हरियाणा का भूजल संकट: भूमिगत टैंक, बढ़ती लागत और शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष

हरियाणा में भूजल प्रदूषण ने ग्रामीणों को महंगे टैंकरों पर निर्भर भूमिगत टैंक बनाने पर मजबूर किया है। यह विषय UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए बेहद जरूरी है।

ज़मीन के नीचे चल रही जंग: हरियाणा में पानी का संकट

हरियाणा के कई जिलों, विशेष रूप से नूंह ज़िले में, भूजल इतना प्रदूषित और खारा हो गया है कि ग्रामीणों को शुद्ध पानी के लिए महंगे भूमिगत टैंक (कुंडा) बनाने पड़ रहे हैं। यह संकट जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, सार्वजनिक अवसंरचना, और प्रशासनिक विफलता से जुड़ा है — और इसी कारण यह विषय UPSC, SSC, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद प्रासंगिक है।

इकबाल खान की कहानी: पानी के लिए संघर्ष

इकबाल खान, 60 वर्षीय किसान, घाघस गांव के निवासी हैं।

पहले कुएं से पानी आता था, फिर बोरवेल लगाए गए। लेकिन अब भूजल खारा और जहरीला हो गया है।

खान ने ₹1.6 लाख खर्च कर 20,000 लीटर का भूमिगत टैंक बनवाया — केवल पीने के लिए।

"पानी इतना खारा हो गया है कि जानवर और पक्षी भी नहीं पीते," — राजुद्दीन मेव, सामाजिक कार्यकर्ता और मेवात RTI मंच के संयोजक।

हरियाणा का जहरीला भूजल: क्या कहती है रिपोर्ट?

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की 2024 रिपोर्ट के अनुसार:

हरियाणा देश में दूसरा सबसे प्रदूषित राज्य है फ्लोराइड स्तर के आधार पर

879 में से 208 नमूनों में फ्लोराइड की मात्रा सीमा से अधिक पाई गई

कई नमूनों में आर्सेनिक और यूरेनियम भी मानकों से ऊपर थे

इनसे हड्डियों की बीमारी (फ्लोरोसिस), कैंसर और किडनी डैमेज हो सकता है

19 जिलों में उच्च इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC), यानी पानी में अत्यधिक नमक पाया गया

📌 UPSC टिप: GS पेपर 3 में पर्यावरण, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन से जुड़े उत्तरों में इस रिपोर्ट का हवाला दिया जा सकता है।

गांवों में हालात: टैंक, टैंकर और तकलीफ

घाघस गांव में 200+ भूमिगत टैंक बनाए गए हैं, कई परिवार मिलकर एक साझा करते हैं

एक टैंकर की कीमत सर्दियों में ₹1,200 और गर्मियों में ₹12,000 तक हो जाती है

5–6 दिन की वेटिंग आम है

बीपीएल परिवारों के लिए यह खर्च असहनीय है

माधी गांव जैसे इलाकों में, नलों से सप्लाई हर तीसरे दिन केवल 10 मिनट होती है।

सरकारी दावे बनाम ज़मीनी सच्चाई

अधिकारी क्या कहते हैं:

मंत्री रणबीर गंगवा: "हर जिले में पानी की पाइपलाइन पहुंच चुकी है"

मुख्यमंत्री नायब सैनी: "जल जीवन मिशन के तहत हर घर को नल से जल उपलब्ध कराया गया है"

लेकिन वास्तव में:

कई गांवों में पाइपलाइन तो है, लेकिन पानी नहीं आता

घाघस के 26 गांवों में टीडीएस (TDS) स्तर 2,000 mg/l से अधिक है

जल जीवन मिशन की पाइपलाइन अभी परीक्षण में है, नियमित सप्लाई नहीं हो रही

हरियाणा में भूजल प्रदूषण के कारण

CGWB रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख कारण:

रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग

औद्योगिक और घरेलू कचरे का गलत निपटान

सीवेज लीकेज और लैंडफिल से रिसाव

भूजल का अत्यधिक दोहन

परिणाम: पानी न पीने लायक है और न ही सिंचाई के लिए।

सामुदायिक समाधान: संघर्ष की नई राहें

टैंक साझा करना, वर्षा जल संचयन और टैंकरों पर निर्भरता

कई पंचायतों ने अपने निजी टैंकर खरीदे

किसान खेती के अलावा मजदूरी या ड्राइवरी करते हैं जीविका के लिए

"पानी इतना खारा है कि नहाने से जलन होती है। पक्षियों के लिए भी टैंकर का पानी बाहर रखते हैं," — इरफान खान, नूंह निवासी

विशेषज्ञों की राय: समाधान क्या है?

शिव सिंह रावत, पूर्व अभियंता (सिंचाई विभाग), संयोजक – यमुना बचाओ अभियान:

सुझाव:

बाढ़ के पानी से जल पुनर्भरण (recharge)

वृहद वर्षा जल संचयन

उपचारित पानी का पुनः उपयोग

फसल विविधीकरण

जलवायु-स्थायी अवसंरचना का निर्माण

जनजागरूकता और अंतर-राज्यीय सहयोग

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुख्य तथ्य

हरियाणा के 22 में से 16 जिलों में यूरेनियम अधिक मात्रा में

घाघस गांव में 200+ टैंक, एक टैंकर की कीमत गर्मियों में ₹12,000 तक

CGWB रिपोर्ट 15,000+ सैंपल पर आधारित

70 बोरवेल्स में TDS 2,000 mg/l से अधिक

जमीन का खारा पानी, नहाने लायक भी नहीं

जल जीवन मिशन की पाइपलाइन सक्रिय नहीं, परीक्षण चरण में

हरियाणा में 1.14% सैंपल में अत्यधिक सोडियम, सिंचाई के लायक नहीं

यह विषय परीक्षाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

UPSC (GS 2, GS 3), SSC, बैंकिंग और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय बेहद प्रासंगिक है:

पेयजल संकट और नीति चुनौतियाँ

भूजल प्रबंधन और स्वास्थ्य प्रभाव

ग्रामीण अवसंरचना और योजनाएं (Jal Jeevan Mission)

पर्यावरणीय समस्याएं और समाधान

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