलना में अधिक तेजी से उसकी परिक्रमा करता है, इसलिए ज्वारीय बल धीरे-धीरे फोबोस को मंगल की रोश सीमा की ओर अंदर खींच रहे हैं।

इस मिशन का उद्देश्य वर्ष 2031 में पृथ्वी पर लौटने से पहले फोबोस और डीमोस दोनों की सतहों से नमूने एकत्र करना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 1 और 3

(c) केवल 2, 3 और 4

(d) केवल 1, 3 और 4

सही उत्तर: (b) केवल 1 और 3

विस्तृत व्याख्या:

कथन 1 सही है: JAXA ने 20 अक्टूबर, 2026 को H3-24L रॉकेट की सहायता से MMX अंतरिक्ष यान का सफल प्रक्षेपण किया।

कथन 2 गलत है: IDEFIX रोवर को ISRO और NASA द्वारा नहीं, बल्कि फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES और जर्मनी की DLR द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।

कथन 3 सही है: फोबोस मंगल की परिक्रमा मात्र $7\text{ घंटे }39\text{ मिनट}$ में पूरी करता है, जो मंगल के $24.5\text{ घंटे}$ के घूर्णन समय से काफी तेज है। इस तीव्र गति के कारण ज्वारीय मंदी (tidal deceleration) उत्पन्न होती है, जो इसे $5,500\text{ किमी}$ की रोश सीमा की ओर अंदर खींच रही है।

कथन 4 गलत है: MMX अंतरिक्ष यान केवल फोबोस की सतह पर उतरेगा और वहीं से नमूने एकत्र करेगा। डीमोस का अध्ययन यह केवल दूरस्थ फ्लाईबाई (flybys) अवलोकनों के माध्यम से करेगा, वहाँ लैंडिंग या नमूना संग्रह नहीं किया जाएगा।

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