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यूपीएससी करेंट अफेयर्स 5 अक्टूबर 2026: आईयूसीएन (IUCN) संरचना, रेड लिस्ट फ्रेमवर्क और वैश्विक संरक्षण शासन | अथर्व एग्जामवाइज़ डेली जीके अपडेट यूपीएससी करेंट अफेयर्स 5 अक्टूबर 2026: आईयूसीएन (IUCN) संरचना, रेड लिस्ट फ्रेमवर्क और वैश्विक संरक्षण शासन | अथर्व एग्जामवाइज़ डेली जीके अपडेट

05 Oct 2026 05 Oct 2026

यूपीएससी करेंट अफेयर्स 5 अक्टूबर 2026: आईयूसीएन (IUCN) संरचना, रेड लिस्ट फ्रेमवर्क और वैश्विक संरक्षण शासन | अथर्व एग्जामवाइज़ डेली जीके अपडेट
International organization Hindi 05 Oct 2026

यूपीएससी करेंट अफेयर्स 5 अक्टूबर 2026: आईयूसीएन (IUCN) संरचना, रेड लिस्ट फ्रेमवर्क और वैश्विक संरक्षण शासन | अथर्व एग्जामवाइज़ डेली जीके अपडेट

आधुनिक वैश्विक पर्यावरण शासन की संरचना अंतरराष्ट्रीय संधियों, बहुपक्षीय सम्मेलनों और वैज्ञानिक प्राधिकरणों पर आधारित है, जो संप्रभु राष्ट्रों की नीतियों और कार्रवाइयों को दिशा प्रदान करते हैं। इस संस्थागत व्यवस्था के केंद्र में प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (International Union for Conservation of Nature - IUCN) स्थित है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत स्थापित पारंपरिक अंतर-सरकारी निकायों के विपरीत, आईयूसीएन एक विशिष्ट 'हाइब्रिड' (मिश्रित) संस्था है, जो संप्रभु राष्ट्रों, सरकारी एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों और वैज्ञानिक आयोगों को एक एकल परामर्शी ढांचे में समाहित करती है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा, राज्य लोक सेवा आयोग (State PSCs) और अन्य संबद्ध प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए आईयूसीएन की कार्यप्रणाली, वर्गीकरण मानदंड और इसके मानक अधिकार को समझना अनिवार्य है। पर्यावरणीय क्षरण, जलवायु-प्रेरित जैव विविधता की हानि और प्राकृतिक आवासों के विखंडन के इस दौर में, आईयूसीएन द्वारा संचालित वैज्ञानिक उपकरण—विशेष रूप से संकटापन्न प्रजातियों की 'आईयूसीएन रेड लिस्ट' (IUCN Red List)—घरेलू संरक्षण कानूनों, बहुपक्षीय वार्ताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के लिए प्राथमिक संदर्भ का कार्य करते हैं। व्यापक दैनिक अध्ययन के लिए अभ्यर्थी 'अथर्व एग्जामवाइज़ डेली करेंट अफेयर्स' संग्रह से स्थैतिक और समसामयिक विषयों का एकीकृत विश्लेषण प्राप्त कर सकते हैं।

ऐतिहासिक उत्पत्ति: फॉन्टेनब्लू से वैश्विक संरक्षण शासन तक

प्रकृति संरक्षण के संस्थागत स्वरूप की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के भू-राजनीतिक और पारिस्थितिक दुष्प्रभावों के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में हुई। युद्ध के बाद का अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विमर्श मुख्य रूप से औद्योगिक पुनर्निर्माण, ब्रेटन वुड्स संस्थानों की स्थापना और आर्थिक स्थिरता पर केंद्रित था; किंतु इसी के समानांतर एक आंदोलन ने उस गंभीर पारिस्थितिक विनाश को रेखांकित किया जो व्यापक युद्ध और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन से उत्पन्न हुआ था।

प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा के लिए समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के निर्माण की पहल संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा की गई, जिसका नेतृत्व इसके प्रथम महानिदेशक और प्रख्यात विकासवादी जीवविज्ञानी सर जूलियन हक्सले ने किया। फ्रांस सरकार और 'लिग सुइस पौर ला प्रोटेक्शन डे ला नेचर' (Ligue Suisse pour la Protection de la Nature) के घनिष्ठ सहयोग से 30 सितंबर से 7 अक्टूबर 1948 तक पेरिस से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित ऐतिहासिक 'शातो द फॉन्टेनब्लू' (Château de Fontainebleau) में एक अंतरराष्ट्रीय संस्थापक सम्मेलन आयोजित किया गया।

इस स्थल का चयन ऐतिहासिक और पारिस्थितिक दोनों दृष्टियों से प्रतीकात्मक था: यह शातो (महल) फॉन्टेनब्लू के प्राचीन वन से घिरा हुआ है, जो कभी शाही शिकारगाह था और बाद में आधुनिक यूरोपीय वानिकी तथा परिदृश्य संरक्षण का उद्गम स्थल बना (जिसे बाद में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी प्राप्त हुआ)। 5 अक्टूबर 1948 को अठारह संप्रभु सरकारों, सात अंतरराष्ट्रीय निकायों और सौ से अधिक राष्ट्रीय संरक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने संस्थापक चार्टर को अनुमोदित किया, जिसके परिणामस्वरूप 'इंटरनेशनल यूनियन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ नेचर' (IUPN) का गठन हुआ।

IUPN से इसके वर्तमान नाम में परिवर्तन 1956 में एडिनबर्ग (स्कॉटलैंड) में आयोजित महासभा में हुआ। सदस्य महासभा ने इसका नाम बदलकर 'इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज' (IUCN) कर दिया। नाम का यह बदलाव एक महत्वपूर्ण वैचारिक परिवर्तन को दर्शाता था: प्रारंभिक दौर का संरक्षण कार्य 'कठोर परिरक्षणवाद' (Strict Preservationism) से प्रेरित था—यह एक ऐसा बहिष्करणकारी दृष्टिकोण था जो प्राचीन प्राकृतिक क्षेत्रों को मानवीय संपर्क से पूरी तरह अलग रखने का पक्षधर था। 1956 के संशोधन ने आधुनिक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा को संस्थागत रूप दिया, जिसमें यह स्वीकार किया गया कि जैविक अखंडता की रक्षा के लिए प्राकृतिक संसाधनों का पारिस्थितिक रूप से सतत प्रबंधन और विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है, ताकि दीर्घकालिक मानव अस्तित्व और सामाजिक-आर्थिक सुदृढ़ता सुनिश्चित की जा सके।

संस्थागत वास्तुकला और हाइब्रिड शासन ढांचा

यूपीएससी करेंट अफेयर्स की तैयारी में एक निरंतर चुनौती बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों के परिदृश्य में आईयूसीएन की सटीक कानूनी स्थिति को स्पष्ट रूप से समझना है। संघ की संरचनात्मक विशेषताएं इसे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की मानक विशिष्ट एजेंसियों से स्पष्ट रूप से अलग करती हैं।

कानूनी स्थिति और मुख्यालय

ग्लैंड (स्विट्जरलैंड) में मुख्यालय वाला आईयूसीएन एक स्वायत्त अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में कार्य करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रायः यह भ्रम उत्पन्न होता है—जैसा कि यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के पूर्व प्रश्नों में भी देखा गया है—कि क्या आईयूसीएन संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी या सहायक अंग है। वस्तुतः आईयूसीएन न तो संयुक्त राष्ट्र की कोई औपचारिक एजेंसी है और न ही किसी संधि-आधारित संयुक्त राष्ट्र सचिवालय का हिस्सा। इसके बजाय, यह एक स्वतंत्र सदस्यता संघ है जिसे 1999 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के प्रस्ताव 54/195 के तहत संयुक्त राष्ट्र महासभा में आधिकारिक 'स्थायी पर्यवेक्षक का दर्जा' (Permanent Observer Status) प्रदान किया गया था। यह दर्जा संघ को संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण सत्र में संप्रभु मतदान अधिकार रखे बिना वैज्ञानिक सलाह देने, प्रस्ताव प्रायोजित करने और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण वार्ताओं में सीधे भाग लेने की अनुमति देता है।

हाइब्रिड सदस्यता संरचना

आईयूसीएन की सबसे विशिष्ट परिचालन विशेषता इसका हाइब्रिड सदस्यता आधार है। इस संघ में 160 से अधिक देशों के 1,400 से अधिक सदस्य संगठन शामिल हैं। इसकी मतदान सदस्यता दो प्राथमिक सदनों में विभाजित है:

सरकारी सदन (Government House): इसमें संप्रभु राज्य सदस्य (State Members) और सरकारी एजेंसियां शामिल हैं, जैसे राष्ट्रीय पर्यावरण मंत्रालय और प्रांतीय वन विभाग।

गैर-सरकारी सदन (Non-Government House): इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन (NGOs), नागरिक समाज निकाय और स्वदेशी जन संगठन (Indigenous Peoples' Organizations - IPOs) शामिल हैं।

यह द्विस्तरीय मॉडल 'विश्व संरक्षण कांग्रेस' (World Conservation Congress)—जो कि आईयूसीएन का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है और प्रत्येक चार वर्ष में एक बार आयोजित होता है—में अपनाए गए निर्णयों को सामूहिक नैतिक और वैज्ञानिक वैधता प्रदान करता है, जिससे राज्य की नीतियों और जमीनी पारिस्थितिक कार्यों के बीच सीधा समन्वय स्थापित होता है।

छह विशेषज्ञ आयोग

आईयूसीएन का मुख्य वैज्ञानिक अनुसंधान और मानक-निर्धारण कार्य इसके छह प्रमुख विशेषज्ञ आयोगों द्वारा संचालित होता है, जो विश्व भर के हजारों स्वयंसेवी वैज्ञानिकों, कानूनी विद्वानों और व्यावहारिक विशेषज्ञों को एकजुट करते हैं:

प्रजाति उत्तरजीविता आयोग (Species Survival Commission - SSC): वैश्विक वनस्पतियों, जीवों और कवकों की स्थिति तथा उन पर मंडराते खतरों का आकलन करने के लिए समर्पित। एसएससी में विशेष वर्गीकरण इकाइयां शामिल हैं, जिनमें 'आक्रामक प्रजाति विशेषज्ञ समूह' (Invasive Species Specialist Group - ISSG) प्रमुख है, जो 'ग्लोबल इनवेसिव स्पीशीज डेटाबेस' (GISD) का संचालन और रखरखाव करता है (यह डेटाबेस यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सीधे पूछा जा चुका है)।

संरक्षित क्षेत्र विश्व आयोग (World Commission on Protected Areas - WCPA): स्थलीय, मीठे पानी और समुद्री संरक्षित क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक दिशा-निर्देश, वर्गीकरण और सर्वोत्तम प्रथाएं विकसित करता है तथा स्थानिक संरक्षण के लिए वैश्विक मानक तय करता है।

पर्यावरण विधि विश्व आयोग (World Commission on Environmental Law - WCEL): कानूनी सिद्धांतों, वैधानिक रूपरेखाओं और अंतरराष्ट्रीय अनुपालन तंत्रों को मजबूत करने पर केंद्रित है, जो वैश्विक पर्यावरण संधियों का आधार हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन आयोग (Commission on Ecosystem Management - CEM): पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन, भू-परिदृश्य पुनर्स्थापन और 'पारिस्थितिकी तंत्रों की लाल सूची' (Red List of Ecosystems - RLE) के मानदंडों को आगे बढ़ाता है।

शिक्षा एवं संचार आयोग (Commission on Education and Communication - CEC): वैश्विक स्तर पर व्यावहारिक विज्ञान, शैक्षिक पहलों और पारिस्थितिक साक्षरता अभियानों का मार्गदर्शन करता है।

पर्यावरण, आर्थिक एवं सामाजिक नीति आयोग (Commission on Environmental, Economic and Social Policy - CEESP): पारिस्थितिक स्थिरता, स्वदेशी भूमि अधिकार, मानवाधिकार और वैश्विक व्यापक आर्थिक नीतियों के अंतर्संबंधों का विश्लेषण करता है।

प्रमुख तथ्य और परीक्षा-उपयोगी डेटा

अथर्व एग्जामवाइज़ करेंट अफेयर्स मॉड्यूल्स के त्वरित और संरचित पुनरीक्षण के लिए मुख्य संस्थागत तथ्य नीचे दिए गए हैं:

स्थापना तिथि: 5 अक्टूबर 1948 को फ्रांस के शातो द फॉन्टेनब्लू में 'इंटरनेशनल यूनियन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ नेचर' (IUPN) के रूप में।

नाम परिवर्तन: प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की अवधारणा को समाहित करने हेतु 1956 में बदलकर 'इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज' (IUCN) किया गया।

मुख्यालय: ग्लैंड, वॉ canton, स्विट्जरलैंड।

संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध: संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्थायी पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त (1999 से); यह संयुक्त राष्ट्र की कोई विशिष्ट एजेंसी या सहायक निकाय नहीं है।

सर्वोच्च निर्णय लेने वाला अंग: विश्व संरक्षण कांग्रेस (World Conservation Congress), जो सदस्य संगठनों द्वारा प्रत्येक चार वर्ष में आयोजित की जाती है।

प्रमुख सहायक तकनीकी समूह: आक्रामक प्रजाति विशेषज्ञ समूह (ISSG), जो प्रजाति उत्तरजीविता आयोग के अधीन 'ग्लोबल इनवेसिव स्पीशीज डेटाबेस' (GISD) का संचालन करता है।

वैश्विक सलाहकार अधिदेश: 1972 के विश्व धरोहर सम्मेलन के तहत यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के लिए प्राकृतिक विरासत पर आधिकारिक वैधानिक सलाहकार निकाय।

भारतीय सदस्यता: भारत 1969 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के माध्यम से इसका आधिकारिक राज्य सदस्य बना।

आईयूसीएन वैज्ञानिक उपकरण: रेड लिस्ट फ्रेमवर्क और संरक्षित क्षेत्र मानक

आईयूसीएन कोई कानून लागू करने वाली एजेंसी (Enforcement Agency) नहीं है; यह किसी सशस्त्र बल की तैनाती नहीं करता, घरेलू कानून नहीं बनाता और न ही अवैध वन्यजीव सामग्री को जब्त करता है। इसके बजाय, इसका वैश्विक प्रभाव वैज्ञानिक प्रमाणों के संश्लेषण, प्रामाणिक डेटा और सहकर्मी-समीक्षित (peer-reviewed) संरक्षण उपकरणों से उत्पन्न होता है जिन्हें बहुपक्षीय सम्मेलनों में व्यापक मान्यता प्राप्त है।

संकटापन्न प्रजातियों की आईयूसीएन रेड लिस्ट

1964 में स्थापित 'आईयूसीएन रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेंड स्पीशीज' को वैश्विक स्तर पर प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम को मापने वाले वस्तुनिष्ठ मानक के रूप में मान्यता प्राप्त है। रेड लिस्ट प्रणाली के तहत प्रजातियों का मूल्यांकन पांच मात्रात्मक वैज्ञानिक मानदंडों के आधार पर किया जाता है:

मानदंड A: 10 वर्षों या तीन पीढ़ियों में जनसंख्या में कमी की दर।

मानदंड B: भौगोलिक वितरण क्षेत्र का आकार, साथ ही विखंडन, गिरावट या अत्यधिक उतार-चढ़ाव।

मानदंड C: जनसंख्या का अत्यंत छोटा आकार और उसमें निरंतर गिरावट।

मानदंड D: अत्यंत सीमित जनसंख्या आकार या अत्यधिक संकुचित वितरण।

मानदंड E: जंगली अवस्था में प्रजाति के विलुप्त होने की संभावना का मात्रात्मक विश्लेषण (उदा. जनसंख्या व्यवहार्यता विश्लेषण)।

इन वैज्ञानिक मापदंडों के आधार पर प्रजातियों को नौ मानकीकृत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

आईयूसीएन रेड लिस्ट श्रेणीमानक परिभाषा और मूल्यांकन पैरामीटरउल्लेखनीय भारतीय पारिस्थितिक उदाहरण
विलुप्त (Extinct - EX)सभी ज्ञात और संभावित ऐतिहासिक आवासों में विस्तृत सर्वेक्षण के बाद अंतिम व्यष्टि (जीव) की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी हो।एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus) 1952 में भारत से विलुप्त घोषित; गुलाबी सिर वाली बत्तख (Rhodonessa caryophyllacea)।
वनों में विलुप्त (Extinct in the Wild - EW)केवल बाड़े/चिड़ियाघर में, मानव देखरेख में, या अपने ऐतिहासिक क्षेत्र से बाहर प्राकृतिक रूप से स्थापित आबादी के रूप में जीवित।हवाईयन क्रो (Corvus hawaiiensis); कुछ विशिष्ट पादप प्रजातियों की ऐतिहासिक स्थितियां।
गंभीर रूप से संकटापन्न (Critically Endangered - CR)मात्रात्मक जनसंख्या पतन या अत्यधिक भौगोलिक सीमा के कारण जंगली अवस्था में अत्यंत उच्च और आसन्न विलुप्ति जोखिम का सामना कर रही प्रजाति।ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps), घड़ियाल (Gavialis gangeticus), हंगुल या कश्मीरी बारहसिंगा (Cervus hanglu hanglu)।
संकटापन्न (Endangered - EN)तीव्र जनसंख्या गिरावट या प्राकृतिक आवास के भारी संकुचन के कारण वनों में विलुप्त होने का उच्च जोखिम।एशियाई हाथी (Elephas maximus), सिंह-पुच्छ मकाक (Macaca silenus), एशियाई शेर (Panthera leo leo), गंगा डॉल्फिन (Platanista gangetica)।
संवेदनशील / असुरक्षित (Vulnerable - VU)जनसंख्या में निरंतर कमी या सीमित क्षेत्र के कारण मध्यम अवधि में वनों में संकटापन्न होने का उच्च जोखिम।एक सींग वाला गैंडा (Rhinoceros unicornis), हिम तेंदुआ (Panthera uncia), ऑलिव रिडले समुद्री कछुआ (Lepidochelys olivacea)।
संकट-निकट (Near Threatened - NT)वर्तमान में संकटग्रस्त श्रेणियों के मानदंडों को पूरा नहीं करती, लेकिन निकट भविष्य में इसके संकटापन्न होने की पूरी संभावना है।काला हिरण / ब्लैकबक (Antilope cervicapra), हिमालयी मोनाल (Lophophorus impejanus), भारतीय तेंदुआ (Panthera pardus fusca)।
संकटमुक्त / कम चिंतनीय (Least Concern - LC)सभी मानदंडों के विरुद्ध मूल्यांकित, किंतु किसी भी संकटग्रस्त स्थिति के योग्य नहीं; व्यापक रूप से वितरित और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध।भारतीय मोर (Pavo cristatus), रीसस मकाक बंदर (Macaca mulatta), सामान्य मैना (Acridotheres tristis)।
डेटा अपर्याप्त (Data Deficient - DD)प्रजाति के वितरण, प्रचुरता या विशिष्ट खतरों के बारे में पर्याप्त आधारभूत जानकारी का अभाव, जिससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जोखिम का मूल्यांकन संभव न हो।कुछ भूमिगत उभयचर, गहरे समुद्र के अकशेरुकी जीव, और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह की कुछ स्थानिक वनस्पतियां।
मूल्यांकन नहीं हुआ (Not Evaluated - NE)जिन टैक्सा का अभी तक मात्रात्मक रेड लिस्ट मानदंडों के तहत मूल्यांकन नहीं किया गया है।सूक्ष्मजीवी, कवक और कीट वर्ग की विशाल प्रजातियां जिनका व्यवस्थित टैक्सोनोमिक विवरण और सर्वेक्षण अभी लंबित है।

पर्यावरण न्यायशास्त्र और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयुक्त औपचारिक शब्दावली "संकटग्रस्त प्रजातियां" (Threatened Species) मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के समूह को संदर्भित करती है: गंभीर रूप से संकटापन्न (CR), संकटापन्न (EN), और संवेदनशील (VU)।

संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन श्रेणियां और सलाहकार भूमिकाएं

आईयूसीएन के संरक्षित क्षेत्र विश्व आयोग (WCPA) ने प्रबंधन उद्देश्यों के आधार पर संरक्षित क्षेत्रों को छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:

श्रेणी Ia और Ib: सख्त प्रकृति रिजर्व (Strict Nature Reserve) और जंगल क्षेत्र (Wilderness Area) - मुख्य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान या प्राकृतिक जंगल संरक्षण हेतु।

श्रेणी II: राष्ट्रीय उद्यान (National Park) - पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा, शैक्षिक और मनोरंजक गतिविधियों हेतु निर्धारित बड़े प्राकृतिक क्षेत्र।

श्रेणी III: प्राकृतिक स्मारक या विशेषता (Natural Monument or Feature) - किसी विशिष्ट प्राकृतिक स्मारक, भू-आकृति या भूवैज्ञानिक संरचना के संरक्षण हेतु।

श्रेणी IV: पर्यावास/प्रजाति प्रबंधन क्षेत्र (Habitat/Species Management Area) - सक्रिय संरक्षण हस्तक्षेपों और प्रजाति-विशिष्ट आवास प्रबंधन के माध्यम से संचालित क्षेत्र।

श्रेणी V: संरक्षित भू-दृश्य/समुद्री-दृश्य (Protected Landscape/Seascape) - पारंपरिक, सामंजस्यपूर्ण मानव-प्रकृति अंतःक्रिया द्वारा निर्मित परिदृश्य।

श्रेणी VI: प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग वाला संरक्षित क्षेत्र (Protected Area with Sustainable Use of Natural Resources) - मुख्य रूप से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र जहां जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का सतत दोहन किया जाता है।

यूनेस्को द्वारा प्रशासित 1972 के विश्व धरोहर सम्मेलन के तहत, आईयूसीएन को यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र के लिए प्राकृतिक विरासत पर आधिकारिक वैधानिक सलाहकार निकाय के रूप में नामित किया गया है। इस रूप में, आईयूसीएन विश्व धरोहर सूची के लिए नामांकित सभी प्राकृतिक और मिश्रित स्थलों का मूल्यांकन करता है, सूचीबद्ध स्थलों के संरक्षण की स्थिति की निगरानी करता है, और पारिस्थितिक संकट का सामना कर रहे स्थलों के संदर्भ में सुझाव देता है।

आईयूसीएन के साथ भारत का रणनीतिक समन्वय

भारत के पारिस्थितिक परिदृश्य में चार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट शामिल हैं: हिमालय, पश्चिमी घाट, भारत-बर्मा क्षेत्र और सुंदरलैंड (जिसमें निकोबार द्वीप समूह शामिल है)। इसलिए, आईयूसीएन के साथ भारत का जुड़ाव राष्ट्रीय संरक्षण नीतियों और वैश्विक पर्यावरण लक्ष्यों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

वर्ष / मील का पत्थररणनीतिक महत्व और संस्थागत तंत्र
1969: राज्य सदस्यताभारत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के माध्यम से आईयूसीएन का आधिकारिक राज्य सदस्य बना।
2001: आईएनसी को मान्यताभारतीय राष्ट्रीय समिति (INC-IUCN) का औपचारिक गठन, जिसका संचालन और समन्वय भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून द्वारा किया जाता है।
2007: देश कार्यालय की स्थापनासंरक्षण परियोजनाओं के बेहतर समन्वय के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते के तहत नई दिल्ली में आईयूसीएन इंडिया कंट्री ऑफिस की शुरुआत।
2008: एशियाई शेर का पुनर्वर्गीकरणगिर वन पारिस्थितिकी तंत्र में स्वस्थ स्व-स्थाने (in-situ) संरक्षण उपलब्धियों को मान्यता देते हुए एशियाई शेर को 'गंभीर रूप से संकटापन्न' (CR) से अपग्रेड कर 'संकटापन्न' (EN) श्रेणी में रखा गया।
2022–वर्तमान: लक्ष्य 3 (30x30) का क्रियान्वयनकुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के साथ मिलकर 'अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपाय' (OECMs) की पहचान हेतु तकनीकी सहयोग।

घरेलू कानूनों और संरक्षण नीतियों के साथ तालमेल

आईयूसीएन द्वारा स्थापित वैज्ञानिक वर्गीकरण सीधे भारतीय घरेलू कानूनों, विशेषकर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के साथ जुड़ते हैं:

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में मूल रूप से छह अनुसूचियां थीं, जिन्हें वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 के तहत चार अनुसूचियों में युक्तिसंगत बनाया गया। यद्यपि अनुसूची I अधिकतम दंड के साथ पूर्ण वैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है, इसकी प्रजातियों की सूची काफी हद तक आईयूसीएन और इसके विशेषज्ञ समूहों द्वारा प्रमाणित खतरे के आकलनों पर निर्भर करती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण गिर परिदृश्य में एशियाई शेर (Panthera leo leo) का संरक्षण है; जहां बेहतर पर्यावास प्रबंधन, शिकार की उपलब्धता बढ़ाने और पशु-चिकित्सा निगरानी के दम पर आईयूसीएन ने इसे 'गंभीर रूप से संकटापन्न' से 'संकटापन्न' में पुनर्वर्गीकृत किया।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के साथ मिलकर आईयूसीएन के मानकों का उपयोग भारत के 54 से अधिक टाइगर रिजर्व में 'प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन' (Management Effectiveness Evaluation - MEE) ढांचे में किया जाता है।

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के लक्ष्य 3 के तहत (जिसका उद्देश्य 2030 तक कम से कम 30% निम्नीकृत स्थलीय, अंतर्देशीय जल और तटीय पारिस्थितिक तंत्रों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करना है), भारत आईयूसीएन के सहयोग से अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (OECMs) को अधिसूचित कर रहा है। इसमें सामुदायिक संरक्षित आर्द्रभूमियां, पवित्र उपवन (Sacred Groves) और अरावली जैव विविधता पार्क जैसे शहरी जैव विविधता क्षेत्र शामिल हैं, जो पारंपरिक राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों से परे स्थानिक संरक्षण का विस्तार करते हैं।

तुलनात्मक मैट्रिक्स: आईयूसीएन बनाम प्रमुख बहुपक्षीय पर्यावरण समझौते

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर आईयूसीएन के कानूनी अधिदेश, प्रवर्तन शक्तियों और प्रशासनिक संरचना को संधि-आधारित निकायों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ मिलाकर गलतियां की जाती हैं। निम्नलिखित तालिका प्रमुख अंतरों को स्पष्ट करती है:

पैरामीटरप्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN)लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES)संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)जैव विविधता सम्मेलन (CBD)
स्थापना एवं कानूनी प्रकृति1948 में स्थापित; स्वतंत्र नागरिक समाज और सरकारों का हाइब्रिड सदस्यता संघ।1973 में मसौदा तैयार (1975 में प्रभावी); कानूनी रूप से बाध्यकारी बहुपक्षीय पर्यावरण संधि।1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद स्थापित; संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक कार्यक्रम (Organic Programme)।1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में स्वीकृत; कानूनी रूप से बाध्यकारी बहुपक्षीय रूपरेखा सम्मेलन।
मुख्यालयग्लैंड, स्विट्जरलैंड।जिनेवा, स्विट्जरलैंड (सचिवालय UNEP द्वारा प्रशासित)।नैरोबी, केन्या।मॉन्ट्रियल, कनाडा।
सदस्यता संरचनाहाइब्रिड: संप्रभु राष्ट्र, उप-राष्ट्रीय मंत्रालय, एनजीओ और स्वदेशी समूह।केवल संप्रभु राष्ट्र और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण संगठन (पक्षकार)।संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश।संप्रभु राष्ट्र और क्षेत्रीय आर्थिक निकाय (196 पक्षकार)।
नियामक अधिकारगैर-बाध्यकारी; वैज्ञानिक डेटा, रेड लिस्ट और तकनीकी दिशानिर्देशों के माध्यम से नैतिक व मानक प्रभाव।पक्षकारों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी; घरेलू कानून और व्यापार परमिट अनिवार्य।गैर-बाध्यकारी; वैश्विक पर्यावरण एजेंडा तय करता है और संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण कार्रवाइयों का समन्वय करता है।कानूनी रूप से बाध्यकारी दायित्व, जिन्हें राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजनाओं (NBSAPs) के माध्यम से लागू किया जाता है।
मुख्य वैज्ञानिक उपकरणआईयूसीएन रेड लिस्ट, संरक्षित क्षेत्रों की ग्रीन लिस्ट, पारिस्थितिकी तंत्रों की रेड लिस्ट।परिशिष्ट I, II और III (अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक वन्यजीव व्यापार का नियमन)।ग्लोबल एनवायरनमेंट आउटलुक (GEO), एमिशन गैप रिपोर्ट, ग्लोबल रिसोर्सेज आउटलुक।कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (KMGBF), क्लियरिंग-हाउस मैकेनिज्म।

यह आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

आईयूसीएन के संरचनात्मक, विनियामक और ऐतिहासिक आयाम यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और राज्य पीएससी के प्रारंभिक तथा मुख्य दोनों चरणों में बार-बार पूछे जाते हैं।

प्रत्यक्ष पाठ्यक्रम संरेखण

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I): पर्यावरण पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन से संबंधित सामान्य मुद्दे - जिनमें विषय विशेषज्ञता आवश्यक नहीं है।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II): महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएं और मंच - उनकी संरचना, अधिदेश।

प्रारंभिक परीक्षा के प्रमुख जाल (Critical Traps to Avoid)

संयुक्त राष्ट्र अंग का भ्रम: प्रश्नों में प्रायः यह कथन दिया जाता है कि आईयूसीएन संयुक्त राष्ट्र का एक विशिष्ट अंग या सहायक निकाय है। जैसा कि यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2015 में पूछा गया था, यह कथन गलत है। आईयूसीएन एक स्वतंत्र, हाइब्रिड अंतरराष्ट्रीय संघ है जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

प्रवर्तन अधिकार का भ्रम: भ्रामक विकल्पों में अक्सर दावा किया जाता है कि आईयूसीएन के पास राष्ट्रीय उद्यानों पर प्रत्यक्ष प्रवर्तन या पुलिसिंग का अधिकार है। वस्तुतः आईयूसीएन केवल वैज्ञानिक डेटा, जोखिम सूचकांक और सलाहकार मानक तैयार करता है; जमीनी स्तर पर कानून लागू करना संप्रभु राष्ट्रों (जैसे भारत का वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972) का कार्य है।

रेड डेटा बुक का दायरा: जैसा कि यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2011 में देखा गया था, यह दावा गलत है कि रेड डेटा बुक में केवल जैव विविधता हॉटस्पॉट में पाई जाने वाली स्थानिक प्रजातियां शामिल होती हैं या यह केवल संरक्षित क्षेत्रों को सूचीबद्ध करती है। रेड लिस्ट वैश्विक स्तर पर सभी प्रजातियों का मूल्यांकन करती है, चाहे वे संरक्षित क्षेत्रों में हों या बाहर।

विशेषज्ञ समूहों की संबद्धता: विशिष्ट संस्थागत समूहों पर आधारित प्रश्न—जैसे 2023 की प्रारंभिक परीक्षा में 'आक्रामक प्रजाति विशेषज्ञ समूह' (ISSG) और 'ग्लोबल इनवेसिव स्पीशीज डेटाबेस' (GISD) पर पूछा गया प्रश्न—आईयूसीएन के प्रजाति उत्तरजीविता आयोग की सटीक जानकारी का परीक्षण करते हैं।

मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन के आयाम

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III में जैव विविधता हानि, पर्यावरण शासन और अंतरराष्ट्रीय संधियों से संबंधित प्रश्नों में आईयूसीएन का उल्लेख उत्तर को अधिक प्रामाणिक बनाता है:

विज्ञान-नीति समन्वय (Science-Policy Interface): आईयूसीएन के उदाहरण से स्पष्ट करें कि कैसे गैर-सरकारी वैज्ञानिक प्रमाण बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधियों को आकार देते हैं (उदा. रेड लिस्ट कैसे CITES व्यापार प्रतिबंधों और CBD के राष्ट्रीय लक्ष्यों को दिशा देती है)।

समावेशी संरक्षण (Inclusive Conservation): अपनी मतदान सदस्यता में स्वदेशी जन संगठनों (IPOs) को शामिल करने के आईयूसीएन के मॉडल का उपयोग यह दर्शाने के लिए करें कि कैसे भारत के वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के तहत समुदाय-आधारित अधिकारों और राज्य-संचालित संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

लक्ष्य 3 (30x30) का क्रियान्वयन: पारंपरिक राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के बाहर पारिस्थितिक गलियारों के विस्तार में भारत के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते समय आईयूसीएन के OECMs मानकों का उल्लेख करें।

उच्च प्रतिफल परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. अंतरराष्ट्रीय संरक्षण रूपरेखाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है जिसे स्टॉकहोम सम्मेलन द्वारा स्थापित किया गया था।

आक्रामक प्रजाति विशेषज्ञ समूह (ISSG), जो ग्लोबल इनवेसिव स्पीशीज डेटाबेस का संचालन करता है, आईयूसीएन के प्रजाति उत्तरजीविता आयोग के अधीन कार्य करता है।

आईयूसीएन रेड लिस्ट में "संवेदनशील" (Vulnerable) के रूप में वर्गीकृत टैक्सॉन को औपचारिक रूप से "संकटग्रस्त" (Threatened) प्रजाति श्रेणियों का हिस्सा माना जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 गलत है: आईयूसीएन की स्थापना 5 अक्टूबर 1948 को फॉन्टेनब्लू (फ्रांस) में हुई थी। यह एक स्वायत्त सदस्यता संघ है जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है, न कि संयुक्त राष्ट्र की कोई विशिष्ट एजेंसी (1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन द्वारा UNEP की स्थापना की गई थी)।

कथन 2 सही है: ISSG आईयूसीएन के प्रजाति उत्तरजीविता आयोग (SSC) के तहत एक स्वयंसेवी विशेषज्ञ समूह है और GISD का प्रबंधन करता है।

कथन 3 सही है: आईयूसीएन रेड लिस्ट के तहत तीन श्रेणियों को सामूहिक रूप से "संकटग्रस्त" (Threatened) माना जाता है: गंभीर रूप से संकटापन्न (CR), संकटापन्न (EN), और संवेदनशील (VU)।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. "विशेष परिरक्षण (Preservation) से समावेशी जैव विविधता संरक्षण (Conservation) की ओर बदलाव के लिए वैज्ञानिक मूल्यांकन और संप्रभु नीति-निर्माण के बीच एक प्रभावी सेतु की आवश्यकता है।" वैश्विक और भारतीय पर्यावरण शासन को आकार देने में प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

उत्तर संरचना रूपरेखा:

प्रस्तावना: 1948 में फॉन्टेनब्लू में आईयूसीएन की उत्पत्ति और कठोर परिरक्षण (IUPN) से सतत उपयोग (IUCN, 1956) की ओर इसके वैचारिक विकास का संक्षिप्त उल्लेख करें। इसके हाइब्रिड सदस्यता ढांचे को रेखांकित करें।

मुख्य भाग - वैश्विक शासन पर वैज्ञानिक प्रभाव:

विश्लेषण करें कि कैसे आईयूसीएन रेड लिस्ट CITES के व्यापार प्रतिबंधों और CBD के राष्ट्रीय लक्ष्यों को निर्देशित करती है।

1972 के विश्व धरोहर सम्मेलन के तहत प्राकृतिक स्थलों के लिए इसकी वैधानिक सलाहकार भूमिका की चर्चा करें।

तकनीकी मानकों के निर्माण को उजागर करें (जैसे WCPA संरक्षित क्षेत्र श्रेणियां, पारिस्थितिकी तंत्रों की रेड लिस्ट)।

मुख्य भाग - भारत के संदर्भ में रणनीतिक अनुप्रयोग:

MoEFCC के माध्यम से 1969 से भारत की राज्य सदस्यता तथा INC-IUCN और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के तकनीकी समन्वय का उल्लेख करें।

प्रजातियों की स्थिति में सुधार (जैसे एशियाई शेर) और राष्ट्रीय स्थानिक निगरानी (प्रोजेक्ट टाइगर में MEE) का मूल्यांकन करें।

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क के लक्ष्य 3 (30x30) को पूरा करने के लिए OECMs (जैसे अरावली जैव विविधता पार्क) की पहचान की व्याख्या करें।

आगे की राह एवं निष्कर्ष: इस बात पर बल दें कि घरेलू कानूनों (वन्यजीव संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2022) को आईयूसीएन के वैज्ञानिक मानकों के साथ जोड़ना साक्ष्य-आधारित और समुदाय-समावेशी संरक्षण सुनिश्चित करता है, जो पारिस्थितिक अखंडता और सतत विकास लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करता है।

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