BIMSTEC क्या है और भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण? जानें UPSC, SSC और बैंकिंग परीक्षा के लिए ज़रूरी तथ्य

जानिए BIMSTEC की कहानी, भारत के लिए इसकी महत्ता और प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, बैंकिंग) में उपयोगी जानकारी। अपनी परीक्षा रणनीति मजबूत करें!

परिचय: BIMSTEC क्या है?

1997 में स्थापित BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) चार सदस्य देशों – बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड (शुरुआत में BIST-EC) के साथ शुरू हुआ। कुछ समय बाद म्यांमार शामिल हुआ, और फिर 2004 में नेपाल और भूटान पूर्ण सदस्य बने। आज इसके सात सदस्य देश हैं:

भारत

बांग्लादेश

भूटान

नेपाल

श्रीलंका

म्यांमार

थाईलैंड

सुस्त शुरुआत से रणनीतिक विकास तक

शुरुआती वर्षों में BIMSTEC सक्रिय नहीं था। 2004 से 2022 तक सिर्फ पाँच शिखर सम्मेलन हुए:

2004: बैंकॉक

2008: नई दिल्ली

2014: नेपीडॉ (म्यांमार)

2018: काठमांडू

2022: कोलंबो

धीरे-धीरे इसने संस्थागत रूप लिया। 2014 में ढाका में स्थायी सचिवालय बना और 14 सेक्टरों को 7 मुख्य क्षेत्रों (व्यापार, पर्यावरण, कृषि, जन-संपर्क, सुरक्षा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी) में पुनर्गठित किया गया। हर क्षेत्र का नेतृत्व एक देश को दिया गया है। उदाहरण के लिए, सुरक्षा क्षेत्र भारत के नेतृत्व में है।

हालिया प्रगति: चार्टर और समझौते

2022 के कोलंबो सम्मेलन में पहली बार BIMSTEC का औपचारिक चार्टर अपनाया गया, जो 20 मई 2024 से लागू होगा। इससे संगठन को कानूनी मान्यता मिली। अन्य प्रमुख कदम हैं:

BIMSTEC परिवहन संपर्क मास्टर प्लान को मंजूरी।

आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, राजनयिक प्रशिक्षण सहयोग पर समझौते।

विदेश मंत्री जयशंकर का बयान

3 अप्रैल को बैंकॉक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता और आपूर्ति शृंखला की विविधता पर ज़ोर देते हुए जल्द होने वाले समुद्री सहयोग समझौते का संकेत दिया। इससे समुद्री व्यापार आसान होगा।

भारत के लिए BIMSTEC का महत्व

समुद्री सुरक्षा

नौसेना संचालन, ऊर्जा आपूर्ति और आपदा राहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण।

समुद्री डकैती और तटीय निगरानी जैसे मुद्दों पर सहयोग।

2018 में पहला संयुक्त सैन्य अभ्यास (MILEX-18)।

एक्ट ईस्ट नीति का विस्तार

दक्षिण एशिया (भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका) और दक्षिण-पूर्व एशिया (म्यांमार, थाईलैंड) के बीच सेतु।

पूर्वोत्तर भारत की विकास परियोजनाओं (त्रिपक्षीय राजमार्ग, कलादान बहु-मोडल परियोजना) के लिए सहायक।

चीन के प्रभाव को संतुलित करना

चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के मुकाबले एक रणनीतिक विकल्प।

सार्क (SAARC) की तुलना में BIMSTEC अधिक प्रभावी मंच, क्योंकि इसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है।

BIMSTEC बनाम SAARC: अवसर और चुनौतियाँ

2016 में उरी हमले के बाद भारत ने SAARC की बजाय BIMSTEC पर ध्यान दिया। लेकिन अभी भी चुनौतियाँ हैं:

बांग्लादेश-म्यांमार के बीच रोहिंग्या शरणार्थी विवाद।

म्यांमार की राजनीतिक अस्थिरता।

बांग्लादेश में शेख हसीना के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में संभावित उतार-चढ़ाव।

इन चुनौतियों के बावजूद, BIMSTEC लगातार क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रमुख तथ्य

ऐतिहासिक दृष्टिकोण: स्थापना और विकास संबंधी तथ्य UPSC और SSC के लिए ज़रूरी।

समसामयिक मुद्दे: हाल के समझौते और विदेश मंत्री जयशंकर के बयान प्रतियोगी परीक्षाओं में आते हैं।

रणनीतिक महत्व: एक्ट ईस्ट नीति, समुद्री सुरक्षा, चीन के प्रभाव संबंधी सवाल परीक्षाओं के लिए अहम।

परीक्षार्थियों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है: BIMSTEC UPSC, SSC और बैंकिंग परीक्षाओं के अंतरराष्ट्रीय संबंध, क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक भूगोल जैसे विषयों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी गहरी समझ आपकी परीक्षा तैयारी को बेहतर बनाएगी।