UPSC करेंट अफेयर्स 9 अक्टूबर 2026: ऐन कार्सन ने जीता साहित्य में नोबेल पुरस्कार | दैनिक सामान्य ज्ञान (GK) अपडेट और अथर्व एग्ज़ामवाइज़ समसामयिक समाचार
स्टॉकहोम स्थित स्वीडिश अकादमी ने आधिकारिक तौर पर कनाडाई कवयित्री, निबंधकार और अनुवादक ऐन कार्सन (Anne Carson) को साहित्य में 2026 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। अकादमी ने कार्सन को "उनकी साहसिक और आविष्कारशील रचनाशीलता के लिए, जिसने शास्त्रीय परंपरा के साथ एक जीवंत संवाद स्थापित कर समकालीन साहित्य के लिए नए रूप गढ़े हैं" के लिए यह मान्यता प्रदान की। यह घटनाक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और 'अथर्व एग्ज़ामवाइज़ करेंट अफेयर्स' के माध्यम से दैनिक समसामयिकी तथा सामान्य अध्ययन (GS) पाठ्यक्रम की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उच्च-उपयोगी (high-yield) सामग्री उपलब्ध कराता है।
1901 में पुरस्कार की स्थापना के बाद से कार्सन साहित्य में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली 19वीं महिला हैं और 2013 में लघुकथा लेखिका एलिस मुनरो (Alice Munro) के बाद यह सम्मान पाने वाली दूसरी कनाडाई मूल की रचनाकार बन गई हैं। इस सम्मान के साथ 1.2 करोड़ (12 मिलियन) स्वीडिश क्रोनर (SEK) की नकद राशि प्रदान की जाती है, जो लगभग 12 लाख अमेरिकी डॉलर ($1.2 million USD) या लगभग ₹12 करोड़ के समतुल्य है। औपचारिक अलंकरण समारोह, जिसमें विजेता को नोबेल डिप्लोमा और स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा, अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि के अवसर पर 10 दिसंबर 2026 को स्टॉकहोम में आयोजित होगा।
साहित्य में नोबेल पुरस्कार 2026: संक्षिप्त अवलोकन
नीचे दी गई तालिका 2026 के पुरस्कार के संस्थागत, वित्तीय और जीवन-वृत्त संबंधी मापदंडों को रेखांकित करती है:
| पैरामीटर | मुख्य विवरण | परीक्षा संदर्भ |
|---|---|---|
| पुरस्कार श्रेणी | साहित्य में नोबेल पुरस्कार 2026 | अंतर्राष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार |
| प्रदाता संस्था | स्वीडिश अकादमी (स्टॉकहोम, स्वीडन) | स्टेटिक सामान्य ज्ञान / वैश्विक संस्थाएँ |
| पुरस्कार विजेता | ऐन कार्सन (उम्र: 76 वर्ष) | चर्चा में रहे वैश्विक व्यक्तित्व |
| राष्ट्रीयता एवं मूल | कनाडाई (जन्म 21 जून 1950, टोरंटो) | UPSC प्रीलिम्स एवं राज्य PCS पहचान |
| आधिकारिक प्रशस्ति पत्र | "उनकी साहसिक और आविष्कारशील रचनाशीलता के लिए, जिसने शास्त्रीय परंपरा के साथ एक जीवंत संवाद स्थापित कर समकालीन साहित्य के लिए नए रूप गढ़े हैं" | विश्लेषणात्मक उद्धरण एवं मुख्य परीक्षा निबंध संदर्भ |
| पुरस्कार राशि | 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (SEK) | वस्तुनिष्ठ सामान्य ज्ञान |
| ऐतिहासिक उपलब्धि | कुल 123 प्राप्तकर्ताओं में से 19वीं महिला साहित्य विजेता | वैश्विक पुरस्कारों में लैंगिक प्रतिनिधित्व |
| पूर्ववर्ती विजेता | लास्लो क्रास्नाहोरकाई (हंगरी, 2025) | साहित्य पुरस्कार विजेताओं का कालक्रम |
प्रमुख तथ्य और परीक्षा-उपयोगी डेटा
वस्तुनिष्ठ परीक्षा प्रारूपों के लिए आवश्यक संरचनात्मक और जीवन-वृत्त संबंधी विवरण निम्नलिखित हैं:
भाषावैज्ञानिक पृष्ठभूमि: कार्सन ने टोरंटो विश्वविद्यालय से कला स्नातक (1974), कला परास्नातक (1975), और क्लासिक्स (शास्त्रीय अध्ययन) में डॉक्टरेट (1981) की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपना डॉक्टरेट शोध प्रबंध "Odi et Amo Ergo Sum" ("मैं घृणा करता हूँ और मैं प्रेम करता हूँ, इसलिए मैं हूँ") विषय पर लिखा था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्कॉटलैंड के सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय से ग्रीक मेट्रिक्स और पाठ्य आलोचना (textual criticism) में उच्च अध्ययन भी पूरा किया।
राष्ट्रीय उपलब्धि: कार्सन 2013 में एलिस मुनरो के बाद साहित्य का नोबेल जीतने वाली दूसरी कनाडाई लेखिका हैं। अन्य प्रमुख कनाडाई मूल के विजेताओं में शाऊल बेलो (Saul Bellow) शामिल हैं, जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका प्रवास के बाद 1976 में यह पुरस्कार जीता था।
साहित्यिक सम्मान: कार्सन दो बार ग्रिफिन पोएट्री प्राइज की विजेता, मैकआर्थर "जीनियस" फेलो, गुगेनहाइम फेलो, तथा टी.एस. एलियट प्राइज और अंतर्राष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए दिए जाने वाले पेन/नाबोकोव (PEN/Nabokov) अवॉर्ड दोनों की प्राप्तकर्ता हैं।
आधिकारिक सूचना: स्वीडिश अकादमी की स्थायी सचिव इनग्रिड कार्लबर्ग ने पुष्टि की कि कार्सन से आइसलैंड के रेक्याविक स्थित उनके आवास पर संपर्क किया गया, जहाँ उन्होंने अपने पति और सहयोगी रॉबर्ट करी के साथ इस निर्णय की जानकारी प्राप्त की।
नामांकन की गोपनीयता: नोबेल फाउंडेशन की संविधियों के अनुसार, स्वीडिश अकादमी के सभी विचार-विमर्श, उम्मीदवारी और आंतरिक मूल्यांकन रिपोर्ट 50 वर्षों की वैधानिक अवधि तक सार्वजनिक रूप से गोपनीय और सीलबंद रखे जाते हैं।
वैश्विक सांस्कृतिक सम्मानों को कवर करने वाले व्यापक विश्लेषणात्मक मॉड्यूल 'अथर्व एग्ज़ामवाइज़ अध्ययन सामग्री' कैटलॉग में व्यवस्थित रूप से संकलित हैं।
ऐन कार्सन का जीवन परिचय और साहित्यिक दर्शन
ऐन कार्सन का बौद्धिक सफर अकादमिक भाषाविज्ञान (philology) और रचनात्मक लेखन के एक अनूठे समन्वय को दर्शाता है। प्राचीन ग्रीक और रोमन साहित्य को ऐतिहासिक अवशेषों के रूप में देखने के बजाय, उनका कार्य शास्त्रीय ग्रंथों को ऐसे सजीव संवादों के रूप में ग्रहण करता है जो आधुनिकता की मनोवैज्ञानिक चिंताओं का विश्लेषण कर सकते हैं। उनका लेखन कथा साहित्य, गीतिकाव्य, साहित्यिक आलोचना और अनुवाद के बीच की पारंपरिक सीमाओं को समाप्त करता है। नोबेल साहित्य समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने उल्लेख किया कि कार्सन का संपूर्ण लेखन एक भाषाविद के विशिष्ट शब्दों के प्रति व्याकरणिक रुझान और एक कवि के आधुनिक दार्शनिक अर्थ की खोज के संगम पर स्थित है।
कार्सन के पूरे करियर में एक केंद्रीय सौंदर्यपरक तत्व पाठ्य विखंडन (textual fragmentation) का सचेत उपयोग रहा है। इफ नॉट, विंटर (If Not, Winter) में प्राचीन ग्रीक गीतिकाव्यकार सैफो (Sappho) की अपूर्ण कविताओं का अनुवाद करते समय, कार्सन ने खोए हुए काव्यात्मक अंशों को कृत्रिम रूप से पूर्ण वाक्यों में बदलने के बजाय उन्हें यथावत छोड़ दिया। उन्होंने क्षतिग्रस्त पेपाइरस (चर्मपत्र) ग्रंथों को टाइपोग्राफिक कोष्ठकों (brackets) के साथ प्रस्तुत किया, जिससे पाठकों को पृष्ठ पर सीधे ऐतिहासिक शून्यता और मौन का साक्षात्कार करने की प्रेरणा मिले। यह पद्धति कार्सन के इस दृष्टिकोण को दर्शाती है कि समकालीन साहित्य को बंद और पूर्व-अनुमानित कथानकों के स्थान पर दरार, अभाव और खुले स्थान को प्रतिबिंबित करना चाहिए। उनके बौद्धिक कैनवास में एशिलस, सोफोक्लीज और यूरिपिड्स जैसे शास्त्रीय नाटककारों के साथ-साथ एमिली डिकिंसन, फ्रांज काफ्का, वर्जीनिया वुल्फ, फ्रेडरिक नीत्शे और सिमोन वेल जैसी आधुनिक विभूतियाँ शामिल हैं।
प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ और योगदान
नीचे दी गई तालिका ऐन कार्सन के प्रमुख प्रकाशनों, उनके संरचनात्मक प्रारूप और अंतर्निहित विषयों को संकलित करती है:
| वर्ष | शीर्षक | विधा / माध्यम | संरचनात्मक एवं विषयगत फोकस |
|---|---|---|---|
| 1986 | एरोस द बिटरस्वीट (Eros the Bittersweet) | आलोचनात्मक निबंध / मोनोग्राफ | ग्रीक गीतिकाव्य में कामुक इच्छा, संवेदी त्रिकोणीयता और रोमांटिक तड़प के विरोधाभास का विश्लेषण करने के लिए कार्सन के डॉक्टरेट अनुसंधान को अनुकूलित करता है। |
| 1998 | ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड (Autobiography of Red) | पद्य-उपन्यास (Novel in Verse) | आधुनिक काल में प्रेम और अलगाव से जूझ रहे एक कलात्मक किशोर के रूप में हेराक्लीज़ के दसवें श्रम से लाल पंखों वाले दैत्य गेरियन (Geryon) की पुनर्कल्पना करता है। |
| 2000 | मेन इन द ऑफ आवर्स (Men in the Off Hours) | हाइब्रिड कविता एवं निबंध | कैटुलस के अनुवादों को ऑगस्टीन, वर्जीनिया वुल्फ, चित्रकला और नश्वरता पर निबंधों के साथ संयोजित करता है। |
| 2001 | द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड (The Beauty of the Husband) | पद्य आख्यान (Verse Narrative) | "29 टैंगो में एक काल्पनिक निबंध" उपशीर्षक के साथ, यह कृति एक लैटिन नृत्य के संरचनात्मक तनाव पर एक वैवाहिक संबंध के विघटन को प्रस्तुत करती है। |
| 2002 | इफ नॉट, विंटर: फ्रैग्मेंट्स ऑफ सैफो (If Not, Winter: Fragments of Sappho) | शास्त्रीय अनुवाद | सैफो के बचे हुए पेपाइरस अंशों का अनुवाद करता है, जिसमें मूल लापता हिस्सों को टाइपोग्राफिक कोष्ठकों के माध्यम से संरक्षित रखा गया है। |
| 2010 | नॉक्स (Nox) | शोकगीत आधारित कला-पुस्तक | एक बॉक्स में अकॉर्डियन की तरह मुड़े हुए स्क्रॉल के रूप में तैयार, यह कैटुलस की कविता 101, तस्वीरों और शब्दकोशीय परिभाषाओं का उपयोग कर कार्सन के दिवंगत भाई माइकल की स्मृति को समर्पित है। |
| 2016 | फ्लोट (Float) | भौतिक चैपबुक संग्रह | इसमें 22 स्वतंत्र चैपबुक शामिल हैं जिन्हें किसी भी यादृच्छिक क्रम में पढ़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो रैखिक (linear) पठन परंपरा को चुनौती देता है। |
| 2019 | नोर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय (Norma Jeane Baker of Troy) | नाटकीय रूपांतरण | युद्ध, सौंदर्य और व्यवस्थागत शोषण की पड़ताल करने के लिए यूरिपिड्स की त्रासदी हेलेन को मर्लिन मुनरो की जीवनी के साथ मिश्रित करता है। |
स्टेटिक सामान्य ज्ञान: साहित्य में नोबेल पुरस्कार
स्टेटिक सामान्य ज्ञान की व्यापक समझ के लिए साहित्य में नोबेल पुरस्कार के ऐतिहासिक, प्रक्रियात्मक और संस्थागत पहलुओं से अवगत होना आवश्यक है।
संस्थागत अधिदेश और अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत
नोबेल पुरस्कार स्वीडिश रसायनज्ञ और उद्योगपति अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की 1895 की वसीयत पर आधारित हैं, जिन्होंने 1867 में डायनामाइट का पेटेंट कराया था। मूल पाँच श्रेणियाँ—भौतिकी, रसायन विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा (Physiology or Medicine), साहित्य और शांति—पहली बार 1901 में प्रदान की गई थीं। अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में स्वेरिग्स रिक्सबैंक पुरस्कार को 1968 में शामिल किया गया और यह पहली बार 1969 में प्रदान किया गया।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज भौतिकी, रसायन विज्ञान और आर्थिक विज्ञान में पुरस्कार प्रदान करती है, तथा कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट चिकित्सा के क्षेत्र में विजेताओं का चयन करता है; वहीं साहित्य के नोबेल पुरस्कार का दायित्व स्वीडिश अकादमी के पास है। नोबेल शांति पुरस्कार इनसे भिन्न है, जिसे नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा ओस्लो में प्रदान किया जाता है।
मरणोपरांत पुरस्कार और अस्वीकृति संबंधी नियम
1974 में नोबेल फाउंडेशन की संविधियों में किए गए संशोधनों के अनुसार, नोबेल पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान नहीं किया जा सकता। इसका अपवाद केवल तभी मान्य होता है जब किसी व्यक्ति की मृत्यु आधिकारिक अक्टूबर घोषणा के बाद किंतु 10 दिसंबर के अलंकरण समारोह से पूर्व हुई हो।
ऐतिहासिक रूप से केवल दो विजेताओं ने साहित्य के नोबेल पुरस्कार को अस्वीकार किया है:
बोरिस पास्तरनाक (1958): इन्होंने आरंभ में पुरस्कार स्वीकार किया, परंतु सोवियत प्राधिकारियों के दबाव में इसे अस्वीकार करने के लिए विवश होना पड़ा।
ज्यां-पॉल सार्त्र (1964): इन्होंने अपने दार्शनिक सिद्धांतों के तहत सभी आधिकारिक व सार्वजनिक सम्मानों को स्वीकार करने से मना कर दिया था।
ऐतिहासिक उपलब्धियाँ एवं रिकॉर्ड
प्रथम विजेता: फ्रांसीसी कवि सुली प्रुधोम (Sully Prudhomme) 1901 में यह सम्मान पाने वाले प्रथम व्यक्ति थे।
सबसे युवा विजेता: ब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग को 1907 में 41 (या 42) वर्ष की आयु में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
सबसे वयोवृद्ध विजेता: ब्रिटिश-जिम्बाब्वे की उपन्यासकार डोरिस लेसिंग ने 2007 में 87 वर्ष की आयु में यह पुरस्कार जीता।
प्रथम महिला विजेता: स्वीडिश उपन्यासकार सेल्मा लेगरलोफ (Selma Lagerlöf) ने 1909 में यह पुरस्कार प्राप्त किया और कालांतर में 1914 में स्वीडिश अकादमी की पहली महिला सदस्य बनीं।
भारतीय संदर्भ: 1913 में, रवींद्रनाथ टैगोर अपने दार्शनिक काव्य संग्रह गीतांजलि (Gitanjali) के लिए साहित्य का नोबेल प्राप्त कर सभी श्रेणियों में प्रथम भारतीय और प्रथम एशियाई विजेता बने।
हाल के साहित्य पुरस्कार विजेताओं का कालक्रम (2020–2026)
| वर्ष | विजेता | देश | मुख्य विधा / अकादमी फोकस |
|---|---|---|---|
| 2026 | ऐन कार्सन | कनाडा | शास्त्रीय ग्रीक अनुवाद, हाइब्रिड कविता, और प्रयोगात्मक निबंध। |
| 2025 | लास्लो क्रास्नाहोरकाई | हंगरी | प्रलयंकारी दृष्टि, उदासी भरा कथा साहित्य, और दार्शनिक गद्य। |
| 2024 | हान कांग | दक्षिण कोरिया | ऐतिहासिक आघातों और मानवीय संवेदनशीलता को उजागर करने वाला काव्यात्मक गद्य। |
| 2023 | जॉन फॉसे | नॉर्वे | अकथनीय अनुभूतियों को वाणी देने वाले अभिनव नाटक और न्यूनतमवादी गद्य। |
| 2022 | एनी एरनॉक्स | फ्रांस | व्यक्तिगत स्मृति और सामाजिक वर्ग असमानताओं को अनावृत करने वाला ऑटोफिक्शन। |
| 2021 | अब्दुलराजाक गुरनाह | तंजानिया / यूके | विस्थापन, निर्वासन और उपनिवेशवाद के प्रभावों की पड़ताल करने वाला उत्तर-औपनिवेशिक साहित्य। |
| 2020 | लुईस ग्लिक | संयुक्त राज्य अमेरिका | व्यक्तिगत दुख को सार्वभौमिक रूप देने वाली स्पष्ट गीतात्मक कविता। |
यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
साहित्य के नोबेल पुरस्कार की घोषणा UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE), राज्य लोक सेवा आयोगों (जैसे MPPSC, UPPSC, BPSC, RAS) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के कई विषयों से सीधे जुड़ती है:
1. UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पेपर I)
प्रारंभिक परीक्षा में अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, वैश्विक पुरस्कारों और सांस्कृतिक घटनाक्रमों से संबंधित प्रश्न संस्थागत स्पष्टता का परीक्षण करते हैं। अभ्यर्थियों को स्वीडिश अकादमी और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के क्षेत्राधिकार के अंतर को समझना चाहिए। प्रश्न अक्सर पुरस्कार की वैधानिक शर्तों, मरणोपरांत नियमों और ऐतिहासिक तथ्यों (जैसे रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में प्राप्त सम्मान) पर आधारित होते हैं।
2. UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (GS-I और निबंध पेपर)
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I (भारतीय संस्कृति और विश्व धरोहर) के संदर्भ में कार्सन की कृतियाँ यह दर्शाती हैं कि किस प्रकार शास्त्रीय भाषाएँ और प्राचीन मौखिक परंपराएँ आधुनिक अनुवादों और मिश्रित साहित्यिक रूपों के माध्यम से प्रासंगिक बनी रहती हैं। यह विषय इस बात का तुलनात्मक आधार प्रस्तुत करता है कि वैदिक ऋचाएँ, संगम साहित्य और संस्कृत नाटक जैसी प्राचीन भारतीय परंपराएँ समकालीन कलात्मक विधाओं को कैसे प्रभावित करती हैं।
इसके अलावा, कार्सन की यह टिप्पणी कि आधुनिक पाठक कविता की ओर इसलिए आकर्षित होते हैं क्योंकि "यह संक्षिप्त होती है" और ऐसी संस्कृति के अनुकूल है जहाँ "हर कोई जल्दबाजी में है", मुख्य परीक्षा के निबंध पत्र के लिए एक उपयोगी विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है। इसका उपयोग आधुनिक उपभोग संस्कृति, गहन चिंतन में कमी और त्वरित डिजिटल संचार के बौद्धिक विमर्श पर पड़ने वाले प्रभावों के विश्लेषण में किया जा सकता है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग (MPPSC, UPPSC, BPSC)
राज्य स्तरीय परीक्षाओं में प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों पर सीधे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। अभ्यर्थियों को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए:
विजेता का देश (कनाडा)।
कार्सन की प्रसिद्ध कृतियाँ, जैसे ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड और एरोस द बिटरस्वीट।
हाल के विजेताओं का क्रम (जैसे 2024 में हान कांग और 2025 में लास्लो क्रास्नाहोरकाई)।
राज्य परीक्षाओं के अभ्यर्थी अथर्व एग्ज़ामवाइज़ MPPSC फाउंडेशन बैच के माध्यम से संरचित अध्ययन सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।
अभ्यर्थियों के लिए अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (वस्तुनिष्ठ)
प्रश्न. साहित्य में नोबेल पुरस्कार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
साहित्य में नोबेल पुरस्कार 'रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज' द्वारा प्रदान किया जाता है।
नोबेल फाउंडेशन की वर्तमान संविधियों के तहत, किसी भी व्यक्ति को मरणोपरांत यह पुरस्कार नहीं दिया जा सकता, जब तक कि उसकी मृत्यु आधिकारिक घोषणा के उपरांत न हुई हो।
ऐन कार्सन साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली कनाडाई महिला हैं।
रवींद्रनाथ टैगोर किसी भी नोबेल श्रेणी में पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई व्यक्ति थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 4
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: साहित्य का नोबेल पुरस्कार 'स्वीडिश अकादमी' द्वारा प्रदान किया जाता है, जबकि रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज भौतिकी, रसायन विज्ञान और अर्थशास्त्र के पुरस्कारों का चयन करती है।
कथन 2 सही है: 1974 के संविधि संशोधनों के अनुसार मरणोपरांत नामांकन प्रतिबंधित है; केवल घोषणा और पुरस्कार समारोह के बीच मृत्यु होने की स्थिति में ही यह मान्य होता है।
कथन 3 गलत है: कनाडाई लेखिका एलिस मुनरो ने 2013 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीता था, अतः ऐन कार्सन यह पुरस्कार पाने वाली दूसरी कनाडाई महिला हैं।
कथन 4 सही है: 1913 में रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल दिया गया था, जिससे वे किसी भी श्रेणी में नोबेल पुरस्कार पाने वाले प्रथम एशियाई बने।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (वर्णनात्मक)
"शास्त्रीय साहित्य केवल पुरातन काल का अवशेष नहीं है; यह एक ऐसा संरचनात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है जिसके माध्यम से आधुनिक मानवीय जीवन की खंडित वास्तविकताओं का विश्लेषण किया जा सकता है।" शास्त्रीय अनुवादों और आधुनिक साहित्यिक रूपांतरणों की भूमिका के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।